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@PrimitiveBanker

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Oblivious@PrimitiveBanker·
@SaffronSapphir1 @theskindoctor13 नेताजी से पंगा लेंगे तो घर में 15 करोड़ मिलने के बाद इस्तीफा देकर बाईज्जत बरी कैसे होंगे
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Son of a BJP MLA from Pichhore (Madhya Pradesh) ran over five people and arrogantly blamed the victims. He has a similar past case too. His father also has a glorious criminal record. Look at his Thar: no number plate, sirens, modified lights, and his father’s photo and designation in bold. He must have been roaming like this, and no policeman would have dared act on these multiple RTO offences. Given his confidence and our faith in the system, this time too he’ll face no action.
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Simi Singh.
Simi Singh.@WitMistique·
सभ्यता की बाहरी लड़ाई लड़ता है वो फौजी, जो लेह या कश्मीर की बर्फीली हवाओं में खड़ा अपनी हड्डियां गलाता है, जिसके सीने पर किसी जि हादी की सीधी गोली लगती है। और उन्ही सेवानिवृत्त सैनिकों को विकलांगता पेंशन पर आयकर में छूट नहीं मिलती जिस देश की सरकार के पास करोड़ों रुपये हैं सामाजिक न्याय के नाम पर बांटने को, वही सरकार एक अग्निवीर को पेंशन नहीं दे पाती। तो तुम्हारे जैसे कीबोर्ड वॉरियर कहते हैं “मोदी जी ने किया है, तो सोच-समझकर ही किया होगा।” आंतरिक सभ्यता के अस्तित्व की लड़ाई लड़ता है वो किसान, जिसे कड़े कृषि कानूनों की जरूरत थी। पर हजारों की अराजक भीड़, जो इस देश के कानून और व्यवस्था की धज्जियां उड़ाती है, सरेआम लाल किले से तिरंगा हटा देती है। और हमारे 56 इंच के सीने वाले मोदी जी उसी भीड़ के दबाव में आकर वे सारे कृषि कानून वापस ले लेते हैं। जब इस देश की सुप्रीम कोर्ट एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग का सवाल उठाती है, तो यही प्रधानमंत्री उसे और कड़ा बना देते हैं। और हर वो मासूम, जो इन अंधे कानूनों की बलि चढ़ता है, वो इस देश की आंतरिक सभ्यता की लड़ाई लड़ता है। जि हादियों को कानूनी संरक्षण देकर, आरक्षण देकर, मंदिरों को आज भी क़ब्ज़े में रख कर, Religious Tourism के नाम पर हर निंदनीय कृत्य करके हिंदुत्व का चूरन सबके गले उतारने की कोशिश करना कायरता है। यह किसी धर्म की लड़ाई नहीं है। काजल हिंदुस्तानी को जब सरेआम गुजरात की हिंदुवादी सरकार के सामने पकड़कर ले जाया जाता है, ब्राह्मणों की ,स्वर्ण लड़कियों पर सरेआम लार टपकाई जाती है, तो तुम्हारे जैसे लोग फेविकोल पी लेते हैं। उनका मुंह केवल तब खुलता है, जब बात सिर्फ मोदी की हो, न कि देश की। तुम्हारे जैसे लोग विलाप करते हैं कि मोदी की मां को कैसे गाली दे दी। तो इधर-उधर की बात और ट्याऊँ- ट्याऊँ करने से कुछ नहीं होता। साबित कीजिए कि कहां से कौन कितना असला-बारूद मंगा रहा था, कहां स्वर्णों ने अराजकता फैलाई। नहीं तो 5K लीजिए, मध्य प्रदेश की बदली तस्वीर का पेड पोस्ट कीजिए और चुप रहिये
Simi Singh. tweet media
AjiHaan@AjiHaaan

