Kumar Divyam
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Kumar Divyam
@AISA_Kd
मैं मरूंगा सुखी, मैंने जीवन की धज्जियां उड़ाई है |POET| writer|Learner। activist| @Newzink50 https://t.co/6gBN9u5aUN











"इतने बड़े भक्त हो, जाओ भगवान से ही कहो कि वो कुछ करें..." जब सबरीमाला में नियमविरुद्ध आचरण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था, तब तो वामपंथी याचिकाकर्ताओं से ये नहीं कहा गया था कि वो कार्ल मार्क्स से जाकर प्रार्थना करें। BR गवई, या जो भी उसका नाम है - भगवान विष्णु पर टिप्पणी करने की उसकी औक़ात नहीं है। वो महर्षि भृगु नहीं है कि श्रीहरि की छाती पर लात मारेगा और वो मुस्कुराते रहेंगे। भगवान विष्णु की प्रतिमा का सिर खंडित कर दिया और ये कह रहा है कि जाकर भगवान से प्रार्थना करो। याचिका भी खारिज कर दी। इतना अहंकार? और हाँ, इस पीठ में उसके साथ जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह भी था। क्या जीसस क्राइस्ट को लेकर ऐसा कुछ होता तो इस तरह का आदेश दिया जाता? हिम्मत है? एक तो मुग़ल आक्रांताओं ने हमारे देवता की मूर्ति खंडित की - तुम हिन्दुओं के साथ सहानुभूति नहीं जता सकते नहीं सही, तुम क्रूर इस्लामी आक्रांताओं की निंदा नहीं कर सकते तो नहीं सही, कम से कम पीड़ित हिन्दुओं के घावों पर नमक तो मत छिड़को! यही सत्य है सुप्रीम कोर्ट का, इन जजों का। जज ही जज को चुनते हैं, कुछेक परिवारों के बीच न्यायपालिका की विरासत घूमती रहती है। राज्यपालों-राष्ट्रपति को ये टाइम फ्रेम देते हैं कार्यवाही के लिए, ख़ुद करोड़ों केस पेंडिंग रखते हैं और इनके लिए समयसीमा तय करने वाला कोई नहीं है।








