Youth In Politics

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@ask_upsc

Founder & Director - Vyas Muni Durgawati Foundation NGO @sevadharm_ngo MAHUAVA , खड्डा विधानसभा क्षेत्र

Kushinagar , Uttar Pradesh 가입일 Mart 2025
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Priyanka Chaturvedi🇮🇳
Civilisations aren’t just about their regimes- it is the collective strength of the people who have fought and survived, who have been resilient, who have lived to tell the tale. Let no one believe they can decide which civilisation survives and which ends by the virtue of power they wield. BTW civilisations have survived that arrogance too.
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Youth In Politics@ask_upsc·
Breaking: Massive global diplomatic victory of Iran 🇮🇷 FM Abbas Araghchi.. 🇷🇺 Russia and 🇨🇳 china voted to UN Security council against the resulotion to reopen the straight of hourmudge . This came just after canada an france refuse to support USA against Iran..
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Priyanka Chaturvedi🇮🇳
मुझे खुशी है कि मैंने एक ऐसे आंदोलन को प्रेरित किया जो हमेशा आक्रोशित ही रहता है। जिस भी पक्ष के साथ भेदभाव होता है, मैं उसके पक्ष में बोलूँगी —चाहे वह मुस्लिम हों, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस या इस मामले में ब्राह्मण। और जब हम आक्रोश की बात कर ही रहे है, तो यह भी जांचने का समय है कि प्रतिनिधित्व के नेक इरादे से शुरू हुई आरक्षण व्यवस्था ने क्या वास्तव में सभी आरक्षित वर्गों को समान रूप से लाभ पहुंचाया है, या फिर इसका लाभ कुछ समुदायों ने दूसरों की तुलना में अधिक उठाया है, जो वास्तव में इसके अधिक हकदार थे। और हाँ, मैं कठिन सवाल पूछूँगी- deal with it.
Priyanka Chaturvedi🇮🇳@priyankac19

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Priyanka Chaturvedi🇮🇳
I am glad I triggered a perpetually outraged movement. Any side which is discriminated against I will speak for it. Whether Muslims, SC, ST, EWS or in this case the Brahmins. And maybe while we are at outrage - time to check whether the reservations that started with the noble intent of representation have benefited all those in reserve categories equally or have been monopolised/taken benefit of by certain communities more than those who deserve it. And yes, I will ask tough questions- Deal with it.
Priyanka Chaturvedi🇮🇳@priyankac19

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Youth In Politics@ask_upsc·
@aandolun जिन ब्राह्मणों को मंत्रालय दिया है उनकी औकात गली के कुत्तों से भी कम होती है।
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स्वामी विवेकाचार्य आंदोलन जी महाराज (गुरु वंशी)
ढोंग देख रहे हो बिनोद… बालक शुभम बड़ी मासूमियत से बता रहा है कि “किसी पार्टी ने तमिल ब्राह्मणों को MLA टिकट नहीं दिया।” पर असली बात बड़े आराम से निगल गया कि तमिलनाडु में गिनी-चुनी सीटें होने के बावजूद, BJP ने दो तमिल ब्राह्मणों को सीधे टॉप मंत्रालय दिए। और मज़ेदार ट्विस्ट सुनिए यही मंत्रालय UPA के ज़माने में अक्सर गैर-हिंदुओं के खाते में जाते थे। मतलब… जहाँ “representation” सच में दिख रहा है, वहाँ चुप्पी। जहाँ “narrative” बन सकता है, वहाँ माइक फुल वॉल्यूम। बिनोद, ये ड्रामा ज़्यादा है।
Shubham Shukla@Shubhamshuklamp

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मुख्य राजनीतिक दलों ने एक भी टिकट ब्राह्मणों को नहीं दिया, मामला ये है ही नहीं! मामला ये है कि:- - इन्ही ब्राह्मणों के प्रति जातीय राजनीतिक नफरत फैलाई जाती है - मामला ये है कि इन्हीं ब्राह्मणों को किसी तरह का कोई राजनीतिक संरक्षण नहीं है - मामला ये है कि यही ब्राह्मण आज प्रशासनिक-राजनीतिक-सामाजिक रूप से शोषित-पीड़ित-वंचित हैं - रमेश रंजन मिश्रा ने ठीक ही कहा है कि:- “चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा,  मैं अभागा सवर्ण हूँ मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा”