क्या हुआ जो किसी से अलग से देश की माँग कर दी.. क्या हुआ जो इनके ग्रुप के अंदर कोई पाकिस्तान से 80s के खालिस्तानियों की तरह असलाह बारूद और आर्मी हेल्प की बात कर रहा है.. क्या हुआ जो इनकी बड़ी दीदी ने अलग से स्टेट जिसके अलग से क़ानून होंगे की बात कर दी..ऐसी ही बात करने पे उमर खालिद सालों जेल में सड़ा है.. क्या हुआ जो इन्होंने साल भर पहले से ही इन्होंने पोलिटिकल पार्टी बना रखी है और अब सवर्ण vs ऑल कास्ट का नैरेटिव चला के दिन भर राजपूतों, वैश्यों, दलित हिंदुओं और OBC हिंदुओं के ख़िलाफ़ जहर उगलते हैं.. ट्रैक्शन के लिए हर 2,4 साल में हवा के साथ विचार बदलने वालों के लिए हर बात क्या हुआ पर ही ख़त्म होनी है..क्यूंकि उस से गहरे में समझने और समझाने पर इंगेजमेंट फार्मिंग का स्कोप कम हो जाता है.. ना तुम्हारे बनाने से कुछ बना था ना तुम्हारे बिगाड़ने से कुछ बिगड़ेगा..तुम्हारे होने से पहले जो था तुम्हारे रहते हुए जो है और तुम्हारे साथ ना रहने से भी जो होगा वो हो के रहेगा..तुमने दिल्ली में दम लगा लिया, तुमने हरियाणा में दम लगा लिया, तुमने बिहार में दम लगा लिया..और अब UP में अप्रत्यक्ष/प्रत्यक्ष दम लगा रहे हो..लिखने को बंगाल भी लिख सकते थे लेकिन अभी नज़र नहीं लगाना चाह रहे.. मूजी जैसे लोग इस रणक्षेत्र के हीरो हैं..जिन्हें पता है कि लड़ाई का इंटरनल मोर्चा मैनेजेबल है लेकिन असली युद्ध एक्सटर्नल है.. इंटरनल लड़ाई रिप्रेजेंटेशन और कोऐक्सिस्टेंस की है जो हजारों सालों से भी साथ ही रहे हैं..एक्सटर्नल लड़ाई सिविलाइज़ेशनल है..और ये लड़ाई भी हज़ार साल से है.. तुम अपनी फाँस तलवार से निकालो और अपनी वीरता की डींगे हांको..लेकिन जहाँ असली लड़ाई है लड़ना वहीं पड़ेगा.. ✌️

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Ajeet Bharti
Ajeet Bharti@ajeetbharti·
तो चिंता इस बात की भी है कि मोदी जी के पोस्ट पर कम्यूनिटी नोट्स आ रहे हैं और उसे पाकिस्तानी रेट कर रहे हैं। मान लेते हैं कि पाकिस्तानी उसको रेट कर रहे हैं, तो प्रश्न यह है कि मोदी या भाजपा के अन्य लोग झूठ/प्रपंच लिख/बोल क्यों रहे हैं? और यदि पाकिस्तानी हैंडल एक्सप्लॉइट कर रहे हैं, यह जानकारी आप सबको है तो, आपके दो मंत्रालय के कार्यालयों में सामूहिक रूप से आपसी हस्तमैथुन चल रहा क्या? वो कर क्या रहे हैं? विरोधियों के अकाउंट सस्पैंड करते हो, वो वापस आ कर मूतता है तुम्हारे ऊपर! और इसका लोड मैं क्यों लूँ जो साला हर तरफ से सताया जा रहा है? आप लोगों के तर्क हमने सुन रखे हैं कि हाँ यार, यूजीसी तो गलत है, पर… पर? गलत है, तो गलत है… ‘पर’ का लोड मैं क्यों लूँ? तुम लोग नब्बे दिन से चुप हो इस पर, तो ज्ञान रखो भीतर में! तुम जानते हो कि सामान्य वर्ग के साथ क्या हो रहा है, तुम जानते हो हर दिन राजनैतिक समीकरणों की आड़ में डबलिंग डाउन ही चल रहा है, तुम जानते हो कि पार्टी को इससे यूपी में सबसे पहले परिणाम झेलना होगा, और फिर भी तुम्हें सोरोस, कॉन्ग्रेस और पाकिस्तान दिख रहा है, तो धन्य हो तुम! एक तरफ यह भी ताने कि ये लोग एक पंचायत चुनाव नहीं जीत सकते, दूसरी तरफ तुम्हारी इसलिए भी फटी हुई है कि ‘इनका टार्गेट यूपी/योगी हैं’, तो पहले तय कर लो कि सवर्णों की औकात है या नहीं है। यदि औकता नहीं है तो मिमियाना बंद करो। यदि नहीं है तो व्हाट्सएप्प में घुस कर स्वयं को हमजा अली मजारी कहना बंद करो। और यदि औकात है, तो जब सवर्ण समूह तुम्हें पेल रहे हैं, तो पार्टी को हराने का, मोदी के कम्यूनिटी नोट का लोड GC को क्यों दे रहे हो? जहाँ तक ‘जीसी स्टेट’ और ‘जीसी लहसुन’ की माँग है, इस पर पचास बार मैं अपनी राय दे चुका हूँ: दो कौड़ी की झाँटू और इम्प्रैक्टिकल माँग है। जो यह माँग कर रहे हैं उन्हें न तो राजनीति समझ में आती है, न ही प्रेशर ग्रुप का लक्ष्य। और जहाँ तक नेहा दास को समर्थन की बात है, तो वह खुल कर दूँगा क्योंकि