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कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं है, जैसे ही अपूर्ण को गुरु बना लोगो तुम्हारी यात्रा वही रुक जाएगी जहां तुम्हारे गुरु की रुक गई।
गुरु अंदर है बाहर से सिर्फ मार्गदर्शन मिलता है , मार्गदर्शक बनाओ गुरु नहीं।
जीवन एक यात्रा है आप एक जगह ठहर नहीं सकते जो जिससे जो अच्छा मिले लो और आगे बढ़ो , कल आगे बढ़ने पर वही बात असत्य लगे उसको वही छोड़ दो।
जिसने गुरु बनाया वो फंस गया एक बंधन में , कोई भी चीज जो बांधे उसको वही छोड़ दो।
गुरु केवल महाकाल है क्योंकि केवल वही है जो पूर्ण है।
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