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Katılım Aralık 2020
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Science Journey@ScienceJourney2·
ब्राह्मण संप्रदाय में शास्त्र ही प्रमाण है जबकी बुद्ध धम्म में शास्त्र तब तक प्रमाण नहीं माना जाता जबतक की वो तर्क बुद्धि विवेक पर खरी न उतरे। यानी कोई किताब खोल कर सबूत दिखाए तो ब्राह्मण संप्रदाय में सबूत मान लिया जाएगा लेकिन बुद्ध धम्म में तब तक उसे सबूत नहीं माना जाता जब तक कि वो मानवता की भलाई के लिए न हो। रेफ़्रेंस संलग्न है ख़ुद पढ़ लेवे।
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प्रेमानंद उर्फ अनिरुद्ध पांडे की पढ़ाई के बारे में संलग्न दैनिक भास्कर खबर क्या बताना चाह रहा है ? @grok
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NCRB डेटा के अनुसार भारत में दलित(SC, ST, OBC) महिलाओं पर अत्याचार बढ़ते जा रहा है। प्रतिदिन औसतन 87 बलात्कार यौन उत्पीड़न के केस आ रहे है उसपर कब मुंह खुलेगा? वो भी माताये बहने बेटिया है या भागवत गीता 9:32 के अनुसार स्त्रिया पापयोनी ही रहेगी? #Shankaracharya
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जब एजुकेशनल सिस्टम में साइंटिफिक टेंपरामेंट का गला घोट माइथोलॉजी को इतिहास की तरह परोसा जाने लगा जाय तो प्रशासन भी तांत्रिक मांत्रिक से चोरी का पता लगाने में लग जाय इसमें हैरानी नहीं होनी चाहिए।
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चोल साम्राज्य Leiden प्लेट्स में लिखित में बता रहा है की वो बुद्धिस्ट महाविहार बनवा रहा है उसके सबूत मिल रहे है और दूसरी तरफ़ आचार परेशान @Advait_Prashant बिना किसी लिखित सबूत के बाय डिफॉल्ट शिवभक्त बता दिया । रिफरेन्स के नाम पर मुंह खोला शब्द गपोड़ दिया। सबूत दो कैसे शैव था?
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कौन ज़्यादा गिरेगा? डॉलर या रुपया?
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Jak@jak_nap108

@ScienceJourney2 बौद्ध देवी सरस्वती (वाग्देवी: वज्रयान परंपरा विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती देवकुल (Pantheon) साधनामाला में उन्हें 'महासरस्वती', 'वज्रसारदा', 'आर्यसरस्वती', और 'वज्रसरस्वती' नामों और रूपों से संबोधित किया गया है सुवर्णप्रभास सूत् में भी वर्णन है रेफ:इकॉनोग्राफी ऑफ बद्धिस्ट

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Science Journey@ScienceJourney2·
ऋग्वेद का रुद्र न तो त्रिशूल रखता है न सती अथवा पार्वती का पति है न ही जटा में चाँद और गंगा दिखता है न ही नंदी बैल के साथ रहता है। उपनिषद का रूद्र, शरीर के रोदन क्रिया वाली इन्द्रिय को कहा गया है। तो ब्राह्मणिज्म में शिव अचानक से कहा से आ गया ? बुद्ध ही बुद्ध है।
बसावन इंडिया@BasavanIndia

"इलाहाबाद म्यूज़ियम के द्वारा गौतम बुद्ध के मूर्ति को भगवान शिव के रूप में प्रचारित व प्रसारित किया जा रहा है भारतीय इतिहास में शिव भगवान जैसा कोई चरित्र ही नहीं रहा है यह भारतीय इतिहास का ब्राह्मणीकरण है।" प्रो० विक्रम अम्बेडकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय @ProfvikramAU

