N@ReSh
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@Naresh4477
Self-respect is the birthright of every human being
Gujarat, India Tham gia Mart 2020
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बॉयफ्रेंड नाराज हुआ तो लड़की ने कर दिया विशाल "SORRY" अभियान
अपने नाराज बोल बॉयफ्रेंड को मनाने के लिए एक लड़की ने पूरे शहर में बड़े-बड़े पोस्टर लगवा दिए जिन पर एक शब्द लिखा था "सॉरी "
पोस्ट देखकर लोग आराम करके कुछ लोग से ड्रामा बता रहे हैं कुछ लोग ऐसे सच्चा प्यार बता रहे है
आप इसे कैसे मानते हो बताओ


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@DrRohinighavari @actorvijay kya ap Aaj bhi use love karti hai such btana
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जिस प्रेमिका ने सत्ता की गद्दी तक पहुँचाने में मदद की संघर्ष की साथी बनी रही उसके साथ ग़द्दारी नहीं की मुख्यमंत्री @actorvijay जी ने इसलिए आज सम्मान और सफलता के शिखर पर है !!
कुछ औरते आपको जीवन में सफल बनाने आती है !!
अफ़सोस मेरा वाला ग़द्दार धोखेबाज निकला वरना एक दिन वो भी मुख्यमंत्री की शपथ ज़रूर लेता !!
#TVKVijayHQ #Vijay #Tamilnadu

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@KraantiKumar kisi bhi samaj ko rajniti sikhani hai to pehle niti bna na sikhna padega esi niti jo unhe satta tak pahucha ske
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कल्याण सिंह लोधी जाति से थे. इसी कारण वो दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय नेता नही बनपाए.
कल्याण सिंह अगर राजपूत बनिया या ब्राह्मण जाति से होते तो 2014 में प्रधानमंत्री वही बनते.
क्यों कि 1998 तक बीजेपी में वाजपेयी और आडवाणी के बाद कल्याण सिंह ही सबसे बड़ा नेता थे.
1990 में मंडल कमीशन के जवाब में बीजेपी को OBC वर्ग से एक चेहरे की तलाश थी. वो चेहरा कल्याण सिंह बने. कल्याण सिंह ने बीजेपी को उत्तरप्रदेश के गांव गांव तक पहुंचाया.
1998 में कल्याण सिंह के बढ़ते कद को कम करने के लिए उन्हें CM की कुर्सी से हटाया गया.
कल्याण सिंह के बाद बीजेपी की सुपरस्टार नेता लोधी जाति की उमा भारती के साथ भी वही सलूक किया गया. आज कहां हैं उमा भारती. लोधी जाति राजपूत नही है. लोधी किसान जाति हैं. धरती सीना चीरकर अन्न उगाते हैं.

