

Ravi Raaj
520 posts




जहाँ विधायक को अपनी बात मनवाने के लिए आत्मदाह जैसा कदम उठाना पड़े उस राज्य की स्थिति की अंदाज़ा स्वयं लगा जा सकता है ,इसलिए कई दिनों से सुनने में आ रहा था की राजस्थान में विधायक और मंत्रियों तक की नहीं सुनी जा रही तो एक आम कार्यकर्ता और जनता की कौन सुनेगा ,कई पत्रकार साथी इस कदम को ग़ैर ज़िम्मेदाराना कदम बता रहे हैं लेकिन सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए समय समय पर आंदोलन करने वाले निर्दलीय युवा विधायक का यह कदम मेरी नज़र में कहीं भी ग़ैर ज़िम्मेदाराना नहीं है, उनका यह कदम मात्र सरकार के ध्यानाकर्षण हेतु था यदि उनका इरादा आत्मदाह करने का होता तो हो सकता है वो माचिस भी अपनी साथ रखते ,लेकिन मात्र पेट्रोल अपने ऊपर उड़ेलने से यदि अंधी बहरी सरकार कुछ सुन सके यही उनका मुख्य उद्देश्य रहा होगा ? लोकतंत्र में संघर्ष, आवाज़ और आंदोलन जरूरी हैं, में आत्मदाह करने के सख्त खिलाफ हूँ लेकिन अगर सरकार लगातार जनता की आवाज को दबाने का प्रयास करती है तो फिर जनप्रतिनिधि होने के नाते भाटी के सामने ओर कोई चारा नहीं बचा होगा इसलिये हो सकता है उन्होंने ये कदम उठाया हो युवा क्रांतिकारी भगत सिंह ने भी असेंबली में बॉम बॉम मात्र अंधी बाहरी सरकार के ध्यान क्षण हेतु ही फका था उनका उद्देश्य किसी को मानना या स्वयं मरना नहीं था भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा 8 अप्रैल 1929 को दिल्ली की केंद्रीय असेंबली में फेंके गए बम का उद्देश्य किसी की जान लेना नहीं था, बल्कि "बहरों को सुनने के लिए धमाके की ज़रूरत होती है" (It takes a loud voice to make the deaf hear) की नीति पर चलना था। @RavindraBhati__








