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Jai jai shree ram

Bharat 加入时间 Aralık 2017
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Anil Bhakar
Anil Bhakar@Anilbhakar96·
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Ashutosh Mishra
Ashutosh Mishra@Ashutos95698794·
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Jaya
Jaya@Jaya__Kishori__·
अक्सर हम यह मान लेते हैं कि अधिक वस्तुएँ, अधिक पैसा, अधिक सुविधाएँ ही हमें अधिक खुश कर सकती हैं। लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। खुशी का संबंध बाहरी चीज़ों की मात्रा से नहीं, बल्कि हमारे मन की संतुष्टि और दृष्टिकोण से होता है। जब व्यक्ति कम में भी संतोष करना सीख लेता है, तो उसके मन में शिकायत, तुलना और लालच कम हो जाते हैं। वह जो कुछ उसके पास है, उसी के लिए कृतज्ञ महसूस करता है। ऐसी स्थिति में उसका मन हल्का, शांत और प्रसन्न रहता है। इसलिए उसके जीवन में खुशी की कमी नहीं होती। लेकिन यदि व्यक्ति के पास बहुत कुछ होते हुए भी संतोष नहीं है, तो वह हमेशा किसी न किसी कमी को महसूस करता रहेगा। फिर चाहे उसके पास कितना भी धन या साधन क्यों न हों, उसका मन कभी पूर्ण नहीं होगा
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Raghav jpsiingh Raghav
Raghav jpsiingh Raghav@RaghavJpsiingh·
यह युद्ध लगता है इसका अंत नहीं यह विश्व मानव सभ्यता के लिए अभिशाप भी बन सकता है मानव
राघवसिंहजेपी#3ह सामर्थ! गौरव!!वीरता!!!@RaghavJP1

अमेरिका-ईरान युद्ध (जिसे Operation Epic Fury कहा जा रहा है) फरवरी 2026 में शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर, मिसाइल और सैन्य ठिकानों पर संयुक्त हमले किए। यह टेंशन ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय प्रॉक्सी सपोर्ट (जैसे हिजबुल्लाह) से जुड़ी थी। अब अप्रैल 2026 तक युद्ध लगभग 35-40 दिन पुराना है, और दोनों तरफ से हमले-प्रतिहमले जारी हैं। मौजूदा स्थिति (अप्रैल 2026 तक) अमेरिका-इजरायल की स्थिति: उन्होंने ईरान की एयर डिफेंस, नेवी, कुछ लीडरशिप और न्यूक्लियर फैसिलिटीज को काफी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की मिलिट्री कैपेबिलिटी "शattered" हो गई है। हाल ही में US ने एक downed पायलट को ईरान के अंदर से रेस्क्यू भी किया। ट्रंप ने बार-बार कहा कि युद्ध "nearing completion" या "wrapping up" है, लेकिन उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर (पावर प्लांट्स, ब्रिजेस) पर हमले की धमकी दी है अगर ईरान Strait of Hormuz नहीं खोलता। 6 अप्रैल 2026 की डेडलाइन चल रही है।f41b00 ईरान की स्थिति: ईरान ने मिसाइल-ड्रोन अटैक्स से जवाब दिया है (गल्फ क्षेत्र, इजरायल और US बेस पर)। उसने Strait of Hormuz को ब्लॉक/थ्रेटेन किया, जिससे ग्लोबल ऑयल प्राइस बढ़े हैं। ईरान का रिजीम (अब Mojtaba Khamenei के नेतृत्व में) हार्डलाइन पर है और US के प्रस्तावों को "maximalist and unreasonable" बता रहा है। ईरान ने कहा कि वह न्यूक्लियर एनरिचमेंट बंद नहीं करेगा और प्रॉक्सी सपोर्ट भी नहीं छोड़ेगा।