Abhay Chitre
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@VoiceOfBrahmins दलीत नई पहचान बनानेकेलीये कुछभी कर सकते है ।
बस सिर्फ जाती आधारीत आरक्षण नही छोड सकते ।
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@LakhanmeenaIND हिंदु धर्ममे वर्णव्यवस्था सदियोंसे रही है ।श्
मगर जन्माधारीत जातीव्यवस्था अंग्रेजोंने 1872 मे लागू की ।
जब यह व्यवस्था मजह 150 साल पहले शुरू हूई तो हजारो सालोंके शोषणकी पोल अपनेआप खूल जाती है ।
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आरक्षण कब तक,,?
आरक्षण कब तक? जाती व्यवस्था जब तक
आरक्षण कब तक? जब तक हम ना पहुंचे तुम तक
आरक्षण कब तक? मंदिर में मनुवादी जब तक
आरक्षण कब तक? सर्वोच्च न्यायालय में कॉलेजियम जब तक
आरक्षण कब तक? छुआछूत मिट जाए जब तक
आरक्षण कब तक? मैला धोना बंद ना हो जाए जब तक
आरक्षण कब तक? बराबरी की भागीदारी ना हो जब तक
चलो आज एक सौदा करते है..
वक्त के पहिए को हजारों साल पीछे ले जाते है
आरक्षण की अदला बदली करते है,
और बात यही खत्म करते है..
एक बात तो तय है मेरे दोस्त, तुम एक दिन भी उस असहनीय दर्द को, झेल ना पाओगे
एक ठोकर लगते ही,
पल भर में ढेर हो जाओगे, पल भर में ढेर हो जाओगे
परंतु आरक्षण को, क्षण भर में समझ जाओगे
क्षण भर में समझ जाओगे।

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@Nargis_Bano78 मतलब ये स्वार्थके चलते हिंदुत्व अपना रहा था ।
ऐसे फटीचरोंकी सनातनको ना आवश्यकता थी ना है ।
ऐसे निजी स्वार्थके लीये ठेकेदार बननेवालोंको इज्जत और पैसा इस्लाममेही मिलेगा , क्योंकी वो मजहब उसके लीयेही बना है ।
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गुजरात 2002 दंगे में पोस्टर बॉय अशोक मोची ने भावुक होते हुए कहा ,
" राम भक्तो के लिये मैंने जो उस समय आक्रोश दिखाया था उसके बाद हिंदू धर्म के ठेकेदारो ने कभी मेरी मदद नहीं की , में फुटपाथ पर कमाता हूं , ऑटो रिक्शा मे सोता हूं , रहने को घर नहीं है , में उस समय अपने आपको हिंदू मानता था लेकिन अब में अपने को हिंदू नहीं मानता " ,
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@epanchjanya 1947 मे इन हरामीओंको भगा देना चाहीये था
अगर नही भागते तो मार देना चाहीये था ।
हिंदुस्तानमे 90 % समस्याएं उत्पन्नही नही होती ।
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@PoojaHindu50 हमे किसीभी रंगसे दिक्कत नही है ।
हम इनकी मानसीकताका विरोध करते है ।
जिस प्रकार इस्लाम सनातन विरोधी है ,
नवयानकी निंवभी केवल सनातन विरोध है ।
और सनातन विरोधीओंको हम कभीभी अपना नही मान सकते ।
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@raviparmarIN हिंदु धर्ममे वर्णव्यवस्था सदियोंसे रही है ।श्
मगर जन्माधारीत जातीव्यवस्था अंग्रेजोंने 1872 मे लागू की ।
जब यह व्यवस्था मजह 150 साल पहले शुरू हूई तो हजारो सालोंके शोषणकी पोल अपनेआप खूल जाती है ।
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पश्चिम बंगाल के इस ब्राह्मण युवा की बात तमाम मनुवादियों को ध्यान से सुनना चाहिए, आरक्षण ग़रीबी उन्मूलन प्रोग्राम नहीं है, यह अफरमेटिव एक्शन है,
"ब्राह्मणों ने सदियों से दलितों का शोषण किया है, यह मानने वाली बात है और अगर नहीं मानते हैं तो यह बड़ी प्रॉब्लम है, और अगर मानते हैं तो उनको एकसमान जगह देने के लिए एक्शन लेना पड़ता है, कास्ट कैपिटल है, प्रिविलेज है अगर आप ब्राह्मण हैं तो"
इस ब्राह्मण युवक के माता पिता को नमन जिन्होंने ऐतिहासिक सच्चाई बताकर अपने बेटे को बड़ा किया और बताया कि पूर्वजों की ग़लती तुम्हे नहीं दोहराना है,
यह बात मनुवादी कभी नहीं समझेंगे, क्योंकि वो मंदबुद्धि होते हैं, उनके माता पिता बचपन से उन्हें सिखा देते हैं जाति व्यवस्था और उसके फायदे।
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@raviparmarIN अंबेडकरवाद दिमगकी तरह है ,
जिस प्रकार दिमग लकडीको अंदरसे खोखला करती है ,
अंबेडकरवाद जातीवादके सिवा और कुछ नही है ,
जो देशको अंदरसे कमजोर करनेमे लगा है ।
जिस प्रकार मुसलमान देशसे पहले धर्मको प्राथमीकता देते है , ठिक वैसेही भिमटे जातीको प्राथमीकता देते है ।
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@pitamaha_b52862 तुम किसको क्या मानते हो ,
इससे घंटा फर्क नही पडता ।
छत्रपती शिवाजी महाराज खुदको सिसोदीया वंशके राजपूत मानते थे ।
हमारे लीये वही ब्रम्हवाक्य है ।
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गागा भट्ट ब्राह्मण ने क्या कहा था जब शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक करना था 😎
शिवाजी महाराज को ब्राह्मण शुद्र मानता था और शूद्र का क्या मतलब होता है ।।
इसलिए Oyye बुढ़िया मंदबुद्धि आँटी Gavar इतिहास की किताबें पढ़ समज😆😆😆

