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केशव
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केशव
@Activist4ranjan
निष्काम कर्मयोगी(कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन)
गोकुल Katılım Ağustos 2023
8.7K Takip Edilen9K Takipçiler
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लगता है,
बिहार के नसीब में ऐसे नेता ही लिखे हैं जिन्हें पढ़ाई-लिखाई से कोई वास्ता न हो।
बस सियासी चालबाज़ी और जोड़-तोड़ आनी चाहिए,
चाहे “juvenile” को “जुबलाइन” ही क्यों न पुकारें।
GOD BLESS #BIHAR !!
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प्रिय चाचा जी - @NitishKumar
नमस्ते।
चाचा जी, आप बिहार आए थे बेरोजगारी और पलायन रोकने के बड़े मिशन के साथ। लेकिन आज क्या देख रहे हैं? आप खुद बेरोजगार होकर दिल्ली पलायन कर रहे हैं!

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सदन में लगे टैब मॉनिटर को मुख्यमंत्री ने पहले नमस्कार किया, दुबारा फिर नमस्कार किया और फिर मशीन से माफ़ी के साथ ही उसकी गर्दन मुड़वा दी, फिर दूसरे, तीसरे और बाक़ी मॉनिटर की भी…
क्या इतने बड़े सूबे के मुख्यमंत्री की मानसिक सेहत और ऐसा व्यवहार आपको सामान्य लगता है? क्या यह गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं है?? #viral #video
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@Jduonline इसी का बदला लेने के लिए तुमने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड गोपालगंज कस्तूरबा गांधी बालिका अपहरण कांड
उसके बाद पटना हॉस्टल काण्ड NEET छात्रा के साथ किया
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@Shubhamshuklamp @yadavakhilesh तुम फिर भी यादवों का नहीं हो सकोगे, क्योंकि तुम्हारे पूर्वज भी यादवों के ख़िलाफ़ जाकर अंग्रेज और मुगलों से जा मिले थे,
यहां तक यादवों के ख़िलाफ़ कांग्रेस और भाजपा से भी जा मिले,
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@Highonchoorma यादव के विरोध के चक्कर में obc sc st अपना गांड में कील ठोक लिया
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3 सीट था जिसमें 6 लोगों का मेरिट बनाया गया इस परीक्षा में सबसे ज्यादा रिटेन में मार्क लाने वाला अनिल कुमार एक OBC थे.
रिटेन में सबसे ज्यादा मार्क कम लाने वाले OBC को इंटरव्यू में सबसे कम मार्क देकर बाहर कर दिया गया.
37 मार्क लाने वाले पीयूष पाठक को इंटरव्यू में 18 मार्क मिला और 43.15 मार्क लाने वाले OBC छात्र अनिल कुमार को इंटरव्यू में मात्र 8 मार्क देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया.
दुःख इस बात की नहीं है कि मेरिट है, दुःख इस बात की है कि द्रोण बेईमान है.

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"मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा"
आप इन्हें भलीभांति जानते होंगे। यह कुमार विश्वास जी हैं। पहले ये कवि हुआ करते थे, मगर
उसमें तगड़ा पैसा नहीं था फिर इन्होंने अपना पेशा बदल दिया और अब ये श्री राम कथा कहने लगे हैं।
आज कुमार विश्वास जी ख़ुद को "अभागा सवर्ण" बोल रहे हैं, और बड़े ही दुःखी मन से इमोजी लगाकर बोल रहे हैं।
कुमार विश्वास जी आप आज जो कुछ दिनों की कथा कहकर लाखों रुपए छापते हो, यह सब भी कहीं न कहीं आपकी "जाति" के कारण ही प्राप्त हुआ है।
यदि आप ख़ुद को "अभागा सवर्ण" कहते हो तो आप ही अपने वर्ग का अपमान कर रहे हो।
आपके लिए राहत इंदौरी साहब का एक शेर कहूंगा।
अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए


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