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Dheer singh pundir (धीरवाणी)
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Dheer singh pundir (धीरवाणी)
@dheersen
मुद्दो पर आधारित समर्थन या विरोध, अंधभक्ति औऱ अंधविरोध दोनो से बैर, कृपया क्षत्रियों को राष्ट्रवाद व हिंदुत्व का ज्ञान न दें 🙏 ये गुण हमारे डीएनए में शामिल है
Dehradun, India Katılım Mayıs 2014
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@2Rajababu धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा हो,
सिर्फ इस वर्ष नहीं, गत कई वर्षों से हो रही नीट परीक्षा धांधली की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच हो और असली दोषी पकड़े जाएं।
श्रीराम मंदिर चढ़ावा लूटकांड में सिर्फ प्यादों पर कार्यवाही के बजाय असली मगरमच्छों को भी जेल में ठूंसा जाए
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@sureshsinghj @PiyushPadmakar सब ऊपर से मैनेज है, बहुत बड़े बड़े मगरमच्छ हैं, देशभर में "भाई साहब" घूम रहे हैं
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@dheersen @PiyushPadmakar जब तक सरकार कोचीन संस्थाओं पर लगाम नही लगाएगी तब तक यह सब होता रहेगा। किसी केंद्रीय मंत्री के कार्यालय से पेपर लीक नही हुआ है कोचिंग संस्थाओं का इसमे हाथ है। CBI जांच में भी स्पष्ट हो चुका है।
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#jantarmantar सरकार फिलहाल झुकने को तैयार नहीं । अब जो होगा संसद में होगा ।
1. सरकार की टॉप लीडरशिप में आम राय : जंतर मंतर के सामने झुकने का सवाल ही नहीं
2. जंतर मंतर के दवाब में किसी का इस्तीफ़ा नहीं । एक बार इस्तीफ़ा हुआ तो फिर ट्रेंड शुरू हो जाएगा । बार बार अलग अलग मंत्री का इस्तीफ़ा माँगा जाएगा
3. सरकार का मानना- देश में लोकतंत्र है, भीड़तंत्र नहीं । फ़ैसले की जगह संसद है सड़क नहीं ।
4. सरकार को मिली जानकारी- एक बड़ी पार्टी जंतर मंतर को फ़ाइनेंस कर रही है , दो पार्टियां लोग पहुंचा रही है । एक बड़ी पार्टी खाने और यूट्यूबर को भेज रही है । उनका खर्च उठा रही है
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@sureshsinghj @PiyushPadmakar नीट परीक्षा में सिर्फ इस बार ही नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों से धांधली चल रही है, इस बार मामला ज्यादा तूल पकड़ा तो दोबारा परीक्षा हो गई।
सब संगठित ढंग से सुनियोजित तरीके से चल रहा था।
जिन बच्चों का भविष्य बर्बाद हुआ है उनसे और उनके अभिभावकों से पूछकर देखिये
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@dheersen @PiyushPadmakar जी बिल्कुल सही है।चंपत को तो जेल जाना चाहिए
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@sureshsinghj @PiyushPadmakar उच्चतम स्तर का सहारा न होता तो अब तक प्रधान और चम्पत दोनों पर कठोर कार्यवाही हो चुकी होती।
सिर्फ छोटे लोगों पर दिखावे के लिए कार्यवाही होना और असली मास्टरमाइंड का बाल भी बांका न होना अपने आप में सारा कथानक स्पष्ट कर देता है
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भाई मंदिर में किसने लूट लिया खुद योगी या मोदी ने जा कर लूट लिया या बीजेपी का कोई पदाधिकारी जा कर लूट लिया। छोटे कर्मचारियों ने कुछ वहां के पदाधिकारीयो के सह पर या लापरवाही में धन का गबन किया है।
जहां तक छात्रों के भबिष्य की बात है हमारे जानने वाले कम 100 बच्चे सरकारी नौकरी पाये है।वह भी बिना घुस और जुगाड़ लागाये।
भाई घूम वही रहा है जिसकी पढ़ाई लिखाई नही है दिन भर मोबाइल पर रील बना रहे है। सरकार को कोसते है नौकरी नही मिल रही है।
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@sureshsinghj @AnandTiwari81 दुनिया भर के "भाई साहब" घूम रहे हैं देश में, शिक्षा को बर्बाद करते हुए।
इन "भाई साहबों" से बच्चों का भविष्य बचाए
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@AnandTiwari81 कोचिंग संस्थान वाले बड़े खिलाड़ी है।सरकार जब तक इन्हें कंट्रोल नही करेगी ऐसा बार बार होता रहेगा।
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परीक्षा घोटाले की नई कहानी: लीक नहीं, ‘मौखिक सौदा’
इस बार का मामला क्लासिक पेपर लीक वाला नहीं था। कोई साइबर हैकर नहीं, कोई छपाई प्रेस से चोरी नहीं। फिर भी सारा सिस्टम हिल गया। असल कहानी और भी चौंकाने वाली है।
