बसावन इंडिया@BasavanIndia
धम्म चक्र बौद्ध धर्म का सबसे प्राचीन और पवित्र प्रतीक है जिस प्रकार क्रॉस ईसाई धर्म का और डेविड का सितारा यहूदी धर्म का प्रतीक है, उसी प्रकार धम्म चक्र बौद्ध धर्म का प्रतिनिधित्व करता है। यह बौद्ध धर्म के आठ शुभ प्रतीकों में से एक है!
भारतीय उपमहाद्वीप में चक्र का इतिहास अत्यंत प्राचीन है सिन्धु घाटी सभ्यता की मुहरों पर भी चक्र या पहिए के चिह्न मिलते हैं वहाँ प्रायः छह तीलियों वाले चक्र दिखाई देते हैं आगे चलकर बुद्ध ने अपनी शिक्षाओं के प्रतीक के रूप में आठ तीलियों वाले धम्म चक्र को अपनाया, जो आष्टांगिक मार्ग का प्रतिनिधित्व करता है, बाद में सम्राट अशोक ने 24 तीलियों वाले अशोक चक्र को शासन, न्याय और धम्म का प्रतीक बनाया, जो आज भारतीय तिरंगे के केंद्र में सुशोभित है।
धम्म चक्र की यह यात्रा सिन्धु सभ्यता से बुद्ध और अशोक तक निरंतर दिखाई देती है यह केवल धर्म का नहीं, बल्कि ज्ञान, नैतिकता, प्रगति और जीवन की सतत गति का भी प्रतीक है सारनाथ में बुद्ध द्वारा दिए गए प्रथम उपदेश को “धम्म चक्र प्रवर्तन” कहा गया, क्योंकि वहीं से ज्ञान का यह चक्र गतिमान हुआ और बौद्ध धर्म विश्व के विशाल भूभाग तक पहुँचा।
अब प्रश्न उठता है कि कृष्ण का चक्र “सुदर्शन” क्यों कहलाता है “सुदर्शन” का शाब्दिक अर्थ है सुन्दर दर्शन, अर्थात ऐसा दर्शन जो मन को आकर्षित करे और सत्य का बोध कराए ऐतिहासिक व्याख्याओं के अनुसार, सुदर्शन चक्र को युद्ध के अस्त्र के रूप में नहीं, बल्कि धर्म, ज्ञान और नैतिक व्यवस्था के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। क्या कोई हथियार देखने में सुंदर हो सकता है हथियार तो संहार और भय का प्रतीक होता है असल में, कृष्ण का “सुदर्शन चक्र” कोई घातक अस्त्र नहीं, बल्कि धम्म चक्र का ही सु-दर्शन है!
इस तथ्य की पुष्टि सिक्कों के प्रमाण से भी होता है यवन राजा अगाथोक्लिस (190–180 ई.पू.) द्वारा जारी सिक्कों पर कथित वासुदेव कृष्ण के हाथ में धम्म चक्र अंकित है इस चक्र में वही आठ आरे बने हैं जो बुद्ध के धम्म चक्र में पाए जाते हैं। यह साफ संकेत है कि कथित कृष्ण का “सुदर्शन चक्र” वास्तव में बुद्ध के “धम्म चक्र” का रूपक है।
बुद्ध का धम्म चक्र इतना सु-दर्शन था कि लोग उसकी ओर सहज ही खिंच जाते थे। उनके उपदेश, उनके विचार और उनका धम्म मार्ग ही “सुन्दर दर्शन” यानी सुदर्शन थे। कृष्ण का “सुदर्शन चक्र” वास्तव में बुद्ध का धम्म चक्र ही है यह हथियार नहीं, बल्कि ज्ञान और धर्म का चक्र है यह धम्म चक्र केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि विचारों की वह शक्ति है जिसने राजाओं को बदल दिया, समाजों को दिशा दी और करोड़ों लोगों को समानता, करुणा तथा विवेक का मार्ग दिखाया।
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