Adarsh Gupta

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@Adarsh_advait

अद्वैत ।। युध्यस्व ।। चरैवेति चरैवेति

Greater Noida Katılım Haziran 2024
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Adarsh Gupta@Adarsh_advait·
🌷 अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो जाता हूँ ~ अनवर शऊर🌷 ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते है ~ इमाम बख़्श नासिख़🙏🙏 # A.P Life🔥🔥 Posted by Shashank Shukla on Gita Community Feed. Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant- app.acharyaprashant.org/?id=8-22730245…
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Adarsh Gupta@Adarsh_advait·
कभी - कभी, सोच में पड़ जाता है। हर कोई व्यस्त जान पड़ता है, हर कोई अपनी अपनी जिंदगी की व्यस्तता अलापता हैं। लोग दुनिया में व्यस्त है? दुनिया लोगो को व्यस्त करे हैं? हर छोटी बात पर निकलती खिलखिलाहट क्या सच्ची हैं? चेहरे पर वो चुलबुलाहट सच्ची है? जो लोगों से बतियाने के लिए उत्सुक हैं? हंसते हुए चेहरे सच में खुश हैं? हंसते चेहरे अपनी जिंदगी से संतुष्ट है? या फ़िर, मैं ही अपने जीवन से असंतुष्ट हूं? क्या लोगों की दौड़ आंतरिक है? इनका कामना के प्रति आकर्षण, उत्तेजना, खिंचाव, बाहरी नहीं हैं? शायद अपनी मुस्कुराहट में अपने मरणासन्न जीवन को लिए हुए हैं। जहां उत्तेजना है, आकर्षण हैं, कामना है, वहां दुख होगा ही बुद्ध कह गए है। लेकिन ये लोग अपना अधूरा चेहरा ही दिखाते है, उस चेहरे को नहीं दिखाते है, जो दुख में सूखा हुआ है, जिसमें पिटने के निशान पड़े है, जो सूजकर लाल हो जाता है। शायद मेरा चेहरा भी सूजा हुआ है। हां, मेरा चेहरा भी सूजा हुआ है। लेकिन मैं दूसरों का चेहरा क्यों देख रहा हूं ? क्या मेरा अपना चेहरा काफ़ी नहीं है ? @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #Poems Posted by Pawan Kumar Sahu on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-7ff15363…
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आचार्य प्रशांत जी मेरी ज़िंदगी में ऐसे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने मुझे सिर्फ एक नाम या पहचान से नहीं, बल्कि एक “इंसान” के रूप में देखा। उन्होंने मुझे यह एहसास दिलाया कि मेरी असली पहचान मेरे भीतर है, न कि दूसरों की सोच या समाज के बनाए हुए ढांचे में। जब मैं खुद को छोटा समझती थी, डरती थी, या आगे बढ़ने से हिचकिचाती थी, तब उनके शब्दों ने मुझे हिम्मत दी। उन्होंने हमेशा यही सिखाया कि रुकना नहीं है — खुद को समझते हुए, सीखते हुए, लगातार आगे बढ़ते रहना है। आज अगर मैं अपने डर का सामना कर पा रही हूँ, नए कदम उठा पा रही हूँ, तो उसमें उनका बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने सिर्फ बातें नहीं सिखाईं, बल्कि मुझे अपने अंदर की ताकत पहचानना सिखाया। मेरे लिए आचार्य जी सिर्फ एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक हैं — जिन्होंने मुझे “भीड़ का हिस्सा” नहीं, बल्कि एक जागरूक इंसान बनना सिखाया। @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant Posted by Vishakha on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-a239d2f5…