वो हर दिन सामान्य वर्ग के साथ हो रहे पक्षपात पर लिख-बोल रही है। मैं किसी ग्रुप में नहीं हूँ, न ही किसी व्यवस्थित योजना का हिस्सा रहा हूँ, पर वैचारिक रूप से ऐसे लोगों को जो भी टार्गेट करेगा, मैं उनके विरोध में रहूँगा। उन्हें जो सहयोग चाहिए, दूँगा। ग्रुप में पचास और लोग होंगे, जिन्हें मैं नहीं जानता, न ही उनकी हर बात का समर्थन करता हूँ, पर जो समूह मुझे ही सोरोस और कॉन्ग्रेस का अजेंट बोल चुका है, जिसने हर तरह की सीमाएँ लाँघी, उन दोगलों द्वारा किसी को एंटी-नेशनल कहने की अथॉरिटी नहीं मानता। तुम्हारा नेता कॉन्ग्रेस की माँग मान ले तो वो ‘मुद्दा छीन लिया’ हो जाता है, हम विरोध करें उसका तो हम एंटी-नेशनल? मोदी या भाजपा का आपको बचाव करना है तो कहो उनसे कि अम्बेडकर की मूर्ति पूजा बंद करे। नहीं कर सकते तो जो ट्रोल करता है, उसके घर पुलिस न भेजे। उदिता त्यागी के परिजनों को क्यों परेशान किया? मेरे ऊपर मार्च से ही UP IB का सर्विलांस क्यों है? हाउस अरेस्ट क्यों किया गया मुझे? अभी भी मेरे घर कौन आता-जाता है, इसकी मॉनिटरिंग क्यों है? मुझे यह मानसिक यातना क्यों दी जा रही है? मैं तो फिर भी अपना काम ही कर रहा हूँ, रो तो नहीं रहा हर जगह! तुम साले नेता के टट्टे हो कर भी विक्टिम बने घूमते हो। मैंने यूजीसी पर नब्बे दिनों से बोला है, और तब तक बोलता रहूँगा, जब तक इनकी नीतियाँ नहीं बदलती। इस बीच, मोदी और भाजपा एड़ी-चोटी का जोर लगा ले, सोशल मीडिया पर तुम्हारी गलत नीतियों का विरोध अकेला भी करता रहूँगा। डरा लो, अरेस्ट कर लो, छापे मार लो (मन की शांति के लिए), पर मैं यह बंद नहीं करूँगा। इसी तंत्र का हूँ, इसमें रह कर, इसके कल-पुर्जे ठीक भी करूँगा और इंजन में भी घुसना पड़े तो घुस कर पटरी बदलवाऊँगा। और हाँ, इसके लिए मुझे पाकिस्तानियों की जरूरत नहीं है। आइटीसेलियों, पूर्व आइटीसेलियों और वानाबी आइटीसेलियों की %# मारने के लिए, अकेला ही काफी हूँ।
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Oblivious
Oblivious@PrimitiveBanker·
@jyotiTpandey05 बाप की शक्ल हैरी पॉटर फिल्म के डॉबी जैसी क्यों लग रही है
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Oblivious@PrimitiveBanker·
@FastestBanker @1K_Nazar फिलहाल पूरी नौकरशाही का यही हाल है। सर्वोच्च सिंहासन पर एक बेहद घमंडी, स्वार्थी, मक्कार और जाहिल बुड्ढा कब्जा कर के बैठा है। उसने ऊपर से लेकर नीचे तक एक सिस्टम लागू कर रखा है। "मेरा वचन ही है शासन" ऐसे में एक स्वस्थ वर्क कल्चर का जिंदा रहना असंभव है।
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FastestBanker
FastestBanker@FastestBanker·
@PrimitiveBanker @1K_Nazar Officer class in SBI is totally slave to management. Never says no to them. Upper management only wants promotion and gives unlimited targets to branches. And Officer do anything for that
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आखिर बीमा के नाम पर ये कैसी लूट मचा रखी है! यदि आपको SBI की भांकरोटा शाखा मे खाता खुलवाना है तो पहले अपने पिछवाडे वाली जेब मे 2000 रुपये बीमा के लिए अतिरिक्त लेकर चले अन्यथा आप अपना खाता Online खुलवा सकते है संभवत बिना बीमा के आपका खाता खुलना संभव नही हो और यदि आपने वीडियो बनाने की कोशिश करी तो फिर आपकी सेवा के लिए पुलिस को बुलाने की बात कही जायेगी जो आपको ससम्मान गाडी मे बिठाकर आपके घर तक छोडकर आयेगी मगर खाता नही खुलवा पायेगी
