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जब हम पतंग उड़ाते हैं , तो पतंग को देखते रहते हैं.... उसे संभालते आसमान को नहीं देख पाते....
पतंग जीवन है , ईश्वर आसमान....
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पायल
२६-३-२०२६
मैंने इस संसार से देह का ऋण लिया है
और ईश्वर से.... आत्मा का.....
कविताएँ लिखकर , इस संसार का ऋण चुकाया मैंने
प्रेम करके ईश्वर का....
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~पायल(@456_payal)
हम सभी
दरअसल एक गहरी नींद में हैं
कोई धर्म की चौखट पर सिर टिका सोया है
कोई राजनैतिक टेंट में
और कोई सोया है
प्रेम की प्रयोगशाला की हरी दीवार से पीठ सटा
जागे हुए
वही हैं केवल
जो ये सब भूल
रात दिन
ये ज़मीन आसमान बचाने की कोशिशें कर रहे हैं
~पायल(@456_payal)
अर्थ क्या ?
मैं उनके साथ
वनवास चुन लूँ
साथ जीवन का स्वप्न देखूँ और
रह जाऊँ अकेली
गोद में पोसने को उनका राजकुँवर लिए
या फिर उम्र भर प्रीती के बीज बोऊँ
और देखूँ
हर बरस लहलहाती फसल को जलकर राख होते हुए
मैं स्त्री हूँ
राम चुनूँ
बुद्ध या कृष्ण
मुझे पीछे छूट जाना है
- पायल। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष
@456_payal#InternationalWomensDay#WomensDay#WomensDay2026
तुम्हारे हाथों में एक अदृश्य भिक्षापात्र
बुद्ध होने से पहले भी था
बुद्ध तुम कभी नहीं रोए ,
क्योंकि तुम्हारे भिक्षापात्र में पहली भिक्षा , यशोधरा की मुस्कान थी....
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~पायल(@456_payal)
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ईश्वर एक नदी था...
और मैंने नदी से दोस्ती कर ली थी... उसने अपने फूल , शीतलता ,मछलियाँ सब मुझे दे दीं.... फिर मुझे.... कभी किसी नाव की भी ज़रूरत नहीं पड़ी....
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पायल
२२-२-२०२६
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अच्छे बनिए , फिर बेहतर और फिर बहुत अच्छे । यह कठिन है और कहीं कहीं पीड़ादायक भी....किंतु विश्वास कीजिए यह बहुत सुंदर यात्रा है....
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पायल
२०-२-२०२६