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जयभीम 💙 जौहार 🏹👨‍🌾 ✍Raising Voice of_ Tribals, Dalits, exploited, oppressed women and Unemployed youth Equality, Humanity & Justice ⚖️

Jaipur Katılım Şubat 2021
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@grok बेरोजगारों की प्रथम प्राथमिकता सरकारी नौकरी की ज़रूरत है....!
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तुम मांगते मांगते थक जाओगे मैं देते नहीं थकूँगा...! पूर्व मुख्यमंत्री श्री @ashokgehlot51 जी इनके कार्यकाल और बजट के चर्चे होते थें...! आप जनता के दिलों में आज भी हैं... @AGehlotPhirSe @grok अशोक गहलोत जी और दिया कुमारी जी दोनों के बजटों में से किसका बजट अच्छा था...?
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Shekhar Choudhary
Shekhar Choudhary@shekharcanada·
कमेंट मे #HBDHanumanBeniwal हैशटैग लिखने वाले प्रत्येक साथी को फ़ॉलो करूँगा ❤️🙏 @hanumanbeniwal
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बेरोजगार युवा,किसान कमेरों, मजदूर, महिलाओं शोषित- पीड़ित वर्ग की बेबाक आवाज़ RLP सुप्रीमों श्री हनुमान जी बेनीवाल को प्राकृतिक अवतरण दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 💐💐 प्रकृति मां आपको उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु प्रदान करें 💐💐 @hanumanbeniwal #HBDHanumanBeniwal
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Shekhar Choudhary@shekharcanada

कमेंट मे #HBDHanumanBeniwal हैशटैग लिखने वाले प्रत्येक साथी को फ़ॉलो करूँगा ❤️🙏 @hanumanbeniwal

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SUNIL POONIA
SUNIL POONIA@sunilpoonia_·
अखिलेश यादव, सुन लो! तुम NSUI राजस्थान प्रभारी हो, लेकिन धरातल की आवाज दबाने की कोशिश मत करो। विनोद जाखड़ जैसे नेता को हटाने की साजिश रची तो राजस्थान के छात्र-युवा चुप नहीं बैठेंगे। वो RSS को मुंह तोड़ जवाब देते हैं, तुम्हें भी जवाब देंगे। अनुशासन ठीक है, लेकिन गुलामी नहीं चलेगी। अगर विनोद पर अन्याय हुआ तो पूरा राजस्थान सड़क पर उतरेगा – और तुम्हारा प्रभारी पद भी नहीं बचेगा। राहुल गांधी जी और हाईकमान को साफ संदेश – ऐसे निडर नेता को बचाओ, वरना NSUI का भविष्य खतरे में! #मै_भी_विनोद_जाखड़ #VinodJakhar #NSUIRajasthan @RahulGandhi @VinodJakharIN @sureshpooniaIN
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SUNIL POONIA
SUNIL POONIA@sunilpoonia_·
मुझे राजस्थान NSUI का प्रदेश महासचिव बनाए जाने पर आदरणीय पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी , राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष श्री गोविंद सिंह डोटासरा जी, राजस्थान NSUI प्रदेश अध्यक्ष बड़े भाई श्री विनोद जाखड़ जी,पूर्व विधायक डॉ. कृष्णा पूनियां जी एवं जयपुर ग्रामीण सांसद प्रत्याशी कोंग्रेस अनिल चोपड़ा जी का हृदय से बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद। आप सभी ने मुझ पर जो विश्वास जताया है, उस पर मैं खरा उतरने का हर संभव प्रयास करूंगा। मुझे जो ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, उसका मैं पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निर्वहन करूंगा और छात्रों की आवाज़ को मजबूती के साथ बुलंद करूंगा। @ashokgehlot51@GovindDotasra @VinodJakharIN @KrishnaPooniaIN @NSUIRajasthan @AnilChopra_ @sureshpooniaIN @1stIndiaNews @zeerajasthan_ @MukeshNaraniya0 @PyareLalverma98
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ASHOK_LALSOT@ASHOKLALSOT24·
बेरोजगार अध्यक्ष जी 👉 ये RSSB बोर्ड की ही भर्तियों का OMR का मामला हैं या RPSC का भी ....? RPSC संस्था में हुए भ्रष्टाचार की मांग कौन उठाएगा...? विद्यार्थी आक्रोश ज्ञापन रैली में
HANUMAN KISAN@HANUMANKISAN

