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Dheer singh pundir (धीरवाणी)
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Dheer singh pundir (धीरवाणी)
@dheersen
मुद्दो पर आधारित समर्थन या विरोध, अंधभक्ति औऱ अंधविरोध दोनो से बैर, कृपया क्षत्रियों को राष्ट्रवाद व हिंदुत्व का ज्ञान न दें 🙏 ये गुण हमारे डीएनए में शामिल है
Dehradun, India Bergabung Mayıs 2014
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@CVC_Youth_Wing @Electionspc2026 गुज्जर हमेशा से सिर्फ स्वजातीय को वोट करता है किसी भी दल से हो,
जहां दोनों दल से गुज्जर वहां बीजेपी के लिए 65:35
जहां किसी दल से गुज्जर नहीं वहां अभी तक बीजेपी प्राथमिकता थी अब वोट बंटेगा।
पर गुज्जर जनसंख्या सिर्फ मेरठ सहारनपुर मंडलों तक ठीक ठाक संख्या में है बाकी जगह नगण्य
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@Electionspc2026 Still more gurjars with poll for bjp. But dent is good.
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@trulyvrs @romita_tiwari जाट बाहुल्य बुढ़ाना से क्यों पिछड़े?
मुजफ्फरनगर सदर से कैसे पिछड़े?
सरधना मे ठाकुर चौबीसी मे बालियान के खिलाफ मतदान होता तो सरधना से ही 30 हजार की लीड हरेंद्र मलिक को मिलती, पर बराबरी पर रहे, क्योंकि चौबीसी में मतदान भले कम हुआ पर भाजपा के नाम पर वोट पड़ गया, चौबीसी से बढ़त रही
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@trulyvrs @romita_tiwari 2022 में शुरुवात संजीव बालियान ने ही की थी, जवाब 2024 में दे दिया गया।
अब 2027 में जो करेंगे, 2029 में 2024 से भी करारा जवाब मिल जाएगा।
पिछली बार मतदान कम किया था,सिर्फ 20% ने सपा को वोट दिया।
2029 में 80% वोट खिलाफ पड़ेगा सरधना, चरथावल, बुढ़ाना, खतौली सब विधानसभा से पिछड़ेंगे
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पश्चिमी यूपी में पूर्व बीजेपी संजीव बालियान से साथ तनातनी को लेकर जब एक इंटरव्यू में पूर्व विधायक संगीत सोम से सवाल हुआ तो उन्होंने कहा- हम दोनों में बहुत अच्छी दोस्त हैं।
संजीव बालियान ने कहा था- जयचंद और विभीषण जनता के बीच जाकर गुमराह करने में कामयाब रहे। कुछ लोग शिखंडी की तरह नजर आए, इसमें मेरी कमी है। कुछ लोग सपा को खुलेआम चुनाव लड़ा रहे थे।
उनके इस बयान पर संगीत सोम ने कहा- मुझे क्या पता ये किसे कह रहे हैं? मैं भाजपा का कार्यकर्ता हूं। मेरी गारंटी सपा की नहीं, बल्कि भाजपा की थी। मुझे मेरी पार्टी ने कहा था कि सरधना विधानसभा जीताकर ले जाना है। संजीव बालियान सरधना विधानसभा जीते हैं। बाकी विधानसभा में हारे लेकिन मेरी विधानसभा में नहीं हारे हैं।
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@trulyvrs @romita_tiwari अब संजीव बालियान को दोबारा सांसद बनना है तो कोई दूसरा दल देख लें, भाजपा के टिकट पर दोबारा सांसद नहीं बन पाएंगे।
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📜 Arguments in Favour of the Caste of the Imperial Gupta Dynasty
1. Vaishya Origin
•Based on the surname “Gupta”
👉 Issue:
“Gupta” was not exclusively a Vaishya surname; it was used by different groups. Hence, this argument is weak.
2. Brahman Origin
•Based on modern academic interpretations ( left right lobby dominated by Brahmans )
👉 Issue:
There is no clear inscription where the Guptas explicitly call themselves Brahmanas. This view largely rests on academic biasedness.
