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@himachali_ASP

Heaven is a myth, mountains are real!! 🏔️

Bharat شامل ہوئے Kasım 2024
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پن کیا گیا ٹویٹ
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ASP@himachali_ASP·
Ethanol bakchodi quote series🧵🪡 Since E20 compliant vehicles available since April 2023, all older generation cars, bikes should continue to get E10 petrol at all fuel pumps at least until 2037.
ASP@himachali_ASP

Ethanol bakchodi quote series🧵🪡 Why should only poor and middle class vehicle owners bear the higher maintenance costs related to engine and some parts issues by E20 and reduced mileage while the rich continue to enjoy XP100 fuels suited to their niche vehicles and super bikes

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Crypto
Crypto@cryptonianbond·
Ethanol ke Khet 😂
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shiv Yadav
shiv Yadav@shiv94624869145·
E200 😂😂😂
United Arab Emirates 🇦🇪
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AgriCraft Innovation
AgriCraft Innovation@AGRICULTURfw·
These new Tattoo machine in America are actually insane
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ASP@himachali_ASP·
Don’t buy ICE cars till ethanol bakchodi gets solved.
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ASP@himachali_ASP·
Ethanol bakchodi quote series🧵🪡 Why should only poor and middle class vehicle owners bear the higher maintenance costs related to engine and some parts issues by E20 and reduced mileage while the rich continue to enjoy XP100 fuels suited to their niche vehicles and super bikes
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Don’t buy ICE cars till ethanol bakchodi gets solved.

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ASP ری ٹویٹ کیا
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ASP@himachali_ASP·
Ethanol bakchodi quote series🧵🪡 Since E20 compliant vehicles available since April 2023, all older generation cars, bikes should continue to get E10 petrol at all fuel pumps at least until 2037.
ASP@himachali_ASP

Ethanol bakchodi quote series🧵🪡 Why should only poor and middle class vehicle owners bear the higher maintenance costs related to engine and some parts issues by E20 and reduced mileage while the rich continue to enjoy XP100 fuels suited to their niche vehicles and super bikes

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ASP ری ٹویٹ کیا
Abhijit
Abhijit@Alpha_Abhijit·
इस पूरे तर्क में सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि वित्तीय अनियमितता जैसे गंभीर विषय को जवाबदेही के बजाय जाति, गुट और व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के चश्मे से देखने की कोशिश की जा रही है। अगर किसी व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है तो सवाल यह नहीं होना चाहिए कि आरोपी किस जाति का है या विरोध करने वाला किस समाज से आता है। सवाल सीधा है कि दानदाताओं की आस्था से जुड़े धन की निगरानी में चूक कैसे हुई और जिम्मेदार कौन है? किसी व्यक्ति के स्वभाव, मीडिया से रिश्ते या पुराने संघर्षों का हवाला देकर उसे संदेह से बाहर नहीं किया जा सकता। और न ही बिना जांच के किसी को दोषी ठहराया जा सकता है। कानून और जांच ही तय करेंगे कि गलती किसकी है। ट्रस्ट में किस समाज के कितने सदस्य हैं, यह बहस अलग विषय हो सकती है, लेकिन वित्तीय पारदर्शिता का विकल्प सामाजिक समीकरण नहीं हो सकता। मंदिर की व्यवस्था श्रद्धा से चलती है, इसलिए उसमें सबसे पहले जवाबदेही, ऑडिट और पारदर्शिता होनी चाहिए। यह कहना कि आलोचना करने वाले किसी जाति या गुट की खुशी से प्रेरित हैं, असली सवाल से ध्यान भटकाना है। जब करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हो तो सवाल उठना विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था को मजबूत करने की प्रक्रिया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुछ लोग जांच की मांग को भी समाजों की लड़ाई बना रहे हैं। राम के नाम पर बनी संस्था को किसी जातीय या राजनीतिक कवच की जरूरत नहीं, उसे सिर्फ साफ व्यवस्था और निष्पक्ष जांच की जरूरत है। आस्था का सम्मान तभी बचेगा जब व्यक्ति नहीं, व्यवस्था जवाबदेह होगी।
Dr. Bhupendra Singh M.D.@DrBS07

