🌺 मन ही देव है 🌺
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दिन रात हमने ब्राह्मणों की धार्मिक सत्ता को चैलेंज करने के लिए बौद्ध-जैन धर्म चलाया। नाथपंथ चला रहे हैं। उससे भी बाहुबल नहीं दिखता है। अभी कुछ दिन पहले घूमे रहे लिटिल-लिटिल नाथपंथी सब आज अचानक से वैदिक ऋषि हो गए हैं और वेदों की ऋचाओं पर दावा ठोंकने लगे हैं। 🤣


इस धागे में बहुत सी त्रुटियां हैं, मुझे समय मिलेगा तो सही करूंगा। बाक़ी आप लोग ये पता लगाओ कि इंद्र और विश्वामित्र का क्या संबंध है। और वशिष्ठ को पुरोहित किन परिस्थितियों में बनाया गया?




बाहुबल तो तब भी दिखता है जब रावण दहन किया जाता है. अगर हम जन्मोत्सव मना ले तो बाहुबल हो गया. छपिया से एक संप्रदाय चलता है जिसको गुजराती लोग भगवान् मानते हैं लेकिन लोकल लोग नही मानते हैं.









दलित, कोइरी जैसे कई समुदायों के लिए उनकी आईडेंटिटी का बहुत महत्व है क्योंकि इनके लिए सबसे बड़ा क्राइसिस यही है। जब ये अंबेडकर या अशोक के नाम पर उत्सव मनाते हैं तो हैरानी नहीं होती लेकिन ब्राह्मण परशुराम के पीछे इतना पागल क्यों है? इनके सामने तो कभी आइडेंटिटी का सवाल नहीं रहा!




कीर्तन कभी कर्तन (कटाई) की जगह नहीं ले सकता, हनुमान जी कीर्तन की जगह कीर्तन और कर्तन (⚔️) की जगह कर्तन (⚔️) करते थे चैतन्य महाप्रभु कीर्तन करते रहे और बंगाल हाथ से निकल गया, आज वो होते तो उन्हें बहुत दुख होता दो क्षत्रिय राजकुमारों (बुद्ध और महावीर ) ने असमय क्षात्र धर्म (⚔️) को छोड़कर अहिंसा का मार्ग अपनाया और उनकी नक़ल करते-करते देश की दुर्गति हो गयी क्षत्रियों को अपना धर्म नहीं छोड़ना चाहिए ~ जगद्गुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज









मैं सभी सांसदों से कहूंगा... आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए ... देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है। उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं करिए। ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त होगी… देश का लोकतंत्र और सशक्त होगा। आइए… हम मिलकर आज इतिहास रचें। भारत की नारी को… देश की आधी आबादी को उसका हक दें।