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Oblivious@PrimitiveBanker·
@f4_f10_ @TheSinghSahgal कल ही तो एम्बुलेंस को रास्ता दिया है। जाने पब्लिक को और क्या चाहिए!!!
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न्यू बैंकर्स डायरी
अपना वाला “मित्रों” और “विकास” में ही रह गया, उधर नेपाल वाला अपने देश के लिए बेहतरीन डिसिशन ले रहा है।
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Oblivious@PrimitiveBanker·
@DearS_o_n @DumBUlL Academic certificate is like a theory being published. A financial statement is proof that the theory works in practice. Sometimes a theory works without the theory being published. That's a person with good financial statement without any academic certification.
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Oblivious@PrimitiveBanker·
@old_cricketer Part 2 ज़्यादा वाहियात थी
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Exx Cricketer
Exx Cricketer@old_cricketer·
जॉली एल एल बी पार्ट 3 ने कितने भी रुपए क्यों न कमाए हों, ये एक बेहद घटिया और थर्ड क्लास मूवी थी। जॉली एल एल बी पार्ट 1 अरशद वारसी वाली बॉलीवुड की आल टाइम 50 फिल्मों में बेहद आसानी से आ जाएगी।
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Oblivious@PrimitiveBanker·
@iNitinTyagi @RBI इस पूरी सरकार में एक ऐसा लायक आदमी नहीं है जो इस प्रोजेक्ट को अंजाम दे सकते। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी और अकाउंट पोर्टेबिलिटी में जमीन आसमान का अंतर है।
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Nitin Tyagi
Nitin Tyagi@iNitinTyagi·
🚨@RBI’s ACCOUNT PORTABILITY: double edged sword for BANERS On paper, it looks customer-friendly. In reality, it’s pressure loading on Bankers. Imagine this: A customer is unhappy → one click → account shifted to another bank. Who will be questioned? The branch staff. Targets won’t reduce. Instead, retention targets will be added. Now you’re not just opening accounts even you’re fighting to stop them from leaving. → Every complaint becomes a threat. → Every delay becomes a risk. → Every system issue becomes YOUR fault. And let’s talk about execution. Mandates, EMIs, salary credits, auto-debits If even one thing fails during portability, who handles the chaos? The same overworked branch staff. → Long hours. → Constant audits. → Endless pressure. → Working on Holiday → Now add “customer retention fear” to it. Digital reforms are welcome. But why is every reform designed without considering the ground reality of bankers? → No staff increase. → No workload reduction. → No mental health support. Just more expectations. Banking is becoming less about service and more about survival. #Bankersvoice
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Oblivious@PrimitiveBanker·
@khuchrep @Nick_mishra पूरा देश ही इनका है। हम तो यहां किराए से रहते हैं
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खुचरेंप
खुचरेंप@khuchrep·
गाइज, ~जितने भी बड़े हॉस्पिटल और बड़े प्राइवेट स्कूल हैं, ~वो सब किसी न किसी मंत्री, विधायक, नेताओं के हैं। ~इसलिए ये लड़ाई थोड़ी लंबी चलेगी, इसके लिए आवाज उठानी पड़ेगी। आर यू रेडी?
