Kumar Rahul (Surviving in जाहिल-युग ©)

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@abadhya

यूँ ही चलती रहेगी दुनिया यहां, हम न होंगे तो कोई हमसा होगा!!!

Earth شامل ہوئے Eylül 2009
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Kumar Rahul (Surviving in जाहिल-युग ©) ری ٹویٹ کیا
Awesh Tiwari
Awesh Tiwari@awesh29·
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी लोगों को एक बेहद भावुक खुला पत्र लिखा है।ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का पत्र डोनाल्ड ट्रंप के 20 मिनट पर भारी पड़ा है। पत्र का एक हिस्सा पढ़िए। "पत्र में मसूद कहते हैं कि ईरान,इस नाम, चरित्र और पहचान के साथ मानव इतिहास की सबसे प्राचीन निरंतर सभ्यताओं में से एक है। अपने विभिन्न कालखंडों में ऐतिहासिक और भौगोलिक लाभों के बावजूद, आधुनिक इतिहास में ईरान ने कभी आक्रामकता, विस्तार, उपनिवेशवाद या प्रभुत्व का रास्ता नहीं चुना। कब्जे, आक्रमण और वैश्विक शक्तियों से निरंतर दबाव सहने के बावजूद और अपने कई पड़ोसियों पर सैन्य श्रेष्ठता रखते हुए भी ईरान ने कभी युद्ध की शुरुआत नहीं की। फिर भी, जिन्होंने उस पर हमला किया, उन्हें उसने दृढ़ता और साहस से खदेड़ दिया। ईरानी लोग अन्य राष्ट्रों के प्रति, जिनमें अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोग भी शामिल हैं, कोई दुश्मनी नहीं रखते। किसी के द्वारा भी ईरान को खतरे के रूप में चित्रित करना न तो ऐतिहासिक वास्तविकता से मेल खाता है और न ही वर्तमान में दिखने वाले तथ्यों से। ऐसी धारणा शक्तिशाली लोगों की राजनीतिक और आर्थिक सनक का नतीजा है। वो कहते हैं ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच के संबंध मूल रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं थे, और ईरानी तथा अमेरिकी लोगों के बीच प्रारंभिक अंतर्क्रियाएं शत्रुता या तनाव से ग्रस्त नहीं थीं। फिर भी इन सभी दबावों ने ईरान को कमजोर नहीं किया। उल्टा, ईरान कई क्षेत्रों में मजबूत हुआ है: साक्षरता दर तीन गुना बढ़ गई। हमारे देश में उच्च शिक्षा में भारी विस्तार हुआ। आधुनिक प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण प्रगति हुई; स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुईं; और बुनियादी ढांचे का विकास पिछले समय की तुलना में अभूतपूर्व गति और पैमाने पर हुआ। ये मापने योग्य, देखने योग्य वास्तविकताएं हैं जो गढ़ी गई कहानियों से स्वतंत्र हैं। साथ ही, प्रतिबंधों, युद्ध और आक्रामकता के विनाशकारी और अमानवीय प्रभाव को ईरानी लोगों के जीवन पर कम नहीं आंका जाना चाहिए। सैन्य आक्रामकता का जारी रहना और हाल के बमबारी हमले लोगों के जीवन, दृष्टिकोण और नजरिए को गहराई से प्रभावित करते हैं। यह एक मौलिक मानवीय सत्य को दर्शाता है: जब युद्ध जीवन, घरों, शहरों और भविष्य को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है, तो लोग जिम्मेदार लोगों के प्रति उदासीन नहीं रहते। यह एक मौलिक सवाल उठाता है। इस युद्ध से अमेरिकी लोगों के हितों में वास्तव में क्या सेवा हो रही है? क्या ईरान से कोई वस्तुनिष्ठ खतरा था जिसने ऐसे व्यवहार को उचित ठहराया? क्या निर्दोष बच्चों का कत्लेआम, कैंसर उपचार वाली दवा सुविधाओं का विनाश, या किसी देश को पत्थर के युग में वापस ले जाने की डींग हांकन, अमेरिका की वैश्विक छवि को और खराब करने के अलावा कोई अन्य उद्देश्य पूरा करता है?
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Sandeep Manudhane
Sandeep Manudhane@sandeep_PT·
In this era of dangerous era-defining wars, India is not building a Starlink of its own as a sovereign asset, but gladly handing it all over to Trump-Elon-Starlink of USA. And our Navic is dead already. We will regret this for a long time. #PoorStrategy #NationalDefence #IndiaSovereignty
Jyotiraditya M. Scindia@JM_Scindia

It was a pleasure to meet Ms. Gwynne Shotwell, President & COO, @SpaceX, Ms. Lauren Dreyer, Vice President, Global Business, @Starlink and the India leadership team today.

