सोशल मीडिया पर ऐसे ऐसे मैसेज जात को लेकर भरे पड़े है , कोई ब्राह्मण अपने पर गर्व , कोई शूद्र अपने पर गर्व, न ज्ञान लेना , न वेदों को पढ़ना।
▫️यदि जाति जन्म से निश्चित होती, तो मनुस्मृति स्वयं यह क्यों कहती➡️
“शूद्रो ब्राह्मणतामेति ब्राह्मणश्चैति शूद्रताम्।” (मनु 10.65)
▫️इसका सीधा अर्थ है➡️
वर्ण बदल सकता है,
क्योंकि वह जन्म नहीं, कर्म पर आधारित है।
जो चीज जन्म से तय होती है, वह बदलती नहीं।और जो बदल सकती है, वह जन्म से नहीं होती।
यदि केवल जन्म ही ब्राह्मण बना देता,तो विद्या, संयम, सत्य और आचरण की परीक्षा क्यों रखी गई?