🏹 Kshatriya Origin
1. Marital Relations with Kshatriya Kingdoms
•Chandragupta I married Kumaradevi of the Licchavi
•Chandragupta II had alliances with Naga rulers
👉 Indicates equality with Kshatriya clans.
2. Salaria Rajput Tradition
•Salaria Rajputs claim Chandragupta as their ancestor
•No other major community in India claims such ancestry
3. Later Guptas and Panduvamshis
•Both associated with Somavanshi (Lunar lineage)
•Said to originate from the same region
•Later Guptas used the same clan identity and claimed Gupta lineage
4. Somavanshi Rajput Connection
•Salaria Rajputs are Somavanshi
•They claim Gupta emperors as their progenitors
👉 Suggests Gupta connection with Lunar Kshatriya lineage.
5. Marriage Prestige
•Guptas took pride in marrying into the Licchavi Kshatriyas
•Licchavis considered Kshatriyas (often termed Vratya Kshatriya)
6. Dharmic Rule
•Hindu, Buddhist, and Jain traditions primarily recognise Kshatriyas as rulers
7. Exclusive Lineage Claims
•Somavanshi Rajputs are among the few who claim Gupta lineage
•No widespread claims from other communities
Conclusion
The Imperial Gupta Dynasty most likely belonged to the Kshatriya caste , associated with the Somavanshi (Lunar) lineage. 🚩
Ceteris Paribus@entropied2223
Arguments in favor of Vaishya Origin- Surname Gupta Kshatriya Origin - Lichhivi princess marriage Brahmin Origin- 1. marital relations with brahmin kingdoms 2. Dhrana gotra 3. Age of rise of Brahminism 4. Greatest Privileges to Brahmins
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@dheersen @BikasSingh188 @PurbiyaRising धीर भईया हमारे यहां भीतरगांव में एक मंदिर है ईंटों का पहला मंदिर। लगभग 5वीं सदी में बना है गुप्त काल में। परंतु आसपास सबसे ज्यादा क्षत्रिय ही हैं क्षेत्र में।
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ये कन्नौज जिला का जवान हैं जो जम्मू कश्मीर में तैनात हैं ई के घर के निकास को किसी समाजवादी पार्टी के बूथ अध्यक्ष ने कब्जा कर रखा है , @kannaujpolice यह मामला कब का है इस व्यक्ति को न्याय मिला या नहीं अभी तक ?
इंटरनेट पर वीडीओ वायरल है, @UPPViralCheck @Uppolice
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अखिल भारतीय जाट महासभा के महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह कल मेरठ में थे । उन्होंने मीडिया से जो कहा वो ज्यों का त्यों यहाँ पढ़िये … वीडियो देखने के लिए कमेंट बॉक्स में दिया लिंक खोलकर यू ट्यूब पर जाएँ ………………. चौधरी युद्धवीर सिंह
मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि 29 तारीख को सकौती में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा लगाए जाने के समय मंच के माध्यम से आयोजकों ने समाज में एक संदेश दिया कि जाट शब्द को हटा दिया गया है। इतना कहकर उस बात को छोड़ दिया गया। बिरादरी में यह संदेश गया कि महाराजा सूरजमल की मूर्ति पर जाट शब्द लिखा था जिसे हटा दिया गया है। पूरी बिरादरी जिसने यह सुना वह आक्रोशित हुई और तुरंत रिएक्शन आने लगे। आजकल सोशल मीडिया है क्योंकि लोगों को वास्तविकता का पता नहीं था कि जाट शब्द कहां से हटाया गया।