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@chaudhary_12575 sirf apki sart hogi kya kuch sart ladke ki bi hona chahiye
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@PrinceV93789344 kya gyan prapt hua aur unke baad kisi aur ko kyu nai hua kya unki tarah aur koi usi raste pe nai chala kya
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किसी प्रमाणिक बौद्ध ग्रंथ में ऐसा नहीं लिखा है कि बुद्ध 6 साल बिना कुछ खाए जिंदा रहे। यह एक आम गलतफहमी या अतिरंजित लोककथा है।
महासच्चक सुत्त (MN 36) में खुद बुद्ध अपने अनुभव का वर्णन करते हैं। उन्होंने 6 साल तक कठोर तपस्या की, जिसमें अत्यधिक उपवास शामिल था: उन्होंने भोजन को धीरे-धीरे कम किया , कुछ ग्रंथों में कहा गया है कि वे एक मुट्ठी चावल या तिल जितना रोज खाते थे।शरीर इतना दुबला हो गया कि पेट पर हाथ रखने पर रीढ़ की हड्डी महसूस होती थी, पसलियां बाहर निकल आती थीं, आँखें गड्ढे में धंस गई थीं। लेकिन पूरी तरह बिना खाए नहीं रहे। वे बहुत कम खाते थे, जिससे शरीर अत्यधिक कमजोर हो गया।
बुद्ध ने खुद कहा कि यह मध्य मार्ग नहीं था, इसलिए उन्होंने उपवास त्याग दिया। सुजाता ने उन्हें खीर दी, उन्होंने उसे ग्रहण किया, ताकत आई और फिर बोधि प्राप्त हुई। उपवास से कोई ज्ञान और मोक्ष प्राप्ति नहीं होती।
Kajal Kushwaha@_KajalKushwaha
मोहम्मद का घोड़ा उड़ता था। जीजस भी तीन दिन बाद फिर जिंदा हुए। गौतम बुद्ध भी 6 साल भूखा रहकर भी जिंदा रहे। सिर्फ़ रामायण महाभारत ही काल्पनिक है ?
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Dear @airtelindia मुझे मेरे पापा के कीपैड फोन में आपकी एयरटेल की SIM में 1 साल का ऑनली कॉलिंग का रिचार्ज करना है।
मोबाइल डाटा उस फोन में इस्तेमाल नहीं कर सकते है।
कृपया आपके only कॉलिंग प्लान की जानकारी देवे।
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निःशब्द ममता और माँ का अंतिम बलिदान।😭💔
"कहते हैं कि भगवान हर जगह नहीं हो सकते, इसलिए उन्होंने माँ बनाई। लेकिन इस तस्वीर/दृश्य को देखकर रूह कांप जाती है और शब्द कम पड़ जाते हैं। यह तस्वीर केवल एक घटना नहीं, बल्कि उस शाश्वत सत्य की गवाह है कि दुनिया में माँ के प्यार से बढ़कर कोई दूसरी ताकत नहीं है।
जान चली गई, शरीर बेजान हो गया, लेकिन उस माँ की ममता नहीं हारी। मरते दम तक उसने अपने बच्चे को खुद से अलग नहीं होने दिया, अपनी बाहों के घेरे में सुरक्षित रखा। यह 'निःशब्द ममता' का वह चरम रूप है जहाँ शब्द अपनी शक्ति खो देते हैं। माँ ने अपनी आखिरी सांस तक यह सुनिश्चित किया कि भले ही उसका अपना जीवन समाप्त हो जाए, पर उसके बच्चे की धड़कनें सुरक्षित रहें।
एक माँ का पूरा जीवन ही बलिदानों की एक लंबी दास्तां होती है। वह अपनी खुशियाँ, अपने सपने और अपना आराम सब कुछ अपने बच्चे की मुस्कान पर न्योछावर कर देती है। आज इस सर्वोच्च बलिदान को देखकर कलेजा फट जाता है। मौत भी उस बंधन को नहीं तोड़ पाई जिसे ममता ने बुना था।
माँ के इस अटूट प्रेम और असीम त्याग को मेरा कोटि-कोटि नमन। दुनिया के हर उस माँ को सलाम, जो अपने बच्चे के लिए खुद को संकट में डाल देती है।
माँ, तुम भले ही आज ओझल हो गई हो, पर तुम्हारा यह प्रेम इस दुनिया में हमेशा अमर रहेगा। माँ के चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि। 🙏🌹💔


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श्रम मंत्री रहने के दौरान मजदूरों के लिए महंगाई भत्ता, स्वास्थ्य बीमा, काम के घंटे 12 से हटाकर 08 घंटे करना, महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश, ट्रेड यूनियन को बाध्यकारी मान्यता... आदि सब परम पूज्य बाबा साहेब की देन है।
मजदूर दिवस पर परम पूज्य बाबा साहेब को नमन। 🙏🙏
#LabourDay #thanksdrambedkar

