अमित कुमार विनि

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अमित कुमार विनि

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@amitkumarvini

अभियंता, कवि, सामाजिक रुचि, स्वतंत्र विचारक, यथार्थवादी, मंजिल की फिक्र क्यो करें, हम तो बस सफर के मुशाफ़िर हैं। सर्वम् अनित्यम् 🙏

गढ़वा, झारखंड, भारत 加入时间 Ekim 2017
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अमित कुमार विनि
प्रेम और कर्तव्य के बीच में उलझा हुआ था मैं बांसुरी छोड़कर चक्र न उठाता तो क्या करता जब शांति के द्वार हर घर से बंद कर दिए गए अंत में अनिवार्य युद्ध न रचाता तो क्या करता जिस राजसभा को मुझे बंदी बनाने का भ्रम था उसे विश्वंभर स्वरूप न दिखाता तो क्या करता कुरुक्षेत्र के धर्मयुद्ध में अपनों से मोह हो जाए फिर महान ग्रन्थ गीता न सुनाता तो क्या करता जहां नीति नियम से धर्म की जीत न होने पाए वहां अधर्म को छल से न हराता तो क्या करता ................ @कुमार विनि ✍️
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अमित कुमार विनि
@ManojYadavInc07 सुकून स्थिरता खोकर बस भाग दौड़ में उम्र गुजर जाती है ।सुप्रभात मित्र 🙏
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Manoj Yadav
Manoj Yadav@ManojYadavInc07·
@amitkumarvini सुप्रभात 🙏 सही कहा… जिंदगी की दौड़ में सुकून कहीं खो जाता है। आपका दिन भी शुभ और मंगलमय हो 🌼✨
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अमित कुमार विनि
सुप्रभात साथियों 🙏 एक नौकरी जिंदगी से सुकून और जवानी छीन लेती है अक्सर शहरों की मजबूरी गांव की कहानी छीन लेती है। सभी का दिन शुभ हो मंगलमय हो 🙏
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अमित कुमार विनि
@IncPantd69 प्रेम और कर्तव्य के साथ धर्म का डाइव निभाना बहुत धर्मसंकट वाली स्थिति होती है धन्यवाद आपका
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𝘿𝙞𝙣𝙚𝙨𝙝𝙋𝙖𝙣𝙩_𝙄𝙉𝘾
@amitkumarvini बहुत सुंदर भावपूर्ण — प्रेम, धर्म और कर्तव्य के बीच की उलझन को इतनी सहजता से व्यक्त किया गया है। शुभ प्रभात भाई जी।
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अमित कुमार विनि
प्रेम और कर्तव्य के बीच में उलझा हुआ था मैं बांसुरी छोड़कर चक्र न उठाता तो क्या करता जब शांति के द्वार हर घर से बंद कर दिए गए अंत में अनिवार्य युद्ध न रचाता तो क्या करता जिस राजसभा को मुझे बंदी बनाने का भ्रम था उसे विश्वंभर स्वरूप न दिखाता तो क्या करता कुरुक्षेत्र के धर्मयुद्ध में अपनों से मोह हो जाए फिर महान ग्रन्थ गीता न सुनाता तो क्या करता जहां नीति नियम से धर्म की जीत न होने पाए वहां अधर्म को छल से न हराता तो क्या करता ................ @कुमार विनि ✍️
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Pushpraj sharma
Pushpraj sharma@RealPushprajX·
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। जय लक्ष्मी मैया की🚩🙏
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🔱 रुद्राक्ष 🔱
हे सरिता के कल-कल नाद 🙏 हे सिंधु के बाहु विशाल, हे मेघों के गर्जन-तर्जन हे प्रलयंकर, महाकाल...✍️ महादेव 🌹
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Solan Princess 👑
Solan Princess 👑@Isha_Pundeer·
"आप सभी को सुबह की राम राम!! Good 😊 morning friends! 🌿🌺"राधे राधे!!🌺🌿
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Priya Mishra
Priya Mishra@Kashyap_Priya4·
ॐ महालक्ष्मी नमो नमः श्री विष्णुप्रियाये नमो नमः धन प्रदाये नमो नमः विश्व जनन्या नमो नमः!! जय लक्ष्मी नारायण 🙏🏻🚩
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ॐ᭄࿐𝚔𝚊𝚞𝚜𝚑𝚒𝚔࿐ॐ
जय दुर्गा मैया 🙏 नमो नमो दुर्गे सुख करनी, नमो नमो अम्बे दुःख हरनी, निरंकार है ज्योति तुम्हारी, तिहूँ लोक फैली उजियारी🚩
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Basram Meena
Basram Meena@BasramHingwaaA·
समय जब पलटता है तो सब पलट के रख देता है इसलिए अच्छे समय मे अंहकार मत करो ओर समय मे थोड़ा सब्र रखों ||
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Nitu Yadav
Nitu Yadav@NituyadavUP·
नवरात्रि का पहला दिन सिर्फ पूजा का नहीं खुद से एक वादा करने का दिन है। अपने अंदर के डर आलस्य और हार मानने की सोच को खत्म करिए यही असली रावण है। नवरात्रि हमें सिखाती है कि जब मन में शक्ति हो तो हर महिषासुर हारता है।🙏 #नववर्ष #चैत्र_नवरात्रि
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एंजेल
एंजेल@Im_Angel_77·
🙏🙏 ब्रह्मचारिणी नवरात्रि के दूसरे दिन पूजित मां दुर्गा 🔱 तपस्या,संयम,त्याग का प्रतीक 🌸 जय माँ ब्रह्मचारिणी की🙏📿
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अमित कुमार विनि 已转推
pk kotwal
pk kotwal@pkkotwal278775·
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🌼 आज के इस पावन दिन पर भगवान भगवान विष्णु (हरि) की कृपा आप सभी पर बनी रहे। उनकी शरण में आने से जीवन में शांति, सुख और समृद्धि का वास होता है। 🙏 💙 जय श्री हरि 💙
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मनभावन संप्रेषण
ॐ श्री दुर्गा देव्यै नमः ll वासन्तीय नवरात्र का दूसरा दिन। देवी दुर्गा माँ हम सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करें।
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विजय शंकर यादव
अब खुशी दुबे कि मां जी बिल्कुल ठीक है और उन्होंने भी।। श्री अखिलेश यादव जी को धन्यवाद करते हुए कहा कि भगवान अखिलेश जी के जैसा बेटा।। हर मां को दे जिससे इस संसार का कल्याण हो सके ऐसी शुभकामनाएं दी है।। सबके है अखिलेश ♥️💚 @yadavakhilesh
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Nitu Yadav
Nitu Yadav@NituyadavUP·
नवरात्रि का पहला दिन शक्ति की शुरुआत 🙏 आज आराधना है माँ शैलपुत्री की जो हमें स्थिरता साहस और नई शुरुआत का आशीर्वाद देती हैं जहाँ शक्ति है वहीं सृजन है🙏
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SP Mishra
SP Mishra@spm694·
मां ब्रह्मचारिणी की कथा : दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय व अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में कमण्डल। पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा कि हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौली शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। #जय_मां_ब्रह्मचारिणी
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