तो मैं यह कहना चाहता हूं कि यह एक शरारत थी। यह स्पष्ट करना चाहिए था। महाराजा सूरजमल की मूर्ति पर कहीं जाट शब्द महाराजा के लिए लिखा ही नहीं गया था और लिखना भी नहीं चाहिए था। सारा मामला एक संस्था के नाम में जाट शब्द को लेकर था जिस पर वहां विवाद हुआ। यह बात साफ साफ बतानी चाहिए थी। उन्होंने संदेश यह देने का प्रयास किया जिससे बिरादरी में आक्रोश फैले। अगर नौजवान भड़क जाते तो कोई दुखद घटना भी हो सकती थी। यह बहुत बड़ी शरारत थी बिरादरी के साथ। मैं भगवान का शुक्र अदा करता हूं कि लोगों ने संयम से काम लिया और धीरे धीरे सच्चाई सामने आ गई कि मूर्ति के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई थी। एक संस्था के नाम से शब्द हटाया गया था।
मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जहां मूर्ति लगाई गई है वह पहले जाट कॉलेज कहा जाता था। बाद में चौधरी चरण सिंह की नीति के अनुसार इसका नाम बदलकर हितकारी किसान इंटर कॉलेज किया गया था क्योंकि जाति के नाम पर संस्थानों को अनुदान नहीं मिलता था। उस समय पूरी बिरादरी ने चौधरी साहब के निर्णय का सम्मान किया और किसी ने विरोध नहीं किया। प्रदेश भर में वैदिक इंटर कॉलेज, छोटूराम इंटर कॉलेज और अन्य संस्थानों के नाम बदले गए।
तो आज सवाल यह है कि जब उस समय समाज ने निर्णय स्वीकार कर लिया था तो अब उसी स्थान पर फिर जाति के नाम को उभारने की जरूरत क्यों पड़ी। क्या ये लोग चौधरी चरण सिंह से भी ऊपर हो गए हैं। जिस स्थान पर उनका निर्णय लागू हुआ उसी जगह जाकर फिर जाति का मुद्दा खड़ा करना उचित नहीं है।
मैं यह भी कहना चाहता हूं कि कुछ लोग इस पूरे मामले में अपनी राजनीति कर रहे हैं। एक व्यक्ति राम अवतार पलसानिया का नाम सामने आता है जिसने पहले कहा था कि वह देश और दुनिया के जाटों को एक विशेष राजनीतिक दल से जोड़ेंगे। उनका एजेंडा स्पष्ट है। वह उसी पर काम कर रहे हैं। उन्होंने एक नौजवान को आगे कर दिया है और खुद पीछे से काम कर रहे हैं। यह संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं है बल्कि व्यक्तिगत निर्णय है।
मैंने देखा कि मंच पर जो वक्ता थे उनकी बॉडी लैंग्वेज में गंभीरता नहीं थी। यह महाराजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण था। वहां उनके जीवन, उनके संघर्ष और उनके योगदान की बात होनी चाहिए थी। यह बताना चाहिए था कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में एक बड़ा राज्य खड़ा किया और अनेक युद्धों में विजय प्राप्त की।
मैं यह भी कहना चाहता हूं कि महाराजा सूरजमल का व्यक्तित्व बहुत व्यापक था। उन्हें किसी जाति या धर्म में बांधना गलत है। भरतपुर में पहली मस्जिद उनके समय में बनी। उनके साथ हर जाति के लोग थे। जाट, गुर्जर, ब्राह्मण सभी ने मिलकर राज्य बनाया। उनका दृष्टिकोण समरसता का था।
जब मराठे मथुरा आए तो उन्होंने मस्जिद तोड़ने की बात कही। तब महाराजा सूरजमल ने कहा कि आज मैं मस्जिद तोड़ूंगा तो कल कोई मंदिर तोड़ेगा। यह उनका विचार था। यह उनके चरित्र को दर्शाता है।
मैं समाज से कहना चाहता हूं कि बिना पूरी जानकारी के प्रतिक्रिया न दें। सोशल मीडिया पर जो कुछ दिखता है वह हमेशा सही नहीं होता। कुछ लोग समाज को अपने हित के लिए इस्तेमाल करते हैं।
हमारा समाज पहले से जागरूक है। चौधरी छोटूराम ने समाज को संगठित किया। चौधरी चरण सिंह ने दिशा दी। महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों और समाज को मजबूत किया। ऐसे में कोई यह कहे कि वह समाज को जगाने आया है तो यह उचित नहीं है।
मैं यह भी कहना चाहता हूं कि समाज के सामने असली मुद्दे क्या हैं। कुरीतियों को खत्म करना, शिक्षा को बढ़ाना, आर्थिक स्थिति को मजबूत करना। लेकिन कुछ लोग इन मुद्दों से ध्यान हटाकर भावनात्मक बातें करके समाज को भड़काते हैं।
मैं समाज से अपील करता हूं कि संयम रखें। किसी के बहकावे में न आएं। अपनी एकता बनाए रखें और उन लोगों को पहचानें जो अपने स्वार्थ के लिए समाज का उपयोग करना चाहते है
