Adv.Abhishek Toshina
4K posts

Adv.Abhishek Toshina
@AToshinaa
Advocate | District & Sessions Court, Didwana Constitution • Bahujan Issues • Legal Awareness संविधान, कानून और सामाजिक न्याय पर बिना डर, बिना समझौता
Didwana, India Katılım Şubat 2021
792 Takip Edilen1.1K Takipçiler

सालों की तपस्या और माता-पिता के खून-पसीने की कमाई जब पेपर लीक में बह जाती है, तब दर्द होता है। इस मानसिक प्रताड़ना से जूझ रहे युवाओं को आतंकवादी या उपद्रवी कहना बंद करो। छात्रों के हक में नहीं बोल सकते, तो अपनी रीढ़विहीन सोच से उन्हें बदनाम भी मत कीजिए! #StandWithS.
#CJPProtest
Makrana, India 🇮🇳 हिन्दी

हक मांगने वाले छात्रों के सामने बंदूकें तानना लोकतंत्र नहीं, 'एक अघोषित आपातकाल' है। यह तानाशाही सरकार आज 'काले अंग्रेजों' की तरह व्यवहार कर रही है। युवा इस हिटलरशाही और 'बिना राइट के सिस्टम' को उखाड़ फेंकेगा। सड़क से संसद तक हमारी जंग जारी रहेगी! #JusticeForStudents
#संसद_मार्च




Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

@ashokgehlot51 हक मांगने वाले छात्रों के सामने बंदूकें तानना लोकतंत्र नहीं, 'एक अघोषित आपातकाल' है। यह तानाशाही सरकार आज 'काले अंग्रेजों' की तरह व्यवहार कर रही है। युवा इस हिटलरशाही और 'बिना राइट के सिस्टम' को उखाड़ फेंकेगा। सड़क से संसद तक हमारी जंग जारी रहेगी! #JusticeForStudents
Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए लाठीचार्ज की मैं कड़ी निंदा करता हूँ। तानाशाही पर आमादा मोदी सरकार यह समझ ले कि लाठियों के बल पर न सच को दबाया जा सकता है और न ही न्याय की गूंज को।
आज युवा भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं क्योंकि एक समय पर युवाओं ने बड़ी संख्या में भाजपा के झूठे प्रचार के जाल में फंसकर श्री नरेन्द्र मोदी के पक्ष में वोट किया परन्तु प्रधानमंत्री मोदी ने इनकी आवाज को दबाया है।
अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे युवाओं की आवाज़ को कुचलना लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है। यह देश बाबासाहेब के संविधान और पंडित नेहरू के लोकतांत्रिक मूल्यों से चलेगा, न कि भाजपा की तानाशाही से!
हिन्दी

@CJP_for_India हक मांगने वाले छात्रों के सामने बंदूकें तानना लोकतंत्र नहीं, 'एक अघोषित आपातकाल' है। यह तानाशाही सरकार आज 'काले अंग्रेजों' की तरह व्यवहार कर रही है। युवा इस हिटलरशाही और 'बिना राइट के सिस्टम' को उखाड़ फेंकेगा। सड़क से संसद तक हमारी जंग जारी रहेगी! #JusticeForStudents
Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

कभी ग्राउंड रिपोर्टिंग करो मैडम तब पता चले छात्रों का दर्द,
कभी छात्रों के मुद्दे को उठाओ तब पता चले?
पर मीडिया को छात्रों से कब ही मतलब था,
छात्र सब शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे,
स्टूडियो में बैठकें ज्ञान देना कोई बड़ी बात नहीं है।
Chitra Tripathi@chitraaum
हिन्दी

@BoltaHindustan पेपर लीक से परेशान छात्र न्याय मांगने आए हैं, जंग लड़ने नहीं! लेकिन संसद के बाहर सुरक्षा बलों की यह पोजीशन साफ दर्शाती है कि देश में 'एक अघोषित राजतंत्र' और 'अघोषित आपातकाल' लागू है। इस 'बिना राइट के सिस्टम' को युवा अब बर्दाश्त नहीं करेगा।
Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

@RahulGandhi पेपर लीक से परेशान छात्र न्याय मांगने आए हैं, जंग लड़ने नहीं! लेकिन संसद के बाहर सुरक्षा बलों की यह पोजीशन साफ दर्शाती है कि देश में 'एक अघोषित राजतंत्र' और 'अघोषित आपातकाल' लागू है। इस 'बिना राइट के सिस्टम' को युवा अब बर्दाश्त नहीं करेगा।
Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
हिन्दी

