पण्डित - सुशील पाण्डेय

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पण्डित - सुशील पाण्डेय

पण्डित - सुशील पाण्डेय

@ASTROSUSHILPAN2

( भगवती उपासक, कुण्डली एवं कर्मकाण्ड विशेषज्ञ ) जय माता की 🙏 माॅं भगवती आपका कल्याण करें,,, सभी धार्मिक अनुष्ठान व कुण्डली आधारित जानकारी के लिए सम्पर्क करें

New Delhi, India Katılım Eylül 2015
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पण्डित - सुशील पाण्डेय
युं ही कोई किसीकी हंसी नही उड़ाता । हंसी का पात्र तो व्यक्ति खुद के ही क्रियाकलापों से बनता है । अपने क्रियाकलापों को सुधार लो , कोई नही हंसेगा ।। ***सुशील पाण्डेय ।।
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कभी-कभी अजीब सी परिस्थिति बन जाती है, जब किसी बात का उचित और मर्यादित उत्तर होते हुए भी उत्तर नही दिया जा सकता । जबकि वह बात इतनी आहत कर होती है, जिससे असहनीय पीड़ा होती है । लेकिन विजय पीड़ा पर ही पानी होती है ।। ***सुशील पाण्डेय ।।
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चूंकि युद्ध में विनाश के सिवा कुछ भी हासिल नही किया जा सकता । वह भी अकारण युद्ध में तो कतई नही । ***सुशील पाण्डेय
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यह एक सुखद खबर है कि- युद्ध विराम पर सहमति बन गई है । भले ही कुछ समय के लिए ही, लेकिन कम से कम युद्ध रुका तो । बस उम्मीद यही है कि- दोनों पक्ष इसे अमल में ले आये । बाकी इसी बीच बैठ कर आपसी तालमेल बिठाने का प्रयास किया जाना चाहिए और तालमेल बिठाना चाहिए ।
Kadambini Sharma@SharmaKadambini

Breaking: राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर भीषण हमला दो हफ्ते के लिए टाला….अगर ईरान फौरन पूरी तरह और सुरक्षित तौर पर Strait of Hormuz खोल दे