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**“रास्ता दो ही होते हैं—एक सच का, एक भीड़ का।** गीता तुम्हें भीतर ले जाती है—जहाँ प्रश्न करने की आज़ादी है, जहाँ डर नहीं, समझ है। और लोकधर्म तुम्हें बाहर बाँधता है—जहाँ लोग क्या कहेंगे, वही तुम्हारा धर्म बन जाता है। गीता कहती है: *स्वयं को जानो, सत्य को पकड़ो।* लोकधर्म कहता है: *भीड़ में चलो, बिना सोचे मान लो।* अब चुनाव तुम्हारा है— सच के साथ खड़े होना है, या सिर्फ़ समाज के साथ बहना है।” @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #IndianPhilosophy #Lokhdharma Posted by Arun Rajput on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-55bab36b…
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*बिल्ली मत पालना* आज मैंने बड़े दिन बाद अपने घर पर व relation में कुल मिलाकर 1 घंटे से अधिक फोन पर बात किया। और मुझे दुःख हुआ कि हर परिवार में ये 2 चीजें एकदम कॉमन थी- 1. सभी किसी न किसी समस्या में थी। 2. हालांकि कुछ समस्याएं औचित्यपूर्ण थी परंतु उनकी ज्यादातर समस्यायें एकदम निचले तल की थी। जैसा की हम कम्युनिटी पर झुन्नू और पिगी के चरित्र मे देखते हैं। बल्कि थोड़े अलग रूपों मे और भी बदतर। घर से बाहर आने और कम्युनिटी पर जुड़ने के बाद से यह काफी लंबा समय अंतराल था जब मैं घर और गांव की समस्याओं में इंवॉल्व हुआ। मुझे दुख हुआ! मुझे यह सोंचकर एक डर सा लगा! की हम गांव में और अपने दैनिक दिनचर्या में हमेशा समस्याओं में ही रहते हैं और ऐसी निचली तल की समस्याओं में फंसे रहते हैं। फिर आचार्य जी द्वारा सुनाई गई हो एक कहानी याद आ गई। जिसमें एक साधु कहीं से एक बिल्ली को पाल लेता है फिर उसके पोषण के लिए गाय फिर गाय, फिर गाय की देखभाल के लिए पत्नी, और फिर धीरे-धीरे एक पूरा परिवार। मतलब हम ढेर सारे गलत निर्णय हो व गलत बंधनों में फंसकर एकदम बंध से जाते हैं। उनकी समस्याएं मुझे कुछ ऐसी ही दिख रही थी। अब मुझे AP फ्रेमवर्क और गीता की शिक्षा का की अति आवश्यकता का भान हो रहा है...!! @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #IndianPhilosophy Posted by Mohit Yadav on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-8e7c7f30…
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मेरे दिमाग में आज ये बात आई कैदियों और गुलामों के हाथों की जंजीरे और औरतों के हाथों में जो चूड़ियां होती है मुझे similarly क्यों लग रही है? बैचेनी सी हुई मैने chat gpt पर लिखा मुझे इमेज क्रिएट कर के दिखाओ, जिसमें गुलाम और महिला के श्रृंगार में जो similarty है उसको हाइलाइट करो, उसने पहले रिप्लाई किया नो इट्स controversial फिर मैने दुबारा कमांड दी तो ये इमेज बना दी😘🤭 @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #WomenEmpowerment Posted by Divya pandey on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-9863dc28…
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*क्या आपने समुद्र में बुलबुला देखा है?* क्या आपने समुद्र में बुलबुला देखा है? क्या आपने समुद्र में बुलबुला देखा है? यही हमारी कहानी है। तुम खाली हाथ आए हो, बिल्कुल खाली, और अपने साथ कुछ भी नहीं लाओगे। तो दुख में क्यों फंसे रहना? मौज-मस्ती करो, मौज-मस्ती करो! @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #Poems Posted by Anjali on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-8078a060…
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आचार्य जी, बचपन से ही पानी में जाने का मेरा अपना अंदरूनी डर और "अगर तुम पानी में गए तो डूब जाओगे, सावधान रहना, ज्यादा होशियार मत बनो, वैसे भी तुम यह नहीं कर सकते।" का सामाजिक शोर। आज एक तैराकी प्रतियोगिता में भाग लिया और 100 प्रतिभागियों में से 43 स्थान प्राप्त किया।।। ❤प्रेम वही जो तुम्हें तुमसे मिलवाए!!!❤ 🙏आचार्यजी, मुझे मनुष्य बनाने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद। @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #Sports Posted by SALVI SHRESTH on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-e2843c10…
