
समझ नहीं आता कि कुछ लोग आज भी जीवाश्म ईंधन को ही क्यों पकड़े रहना चाहते हैं?
ईवी की बात करो, तो वे रेंज और कीमत का रोना रोते हैं।
पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की बात हो तो झूठी अफवाहें फैलाने लगते हैं।
क्या पिछले तीन महीनों में हमें यह समझ नहीं आया कि जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल कैसे दुनिया भर में एक हथियार की तरह हो रहा है?
इसकी ज़िद की वजह से आज हम सबको कितनी भारी आर्थिक और कूटनीतिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
हिन्दी
