निश्चल मन के समर्पण को,
कमजोरी मत समझो!
मन से मन के अटूट रिश्ते की,
नाजुक डोरी को,
कमजोर मत समझो!
आप पढ़ न पाए मन की किताब,
मेरी कमजोरी मत समझो,
मेरे मन की किताब पढ़ना मुश्किल था,
पर किताब कोरी मत समझो!
मैं सृष्टि,शक्ति,जननी,निर्माता हूँ,
मन की कोमलता को,
मुझ को कमजोर मत समझो!!❤️
कोई हमसे पूछे?हम तुम्हें क्यों पसंद हैं
तब तुरंत कोई जबाब नहीं सूझता है
फिर बहुत सोचने पर
इतना ही समझ में आता है कि
शक्ल आदतें हरकतें इत्यादि सब बाद में हैं
सबसे पहले उसका होना ही अच्छा लगता है
|| जय सियाराम ||
इस जिंदगी के सफर में थकान बहुत हैं,
अपनों के अपनों पर यहां इल्जाम बहुत है।।
शिकायतों का दौर देखता हूं तो थम सा
जाता हूं,
लगता है उम्र कम है और इम्तिहान बहुत
है...!!
इश़्क हमारा मुक्कमल हुआ
दरिया ए दिल ने
इक दूजे को अपना मान लिया
प्यार की लहरों पर संवार
आरजू ए दरिया में डूबे हुए
दूरियों से हमें कोई फर्क नही
आप हो दरिया इश़्क का
मुझे बस खो जाना आप ही में
सपनों की बातें हो और
साथ आपका हो और
क्या ही चाहिए
खुशहाल जीवन के लिए🌹
#Viद्या🍁 #बज़्म