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पंडित जगन्नाथ
जब तक वो सरकार थी, तब तक उसका चरणामृत पीकर इसको गाली देते थे । अब इसकी सरकार है, तो इसका चरणामृत पीकर उसको गाली देते हैं। बाकी नीचे वाले समर्थक केवल चरणामृत पीते हैं। उनको नहीं मतलब कि वो छोटे लाल का चरणामृत है या मोहम्मद छंगू का । चातक की तरह एक जगह मुंह खोल कर खड़े हो गए हैं। कोई भी आता है, चरणामृत चुआ के चला जाता है। और ये बड़े चाव से पी लेते हैं।
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Youth In Politics@ask_upsc·
@Awadheshkum युगांडा से भी सर्टिफिकेट ले लो।
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Awadhesh Kumar
Awadhesh Kumar@Awadheshkum·
इजिप्ट के दूतावास ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा पासपोर्ट फर्जी है। रिंकी भुईया सरमा का कोई पासपोर्ट इजिप्ट का नहीं है। जरा सोचिए, कांग्रेस के पास कैसा सूचना स्रोत है जो हमेशा झूठ साबित होता है। हिमंता विस्वाबरमा से लड़ना है तो ठोस तथ्य और सबूत लेकर आइए। आखिर एक मुख्यमंत्री की पत्नी दूसरे देशों का पासपोर्ट क्यों रखेंगी? पवन खेड़ा इस समय कांग्रेस के मीडिया में प्रमुख चेहरा बने हुए हैं। आखिर उनको ऐसी चंडुखाने की सूचना कहां से मिलती है? चुनाव के दौरान ऐसे आरोप लगाए जिससे असम का मुख्यमंत्री परिवार देशद्रोही साबित होता है। आपने तीन-तीन पासपोर्ट मीडिया के सामने रख दिया। अब हिमंता उन पर मुकदमा चलाकर गिरफ्तार करवाने की कोशिश करते हैं तो इसमें क्या गलत होगा?
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Comrade M
Comrade M@ComradeMalal·
जब तक UP का ब्राह्मण अपना केंचुल उतारकर और जनेऊ खूँटी पर टांगकर आग नहीं मूतेगा। रिपब्लिक आप से सिर्फ़ त्याग ही करवायेगी। त्याग करते रहिए त्यागी कहलाते रहिए।
Ritesh Pandey@mpriteshpandey

समुचित और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए. उत्तर भारत के राज्यों में अति पिछड़े और महादलित समुदायों की कई ऐसी जातियाँ हैं, जिनकी आबादी बहुत कम है. उन जातियों को विधानसभाओं और लोकसभा में प्रतिनिधित्व तो क्या, राजनीतिक दलों द्वारा चुनावों में उम्मीदवारी तक नहीं दी गई है. कुछ प्रतिनिधित्व मिला भी है, तो वह दिखावे से अधिक कुछ नहीं है. अब ऐसा ही कुछ दक्षिण भारत में भी होता दिख रहा है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में चार प्रमुख पार्टियों- भाजपा, कांग्रेस, डीएमके और एआईडीएमके- ने ब्राह्मण समुदाय से एक भी उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है. ऐसा 35 साल में पहली बार हुआ है. इन दलों ने अपने आंतरिक आकलन के आधार पर उम्मीदवार खड़े किये होंगे, इसलिए उनके निर्णय पर सवाल उठाने का आधार नहीं है. तो, क्या यह माना जाए कि यह स्थिति केवल एक संयोग भर है? तमिलनाडु की जनसंख्या में ब्राह्मण समुदाय का हिस्सा तीन प्रतिशत से कम है, पर कई शहरों में उसकी आबादी 10 प्रतिशत से अधिक है. मुख्य रूप से शहरों में बसे होने के कारण विभिन्न राजनीतिक दलों में ब्राह्मण कार्यकर्ताओं की भागीदारी है. दो छोटी पार्टियों ने आठ ब्राह्मण उम्मीदवार उतारा है. तो, चार मुख्य पार्टियों का ऐसा करना केवल संयोग भर तो नहीं है. ऐसे में क्या यह माना जाए कि राजनीतिक लाभ-हानि देखने और अधिक जनसंख्या वाले जातिगत समुदायों को लुभाने की कोशिश के कारण ऐसा हुआ है? ऐसा राजनीति में होता रहा है, पर ऐसा नहीं लगना चाहिए कि यह किसी समुदाय विशेष के प्रतिनिधित्व और भागीदारी को सीमित किया जा रहा है. राजनीति को निरंतर समावेशी बनाने से लोकतंत्र सशक्त होता है. उस पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

