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Tejendra singh Rajput 🇧🇴
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Tejendra singh Rajput 🇧🇴
@110Tejendra
समाजसेवी क्षत्रिय धर्म और सर्वोपरि
Indian Springs Village, AL Katılım Temmuz 2014
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जनता की जायज मांगो को अनदेखा करना राजस्थान की भाजपा सरकार को बहुत महंगा पड़ेगा....
विगत डेढ़ महीने से जनता सड़कों पर है और सरकार आँखे मूँदकर सो रही है....
आगामी चुनावों में करारा जवाब दिया जाएगा...
@RavindraBhati__
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गिरल धरने पर बाड़मेर की जनता से बातचीत में एक ही बात बार-बार सुनने को मिल रही है कि जनप्रतिनिधि हो तो रविंद्रसिंह भाटी जैसे जो जनता के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहते है…
विधायक हो या सांसद अगर जनता के हक़ की लड़ाई लड़नी है तो रविन्द्र सिंह भाटी जैसा जज़्बा होना चाहिए जो 50 डिग्री की भीषण गर्मी में भी अपनी जनता और मज़दूरों के अधिकारों के लिए धरने पर बैठे हैं उन्होंने हमेशा जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाया है और आगे भी उठाते रहेंगे।
जनता के हितों के लिए संघर्ष करने वाले ऐसे जनप्रतिनिधि ही लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाते !
@RavindraBhati__
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साहब, हमने तो पूरा घटनाक्रम देखा ही नहीं। प्रदर्शन स्थल पर 250-300 पुलिसकर्मी मौजूद थे, फिर कार्रवाई केवल एक कांस्टेबल पर ही क्यों? क्या बाकी सभी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे और केवल वही दोषी था?
जनता के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि कहीं यह कार्रवाई निष्पक्ष प्रशासनिक निर्णय न होकर किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाने का प्रयास तो नहीं। यदि ऐसा नहीं है तो फिर चयनात्मक कार्रवाई के पीछे वास्तविक कारण क्या है?
जिस कर्मचारी ने लगभग ढाई वर्षों तक पूरी कार्यप्रणाली को निकटता से देखा, समझा और जिम्मेदारी निभाई, उसे अचानक हटाने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है। क्या यह प्रशासनिक आवश्यकता थी या फिर द्वेषपूर्ण मानसिकता का परिणाम? किसी व्यक्ति को बार-बार हटाना, लगाना और फिर हटाना केवल प्रशासनिक अस्थिरता ही नहीं दर्शाता, बल्कि संबंधित व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा भी प्रतीत होता है।
रोज-रोज की यह नौटंकी आखिर कब तक चलेगी? कभी हटाओ, कभी लगाओ, फिर हटाओ और फिर लगाओ। यदि यही व्यवस्था है तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
युवा शक्ति इतना अवश्य कहना चाहती है कि जिन लोगों को अन्यायपूर्वक निशाना बनाया जा रहा है, उनकी सुरक्षा और सम्मान के लिए समाज स्वयं खड़ा होना जानता है। प्रशासन का दायित्व निष्पक्षता है, पक्षपात नहीं। जनता सब देख रही है और हर प्रश्न का उत्तर समय अवश्य मांगेगा।
@PoliceRajasthan @Barmer_Police @RajCMO

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यह है प्रशासन की हकीकत
मात्र जमानत देने वाले लोगो का आपने रातों रात ट्रांसफर करवा दिया।
एसपी तहसीलदार दोनो को हटा दिया।
विधायक सांसद बोले तो सुरक्षा हटा दो और उनके समर्थकों के साथ कोई न्याय करे तो उन अधिकारियों को हटा दो।
सरकारों का डर अच्छा लगा!
@hanumanbeniwal @RavindraBhati__

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#शिव_विधायक श्री रविन्द्रसिंह भाटी के PSO श्री तखतसिंह को एपीओ करना आखिर किस बात की सजा है...?
क्या इसलिए कि उन्होंने एक जनप्रतिनिधि की सुरक्षा ड्यूटी निभाई...?
गिरल में मजदूरों के धरने और बाड़मेर जिला कलेक्टर कार्यालय के घेराव के दौरान हुई घटना में जब विधायक रविन्द्रसिंह भाटी ने स्वयं पर पेट्रोल डाल लिया तब मौके पर केवल PSO ही नहीं बल्कि दर्जनों पुलिस अधिकारी, कर्मचारी और बाहर सैकड़ों की संख्या में RAC व पुलिस जाप्ता तैनात था। फिर आखिर पूरा दोष केवल एक PSO पर डाल देना क्या न्याय कहलाएगा...?
यह कार्यवाही कहीं न कहीं सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी बड़े प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र की विफलता को छिपाने के लिए एक निचले स्तर के कर्मचारी को बलि का बकरा बनाया जा रहा हो। मारवाड़ी में एक कहावत है — “चूले में मूत्रे बैर बालनो”। आज वही हाल पुलिस विभाग में दिखाई दे रहा है जहां ऊपर बैठे जिम्मेदार लोग बच जाते हैं और नीचे काम करने वाले कर्मचारी कार्रवाई की मार झेलते हैं।
जैसलमेर में एक कांस्टेबल ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर सिर्फ इतना लिख दिया कि अनुसंधान करने वाली पुलिस को नेताओं के घरों की शादियों में ड्यूटी नहीं लगाई जानी चाहिए और उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला दिया। इतना लिखना ही उस कांस्टेबल को भारी पड़ गया और उसे चार्जशीट थमा दी गई।
आखिर पुलिस विभाग में कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर तक की नौकरी सेवा है या गुलामी...?
क्या वर्दी पहन लेने के बाद एक पुलिसकर्मी अपने संवैधानिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकार खो देता है...?
क्या उन्हें सिर्फ आदेश मानने वाली मशीन समझ लिया गया है...?
सच्चाई यह है कि पुलिसकर्मी सबसे ज्यादा दबाव, राजनीतिक हस्तक्षेप और मानसिक प्रताड़ना झेलते हैं लेकिन उनके पक्ष में बोलने वाला कोई नहीं होता क्योंकि उनके मजबूत संगठन या एसोसिएशन नहीं हैं। यही कारण है कि सरकारें और अधिकारी वर्ग सबसे पहले उन्हीं पर कार्रवाई करके अपनी “सख्ती” दिखाते हैं।
सरकार को यह समझना होगा कि भय और दमन से व्यवस्था नहीं चलती। यदि हर घटना में नीचे के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जाएगा तो पुलिस बल का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा।
आज जरूरत है पुलिसकर्मियों के अधिकारों, सम्मान और न्याय की बात करने की। क्योंकि लोकतंत्र में वर्दी पहनने वाला भी इंसान है, उसका भी आत्मसम्मान है, उसके भी अधिकार हैं।
-जैतमाल सिंह मगरा
@RajCMO @BhajanlalBjp @PoliceRajasthan @RajPoliceHelp