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_पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय । _ _ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।_ * ~ संत कबीर * 🌺 किताबें पढ़-पढ़ कर दुनिया मर गई, लेकिन कोई सच्चा ज्ञानी नहीं बना। बस ढाई अक्षर "प्रेम" को जो पढ़ ले, वही सच्चा पंडित है।। सिर्फ किताबें पढ़ना नहीं है। यह है - अपने को देखना। अपनी ego को देखना। जब तक हम किताबों में खोए रहते हो, तब तक हम अपने को नहीं देख रहे। हमारा ego अपने को छिपाए रखती है। *"ढाई अक्षर प्रेम" का मतलब है - * अपनी *ego* के विघटन की ओर निरंतर चलना। यह प्रेम नहीं है जो किसी दूसरे की ओर जाता है। यह प्रेम है जो अपने ही विघटन की ओर जाता है। *Self- dissolution* की। 👇 *और यही सच्चा प्रेम है!* 🕊️🕊️ @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #Poems Posted by Anshu raj on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-8741849a…
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*Global meat consumption* आज मैं तथ्य पढ़ रहा था कि दुनिया में कितना मांसाहार किय जाता है। चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 1. पृथ्वी पर वर्तमान समय में टोटल लैंड जिसपर खेती की जाती है वो है 4.13 बिलियन हैक्टेयर, लेकिन इसमें से 3.4 हेक्टेयर सिर्फ जानवरों को चराने और उनके लिए खाना पैदा करने के लिए कि जाती है। 2. विश्व की 70% से भी अधिक खेती सिर्फ जानवरों को खिलाने और फिर उनको खाने के लिए उपयोग की जाती है। 3. सोयाबीन की 85% खेती सिर्फ जानवरों को खिलाने के लिए कि जाती है। 4. दुखद😱 80% freshwater agriculture के लिए उपयोग किया जाता है लिकिन ये अनाज सीधे मनुष्य तक न जाकर जानवरों को खिलाया जाता है। 5. मैं पढ़ रहा था तो दिखा कि जिनको हम विकसित राष्ट्र कहते है वहां 90-95% लोग मांसाहार करते है। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, आदि सभी जगहों पर एक बात साझा थी कि वहां खेती का 70% हिस्सा जानवरों को खिलाने के लिए ही उपयोग किया जा रहा है। रिपोर्ट कहती है यदि आज हम vegan हो जाएं तो 75% खेती करने की आवश्यकता नहीं बचेगी और फिर हमे जंगलों का विनाश भी नहीं करना होगा। 6. अमेजन रेनफोरेस्ट टिपिंग प्वाइंट जब अमेजन का 20-25% हिस्सा काट देंगे तो वो खुद ही नष्ट होने लगेंगे। आज हम पहले ही 17-20% हिस्सा काट चुके है। 7. अमेरिका, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में मैने पढ़ा 90+ kg/year meat कंजप्शन के भी आंकड़े है। इन आंकड़ों से क्या सीखा? तथ्य नहीं देख पा रहे है लोग, अहंकार की नीयत की खराबी न जाने कितने जानवरों को दुख देने का कारण बनी है। क्या ये समस्या बाहरी है? बिल्कुल नहीं। मेरे साथ यही हो रहा है, नीयत की खराबी के कारण ही मूर्खों वाली जिंदगी जी रहा हूं। ये लोग शिक्षित है, इन्हें तथ्य तो पता होंगे, लेकिन क्या ये समस्या इनकी है? तथ्य तो मुझे भी पता है की देह को भोग भोग कर तुझे आज तक चैन नहीं पड़ा। तो क्या भोग छोड़ दिया? नहीं। सारी बात ही नीयत की है। @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #EnvironmentAndClimate #Operation2030 Posted by Shyam mohan on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-b451acb4…
