क्या यह सच है कि अगर कोई मुसलमान मर्द किसी गैर-मुस्लिम औरत के साथ शारीरिक संबंध क़ायम करे, फिर उसे इस्लाम की तरफ़ बुलाकर कन्वर्ट करवा ले, तो यह जिहाद माना जाएगा और अल्लाह तआला इससे खुश हो जाएगा?
और अगर कोई पाकीज़ा, नेक और दीनदार शख़्स किसी गैर-मुस्लिम के साथ रंगरलियाँ मनाए, शारीरिक सुख भोगे और फिर उसे धर्म-परिवर्तन करवा दे, तो क्या यह भी जिहाद की श्रेणी में आएगा? अल्लाह तआला इस पर रज़ी और खुश होगा?