4c8218 दोनों तरफ नुकसान: सिविलियन कैजुअल्टीज, इकोनॉमिक दबाव (ईरान पर सैंक्शंस पहले से थे, अब और बढ़े), और क्षेत्रीय अस्थिरता। युद्ध हल (समाधान) कैसे निकल सकता है? मुख्य संभावनाएं विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध लंबा खिंचने की बजाय डिप्लोमेसी + मिलिट्री प्रेशर के मिश्रण से खत्म होने की ज्यादा संभावना है। यहां मुख्य रास्ते: 45-दिन का सीजफायर और बातचीत (सबसे चर्चित विकल्प अभी): हाल की रिपोर्ट्स में US, ईरान और मीडिएटर्स (ओमान, पाकिस्तान, तुर्की आदि) के बीच 45-दिन का सीजफायर की चर्चा चल रही है, जो युद्ध को स्थायी रूप से खत्म कर सकता है। इसमें Strait of Hormuz को फिर से खोलना शामिल है। ट्रंप के एन्क्लेव (Steve Witkoff आदि) इंडायरेक्ट टॉक्स कर रहे हैं। अगर ईरान कुछ कंसेशन दे (जैसे न्यूक्लियर पर लिमिट), तो US सैंक्शंस हटा सकता है। लेकिन ईरान इसे "excessive" बता रहा है। यह "Venezuela Model" जैसा हो सकता है — रिजीम बचा रहे, लेकिन US डिमांड्स मान ले।091421 15-पॉइंट प्लान या न्यूक्लियर डील 2.0: US का प्रस्ताव: ईरान न्यूक्लियर एनरिचमेंट बंद/सीमित करे, मिसाइल प्रोग्राम कर्ब करे, प्रॉक्सी सपोर्ट छोड़े, Strait of Hormuz फ्री करे। बदले में US सैंक्शंस हटाए और सिविलियन न्यूक्लियर प्रोग्राम सपोर्ट करे। ईरान इसे रिजेक्ट कर रहा है, लेकिन प्रेशर बढ़ने पर कुछ समझौता हो सकता है। पुराना JCPOA (2015) फेल हो चुका है, नया डील "no enrichment on Iranian soil" या रीजनल कंसोर्टियम पर हो सकता है। ईरान का और कमजोर होना + अनकंडीशनल सरेंडर: अगर US-इजरायल और हमले जारी रखें (पावर प्लांट्स, एनर्जी इंफ्रा पर), तो ईरान की इकोनॉमी और रिजीम अंदर से टूट सकता है। ट्रंप ने "unconditional surrender" की बात की है। लेकिन फुल रिजीम चेंज (जैसे इराक 2003) मुश्किल है — ट्रंप ग्राउंड ट्रूप्स में नहीं जाना चाहते। प्रोलॉन्ग्ड अट्रिशन (लंबा युद्ध): अगर कोई डील नहीं हुई, तो युद्ध महीनों-वर्षों तक चल सकता है। ईरान अंडरग्राउंड फैसिलिटीज और असिमेट्रिक वॉरफेयर (मिसाइल, ड्रोन्स, प्रॉक्सी) से लड़ सकता है। लेकिन ग्लोबल इकोनॉमी (ऑयल प्राइस $120+), चीन-रूस का विरोध और US के घरेलू प्रेशर से दोनों पक्ष थकेंगे। क्या तय करेगा आउटकम? ट्रंप का स्टैंड: वे "deal maker" बनना चाहते हैं, लेकिन "maximum pressure" भी। उन्होंने डेडलाइन दी है (6 अप्रैल तक Hormuz), लेकिन U-turn भी कर चुके हैं। ईरान का रुख: हार्डलाइनर्स (IRGC) मजबूत हैं, लेकिन इकोनॉमिक दबाव और इंटरनल प्रोटेस्ट्स से कमजोर। बाहरी फैक्टर: UN, यूरोप, गल्फ स्टेट्स (सऊदी, UAE), चीन-रूस मीडिएशन कर सकते हैं। ऑयल मार्केट और ग्लोबल महंगाई बड़ा प्रेशर है। रिस्क: एस्केलेशन से रेडियोएक्टिव फॉलआउट (Bushehr जैसे प्लांट्स), बड़े क्षेत्रीय युद्ध या WW3 जैसी अफवाहें, लेकिन अभी दोनों पक्ष फुल-स्केल ग्राउंड वॉर नहीं चाहते। निष्कर्ष: सबसे संभावित हल डिप्लोमैटिक सेटलमेंट है — सीजफायर + लिमिटेड न्यूक्लियर/मिसाइल समझौता, जहां ईरान कुछ कंसेशन दे और US सैंक्शंस हटाए। लेकिन दोनों तरफ "maximalist" डिमांड्स से यह आसान नहीं। अगर 6 अप्रैल की डेडलाइन पार हुई, तो बड़े हमले हो सकते हैं,

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Khushi Rajput 🇮🇳🩷
Khushi Rajput 🇮🇳🩷@KhushiRajp57943·
हर पल दुआ में तुझको ही मांगा है मेरे हर एहसास में बस तेरा ही साया है तू जो मिला तो यूँ लगा जैसे मेरी अधूरी सी दुनिया को रब ने खुद सजाया है Good night all Khushi_R✍️
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Jitendra Upadhyay
Jitendra Upadhyay@Jitendr08357253·
कोट वही रहता है साड़ियाँ बदल जाती हैं Video credit to creator
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राघवसिंहजेपी#3ह सामर्थ! गौरव!!वीरता!!!
