پن کیا گیا ٹویٹ
वनमाली
1.1K posts

वनमाली
@vanmaali
कुछ पुष्प मिले है बीहड़ से ! @_harihardas
दंडकारण्य شامل ہوئے Ocak 2025
49 فالونگ445 فالوورز
वनमाली ری ٹویٹ کیا
वनमाली ری ٹویٹ کیا
वनमाली ری ٹویٹ کیا

इस विषय से बिल्कुल ही असंबंधित चलचित्र जो मै कल सुन रहा था...😅
Narendra Modi@narendramodi
मैं सभी सांसदों से कहूंगा... आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए ... देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है। उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं करिए। ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त होगी… देश का लोकतंत्र और सशक्त होगा। आइए… हम मिलकर आज इतिहास रचें। भारत की नारी को… देश की आधी आबादी को उसका हक दें।
हिन्दी
वनमाली ری ٹویٹ کیا
वनमाली ری ٹویٹ کیا

आज की पीढ़ी के लिए विवाह आदि उत्सवों में संगीत का अर्थ है पीले रंग की मैचिंग ड्रेस और गोगल्स पहन DJ /स्पीकर्स पर बॉलीवुड के गानों पर फूहड़ नृत्य !
जिस समाज का पतन का स्तर यह है कि वो अपने रिश्ते में लगने वाले चाचा, भाई, बहन को नहीं जानता हो वो कुलदेवी को क्या ही जानेगा तो उनके प्रति गाए जाने वाले पारंपरिक गीतों को जानना बेमानी ही है।
बॉलीवुड की बनाई गई रस्मों पर फिल्माएं बॉलीवुडिया गानों को ही विवाह का गीत समझ लेने वाली पीढ़ी अपनी चाची, दादी के पास बैठेगी तो जानेगी की विवाह में दूल्हा शंकर स्वरूप है और दुल्हन मां पार्वती । प्रचलित है कि जगत के माता पिता इस सनातन दंपती ने विवाह की लोक विधि स्थापित करने को ही यह विवाह लीला रची। तभी तो हमारे क्षेत्र में प्रथमपूज्य, कुलदेवी, ग्रामदेवता के गीतों के बाद जो विवाह से संबधी गीत गाया जाता है उसके बोल है "भोला बान बैठ गया री! मिल के गाओ गीत बधाई"। अन्य क्षेत्रों में भी मैने सुना है कि वर-वधु से लक्ष्मी नारायण के रूप में सब शगुन, विधियां कराई जाती है और गीतों में दोनों कुलों के कल्याण की कामना से भरी।
गीतों की परंपरा लोरियों से आगे बढ़ी, जब रात को सोते समय बच्चियां अपनी दादी के पास सोती तो गीत सुनाते हुए सुलाती, भोर भी गीतों से ही होती जो अपने आप भीतर रच बस जाती। बचपन में शाम होते ही मैं भाग कर दादी की गोद चढ़ जाता था और कहता था कि "माँ! भोला सुना दो!" जैसा वो सुनाती थी वैसा मैने फिर कभी नहीं सुना, अब मेरी बहन भी मुझसे कहती है कि "जैसा भोला तू गाता है वैसा अब कोई नहीं गाता" ।
सार यहीं है कि जीवन में आगे बढ़ना अच्छा है पर वो बढ़ना पुरानी पीढ़ी के मूल्यों के बदले न हो अन्यथा गांवों और छोटे शहरों का वो समय दूर नहीं जब महानगरों की तरह विवाह उत्सवों में गीत गाने को अलग से किसी को पैसे देकर बुलाना पड़े।
सीताराम!
आकांक्षा@narayansuta
"धन बढ़व ,जन बढ़व ,बढ़व कुल परिवार..." कितना सुंदर लगता है जब शादियों में घर की सारी कुल वधुएँ एक साथ, एक स्वर में कुल देवी का गीत गाती हैं । इन्हें सुन के एक अलग ही प्रसन्नता होती है कि कैसे इन्होंने एक गीत को पीढ़ियों से सम्भाल कर रखा है। आगे वाली पीढ़ी तो राम भरोसे ही है!
हिन्दी
वनमाली ری ٹویٹ کیا
वनमाली ری ٹویٹ کیا
वनमाली ری ٹویٹ کیا
वनमाली ری ٹویٹ کیا


