Dr. Neha Das@neha_laldas
"गौ-ब्राह्मण प्रतिपालक" छत्रपति शिवाजी महाराज को इन अम्बेडकरवादियों ने "बहुजन प्रतिपालक" घोषित कर दिया है! उनके भगवा ध्वज को नीला बना दिया है! शिवाजी महाराज को भी बहुजन बना दिया है! ऐसे हमारे ऐतिहासिक योद्धाओं का इतिहास बदला जा रहा है! और और क्या क्या देखना बाकी रह गया है?
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@SunilAstay छत्रपती शिवाजी महाराजके हाथमे भगवेकी जगह निला झंडा दिखानेके लीये तेरे जैसे निलांडूपर FIR होनी चाहीये ।
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बहुजन प्रतिपालक छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करने के जुर्म में कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री पर महाराष्ट्र में कई FIR दर्ज हुई है, RSS के प्रोग्राम के दौरान इसने कहा था "शिवाजी युद्ध लड़-लड़कर थक गए थे, एक दिन वे समर्थ रामदास स्वामी के पास गए, अपना मुकुट उतारकर उनके चरणों में रख दिया और कहा ‘अब मैं थक गया हूँ, आप ही राज्य का कारभार संभालिए"
धीरेंद्र को कड़ी ताड़ना मिलना चाहिए, इसको बेल्ट ट्रीटमेंट मिलना चाहिए, इसने बहुजन प्रतिपालक छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया है, उनको कमजोर बताया है,
धीरेंद्र ने अपनी ब्राह्मण जाति को सर्वश्रेष्ठ बताने के चक्कर में समर्थ रामदास को जोड़ा, हक़ीक़त यह है कि चाणक्य की तरह समर्थ रामदास भी फिक्शनल कैरेक्टर है 🔥🔥🔥


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@Voiceofpavan पहली बात यह जान लो ,
अंबेडकर किसीभी धर्मके अधिकृत आराध्य नही है ।
किसीभी राजकीय नेताकी या उसके कार्यों तथा विचारधाराकी आलोचना sc st act मे नही आती ।
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एक देश,दो कानून ?
छतीसगढ़ की ब्राह्मण जाति की अनामिका उपाध्याय ने बाबासाहेब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर और भारत के सबसे बड़े जातीय समूह 'जाटव' पर बेहद ही अभद्र,अपमानजनक एवं जातिसूचक टिप्पणी कीं। सवर्णों के दबाब में छत्तीसगढ़ पुलिस ने उसे दो दिन बाद छोड़ दिया।
गुजरात के एससी वर्ग के निखिल चावड़ा पर महज अभद्र टिप्पणी व एक फ़ोटो एडिटिड करने का आरोप लगा था। भाजपा नेताओं और सवर्णों के दबाब में गुजरात पुलिस ने निखिल चावड़ा को जेल भेज दिया। निखिल पिछले एक हफ्ते से जेल में बन्द है।
बहुजन समाज के लोगों याद रहे कि आप कानून में विश्वास रखते हैं,लेकिन कानून सत्तारूढ़ दलों के अधीन चलता है।
एक देश में दो कानून कैसे हो सकते हैं? जब अनामिका उपाध्याय को रिहा कर दिया गया है,तो फिर निखिल चावड़ा को रिहा करने में कौन-सी परेशानी आ रही है?
क्या सवर्णों और बहुजनों के लिए अलग-अलग कानून है? बहुजन समाज के लोगों को चिन्तन-मनन करना चाहिए।
बहुजन नेताओं,स्वघोषित बहुजन मीडिया और बहुजन सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर को निखिल चावड़ा को जेल से बाहर निकलवाने में मदद करनी चाहिए।
@The_Mooknayak @TheNewsBeak


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@Ambedkarite1111 आरक्षणजिवीओंको आरक्षण दिलानेवाला भगवान स्वरूपही लगेगा ।
इसमे अचरजकी कोई बात नही ।
जिसे तुम भगवानका दर्जा देनेकी कोशीश करते हो उसके धर्म या देशके लीये किए 5 अच्छे काम गिनवा दो ।
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दलितों के लिए अंबेडकर से बड़े कोई भगवान नहीं है।
Swami Anand Swaroop@kalisenachief
भगवान को गाली दोगे तो चलेगा लेकिन यदि अंबेडकर , ईशा मसीह , मुहम्मद को कुछ कहा तो तुरंत गिरफ्तारी । मोदी मोदी मोदी मोदी
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