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आर्यावर्त
आर्यावर्त@KhatkarRaj93559·
@ScienceJourney2 Jab Ashok ne So called Boudh Dhamm apnaya uske baad usne koi Yudh nahi lada Army or Shatron ko jung lagne laga .. 40 saal baad jab Magadh ki naak k niche chhote se Rajya Kaling ne b Smraat Ashok ko aankh dikhana suru kr diya to मजबूरी me yudh kiya or मुस्किल se jeete
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आप कितने जातिवादी है, राष्ट्रवादी है या देशद्रोही, रेशनल थिंकिंग रखते है या अंधविश्वासी कर्मकांडी है ये आपके द्वारा चुनाव किए गए नायक से झलक जाती है।
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आर्यावर्त
आर्यावर्त@KhatkarRaj93559·
@ScienceJourney2 Boudh Dhamm स्वीकार krne ka baad se he Mourya Vansh ka पतन hona suru huya tha kyunki Ashok k baad ko bada raja Mourya Vansh me nhi huya .. yani jabtak Mourya Shasko ne सनातन वैदिक धर्म ka अनुशरण kiya tabtak Magadh श्रेष्ठता k शिखर par raha .
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Oggy
Oggy@nobody_302282·
@ScienceJourney2 Ashoka inherited a powerful legacy—but his brutal campaign in Kalinga sparked consequences. Later, Kharavela of Kalinga is said to have struck back at Magadha. History isn’t as one-sided as it’s often told. Handle name has scinece and discuss fake history. LOL
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बताओ @grok संलग्न पोस्ट वीडियो में बलि किस जानवर की और कौन सी जाति का व्यक्ति और क्यो दे रहा ही ? ये घटना कब की है और किस मंदिर की है ? सही से पता लगाकर फैक्ट चेकिंग करो।
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संलग्न पोस्ट में दिखाए जा रहे वीडियो की फैक्ट चेकिंग कर बताओ @grok ये कब का और कहा का घटना है तथा इसपर शासन प्रशासन ने क्या एक्शन लिया है ?
We The People@WithYou2023

If there’s anyone who knows where this is happening or happens, please bring the police and have this monster arrested. He has probably just fractured the child’s rib bones and damaged the child dangerously. All I know is that this is happening probably in Maharashtra. The background track is Marathi. This society in India is going to dogs. There seems to be no law and order too.

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जानवर का गला अगर हलाल तरीके से नहीं रेता गया है तो कितने प्रतिशत मुस्लिम ऐसे झटके मांस खा सकते है ? अगर हलाल मांस है तो कितने प्रतिशत अन्य धर्म मजहब वाले उसे खा सकते है?
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@grok क्या बकरी पवित्र जानवर नहीं है अगर नहीं तो क्या जो भी अपवित्र है वो अलाउ है ? @grok
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Grok
Grok@grok·
नहीं, यह दोहरी मानसिकता नहीं है। मंदिरों में गाय की चमड़ी (जूते, बेल्ट आदि) पर रोक मुख्यतः गाय की पवित्रता के कारण है। डमरू-ढोलक बकरी की चमड़ी से बनते हैं और शिव मंदिरों में यह शिव का प्रतीक व शास्त्र-अनुमोदित परंपरा है। भक्ति व आरती के लिए हजारों वर्ष से इस्तेमाल होता आया है, इसलिए अपवित्र नहीं माना जाता।
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Science Journey@ScienceJourney2·
भारत के किन किन मंदिरों में आरती या पूजन के समय ढोलक या डमरू पुजारियों द्वारा बजाया जाता है ?@grok साथ ही ये भी बताओ डमरू या ढोलक बनाने में क्या क्या मटेरियल इस्तेमाल होता है?
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Science Journey@ScienceJourney2·
@grok लेकिन मंदिरों में तो किसी भी तरह के चमड़े से रिलेटेड वस्तुओ की मनाही होती है फिर ढोल, डमरू को अलाउ करना क्या दोहरी मानसिकता है पुजारियों को? @grok
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Grok
Grok@grok·
नहीं, मंदिरों में पारंपरिक डमरू या ढोलक बजाने से देवता अपवित्र नहीं माने जाते। शिव मंदिरों में डमरू शिव का प्रतीक है और हजारों साल से बकरी/हिरण की चमड़ी से बना इस्तेमाल होता आ रहा है। यह शास्त्रों, आगमों और मंदिर परंपरा के अनुसार ही है। भक्ति और रीति-रिवाज के कारण इसे अशुद्ध नहीं समझा जाता। अनेक प्रमुख मंदिर जैसे महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ आज भी यही करते हैं।
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