27 जनवरी - विद्यार्थी आक्रोश ज्ञापन नागौर के इस युवा हित कार्यक्रम में सभी युवाओं को अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का निवेदन करता हूँ ।। जिला कलेक्टर कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा ।। समय - 11:00 बजे बहुत बहुत धन्यवाद और आभार ।। 🤝🤝🤝🫡🫡🫡🫡👍👍👍👍👍👍

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Dinesh Dangi
Dinesh Dangi@dineshdangi84·
NSUI प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ आज नोटिस का जवाब भेज दिया है- कहा-मैने तो कोई अनुशासनहीनता नहीं की और सब अनुशासन के भीतर ही किया...मैं आपसे बार बार नियुक्तियों के लिए निवेदन कर रहा था...पर अनुमति नहीं मिली... ऐसे में कार्यकर्ताओं का लगातार प्रेशर बन रहा था... संगठन की सक्रियता के लिए फिर नियुक्तियां करना बहुत ही जरूरी हो गया था....
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ASHOK_LALSOT@ASHOKLALSOT24·
@AshokMeghwal_ @Akhileshyadavin @RahulGandhi लाठी खाना उसके वश की बात नहीं हैं भाई वो AC में बैठकर ऐसे ही नोटिस जारी करेगा धरातल पर उतरे तो मालूम हों उसे
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Ashok Meghwal
Ashok Meghwal@AshokMeghwal_·
अभिमन्यु पूनिया जी आप सबकी इस ऐतिहासिक पदयात्रा में NSUI राजस्थान के प्रभारी अखिलेश यादव जी को भी पधारना चाहिए। प्रभारी जी कभी राजस्थान में क्यों नहीं दिखते है? @Akhileshyadavin आप आओगे ना? अब तो सर्दी भी उड़ गई है। ठंड लगे तो आप हाथ में मशाल थाम लेना। @RahulGandhi @VinodJakharIN
Abhimanyu Poonia@AbhimanyuP00NIA

राजस्थान NSUI के प्रदेशाध्यक्ष श्री @VinodJakharIN जी के नेतृत्व में हनुमानगढ़ एवं श्रीगंगानगर NSUI द्वारा आयोजित 'युवाओं का युद्ध-ड्रग्स के विरुद्ध' कार्यक्रम के अन्तर्गत पदयात्रा एवं विशाल मशाल जुलूस में शामिल रहूंगा। आप समस्तजन युवा पीढ़ी को ड्रग्स नशे से बचाने की इस मुहीम में अधिक से अधिक संख्या में हिस्सा लें। @RahulGandhi @SachinPilot @RohitJawa12

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@AshokMeghwal_ जमीनी संघर्ष से जुड़े NSUI के प्रदेशाध्यक्ष भाई विनोद जाखड़ युवा, किसान, ग़रीब, मज़दूर की प्रखर आवाज़ हैं.. जो कि तुच्छजीवी इसलिए भी नहीं पचा रहें कि विनोद जाखड़ दलित वर्ग से आता हैं...... अगर ऐसे ही चलता रहेगा तो कांग्रेस को आगामी चुनावों में नुकसान का खामियाजा भुगतना पड़ेगा
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Ashok Meghwal
Ashok Meghwal@AshokMeghwal_·
अखिलेश यादव NSUI प्रभारी राजस्थान के लिए मेरा संदेश। #मै_भी_विनोद_जाखड़
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Ashok Meghwal
Ashok Meghwal@AshokMeghwal_·
@RahulGandhi जी को समय निकाल कर यह पोस्ट पढ़ना चाहिए। सिर्फ संविधान की लाल किताब हाथ में लेकर संविधान बचाओ संविधान बचाओ बोलने से काम नहीं चलने वाला है। राजस्थान में कांग्रेस सहित NSUI को मजबूत करने का काम कोई कर रहा है तो वो दलित वर्ग से आने वाले @VinodJakharIN है। दलित को दबाना मतलब कांग्रेस को दबाना है।
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan