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शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने श्रमिकों के साथ प्रदेश की सरकार के लिए सद्बुद्धि के लिए किया यज्ञ
@RavindraBhati__
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अब तो सच में हद हो गई है। इतने निकम्मे हैं कि एक परीक्षा ढंग से नहीं करवा सकते?
#CUET परीक्षा के दौरान तमाम सेंटर्स पर सर्वर ही डाउन हो गया।
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🔥😡 यूरोप के बाद, जापान में भी “विश्वगुरु” का डंका बज गया 🤡🌍
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⬩➤ टोक्यो, जापान में बड़े-बड़े बिलबोर्ड्स पर 📢 • STOP MODI ✋ • Indian Dracula 🧛♂️ • Modi The Killer of Humanity ☠️ • Modi is the New Hitler 😠 • The Butcher of Gujarat 🩸
विश्वगुरु का वैश्विक चेहरा अब दुनिया देख रही है 👀🌐
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⬩➤ Godi मीडिया रोज़ मोदी जी के भव्य स्वागत की कहानियाँ गढ़ता है लेकिन असली तस्वीर ये है 📸😏
⬩➤ विदेश में प्रचार → फोटोशूट → “Howdy Modi” 📸🤳 ⬩➤ अंदर 100 पेपर लीक 📝💸 महंगाई 💰 बेरोजगारी 😔 किसानों का खून 🌾🩸
⬩➤ कब तक झूठे narrative और Godi मीडिया के भरोसे देश चलाएंगे? 🤔⏳
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⬩➤ विश्वगुरु का असली चेहरा दुनिया देख चुकी है 🌍👁️
आप कब देखोगे? ⏰
⬩➤ Like करो अगर सच्चाई दिख रही है 👍❤️
⬩➤ Share करो अगर जागना है 🔄💪
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राजस्थान की राजनीति में अगर हनुमान बेनीवाल और रविंद्र सिंह भाटी एक साथ खड़े हो जाएं, तो यह केवल दो नेताओं का साथ नहीं बल्कि लाखों किसानों, युवाओं और आम जनता की आवाज़ का संगम होगा। एक तरफ बेनीवाल का वर्षों का संघर्ष और जनाधार है, तो दूसरी तरफ भाटी का युवा जोश और बढ़ती लोकप्रियता। दोनों की ताकत एक मंच पर आने से प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं और जनता को एक मजबूत विकल्प मिल सकता है।
@hanumanbeniwal @RavindraBhati__

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बीजेपी सरकार ने सिर्फ हिंदू- मुस्लिम कर सत्ता हासिल की, आज सवालों के जवाब तक नहीं दे पा रहे....
क्या यह लोग प्रदेश का भला कर पाएंगे?
@BhajanlalBjp @madanrrathore
@BJP4Rajasthan @BJP4India
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🔰लो अब आखिर गृह मंत्रालय ने भी कबूल कर लिया असली संविधान निर्माता अंबेडकर नही बल्कि B.N. राव साहब थे।
👉गृह मंत्रालय ने ये कबूल करते हुए कहा कि भीमराव अम्बेडकर संविधान के निर्माता नही है।
👉उन्होंने ने केवल संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन के तौर पे काम किया था।
👉यह कहना है केंद्रीय गृह मंत्रालय का।
👉गृह मंत्रालय ने सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए सवाल के जवाब के तहत ये जानकारी दिया।
🔰अंबेडकरवादी लोग तो इस 37% लाने वाले व्यक्ति को संविधान निर्माता बताना शुरू कर दिए थे।
👉 लेकिन कोई भी ऐसा इंसान जो संविधान के बारे मे थोड़ी बहुत जानकारी रखता हो।
👉वो भलि भांति जानता है अंबेडकर संविधान निर्माता नही थे।
👉असली संविधान निर्माता बीएन राव साहब थे।
🔰क्योंकि 37% लाने वाला व्यक्ति जिसकी औकात ही 37% लाने की हो वो भला संविधान कैसे लिख सकता है।
👉हां लेकिन ये आरक्षण इस 37% वाले की देन है।
👉 जो बीएन राव साहब से रिक्वेस्ट करके 10 साल के लिए अपने समाज को आरक्षण दिलवाया था।

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