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Dr. Neha Das
Dr. Neha Das@neha_laldas·
मध्यप्रदेश MPPSC के कृषि विभाग में सहायक संचालक पोस्ट पर 100% आरक्षण? धन्यवाद मध्यप्रदेश सरकार!! जनरल कैटेगरी को पूरी तरह से नौकरी से बाहर करके आपने 100% सामाजिक न्याय कर दिया👏👏
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Krishna Kant
Krishna Kant@kkjourno·
अडानी, मोदी से - "तू जहां जहां उड़ेगा, मेरा धंधा साथ होगा" प्रधानमंत्री जी जहां भी गए जनता के लिए रील लेकर लौटे और अडानी के लिए धंधा। भक्त इस बात को नहीं समझता क्योंकि वो है अक्ल का अंधा।
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@RoflGandhi_ @rajnathsingh जो काम ये ख़ुद कर रहे होते है, बड़े सलीके से कांग्रेस को शब्दश डाल देते है. कांग्रेस को तो पल्ले ही नहीं पड़ा की चुनाव 2019 से नहीं हुए है. असंवैधानिक सरकार चल रही है. उस पर कमाल ये है की - जो चला रही है वो संस्था का अस्तित्व ही नहीं है. मतलब - चल क्या रहा है इस देश में?
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Rofl Gandhi 2.0 🏹 Commentary
@rajnathsingh इसीलिए आप लोग कुछ बेचने लायक छोड़कर ही नहीं जाओगे निंदा टर्टल जी।
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Rajnath Singh
Rajnath Singh@rajnathsingh·
काँग्रेस कुर्सी के लिए देश भी बेच सकती है।
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भाई 2019 से इस देश में चुनाव नहीं हुए है. ये गैंग जहाँ पूरा फोकस करती है वहाँ वो गेम होता ही नहीं है, सिर्फ़ भुलावा होता है. काम पीछे कहीं और हो चुका होता है. कांग्रेस को 11 साल से पल्ले ही नहीं पड़ रही हो क्या रहा और कैसे रोके. एक ही विकल्प - पूर्ण बहिष्कार पेपर बैलेट के लिए.
Awesh Tiwari@awesh29

ज्ञानेश कुमार एंड कंपनी के खेल में जितने गहरे आप उतरेंगे आपको लगेगा अरे यह कितनी अंतहीन सुरंग है जिसमें लोकतंत्र की लूट खत्म होने का नाम नहीं लेती। मेरे अजीज अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। यह खुलासा बीजेपी को तीसरी बार जबरिया सिंहासन पर बैठाने वाले चंद्रबाबू नायडू की सरकार का सूत्र बताती है। प्रभाकर कहते हैं कि 2024 में हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में आधी रात के बाद करीब 17 लाख वोट 6 सेकंड में डाले गए। अर्थशास्त्री प्रभाकर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि करीब 3,500 बूथों पर मतदान रात 2 बजे तक जारी रहा। उन्होंने दावा किया कि डेटा एक चिंताजनक तस्वीर पेश करता है। कुल वोटों का करीब 4.16 फीसदी रात 11:45 बजे से 2 बजे के बीच डाला गया। उन्होंने कहा कि शाम 8 बजे से रात 2 बजे तक करीब 52 लाख वोट दर्ज किए गए। आधी रात के बाद अकेले 17 लाख से ज्यादा वोट डाले गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि आधी रात के बाद हर 20 सेकंड में एक वोट डाला जा रहा था। प्रभाकर ने आयोग से पूछा है कि EVM को रीसेट होने में 14 सेकंड लगते हैं, तो फिर 6 सेकंड में वोट कैसे डाले जा रहे थे? क्या कोई मतदाता इतने कम समय में अंदर आकर वोट डालकर बाहर निकल सकता है?” उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि शाम 8 बजे के बाद कुछ न कुछ तो असामान्य हुआ।

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Kapil
Kapil@kapsology·
Content creators nahi ruk rahe bhai 🤣🤣🤣
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सड़के बनती रहती है, बनकर पूर्ण कभी नहीं होती, बनती सड़के - पुलों में पैसा खून जैसा दौड़ पूरी राजनीतिक सिस्टम को जिंदा बनाये रखता है। ये वो टैक्स है जो आपके बैंक अकाउंट से सुधा जुड़ा है, आप इसमें पार्टिसिपेंट ही नहीं है। लेकिन तालिया जाहिलो के लिए बजती रहनी चाहिए। #corruptindia
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मनुवादी बृजेश मिश्र/ Brijesh Mishra🇮🇳
अब बेबाक बोलना ही होगा बिहार और उत्तर प्रदेश में पिछले 30 वर्षों में पिछड़ा और दलित ही मुख्यमंत्री रहे हैं, सर्वाधिक लेकिन हक ब्राह्मण खा रहे हैं। बिल्कुल ठीक बोला है अवध ओझा ने।
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Adv. Pandit Vaibhav Joshi (SMS)
1 अरब से ऊपर जनसंख्या है हमारी । एक होशियार ढूंढों, हजार मिलेंग । IIT जैसे मजबूत इंजीनियरिंग कॉलेज हैं हमारे पास। हमारे नेता चाहते तो आज भारत में पेट्रोल की जगह हाइड्रोजन ( पानी) से चलने वाली कारें बन चुकी होती। लेकिन इनको 90 % वाला होशियार सक्षम व्यक्ति नहीं चाहिए ।
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