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umang misra
umang misra@umangmisra·
भाजपा के 46 साल: गांधीवादी समाजवाद से आंबेडकरवाद/क्रोनी पूंजीवाद तक भाजपा की स्थापना के 46 साल पूरे हुए। पुराने समर्थक कहते थे भाजपा आइडियोलॉजी से समझौता नहीं करती और उदाहरण के रूप में जिन्ना को सेकुलर बताने के बाद आडवाणी जी की ताकत कम होती जाना बताते थे। आइए परीक्षण करते हैं कि भाजपा सिद्धांतों से समझौता करती है या नहीं करती! 1980 में पार्टी की स्थापना के समय गांधीवादी समाजवाद को सिद्धांत के रूप में अपनाया गया। एक मुस्लिम सिकंदर बख्त भी संस्थापक सदस्य और पदाधिकारी थे। बाद में सरकार बनने पर वो मंत्री भी रहे, राज्यसभा में भी भेजे गए थे। आज गांधीवाद और समाजवाद दोनों को कोसता है भाजपाई प्रचार तंत्र। और संसद में भाजपा का एक भी मुस्लिम सदस्य नहीं। 1984 के चुनाव में दो सीट आई तो गांधीवादी समाजवाद सिद्धांत ही छोड़ दिया जबकि इतनी बुरी तरह हार का कारण न गांधी बाबा थे न समाजवाद, इंदिरा गांधी के शहीद होने के बाद कांग्रेस के पक्ष में आई लहर के कारण भाजपा की दुर्दशा हुई थी। 1985 से आडवाणी जी के नेतृत्व में हिंदुत्व के रथ पर सवार हुए, वीपी सिंह के साथ मिलकर 1989 के चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने में सफल हुए लेकिन वीपी के मंडल आयोग लागू करते समय गांधारी बन गए जबकि उस समय भाजपा का कोर वोटर सवर्ण था। साझा सरकारों के दौर में उदार छवि वाले अटल जी चेहरा बने, आडवाणी जी वेटिंग में चले गए। उस दौर में सभी कोर मुद्दों को मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया। अटल जी बस यात्रा लेकर लाहौर गए और आडवाणी जी जिन्ना की मजार पर पुष्प अर्पित कर उन्हें सेकुलर बता आए। 2014 में सबका साथ सबका विकास और अच्छे दिन के मुद्दे पर जीते लेकिन सरकार बनने के बाद धीरे धीरे गोल पोस्ट खिसकाने लगे। राज्यों के चुनाव जीतने के लिए अलग अलग जातियों के क्षत्रप खड़े किए। 2018 में SC/ST Act पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध और कड़ा एकतरफा कानून बनाया। ये न गांधीवाद था, न समाजवाद, न हिंदुत्व, न साझा कार्यक्रम, न सबका साथ सबका विकास। धीरे धीरे भाजपा ने आंबेडकरवाद को अपना लिया, गांधी भुला दिए गए, अटल/आडवाणी मार्गदर्शक मंडल में गए। दिलीप मंडल जैसे घोर सवर्ण विरोधी को सरकार का सलाहकार बनाया गया। धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में यूजीसी के अन्यायपूर्ण नियम लाने का प्रयास हुआ। ऐसे में आप फैसला करें भाजपा की विचारधारा क्या मानी जाए? गांधी से शुरू होकर वाया सावरकर ये कहां पहुंच चुकी है? क्या है भाजपा की विचारधारा? गांधीवादी समाजवाद?सावरकर का हिंदुत्व? मंडलवाद? आंबेडकरवाद? पेरियारवाद? संघ की विचारधारा? आखिर क्या है भाजपा की विचारधारा जो विरोधी सिद्धांतों को एकसाथ ओढ़े घूमती है! या भाजपा की विचारधारा सिर्फ सत्ता है जिसके शिखर पर आज वो विराजमान है ? अब जब कोई पुराना बुढ़वा भाजपाई कहे कि भाजपा अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करती तो ये पोस्ट उसे पढ़वा दीजिएगा। इस पोस्ट में तो सिर्फ सिद्धांत का परीक्षण किया है। ऐसे बहुत से पहलू हैं जिनका गहन विश्लेषण करने पर दावे और वास्तविकता में अंतर मिलेगा। 46 साल में कितने रंग दिखा दिए हैं गिनते रहिए राष्ट्रहित में। डंका बज रहा है।
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बाहरी बिहारी
क्या प्रशांत किशोर बिहार में तेजस्वी से बेहतर राजनीती कर सकते हैं? अपनी राय दीजिए ... जय बिहार ✊🙏
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Pulkit Tyagi
Pulkit Tyagi@pulkitnpc·
क्या गुंडा बनेगा रे तू...छे।
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°अद्वितीय°
UGC के बाद से माहौल इतना बदला है कि मोदी की माला जपने वाले २०१४ के बाद मोदी भक्त बने फ्लोटिंग वोटर्स अब फिर से बहती हवा को देखकर वोट की बात करने लगे हैं. थोड़ा ठंड रखें, ये नरेशन ‘चाहे काली बिल्ली को वोट दे दूँ, मोदी को नहीं दूंगा’ तक भी बदलेगा. समाज की धुरी हम ऐसे ही नहीं बने.
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@ews_army तमिलनाडु के ज़्यादातर ब्राह्मण अमेरिका में बस गए हैं।