NSUI में ये क्या हो रहा है? कांग्रेस की आज देश में जो हालत हो रही है, वह यों ही नहीं है। वह लंबी भूलाें का नतीजा है। उसमें बीजेपी को दोष देना ग़लत है। जो बीजेपी कर रही है, वह इतिहास में नया नहीं है। कांग्रेस के पुराने और ज़हीन-शहीन नेता इस बात को बेहतर जानते हैं कि युवा-विरोधाभास, भविष्य की खोज और भविष्य को ही रोक देने की कोशिशें आत्मघाती हुआ करती हैं। लेकिन अगर कोई फिर भी इस पर चले तो उन्हें कौन बचाए? कोई भी राजनीतिक दल अपने भविष्य को पोस्टरों पर नहीं, अपनी सबसे युवा शाखा की ऊर्जा में खोजता है। युवा संगठन केवल “कैडर” नहीं होते, वे पार्टी की राजनीतिक चेतना, जमीनी भाषा और आने वाले दशक का नेतृत्व-भंडार होते हैं। इसलिए जिस पार्टी में युवा संगठन को लगातार “कंट्रोल” के नाम पर कुचला जाता है, वहाँ भविष्य का संकट एक दिन नहीं; धीरे-धीरे, रोज़ घटता है। कांग्रेस में यह संकट अक्सर एक ही शक्ल में दिखाई देता है। नीचे से ऊपर तक प्रतिभा को उभरने देने में झिझक, और उभरती प्रतिभा को रोकने में तत्परता। राजस्थान में एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ को नोटिस देने का प्रकरण इसी प्रवृत्ति का सबसे साफ़ और सबसे समकालीन उदाहरण बनता जा रहा है। राजनीति में नीयत और रणनीति हमेशा बहस के विषय होते हैं; लेकिन कुछ पैटर्न इतने दोहराए जाते हैं कि वे “एक्सेप्शन” नहीं, “संस्कृति” लगने लगते हैं। जाखड़ के साथ जो हो रहा है या जो संदेश बन रहा है, वह यही है कि पार्टी के भीतर युवा नेतृत्व की स्वायत्तता को संदेह की निगाह से देखा जाता है और उसकी लोकप्रियता को ताक़त नहीं, ख़तरा माना जाता है। सक्रियता, लोकप्रियता और अंदरूनी चेतना क्या अपराध होती है? कांग्रेस में लोकप्रियता की सज़ा क्यों मिलती है इसके ही नेताओं को? यह प्रश्न कांग्रेस में हर जगह तैरता है। कांग्रेस में चालाकियों को तरजीह मिलती है और प्रतिभाएँ क्यों किनारे कर दी जाती हैं। यह प्रकरण इसी का उदाहरण है। विनोद जाखड़ ही नहीं; अनिल चौपड़ा, अभिमन्यु पूनिया से लेकर दिव्या मदेरणा, संयम लोढ़ा, सीएस बैद, रघु शर्मा, सचिन पायलट, बीना काक, पिरथीपालसिंह संधु आदि के प्रकरण इसी तरह के हैं। विनोद जाखड़ राजस्थान में असाधारण रूप से सक्रिय रहे हैं। तपती लू में लंबी यात्रा, संगठन-निर्माण की कोशिश और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक एक दृश्य उपस्थिति; ये सभी किसी भी आधुनिक राजनीतिक संगठन में “एसेट” माने जाने चाहिए। लेकिन कांग्रेस के युवा-तंत्र में अक्सर यही “एसेट” परेशानी बन जाता है; क्योंकि ऊर्जा जितनी तेज होती है, नियंत्रण-तंत्र उतना ही घबराता है। मुझे याद नहीं पड़ता कि अशोक गहलोत के बाद एनएसयूआई में कोई इतना सक्रिय प्रदेश अध्यक्ष आया है। मेरी यह बात ग़लत हो तो आप मुझे दुरुस्त ज़रूर कीजिएगा। यहाँ असली सवाल व्यक्तियों का नहीं; मनोवृत्ति का है। क्या कांग्रेस को ऐसे युवा चाहिए, जो केवल आदेश-पालक हों या ऐसे युवा जो जनता के बीच अपनी जगह बनाते हुए पार्टी के लिए नया स्पेस पैदा कर सकें? अगर दूसरा विकल्प सही है तो फिर सक्रियता को “अनुशासनहीनता” की तरह ट्रीट करना आत्मघाती है। और अगर पहला विकल्प चुना गया है तो पार्टी को ईमानदारी से मान लेना चाहिए कि वह नेतृत्व-निर्माण नहीं, नेतृत्व-प्रबंधन कर रही है। जाखड़ को केंद्रीय इकाई की तरफ़ से नोटिस और वह भी ऐसी भाषा में जिसे “अपमानकारी” ही माना जाएगा, एक सांगठनिक कदम भर नहीं