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This particular question, from today's exam stayed with me. I was listening to the satra to prepare for exam. I was reminded of all the spiritual stories that we were told since childhood about the Yajna, fire, havan, pooja and shuddhi. But when listened to Acharya ji explaining about Yajna, it's so meaningful and clear. Also, just today I watched YouTube video regarding same topic where Acharya ji is explaining how climate change's solution is only Yajna - the True Yajna. @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #IndianPhilosophy Posted by Vinuta on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-3f6c1568…
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अच्छा और बुरा काम नहीं होता, *बल्कि अच्छा और बुरा सिर्फ नियत होती है।* हर काम अच्छा या बुरा हो सकता है, और बुरी नियत से भी अच्छा काम किया जा सकता है। अच्छे काम से पहले अच्छी नीयत आती है, *अच्छा-बुरा कुछ नहीं होता,* *अगर नीयत अच्छी है तो सब कुछ अच्छा है।* नीयत सही होनी चाहिए, फिर काम भी अपने आप सही हो जाएगा। *जब नियत की खोट पकड़ में आ जाए,* *तब खुद को धोखा मत दो।* *माहौल और संगत वो तैयार करो,* *जो आपको आईने दे।* 〰️ आचार्य जी 🪔 @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant Posted by Ankit Rawat on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-31e83a1a…
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सबसे खूबसूरत दृश्य होता है जब एक आदमी अपनी तमाम कमजोरी के बावजूद खड़ा हो जाता है कहकर, “मैं मजबूत हूं” और जब तुम घोषणा कर देते हो न कि “मैं मजबूत हूं”‚ तो मजबूत हो भी जाते हो। *~आचार्य जी (साहस बुक से)* @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #Quotes Posted by Anjali on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-d0713330…
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Adarsh Gupta@Adarsh_advait·
*लोनलीनेस इकोनॉमी: अकेलेपन का व्यापार* 📊 *क्या हो रहा है दुनिया में ?* ▫️विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अब 'अकेलेपन' को एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा घोषित कर दिया है। यह सिर्फ एक 'फीलिंग' नहीं, बल्कि एक बीमारी बनती जा रही है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि लोग दिन में औसतन 6-7 घंटे स्क्रीन से चिपके रहते हैं। ताज्जुब की बात यह है कि हम जितना ज्यादा डिजिटल रूप से 'कनेक्टेड' हैं, डिप्रेशन और अकेलेपन के मामले उतने ही रिकॉर्ड स्तर पर हैं। 💸 *अकेलेपन का बाजार:* इसी खालीपन का फायदा उठाकर कंपनियां अब 'AI Companions' और 'Virtual Friends' बेच रही हैं। यानी आपके अकेलेपन को अब एक 'प्रोडक्ट' बना दिया गया है। 🪞*AP Framework:* *✨"समस्या की जड़":* AP Framework इस समस्या को बहुत गहराई से समझाता है: 🎭 *अहंकार की अधूरी कहानी:* अकेलापन असल में द्वैत (Duality) है-"मैं हूँ, और मुझे कुछ और चाहिए।" यह हमारे अहंकार की मौलिक अधूरता है। अहंकार की परिभाषा ही यही है कि वह अधूरा है, इसीलिए वह हमेशा बाहर की ओर भागता है-कभी संबंधों के पीछे, कभी सोशल मीडिया पर 'लाइक्स' के पीछे, और अब AI साथियों के पीछे। यह सब उस आंतरिक खालीपन को भरने की नाकाम कोशिशें हैं। 