अमेरिका-ईरान युद्ध (जिसे Operation Epic Fury कहा जा रहा है) फरवरी 2026 में शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर, मिसाइल और सैन्य ठिकानों पर संयुक्त हमले किए। यह टेंशन ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय प्रॉक्सी सपोर्ट (जैसे हिजबुल्लाह) से जुड़ी थी। अब अप्रैल 2026 तक युद्ध लगभग 35-40 दिन पुराना है, और दोनों तरफ से हमले-प्रतिहमले जारी हैं। मौजूदा स्थिति (अप्रैल 2026 तक) अमेरिका-इजरायल की स्थिति: उन्होंने ईरान की एयर डिफेंस, नेवी, कुछ लीडरशिप और न्यूक्लियर फैसिलिटीज को काफी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की मिलिट्री कैपेबिलिटी "शattered" हो गई है। हाल ही में US ने एक downed पायलट को ईरान के अंदर से रेस्क्यू भी किया। ट्रंप ने बार-बार कहा कि युद्ध "nearing completion" या "wrapping up" है, लेकिन उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर (पावर प्लांट्स, ब्रिजेस) पर हमले की धमकी दी है अगर ईरान Strait of Hormuz नहीं खोलता। 6 अप्रैल 2026 की डेडलाइन चल रही है।f41b00 ईरान की स्थिति: ईरान ने मिसाइल-ड्रोन अटैक्स से जवाब दिया है (गल्फ क्षेत्र, इजरायल और US बेस पर)। उसने Strait of Hormuz को ब्लॉक/थ्रेटेन किया, जिससे ग्लोबल ऑयल प्राइस बढ़े हैं। ईरान का रिजीम (अब Mojtaba Khamenei के नेतृत्व में) हार्डलाइन पर है और US के प्रस्तावों को "maximalist and unreasonable" बता रहा है। ईरान ने कहा कि वह न्यूक्लियर एनरिचमेंट बंद नहीं करेगा और प्रॉक्सी सपोर्ट भी नहीं छोड़ेगा।4c8218 दोनों तरफ नुकसान: सिविलियन कैजुअल्टीज, इकोनॉमिक दबाव (ईरान पर सैंक्शंस पहले से थे, अब और बढ़े), और क्षेत्रीय अस्थिरता। युद्ध हल (समाधान) कैसे निकल सकता है? मुख्य संभावनाएं विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध लंबा खिंचने की बजाय डिप्लोमेसी + मिलिट्री प्रेशर के मिश्रण से खत्म होने की ज्यादा संभावना है। यहां मुख्य रास्ते: 45-दिन का सीजफायर और बातचीत (सबसे चर्चित विकल्प अभी): हाल की रिपोर्ट्स में US, ईरान और मीडिएटर्स (ओमान, पाकिस्तान, तुर्की आदि) के बीच 45-दिन का सीजफायर की चर्चा चल रही है, जो युद्ध को स्थायी रूप से खत्म कर सकता है। इसमें Strait of Hormuz को फिर से खोलना शामिल है। ट्रंप के एन्क्लेव (Steve Witkoff आदि) इंडायरेक्ट टॉक्स कर रहे हैं। अगर ईरान कुछ कंसेशन दे (जैसे न्यूक्लियर पर लिमिट), तो US सैंक्शंस हटा सकता है। लेकिन ईरान इसे "excessive" बता रहा है। यह "Venezuela Model" जैसा हो सकता है — रिजीम बचा रहे, लेकिन US डिमांड्स मान ले।091421 15-पॉइंट प्लान या न्यूक्लियर डील 2.0: US का प्रस्ताव: ईरान न्यूक्लियर एनरिचमेंट बंद/सीमित करे, मिसाइल प्रोग्राम कर्ब करे, प्रॉक्सी सपोर्ट छोड़े, Strait of Hormuz फ्री करे। बदले में US सैंक्शंस हटाए और सिविलियन न्यूक्लियर प्रोग्राम सपोर्ट करे। ईरान इसे रिजेक्ट कर रहा है, लेकिन प्रेशर बढ़ने पर कुछ समझौता हो सकता है। पुराना JCPOA (2015) फेल हो चुका है, नया डील "no enrichment on Iranian soil" या रीजनल कंसोर्टियम पर हो सकता है। ईरान का और कमजोर होना + अनकंडीशनल सरेंडर: अगर US-इजरायल और हमले जारी रखें (पावर प्लांट्स, एनर्जी इंफ्रा पर), तो ईरान की इकोनॉमी और रिजीम अंदर से टूट सकता है। ट्रंप ने "unconditional surrender" की बात की है। लेकिन फुल रिजीम चेंज (जैसे इराक 2003) मुश्किल है — ट्रंप ग्राउंड ट्रूप्स में नहीं जाना चाहते। प्रोलॉन्ग्ड अट्रिशन (लंबा युद्ध): अगर कोई डील नहीं हुई, तो