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कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥"
बचपन में हनुमान जी ( मारुति) बहुत बलशाली और चंचल थे। असीम शक्तियों के कारण वे अक्सर आश्रमों में ऋषियों की तपस्या में बाधा डालते थे।
वे खेल-खेल में यज्ञ के पात्र तोड़ देते, यज्ञ की अग्नि बुझा देते और शांतिप्रिय ऋषियों को परेशान करते थे।
वानर बालक की इन शरारतों और उनकी असीम शक्तियों से भयभीत होकर, ऋषियों ने विचार विमर्श किया।
उन्हें नियंत्रित करने और दंड देने के लिए, महान ऋषियों ने एक योजना बनाई। ऋषियों ने हनुमान जी को शाप दिया:"हे वानर बालक! हमारे इस श्राप से तुम अपनी उस असीम शक्ति और क्षमताओं को लंबे समय तक भूल जाओगे।
"यह श्राप दिया गया कि वे अपनी शक्ति से पूरी तरह अनभिज्ञ हो जाएंगे।श्राप का प्रभाव:इस श्राप के प्रभाव से बाल हनुमान शांत हो गए।
वे अपनी अलौकिक शक्तियों को बिल्कुल भूल गए और एक साधारण वानर की तरह व्यवहार करने लगे।शक्तियों का पुनः स्मरण:ऋषियों ने श्राप में यह भी कहा था कि जब समय आएगा और कोई योग्य व्यक्ति उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण कराएगा, तब उन्हें अपना पूरा बल वापस याद आ जाएगा।
रामायण काल में, जब सीता माता की खोज के लिए वानर सेना लंका की ओर जाने लगी, तो समुद्र को पार करने की समस्या उत्पन्न हुई।
तब जाम्बवान (ऋक्षराज) ने हनुमान जी को उनकी अपार शक्तियों और जन्म के समय मिली क्षमताओं का स्मरण कराया।
शक्ति याद आते ही उन्हें अपने उड़ने की अद्भुत क्षमता का बोध हुआ और वे विशाल समुद्र को पार करके लंका जाने में सफल हुए।
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🔱🕉️ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ 🕉️🔱
महादेव की कृपा से भय दूर होता है,
मन में शक्ति आती है और जीवन में सकारात्मकता का प्रकाश फैलता है। 🙏
#HarHarMahadev #Mahadev #MahamrityunjayaMantra #ShivBhakti #SanatanDharma 🚩🔱
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