रहता। वह एक राजनीतिक संदेश बन जाता है: “ज़्यादा दिखोगे तो काट दिए जाओगे।” "लोक तुम्हें चाहेंगे तो यह भी बर्दाश्त नहीं होगा।" यह संदेश केवल जाखड़ तक सीमित नहीं रहता; वह राजस्थान के हर छात्र नेता, हर युवा कार्यकर्ता, हर उभरते चेहरे के भीतर उतरता है। और वही भीतर उतरकर अगले पाँच साल का कैडर-निर्णय करता है कि इस पार्टी में मेहनत करने का रिटर्न क्या है। यह संदेश देखें तो वहाँ तक जाता है जहाँ युवक कांग्रेस के एक युवा अध्यक्ष का चुनाव जीत जाते हैं और उसे एक लंबे समय तक घोषित ही नहीं किया जाता। यह संदेश चूरू से सिरोही और अजमेर से उदयपुर तक समान रूप से जाता है। कांग्रेस की दिक्कत यह है कि वह लोकप्रियता को “लोकप्रियता” की तरह नहीं देखती; वह उसे “सत्ता-उत्तराधिकार” की शुरुआत की तरह देखती है। और फिर जो भी लोकप्रिय होता है, उसे पहले “लाइन में” लाने का प्रयास होता है और नहीं आया तो “नोटिस” की भाषा में लाया जाता है। यह संगठन का संचालन नहीं, संगठन का डर-प्रबंधन है। जिस प्रदेश अध्यक्ष को दो साल से अधिक हो गया हो वह अपनी मर्जी से कार्यकारिणी तक नहीं बना पा रहा तो फिर “प्रदेश नेतृत्व” का अर्थ क्या बचता है? संगठन का मूल सिद्धांत है। जिम्मेदारी के साथ अधिकार। अगर अधिकार नहीं तो जिम्मेदारी भी एक दिखावा बन जाती है। और जब जिम्मेदारी दिखावा बनती है, तब परिश्रम “भक्ति” बनता है, राजनीति नहीं। यही वह बिंदु है, जहाँ पार्टी अपने ही पैरों को कुल्हाड़ी पर मारती है। जो नेता संगठन को मजबूती देने के लिए नियुक्तियाँ करता है, उसे सार्वजनिक रूप से कठघरे में खड़ा कर देना, दरअसल संगठन की रफ्तार को दंडित करना है। और जब रफ्तार को दंड मिलता है तो संगठन धीरे-धीरे “फाइल संस्कृति” में चला जाता है, जहाँ फैसले भी डरकर होते हैं और लोग भी डरकर। दिल्ली से एक ऐसे युवक को NSUI महासचिव नियुक्त कर दिया गया जिसका “किसी को अता-पता नहीं।” यहाँ भी मुद्दा व्यक्ति नहीं, प्रक्रिया है। जमीनी संगठन को साइड-लाइन करके ऊपर से “इम्पोर्टेड” चेहरे उतारना, कैडर के आत्मसम्मान को चोट पहुँचाता है। कैडर की सबसे बड़ी पूंजी होती है यह भरोसा कि मेहनत की पहचान होगी। जब पहचान “कनेक्शन” से तय होने लगे, तो मेहनत पार्टी छोड़ देती है, और पार्टी केवल पोस्टर, बयान और गुट छोड़ देती है। कांग्रेस अगर सचमुच मजबूत होना चाहती है तो उसे एक कठोर लेकिन सरल नियम अपनाना होगा: युवा नेतृत्व को स्वायत्तता—नोटिस नहीं, मार्गदर्शन; नियंत्रण नहीं, निर्माण। लोकप्रियता को संपत्ति मानना—खतरा नहीं। निर्णय की पारदर्शिता—किस आधार पर किसे नोटिस, किस आधार पर किसे पद? प्रदेश इकाइयों का सम्मान—दिल्ली का “कमांड” नहीं, समन्वय। भाषा की मर्यादा—अपमान संगठन को नहीं, भीतर के भरोसे को तोड़ता है। आज कांग्रेस “वॉकल” हो सकती है; लेकिन कड़वा सच है: अगर राजनीतिक चेतना कम है यानी जमीनी सिग्नल पकड़ने की क्षमता कमजोर है तो आवाज़ केवल शोर बन जाती है। और शोर से संगठन नहीं बनता; संगठन भरोसे, स्वतंत्रता और न्याय से बनता है। विनोद जाखड़ का मामला किसी एक युवा नेता का नहीं रह गया है। यह कांग्रेस के उस प्रश्न का परीक्षण है कि वह अपना भविष्य सच में गढ़ना चाहती है या अपने भविष्य को भी अनुशासन की फाइल में बंद करके “सुरक्षित” रखना चाहती है। सुरक्षित भविष्य अक्सर पैदा ही नहीं होता। @nsui @VinodJakharIN @AbhimanyuP00NIA @DivyaMaderna @SachinPilot @NSUIRajasthan @SanyamLodha66 @AnilChopra_