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हालाँकि देश भर के पुरुष व महिला मज़दूरों व श्रमिक समाज की हालत में कोई अपेक्षित सुधार लाख कोशिशों के बावजूद अब तक देखने को नहीं मिलता है, और इसीलिये ’मज़दूर दिवस’ के महत्व को आज भी नकारा नहीं जा सकता है और इस मौके़ पर नित्य दिन जीवन संघर्षों में लगे मेहनतकश तबके़ के सभी लोगों को आज ’मई दिवस’ की बधाई तथा उन सबके थोड़े ’अच्छे दिन’ की फिर से शुभकामनायें।
वैसे तो देश निर्माण में मज़दूरों एवं सभी मेहनतकश समाज के लोगों का ज़बरदस्त योगदान रहता है और उनके इस महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने देश की आज़ादी से पहले और फिर आज़ादी के बाद भी इन सबके लिये ख़ुश व ख़ुशहाल जीवन की गारण्टी सुनिश्चित करने का प्रयास किया था, किन्तु अब तो आउटसोर्सिंग, दैनिक वेतन भोगी तथा हायर एड फायर की प्रथा ने जीवन के हर पहलू में प्रचलित हो जाने से देश के मेहनतकश तबक़ों/समाज को नई मुसीबतों व रोज़गार अनिश्चितताओं का ज़बरदस्त सामना है, जिससे उसके परिवार को पालन-पोषण ही नहीं बल्कि उसकी शिक्षा-दीक्षा, स्वास्थ्य आदि पर भी बुरा प्रभाव पड़ता हुआ साफ दिखाई पड़ता है अर्थात् विकास की चाह में मज़दूरों का भविष्य ही नहीं बल्कि उनका व उनके परिवार का जीवन दाव पर लगा हुआ दिखता है, जो उचित नहीं प्रतीत होता है।
साथ ही, महिलाओं को इसके लिये वास्तव में सुरक्षित वातावरण नहीं मिल पाना भी भारत में चिन्ता का विषय बना हुआ है।
कुल मिलाकर, देश के विकास में मज़दूर/श्रमिक वर्ग की उचित भागीदारी सुनिश्चित हो, ऐसी आज मई दिवस पर सभी सरकारों से अपील है। वैसे भी बी.एस.पी. का संघर्ष उन्हीं मेहनतकश बहुजनों के हक़ के लिये समर्पित है और रहेगा।
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सत्य, अहिंसा व मानवता के आदर्श ज्योति को दुनिया में फैलाकर भारत को जगदगुरु की विश्व ख्याति व सम्मान दिलाने वाले तथागत (भगवान) गौतम बुद्ध को आज उनकी जयन्ती पर शत्-शत् नमन व उनके अनुयाइयों को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं सुख, शान्ति व सौहार्द भरे जीवन की शुभकामनाएं।
तथागत गौतम बुद्ध के बताए रास्ते पर सही से चलकर लोगों के जीवन को सुखी व सम्पन्न बनाना ही सच्चा राजधर्म है, इससे भला कौन इंकार कर सकता है। लेकिन इसकी सार्थकता तभी संभव है जब सभी सरकारें अपनी कथनी व करनी में अन्तर ना आने दें और वही करें जो कहें एवं वही कहें जो कर पायें, तभी इससे सभी को प्रेरणा मिलेगी।
साथ ही, सरकारें ख़ासकर सभी धर्मों के मानने वालों के जान, माल व मज़हब की सुरक्षा सुनिश्चित करें तो यह तथागत गौतम बुद्ध को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इतना ही नहीं बल्कि ’अप्प दीपो भवः’ अर्थात शिक्षित बनो, ख़ुद ऊपर उठो व अपना प्रकाश स्वयं बनो के सिद्धान्त से ही देश आत्मनिर्भर एवं महान बनेगा।
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@Aayushimishra_ jimedari ke karan esa hota hoga ho ske to khudko thoda change kre
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मेरे पति एक शॉपिंग मॉल में काम करते हैं… हमारी लव मैरिज को 2 साल हो चुके हैं। लेकिन आज मैं अंदर से पूरी तरह टूट चुकी हूँ।
मेरी सबसे बड़ी परेशानी ये है कि उन्हें मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाने में बिल्कुल भी रुचि नहीं है। अगर मैं बार-बार कहूँ, ज़िद करूँ, तभी 2-3 दिन बाद वो मेरे साथ होते हैं… वो भी ऐसे जैसे बस कोई ज़िम्मेदारी निभा रहे हों, दिल से नहीं।
वो कभी खुद से मेरे पास नहीं आते… कभी मेरी भावनाओं, मेरी इच्छाओं या मेरी जरूरतों को समझने की कोशिश नहीं करते। अगर मैं पहल न करूँ, तो 3-4 महीने तक हमारे बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं होता।
क्या ये सब नॉर्मल है…?
कभी-कभी मेरे मन में बहुत बुरे ख्याल आते हैं। जिस मॉल में वो काम करते हैं, वहाँ इतनी सारी महिलाएँ हैं… क्या उनका किसी और के साथ कोई रिश्ता है? क्या वो मुझे धोखा दे रहे हैं?
मैंने उनका WhatsApp, कॉल लिस्ट—सब कुछ चेक किया… लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। फिर भी दिल मानने को तैयार नहीं है, क्योंकि उनका व्यवहार पूरी तरह बदल चुका है।
सबसे ज्यादा दर्द इस बात का है कि शादी के पहले 6 महीनों में वही इंसान हर दिन मेरे करीब आता था, मुझे चाहता था… और आज वो मुझसे जैसे दूर भाग रहा है।
आखिर क्यों…?
क्या हर शादीशुदा रिश्ते में ऐसा होता है… या सिर्फ मेरी ही किस्मत में ये दर्द लिखा है?
कमेंट में मुझे आप अपनी एक अच्छी सलाह जरूर दें ✍🏻



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@Sanjay_Sang90 neta vahi hai jo samaj ko achi niti banake raj karna sikhaye aur aj ke time me syad koi nai he jiski niti satta hasil kr ske
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1. जब आप एक working woman से शादी करते हैं तो आपको ये accept करना होगा कि वो घर handle नहीं कर पाएगी
2.अगर आप एक housewife choose करते है जो आपकी ओर आपके घर की देखभाल करती है तोह आपको समझना होगा कि वो कमा नहीं सकती
3.जब आप एक आज्ञाकारी wife चुनते है तो आपको accept करना होगा कि वो आपके ऊपर depend है और आपको इसकी जीविका ensure karni padegi...
4. अगर आप एक strong woman से शादी करते हो तो आपको ये accept करना पड़ेगा कि उसका खुद का भी कुछ फैसला होगा और वो शख्त रहेगी.
5. अगर आप सुंदर wife चुनते हो तो आपको accept करना पड़ेगा कि उसके खर्चे भी ज्यादा होंगे .
6.अगर आप एक सक्सेसफुल wife चुनते हो तो आपको accept करना होगा कि उसके खुद के भी कुछ सपने ,गोल होंगे ....
आप क्या चुनोगे ??
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