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EWS ARMY
EWS ARMY@ews_army·
तामिलनाडु में लगभग ब्राह्मण विधायक नहीं हैं, संसद में प्रतिनिधि नहीं हैं, राजनीति में प्रतिनिधित्व लगभग न के बराबर है, फिर भी वहां के ब्राह्मणों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर है। भेदभाव की घटनाएं भी कम हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश में लगभग 52 ब्राह्मण विधायक हैं। इन ब्राह्मण विधायकों के परिवार आर्थिक रूप से भले ही समृद्ध हों, लेकिन सामाजिक और आर्थिक स्थिति के मामले में तामिलनाडु के ब्राह्मणों के सामने कहीं नहीं टिकते। आज उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। इसलिए कहता हूं कि भारत में जो जाति के नाम पर प्रतिनिधित्व का खेल चलता है, वह एक बड़ा फ्रॉड है। इससे समाज को नहीं, बल्कि समाज के ठेकेदारों को फायदा होता है।
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@UpdeshTripathi असम में लास्ट वाला कांग्रेस का प्रहार ठीक समय पर किया गया है।
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उपदेश त्रिपाठी
असम में हिमंत सरकार की थकान साफ दिख रही है बंगाल में ममता बनर्जी की ताकत के आगे बीजेपी अभी भी कमजोर दोनों जगह बीजेपी बुरी तरह हारने वाली है..
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पंडित जगन्नाथ
"सरकार हमारी लेकिन सिस्टम उनका है" यह बोलने का साफ साफ अर्थ यह हुआ कि तुम कल भी गवार/मूर्ख थे और आज भी गवार/मूर्ख ही हो । न तो कल तुम सत्ता पाने के काबिल थे और न ही आज सत्ता में रहने के काबिल हो । बस राजयोग अपना असर दिखा रहा है।
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@semeerc कौन नेता देश के लिए योगदान दे रहा है सर जी ??
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sameer chougaonkar
sameer chougaonkar@semeerc·
शरद पवार ने आज राज्यसभा की शपथ व्हील चेयर पर ली।शपथ ठीक से पढ़ भी नहीं सके।बमुश्किल किसी तरह शरद पवार को शपथ दिलाई गई। मुंह से शब्द नहीं निकल रहे थे। सच में शरद पवार सत्ता के निर्लज्ज नशेड़ी हैं। ऐसी हालत में राज्यसभा में क्या योगदान देंगे और महाराष्ट्र के लिए क्या करेंगे समझ से परे है।
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@AnupamNawada अबे बीजेपी के दल्ले , गोगोई के पत्नी को इतने दिनों से पाकिस्तान का एजेंट बता रहे थे तुम लोग ,तो वह बहुत अच्छा था।
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Anupam K. Singh
Anupam K. Singh@AnupamNawada·
दुबई प्रशासन ने ही कांग्रेस के दावों की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। पवन खेड़ा को सबक सिखाया जाना चाहिए अब। उन्होंने ग़लत परंपरा शुरू की है, छोड़ दिया गया तो दुष्प्रचार अभियान का स्तर गिरता ही चला जाएगा। कल को ये लोग कांग्रेस को वोट न देने वाले मतदाताओं के घरों की महिलाओं व बच्चियों का चरित्र-हनन करेंगे, उनके ख़िलाफ़ घृणित अभियान चलाएँगे। चुनाव आयोग को भी सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए। 'नीमो यादव' को क्लीन-चिट देने वाली न्यायपालिका से तो हमें कोई उम्मीद है ही नहीं। अब समझ में आ रहा है चुनाव से पहले क्यों ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाया गया था, ताकि ये लोग ग़लती करें फिर भी आयोग कार्रवाई से हिचके। दुबई वाली जो प्रॉपर्टी डीड खेड़ा एन्ड गैंग ने दिखाई थी, वो फ़र्ज़ी निकली है। अब भाजपा को उस एक-एक कांग्रेसी की संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए, जिस-जिस के विदेशों में संपत्तियाँ हैं।
Himanta Biswa Sarma@himantabiswa

Busting another lie of #CongFakeAICampaign. The Dubai property title deeds have also turned out to be FAKE with glaring inconsistencies and no authentic record. You can also find out at: dubailand.gov.ae/en/eservices/t… All of their lies are THUS BUSTED. Legal action will follow.

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Priyanka Chaturvedi🇮🇳
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