पेपर सेट करने वाले व्यक्ति खुद बिक गए। उन्होंने मौखिक रूप से कोचिंग संस्थानों के लोगों को पूरा पेपर बता दिया। फिर उन कोचिंग वालों ने इसे महंगे पैकेज के रूप में बेचा। कोई हार्ड कॉपी, कोई फोटोकॉपी, कोई व्हाट्सएप मैसेज — बस ज़ुबानी जानकारी। और इस ‘अनऑफिशियल’ तरीके से सारा खेल चल निकला।
तो सवाल यह उठता है — प्रधान (या जो भी उच्च अधिकारी इस पूरे प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार थे) कहाँ से दोषी ठहराए जा रहे हैं? अगर तकनीकी रूप से पेपर ‘लीक’ नहीं हुआ, तो उन्हें दोष देने का आधार क्या है? हाँ, नैतिकता के स्तर पर ज़रूर सवाल उठता है। अगर सिस्टम की निगरानी में इतनी बड़ी खामी रह गई, तो नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना शायद बेहतर विकल्प होता।
दिलचस्प बात यह है कि री-एग्जाम कराते समय सरकार ने इस बार कोई रिस्क नहीं लिया। सभी संभावित सूत्रों को कड़ी निगरानी में रखा गया — ठीक वैसे ही जैसे बजट पेश होने से पहले वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को ‘लॉक-इन’ कर दिया जाता है। मोबाइल, इंटरनेट, बाहरी संपर्क — सब पर पाबंदी। सुरक्षा का यह स्तर सराहनीय है, लेकिन यह भी दिखाता है कि सिस्टम को अपनी ही कमजोरी का एहसास हो चुका है।
अब सवाल यह है — क्या केवल सख्त सुरक्षा और री-एग्जाम से समस्या का समाधान हो जाएगा? या फिर परीक्षा सेटिंग और मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया में गहरी सुधार की ज़रूरत है? क्योंकि जब पेपर सेट करने वाला ही ‘बिक’ सकता है, तो भरोसे की दीवार कितनी भी ऊँची क्यों न हो, एक ज़ुबानी इशारा ही काफी है।
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@sureshsinghj @PiyushPadmakar कम से कम शिक्षा क्षेत्र और मंदिरों में लूट नहीं करनी थी,
और बहुत से संसाधन थे, फिर छात्रों के भविष्य और रामभक्तों की श्रद्धा से खिलवाड़ क्यों किया गया??
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@PiyushPadmakar यह आंदोलन स्पांसर्ड है।पैसे से भी आदमियों से भी संसाधनों से भी।
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@pundir37 शिक्षा क्षेत्र और मंदिरों में भी भ्रष्टाचार कर इन्होंने अपनी कब्र अपने आप खोद ली है
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@Pratyanjay1 नई पीढ़ी की सोच बिल्कुल अलग है, सत्ता विरोधी रुझान बढ़ रहा है
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@engineermech15 @kshatriyaBihari गाजियाबाद या दिल्ली की होना लिखा है इन्हें,
ये शामली की खेड़ी खुशनाम की हैं इसका कोई साक्ष्य?
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पश्चिम यूपी से कोई है जो सरकारी नौकरियों मे सफल हुए क्षत्रियों पर पोस्ट करता हो @dheersen आपके नजर मे कोई है ? ट्विटर, Facebook कहीं भी लिखते हों ?
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@dheersen @kshatriyaBihari Iss baar khedi khusnaam ki ek ladki bhi select huyi hai...shayad IPS
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@kshatriyaBihari संख्या नगण्य है उंगलियों पर गिनने लायक है।
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@kshatriyaBihari वंदना चौहान IAS उत्तराखंड कैडर (AIR 6) नसरुल्लागढ़ गाँव से है,
इसके अलावा कुछ PCS से प्रोन्नत होकर भी IAS/IPS हुए।
एक लड़का गांव सोना अर्जुनपुर से और एक गांव मोरा से भी UPSC क्लियर कर IRS या अन्य कैडर में गए हैं।
बगल के शामली में एक ही गांव bhatu खेड़ी से 2 राजपूत IAS हैं।
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@JADOUNtzx ज्यादातर वही पुराने चेहरे थे, पर परीक्षाओं में धांधली, मंदिर में लूट से माहौल काफी बदला है,
नई पीढ़ी मोदी भक्त नहीं है
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@Pratyanjay1 आक्रोश जमीन पर महसूस किया है।
शिक्षा और मंदिर में भ्रष्टाचार नहीं करना था
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@MediaHarshVT गुज्जू लॉबी और नागपुरी लॉबी को कम से शिक्षा क्षेत्र और श्रद्धा के केंद्र मंदिरों में भ्रष्टाचार नहीं करना चाहिए था, और बहुत से क्षेत्र हैं जहां लूट की अच्छी खासी गुंजाइश है
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