युद्ध महीनों-वर्षों तक चल सकता है। ईरान अंडरग्राउंड फैसिलिटीज और असिमेट्रिक वॉरफेयर (मिसाइल, ड्रोन्स, प्रॉक्सी) से लड़ सकता है। लेकिन ग्लोबल इकोनॉमी (ऑयल प्राइस $120+), चीन-रूस का विरोध और US के घरेलू प्रेशर से दोनों पक्ष थकेंगे। क्या तय करेगा आउटकम? ट्रंप का स्टैंड: वे "deal maker" बनना चाहते हैं, लेकिन "maximum pressure" भी। उन्होंने डेडलाइन दी है (6 अप्रैल तक Hormuz), लेकिन U-turn भी कर चुके हैं। ईरान का रुख: हार्डलाइनर्स (IRGC) मजबूत हैं, लेकिन इकोनॉमिक दबाव और इंटरनल प्रोटेस्ट्स से कमजोर। बाहरी फैक्टर: UN, यूरोप, गल्फ स्टेट्स (सऊदी, UAE), चीन-रूस मीडिएशन कर सकते हैं। ऑयल मार्केट और ग्लोबल महंगाई बड़ा प्रेशर है। रिस्क: एस्केलेशन से रेडियोएक्टिव फॉलआउट (Bushehr जैसे प्लांट्स), बड़े क्षेत्रीय युद्ध या WW3 जैसी अफवाहें, लेकिन अभी दोनों पक्ष फुल-स्केल ग्राउंड वॉर नहीं चाहते। निष्कर्ष: सबसे संभावित हल डिप्लोमैटिक सेटलमेंट है — सीजफायर + लिमिटेड न्यूक्लियर/मिसाइल समझौता, जहां ईरान कुछ कंसेशन दे और US सैंक्शंस हटाए। लेकिन दोनों तरफ "maximalist" डिमांड्स से यह आसान नहीं। अगर 6 अप्रैल की डेडलाइन पार हुई, तो बड़े हमले हो सकते हैं,
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Manav
Manav@Manav520·
अकेले चलता हूँ, ख़ामोशी के साथ, सपनों की उड़ान है, मन में बात। ना कोई देखे, ना कोई सुने, बस अपनी सोचों में मैं खुद गुनूँ। अकेलेपन में छुपा है सुकून का रंग, जहाँ खुद से मिलता है दिल का संग। शोर-शराबे से दूर, मैं अपने ही पास, अकेलेपन में ढूँढता हूँ जीवन का सार । Good evening
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Om
Om@RahulSi01423678·
भदोही जिले के अफसर मरीजों की हत्याएं करा रहे हैं.प्रदेश सरकार का डर उनके अंदर नहीं है। महोदय आप से विनम्र निवेदन है कि प्रसूताओं की मौत के मामले की गहनता के साथ जांच कराकर दोषी अफसरों पर सख्त कार्रवाई कराई जाए। @myogiadityanath @brajeshpathakup @CMOfficeUP @Uppolice
🇮🇳Rahul Singh🇮🇳@RahulSi86132882

बहुत ही दुखद घटना माननीय मुख्यमंत्री जी अब तो अपनी आंखें खोलिए. पूज्य महाराज जी भदोही जिले में मौत का अस्पताल चल रहा है .डीएम और सीएमओ की मिली भगत से त्रिलोकपुर, नहरा, औराई में एक ही अस्पताल को चार मौतों के बाद अलग-अलग नामों से लाइसेंस जारी करके चलवाया जा रहा है. भदोही जिले के अफसर मरीजों की हत्याएं करा रहे हैं.प्रदेश सरकार का डर उनके अंदर नहीं है। महोदय आप से विनम्र निवेदन है कि प्रसूताओं की मौत के मामले की गहनता के साथ जांच कराकर दोषी अफसरों पर सख्त कार्रवाई कराई जाए।

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Anil Bhakar
Anil Bhakar@Anilbhakar96·
Little boy enjoying bath
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Anil Bhakar
Anil Bhakar@Anilbhakar96·
Be the reason for someone's laughter, everyone makes them cry.
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Ashutosh Mishra
Ashutosh Mishra@Ashutos95698794·
Why was he so fat?
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Khushi Rajput 🇮🇳🩷
Khushi Rajput 🇮🇳🩷@KhushiRajp57943·
मेरी तमन्ना अब सिर्फ एक ख्वाहिश नहीं रही तुम्हारे साथ वो मेरी सबसे बड़ी खुशी बन गई है तुम मिले तो ऐसा लगा जैसे मुकम्मल हो गई ज़िंदगी ♥️🌹 अब हर दुआ में बस तुम्हारा ही नाम शामिल है Good night all friends Khushi_R✍️
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