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Kshama
Kshama@ChhayaDube53954·
लुफ्त-ए-इश्क ....सिर्फ वो ही समझते है, दिल जिनके.... धडकते नहीं .....सुलगते है...... .......
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किसी शायर ने क्या खूब ✍️ है,,, रूप वह सुरा है- जो आंखों मे नशा करती है । प्रीत वह कली है- जो कांटो मे खिला करती है । भले ही कोई- ताज न बनवा पाये । पर,,,, मुमताज तो हर दिल मे बसा करती है ।। ( रचना- अज्ञात )
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गधे की आँख पर हरे रंग का चश्मा चढ़ा , उसे सूखी घास मे भी हरी घास के स्वाद की अनुभूति कराई जा सकती है । बशर्ते,,,,,चश्मा चढ़ाने का हुनर होना आवश्यक है ।। ***सुशील पाण्डेय ।।
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Kshama
Kshama@ChhayaDube53954·
Madhav 🙏🏻🙏🏻
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जो रह-रह कर आज भी विनाश ही करती है । संकल्पनाये तो दोनो की ही अधूरी रह गई ।। ***सुशील पाण्डेय ।।
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अहंकार मानव के समूल विनाश का कारण बनता है । रावण को त्रिलोक विजेता होने का अहंकार, जिसके चलते राक्षस संस्कृति के विस्तार की संकल्पना उसके समूल विनाश का कारण बनी । विश्वामित्र को तपबल का अहंकार, त्रिशंकु को सदेह स्वर्ग भेजने की संकल्पना । परिणामस्वरूप कर्मनाशा का उद्गम ,
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अति गोपनीयता संदेह को जन्म देती है । अतः अत्यंत गोपनीय बने रहने से बचना चाहिए । पारदर्शी बनें , सन्देह की परिधि से मुक्त रहेंगे ।। ***सुशील पाण्डेय ।।
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Neema Gupta
Neema Gupta@NeemaGupta6·
#सुप्रभात सभी को ‌🙏
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@archana67827913 चर्चा और विचारों का आदान-प्रदान ही तो इस सोशल मीडिया का उद्देश्य है । लेकिन, सदुपयोग कम बल्कि दुरुपयोग होता जादा दिखाई देता है ।
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अर्चना शर्मा
Social media एक ऐसा माध्यम जिससे हम अपनी बात लोगों तक पहुंचा सकते हैं। ज्ञान चर्चा के माध्यम से ही आगे बढ़ता है या उत्पन्न होता है। किसी से बात करने में कोई बुराई नहीं होती बस बात सार्थक होनी चाहिए। रही बात खाली समय बिताने की तो वो व्यक्ति हर किसी के साथ नहीं बिता सकता।
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अपना घर फूंक कर दूसरे के घर को प्रकाशित करना, न तो महानता है और न ही बुद्धिमत्ता । इसे किसी भी तरह से उदारवादिता भी नही माना जा सकता । हाँ, ऐसा करने वाले को महा मूर्ख की श्रेणी में जरूर रखा जाता है । इसी श्रेणी में रखना उचित भी होगा ।। ***सुशील पाण्डेय ।।
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अनुरूप होगा । परिणामस्वरूप वह अपनी सत्ता का अहसास हमे कराती है और हमसे अपनी सत्ता को/अपने वर्चस्व को मानवाती है ।। ***सुशील पाण्डेय ।।
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कभी प्रकृति को चुनौती नही देनी चाहिए । वह हमारी चुनौतियों को कभी अनसुना नही करती है । दूसरा कोई भले ही हमारी चुनौतियों को अनसुना कर दे या भूल जाय , पर वह नही । वह स्वीकार करती है और हमारी चुनौतियों का परिणाम भी देती है । चुनौतियाँ जितनी बड़ी होंगी , परिणाम भी उसी के
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@dibang बड़ अधिकार दच्छ जब पावा । अति अभिमानु हृदयँ तब आवा ।। नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं । प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं ।। गोसाईं बाबा ने श्री रामचरित मानस के बालकाण्ड में लिखा है । आज वही चरितार्थ होता दिख रहा है, दुनिया भर में ।
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Dibang
Dibang@dibang·
प्रेस कांफ्रेंस में क्या बोले ट्रम्प. बड़ी बातें: 1. अमेरिका चाहे तो पूरे ईरान को एक ही रात में पूरी तरह खत्म किया जा सकता है. जरूरत पड़ी तो वो कल, मंगलवार की रात भी हो सकती है. 2. हम जीत गए, वो सैन्य रूप से हार चुके हैं. हमारी राय है कि हम होर्मुज में टोल वसूलेंगे. 3. ईरान के साथ एक ऐसा समझौता होना चाहिए जो मुझे स्वीकार्य हो. बिना रोक-टोक तेल की आवाजाही उसका हिस्सा होना चाहिए. 4. मुझे अंतरराष्ट्रीय कानून (war crimes) की चिंता नहीं है. 5. जो मैंने कहा वो सही है. मैं आलोचकों की परवाह नहीं करता. (गाली‑भरी भाषा के इस्तेमाल पर ट्रम्प का जवाब)
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पण्डित - सुशील पाण्डेय
प्रभु से कौन जीत पाया है,,, उनको प्रसन्न करके असुरों ने तमाम वरदान प्राप्त तो जरूर कर लिया था । ( ऐसा उल्लेख कथाओं पुराणों में मिलता है ) लेकिन उस वरदान/शक्ति का दुरुपयोग खुद उनके लिए ही घातक बना । इसलिए यदि हमें किसी भी तरह से कोई शक्ति ( धन बल पद प्रतिष्ठा आदि की ) मिल
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