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ASHOK_LALSOT@ASHOKLALSOT24·
RLP सुप्रीमों श्री @hanumanbeniwal जी OMR शीट्स प्रकरण में जल्द ही बड़ा आंदोलन करने का ऐलान कर चुके हैं,ठीक वैसे जैसे #SI_भर्ती_2021_रद्द को लेकर 127 दिन तक आंदोलन किया था फ़िर रद्द भी हुईं OMRगायब करने वाले चोर नहीं बचेंगे 🔰 पहले भी कई सबूत दिए हैं #OMR_घोटाला_मांगे_CBI_जांच
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ASHOK_LALSOT@ASHOKLALSOT24·
@alokrajRSSB जी ये गायब हुई OMR शीट्स की गुत्थी कब सुलझेगी...? गायब हुई OMR शीट्स के लिए SOG लगातार आपके पास पत्र लिख भेज रहीं हैं, की हमें जानकारी चाहिए....! लेकिन RSSB बोर्ड खामोश क्यूँ हैं...? बोर्ड में हर जगह कैमरे लगे हैं तो ढूंढों ..! #OMR_घोटाला_मांगे_CBI_जांच
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Alok Raj@alokrajRSSB

नरेंद्र जी, बहुत शीघ्र ही 4th class भर्ती परीक्षा के सभी कैंडिडेट्स के स्कोर कार्ड जारी हो जाएंगे। तब ये गुत्थी अपने आप सॉल्व हो जाएगी।

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ASHOK_LALSOT@ASHOKLALSOT24·
पेपर लीक मामला तो बहाना था जो ठंडे बस्ते में रख दिया गया! खेल तो OMR शीट भरने का चल रहा हैं..! आगे से आगे ही स्क्रिप्ट रचकर तैयार रहता हैं RSSB, कई अलानी फलानी परीक्षाओं की तिथियां घोषित कर देते हैं फ़िर अंदर ही अंदर OMR का खेल चल रहा होता हैं #OMR_घोटाला_मांगे_CBI_जांच
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