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Ajeet Bharti
Ajeet Bharti@ajeetbharti·
भाजपा को समझ में भी आ रहा है कि X वास्तव में उसके साथ क्या कर रहा है? प्रतीत होता है कि आप चाहे मोदी, भाजपा, सरकार आदि के संदर्भ में सकारात्मक लिखो या नकारात्मक, सरकार की अपनी मूर्खता के कारण उसकी रीच रेस्ट्रिक्ट हो रही है। यदि आप टेक कंपनी को कहोगे कि मोदी जी पर नेगेटिव ट्वीट नहीं चाहिए तो वो ऐसे ही मजे लेता है। मैं जानता हूँ आप सबने इसी प्रकार के उदाहरण देखे होंगे। @PMOIndia अपने दल से कहिए सँभल जाएँ वरना आप अपने हाथों से मोदी जी की रीच बर्बाद कर दोगे।
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Oblivious@PrimitiveBanker·
@tehseenp कांग्रेस ने नेहरूजी को जबरदस्ती "Larger than Life" बनाने की कोशिश की, नेहरूजी का मजाक बन गया अंबेडकरवादियों की वजह से आज डॉ बी आर अंबेडकर का मजाक बना हुआ है नवबौद्धों की वजह से आज बुद्ध का मजाक बन रहा है BJP यही काम भारतीय संस्कृति और इतिहास के साथ कर रही है।
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sanjay kumar
sanjay kumar@sanju1000·
दो ख़बरें जांच करने वाली है। एक-सरकार पेट्रोल में अब 20 की जगह 27 फीसदी इथेनॉल मिला रही है। यानी आपको E20 की जगह E27 पेट्रोल दिया जा रहा है। जबकि देश में किसी भी कंपनी की गाड़ी के इंजन को E27 पेट्रोल के लिए नहीं बनाया गया है। दूसरी ख़बर-आपके LPG सिलेंडर में 14.2 किलो की जगह 12 किलो गैस दिया जा रहा है और कम गैस की आपूर्ति का ठीकरा गैस वेंडरों पर फोड़ा जा रहा है। ये दोनों खबरें अगर आपको परेशान नहीं करती हैं तो आप मोदीभक्त हैं। बाकी देश में सब चंगा है।
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The Indian Express
The Indian Express@IndianExpress·
The number of seats reserved for scheduled caste (SC) and scheduled tribe (ST) students in medical, engineering, higher and technical education courses has almost been doubled in Odisha, with the state government making major changes in the reservation policy. In a late-night cabinet decision Saturday, the BJP government in Odisha increased reservation of seats in medical, engineering, and other higher/technical education courses in Odisha. It also approved reservation of seats in these courses for students belonging to backward classes. According to officials, seats reserved for ST students will increase from 12 percent to 22.50 percent, and for SC students from 8 percent to 16.25 percent. The reservation has been allowed in accordance with their population size in the state, said an official. Similarly, 11.25 percent seats will now be reserved for students from the socially and educationally backward classes, who were not getting any reservation earlier.
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Oblivious@PrimitiveBanker·
इस मुल्क ने उस शख्स को जो काम था सौंपा, उस शख्स ने सारे मुल्क की... माचिस जला के छोड़ दी
CNBC-TV18@CNBCTV18Live

#Odisha hikes ST, SC quotas, introduces OBC reservation in medical, technical courses cnbctv18.com/education/odis…

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Oblivious
Oblivious@PrimitiveBanker·
आदमी ऐसे क्यों बैठता है आदमी ऐसे क्यों बोलता है आदमी ऐसे क्यों हंसता है आदमी ऐसे क्यों खाता है आदमी ये क्यों खाता है, वो क्यों पीता है, आदमी ये क्यों पहनता है के बाद पेश है आदमी ऐसे क्यों छींकता है
x_c4tb0y_x@vampiric_shirin

i genuinely think that men sneeze loudly because women were socialized from a young age to take up less space and be overly considerate of others and men are taught the opposite

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Gems
Gems@gemsofbabus_·
🚨 Odisha Govt raises quota for STs, SCs; introduces reservation for OBCs in medical and technical education. ST : 12% to 22.50% SC : 8% to 16.25% OBC : 11.25%
Gems tweet mediaGems tweet media
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