राम मंदिर में वित्तीय अनियमितता के मामले में तमाम लोगों को दुख कम है और एक मौन आनंद अधिक है। मिडिया इसलिए खुश है क्योंकि चंपत राय जी को घेरने का उन्हें मौका मिल गया, कारण यह है की वह अक्खङ व्यक्ति हैं। उनका यह रूखा व्यवहार मिडिया के साथ भी वर्षों से रहा है। लेकिन जो भी लोग उन्हें जानते हैं, उन्हें यह पता है की यह काम चंपत जी का नहीं हो सकता। ट्रस्ट बनाते समय उसमें 10 सदस्य ब्राह्मण समाज से रखे गये और एक सदस्य दलित समाज से, इसलिए पिछङे वर्ग में बहुत रोष रहा इस बात को लेकर, उन्हें मौका चाहिए था, वह उन्हें मिल गया, वह इस कांड से खुश हैं। क्षत्रिय समाज का भी दुख कम नहीं था, उनका भी यहीं मानना था की उनके समाज से प्रतिनिधित्व रहना चाहिए था, पर नहीं था, इसलिए वह भी इस घटनाक्रम से प्रसन्न हैं। ब्राह्मण वर्ग में एक धङा जो इसे ट्रस्ट पर वित्तीय आरोप मानने के बजाय अपने समाज पर आरोप मान रहा है, वह इसका सारा ठीकरा टून्नू यादव पर फोङ रहा है। उसके लिये टुन्न्नू यादव एक बलि का बकरा है, जिसके माथे सारा पाप जङकर बाकी एक बङी संख्या को बचाना चाहते हैं। संतों में भी एक वर्ग ऐसा है जो उन संतों का विरोधी है जो इस समय ट्रस्ट में हैं, वह भी इस मामले से प्रसन्न हैं, उदाहरण के लिये श्री वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज, इनका विवाद स्वर्गीय स्वरुपानंद जी के दोनों शिष्यों से चल रहा है जिसमें से एक शिष्य और सपा नेता श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी हैं। इसी प्रकार राम मंदिर आन्दोलन के समय बेहद सक्रिय रहे लोगों का एक समूह है, जिन्हें लगता है की उन्हें महत्व नहीं दिया जा रहा है। अयोध्या के अंदर संतों का एक धङा है जो ट्रस्ट वाले संतों का विरोधी है, वह भी प्रसन्न हैं। कुल मिलाकर इस घटनाक्रम से दुखी लोगों की संख्या कम है और खुश होने वालों की ज्यादा है। मुझे भी आप इस घटनाक्रम से खुश होने वालों में ही गिनकर रखिये। मेरे खुशी का कारण यह है की ये सारा गिरोह बहुत जल्द ही पकङ में आ गया, वरना जैसे दक्षिण भारत के मंदिर व्यवस्था में लगे लोगों के बच्चों के विवाह में उनके बच्चों को चार आठ किलोग्राम सोना पहने फोटो जब तब वायरल होता रहता है और लोग इसे सामान्य मानते हैं, वहीं हाल यहां भी हो जाता। इसलिए इसे भी भगवान राम की ही इच्छा समझनी चाहिए। मंदिर के चढावे की धनराशि गिनने का काम एक दो लोग नहीं करते। इसके लिए ढेर सारे लोग इसमें लगते हैं। अतः यदि तब भी चोरी हो रही है और रोज हो रही है तो स्पष्ट बात यह है की चढावा गिनने वाले में से प्रत्येक व्यक्ति या तो चोर है अथवा उस चोरी पर मौन है। मंदिर व्यवस्था में समय के साथ तमाम स्थानीय लङकों को वहां की व्यवस्था में जोङा गया। वह लङके किसके रिकमंडेशन पर जोङे गये, किसने उनका नाम सुझाया, उस व्यक्ति की पहचान आवश्यक है। वैसे उत्तर प्रदेश सरकार ने एस आई टी की जांच शुरु कर दी है, और जिस प्रकार का रुख मुख्यमंत्री जी का इस मामले को लेकर है, मुझे पुर्ण विश्वास है की न केवल ऐसे लोग जल्दी ही पकङे जायेंगे बल्कि इनकी संपत्तियों को भी जब्त किया जायेगा। कम से कम मुझे इस बात में कोई शंका नही है। इस विषय में आगे क्या होना चाहिए, इस पर मेरी राय यह है की जो भी व्यक्ति ट्रस्ट की तरफ से इस अनुभाग को देख रहा था उसका इस्तिफा आवश्यक है। गुजरात के कई बङे मंदिरों में जिस तरह की चढावे की राशि को गिनने की व्यवस्था है उसे लागू किया जाय क्योंकि वहां प्रश्न उठने की गुंजाईश नहीं रहती। ट्रस्ट के सदस्यों की संख्या बढाकर समाज के अन्य वर्गों से भी कुछ लोगों को रखा जाये ताकि ट्रस्ट के प्रति सर्व सामान्य में एक जो दुराव अथवा विरोध का भाव है वह समाप्त हो। राम मंदिर आन्दोलन में जिन लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उन लोगों की ट्रस्ट पहचान करे और उनका एक संरक्षण मंडल या ऐसा ही कोई टोली बना दे ताकी वह भी औपचारिक रुप से ही सही लेकिन उस व्यवस्था से जुङ जायें। मेरा मानना है की यदि ऐसे कुछ परिवर्तन हो जाते हैं तो इस घटना का एक सुखद परिणाम आ सकता है। नहीं तो ऐसी घटनायें बार बार होती रहेंगी और जो आगे नहीं भी होंगी तो सर्व समाज ट्रस्ट को स्वीकार करने के बजाय ऐसे मौकों के इंतजार में वैसे ही बैठा रहेगा, जैसे अब तक बैठा था।

