
@hemantkumarnews पेपर जब दिया ही नहीं तो पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से पीड़ित हुए कैसे?
जब सिस्टम की नाकामियों पर तुम्हारी रीढ़ झुक जाती है, तब एक बेगुनाह का संघर्ष तुम्हें मज़ाक लगता है; याद रखना, सत्ता की चौखट पर ईमान बेचने वालों की कलम, इतिहास के पन्नों में सिर्फ 'दलाली' लिख पाती है।
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