#JatSamaj #MaharajaSurajmal #ChaudharyCharanSingh #Jat




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1-मेरठ के सकौती में 29 मार्च को हुई घटना पर बड़ा खुलासा
ऑल इंडिया जाट महासभा के महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह ने सच सामने रखा। उन्होंने बताया कि 29 मार्च को सकौती में हुए कार्यक्रम के आयोजकों ने समाज को गुमराह किया।
सच्चाई यह है कि महाराजा सूरजमल की प्रतिमा से “जाट” शब्द नहीं हटाया गया था, बल्कि आयोजकों के अपने संगठन के नाम के साथ यह शब्द हटाया गया था।
बिना पूरी जानकारी के पूरे समाज की प्रतिक्रिया सामने आई, जो एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा बताई जा रही है।
अब सवाल यह है कि आखिर समाज को भड़काने की कोशिश क्यों की गई?
#Meerut #JatCommunity #TruthExposed #YudhvirSingh #MaharajaSurajmal #BreakingNews #SocialAwareness #JatMahasabha #ViralNews #IndiaNews #sakauti
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@dheersen @BikasSingh188 @PurbiyaRising Are nahi bhaiya bachgoti, rajkumar,rajwar ek hee hai inki aapas me shadi nahi hoti meri toh sari rishtedari hee inme hai
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@aditya124599 @BikasSingh188 @PurbiyaRising बचगोती (वत्स गोत्री)/राजकुमार एक अलग वंश है, शायद बाद के दिनों में इन्हें चौहान की शाखा होने की मान्यता बन गई क्योंकि चौहानों का ऋषि गोत्र भी वत्स है।
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@dheersen @BikasSingh188 @PurbiyaRising Kaushambi vats mahajanpad ki rajdhani thi aaj bhi idhar side bachogoti 'vatsgotri' bahut badi sankhya me hai somwanshi aur bachgoti bhare huye hai pratapgarh me
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@PurbiyaRising जी, मै भी 15 वर्ष से यही कहता आया हूं और इसके प्रबल साक्ष्य भी हैं
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@dheersen इसलिए मेरा मानना है और जो है भी गुप्ता राजवंश क्षत्रिय थे और सोमवंशी शाखा के थे!!
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@BundelianBeetle @HinduHistoria @scionofEla कल्चुरी राजवंश की तो पहचान पर दावा भी कलाल समाज ज्यादा जोर शोर से कर रहा है, कल्चुरी राजपूत इतने कम संख्या में और महत्वहीन कैसे रह गए,आश्चर्य होता है
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Never ask a man his salary
a woman her age
and @scionofEla what happened to Kalchuris after 13th century 🤧🥂
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@ews_army क्रमशः
अहीर,
भूमिहार,
राजपूत
कुर्मी
कोइरी
ब्राह्मण
पासवान
बनिया वर्ग की जातियां
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@singhp002 @PurbiyaRising इस लॉजिक से विष्णगुप्त (चाणक्य) को भी वैश्य मानना पड़ेगा
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@PurbiyaRising अब इनके हिसाब से चंद्रगुप्त मौर्य के नाम में भी गुप्त लगा हुआ है, तब वह भी बनिया हुए न,
Sirname से कोई वंश कैसे तय हो सकता है।
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@sachinsgaur उत्तरप्रदेश में ब्राह्मण ही सबसे प्रभावी और सबसे शक्तिशाली समाज है जिसका हर दल की सरकार मे वर्चस्व रहा है और आगे भी रहेगा,
उत्तरप्रदेश में प्रभाव के मामले में ब्राह्मणों से किसी अन्य जाति का दूर दूर तक कोई मुकाबला नहीं है
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