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ASP@himachali_ASP·
@premjs Transport union fear ✅
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Prem Swaroop
Prem Swaroop@premjs·
@himachali_ASP Diesel is safe from Gadkari unless he decides to offer clean diesel only to trucks and cars have to get the ones adulterated with iso butanol
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Crystal Clear
Crystal Clear@Crystal_x_Clear·
बाबा भारती और खड्ग सिंह की कहानी याद आ गई। अपने घोड़े सुल्तान को खोकर भी बाबा भारती का अनुरोध खड्ग सिंह से सिर्फ इतना था कि किसी को ये मत बताना कि तुमने गरीब-लाचार-बीमार बनकर, ये घोड़ा सुल्तान मुझसे चुराया है क्यूंकि फिर लोग किसी लाचार-बीमार-गरीब पे भरोसा नहीं करेंगे। आज के आधुनिक खड्ग सिंह बाबा भारती रूपी जनता से सुल्तान घोड़ा तो नहीं पर वोट और नोट चुरा रहे हैं। और जनता ये कह रही है कि, “सालों लूट तो लिया तुमने पर ऐसा ना करो कि लोगो की आस्था ही खत्म हो जाए इस राजनीति से”।
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Crystal Clear
Crystal Clear@Crystal_x_Clear·
मैं भी चौकीदार, मैं भी चौकीदार करने वाले सारे चौकीदारों ने श्रद्धालुओं को लूट लिया और अब लोगो को जात-पात में उलझा रहे हैं।
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ASP
ASP@himachali_ASP·
After Geopolitics experts in spaces. Now, we have Football experts in the panel😂😂
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Mango Maniac
Mango Maniac@MangoSeasonison·
This week’s focus remains on Ethanol Gadkari uncle! Here’s another masterpiece from the man himself: 🫡
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ASP ری ٹویٹ کیا
Swarajya
Swarajya@SwarajyaMag·
Recently released Raakh joins a pattern that has settled into Indian content - Creative Rewriting in the name of Creative Liberty. The 1978 Ranga-Billa case is dramatised on screen, but Inspector VP Gupta, who led the real investigation, is rewritten as SI Jayprakash Jatav, a Dalit officer battling caste prejudice in the force. The pattern is not isolated. Jai Bhim (2021) dramatised a real police torture case in which the brutal officer was Christian. - The film recoded him on screen as a Hindu Vanniyar, with the community's sacred Agni Kundam symbol in the background. - A legal notice eventually forced the filmmakers to blur it. Soorarai Pottru, the 2020 film on Air Deccan founder Captain GR Gopinath, recast him on screen as a fierce Dravidian disciple of Periyar. - Gopinath himself comes from an Iyengar background. - The achievement on screen was real. The identity attached to it had been switched. IC 814 kept the hijackers' onboard codenames Bhola and Shankar foregrounded on screen. - The men's real Pakistani names — Ibrahim Athar, Shahid Akhtar Sayeed, Sunny Ahmed Qazi — barely featured. Traditional creative liberty compresses time, combines minor figures, invents dialogue. What is emerging is different. The identity of a real person is swapped to attach a political narrative to their story. For most viewers, the screen version replaces the historical record. @CranksCorner in @SwarajyaMag with writes how cinematic shortcut crosses into ideological rewriting, and why the line is worth holding even when the individual films are well-made. swarajyamag.com/culture/identi…
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