@HansrajMeena पेपर लीक से परेशान छात्र न्याय मांगने आए हैं, जंग लड़ने नहीं! लेकिन संसद के बाहर सुरक्षा बलों की यह पोजीशन साफ दर्शाती है कि देश में 'एक अघोषित राजतंत्र' और 'अघोषित आपातकाल' लागू है। इस 'बिना राइट के सिस्टम' को युवा अब बर्दाश्त नहीं करेगा।
Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

@CJP_for_India पेपर लीक से परेशान छात्र न्याय मांगने आए हैं, जंग लड़ने नहीं! लेकिन संसद के बाहर सुरक्षा बलों की यह पोजीशन साफ दर्शाती है कि देश में 'एक अघोषित राजतंत्र' और 'अघोषित आपातकाल' लागू है। इस 'बिना राइट के सिस्टम' को युवा अब बर्दाश्त नहीं करेगा।
हिन्दी

जब देश की मेधा संसद की ओर बढ़े और स्वागत में बंदूकें तनी हों, तो समझ लें कि यह 'बिना राइट का सिस्टम' है। बिना किसी घोषणा के यह 'एक अघोषित आपातकाल' और 'अघोषित राजतंत्र' देश के लोकतंत्र और युवाओं के भविष्य को पूरी तरह कुचल रहा है। #JusticeForStudents




Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

संसद भवन के ठीक बाहर गाड़ियों की ओट में सीधे बंदूकें ताने खड़े सुरक्षा बल! यह तस्वीरें गवाह हैं कि सरकार अपने ही देश के युवाओं और छात्रों के शांतिपूर्ण आक्रोश से कितनी घबरा गई है। लोकतंत्र संवाद की मेज पर चलता है, बंदूकों की नोक पर नहीं! #DelhiProtest
#संसद_मार्च




Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

@CJP_for_India संसद कूच' के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों को घसीटने और उन पर बल प्रयोग करने का वीडियो विचलित करने वाला हैं। ये छात्र देश का भविष्य हैं, कोई अपराधी नहीं। एक संवेदनशील समाज और तंत्र में युवाओं की मानसिक पीड़ा को समझने और संवाद की जरूरत है, दमन की नहीं। #StandWithStudents
Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

संसद कूच' के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों को घसीटने और उन पर बल प्रयोग करने की तस्वीरें विचलित करने वाली हैं। ये छात्र देश का भविष्य हैं, कोई अपराधी नहीं। एक संवेदनशील समाज और तंत्र में युवाओं की मानसिक पीड़ा को समझने और संवाद की जरूरत है, दमन की नहीं। #StandWithStudents



Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

जब देश की सत्ता छात्र विरोधी हो जाए, तब सड़कों पर आंदोलन का जन्म होता है। 'संसद कूच' कर रहे शांतिपूर्ण युवाओं को बैरिकेडिंग से रोकना अलोकतांत्रिक है। सरकार कब तक अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छुपाएगी? युवाओं को रोजगार और न्याय दोनों चाहिए। #SansadMarch
#संसद_मार्च




Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

जब संसद के अंदर चर्चा से भागा जाता है, तब बाहर शांतिपूर्ण मार्च को लाठियों से दबाया जाता है। सरकार कब तक अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छुपाएगी? शिक्षा मंत्री को अब नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। #JusticeForStudents
@dpradhanbjp
Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

सुजानगढ़ सदर थाना क्षेत्र में एक महिला के घर में घुसकर तोड़फोड़, जमीन पर जबरन कब्जे का प्रयास, मारपीट, गाली-गलौज, ओढ़नी खींचकर लज्जा भंग तथा जान से मारने की धमकी दी गई। सबसे गंभीर बात यह है कि घटना का वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की
@RajPoliceHelp


Didwana, India 🇮🇳 हिन्दी

#RaghavChadha
“चोरों की मंडली एक आदमी से खौफ खाती थी,
क्योंकि वो रोज़ उनकी पोल खोलता था।
आख़िर उन्होंने सोचा—इसे ही साथ मिला लो,
फिर न डर रहेगा, न सच बोलने वाला…”

हिन्दी

“कुर्सी बदलते ही रिश्तों की गर्माहट ठंडी पड़ जाती है,
सियासत में दिल नहीं, समीकरण चलते हैं।”
#RaghavChadha
हिन्दी






