RedFMPatna ری ٹویٹ کیا

महात्मा की हत्या की कोशिशें 30 जनवरी के काफ़ी पहले शुरू हो गई थीं।
25 जून 1934 को जब गांधी कस्तूरबा के साथ छूआछूत विरोधी आंदोलन के लिए सम्मानित होने पुणे नगरपालिका जा रहे थे तब उनकी कार पर बम फेंका गया था। प्यारेलाल बताते हैं कि इसमें भी गोडसे और उसके गिरोह का हाथ था।
1934 में न विभाजन का सवाल था, न 55 करोड़ का न कोई और। वे गांधी के छूआछूत विरोधी आंदोलन से नाराज़ थे।
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