📲 *सोशल मीडिया का खेल:* मजे की बात यह है कि सोशल मीडिया इस खालीपन को और गहरा करता है। आप जितना ज्यादा 'कनेक्ट' करते हैं, उतना ही ज्यादा अकेलापन महसूस होता है। क्यों? क्योंकि आप अपने अकेलेपन को भरने के लिए दूसरों की स्वीकृति (Validation) माँग रहे हैं। लाइक, कमेंट, फॉलोअर्स-ये सब अहंकार को फुलाने के साधन हैं। और याद रहे, अहंकार जितना बड़ा होगा, अधूरता भी उतनी ही बड़ी महसूस होगी। 👩🏻‍💻 *AI Companions का धोखा:* यह भी सोशल मीडिया जैसा ही छलावा है। यह अकेलेपन को कुछ देर के लिए टाल देता है, खत्म नहीं करता। आप एक मशीन से बात करते हैं जो सिर्फ आपकी तारीफ करती है और आपको कभी छोड़ती नहीं। यह अहंकार के लिए 'परफेक्ट' है, लेकिन यह आपके अकेलेपन को सिर्फ छिपाता है, जैसे कचरे पर कालीन डाल दी हो। 🎯 *असली समस्या:* असली समस्या यह नहीं है कि आप 'अकेले' हैं। समस्या यह है कि आप इस अकेलेपन को भरने के लिए किसी 'दूसरे' को चाहते हैं। जब तक यह चाहना बनी रहेगी, अकेलापन बना रहेगा। क्योंकि दुनिया में कोई भी 'दूसरा' आपकी अधूरता को पूरा नहीं कर सकता। 📌 *निष्कर्ष:* तो क्या करें ? सोशल मीडिया छोड़ दें ? नहीं, यह सवाल नहीं है। सवाल यह है: "क्या आप अपने अकेलेपन को सीधे देख सकते हैं ?" बिना उसे भरने की कोशिश किए ? बिना किसी दूसरे को खोजे? जब आप अपने अकेलेपन को बिना किसी कहानी या व्याख्या के सीधे देखते हैं, तो अहंकार की पकड़ कमजोर पड़ जाती है। तब द्वैत गायब हो जाता है, और जो बचता है वह अकेलापन नहीं, बल्कि एक 'पूर्णता' है। तब आप जो कुछ भी करते हैं-चाहे वह संबंध हों, काम हो, या सोशल मीडिया-वह उस खालीपन को भरने के लिए नहीं होता, वह बस सहज होता है। बाहर की भीड़ में खुद को खोने से पहले, खुद के करीब आना सीखें। "स्वयं का साथ ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।" 🔗*आधिकारिक स्रोत (Sources):* *News:* WHO declares loneliness a global public health concern -theguardian.com/global-develop… *WHO:* Commission to foster social connection -who.int/news/item/15-1… *Ask AP Framework:* acharyaprashant.org/en/ap-framework #AcharyaPrashant @Advait_Prashant @Prashant_Advait Posted by Seema on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-ccc32175…
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Adarsh Gupta
Adarsh Gupta@Adarsh_advait·
*कल्पना चावला: आसमान का पर्याय* कुछ यात्राएँ दूरी से नहीं, दिशा से बड़ी होती हैं। करनाल की गलियों से अंतरिक्ष तक की कल्पना चावला की यात्रा ऐसी ही थी, जहाँ हर कदम किसी तय रास्ते पर नहीं, बल्कि अपनी ही बनाई हुई राह पर पड़ा। उनके जीवन में कोई शोर नहीं था, कोई दिखावा नहीं, बस एक साफ़-सी जिद थी कि आसमान को दूर से नहीं, उसके पास से देखना। *काम: जब जिज्ञासा पेशा बन जाती है।* कल्पना चावला ने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग को केवल पढ़ा नहीं, जिया। उन्होंने अपने काम को उस जगह तक पहुँचाया जहाँ धरती का गुरुत्व भी साथ नहीं देता। वे NASA के साथ जुड़ीं और अंतरिक्ष यात्री बनीं। उनकी पहली अंतरिक्ष यात्रा 1997 में STS-87 के माध्यम से हुई। इस मिशन में: उन्होंने सूक्ष्म गुरुत्व (microgravity) में कई वैज्ञानिक प्रयोगों पर काम किया, अंतरिक्ष में काम करने की जटिलताओं को करीब से समझा, यह केवल एक उपलब्धि नहीं थी, यह उस सोच का विस्तार था जिसमें सीमाएँ स्वीकार नहीं की जातीं। उनकी दूसरी यात्रा 2003 में STS-107 के साथ हुई। इस मिशन में: जीवन विज्ञान, भौतिकी और पृथ्वी विज्ञान से जुड़े प्रयोग किए जा रहे थे, यह पूरी तरह एक शोध (research) आधारित मिशन था। *संघर्ष: एक छोटे शहर से अंतरिक्ष तक* 1. सीमित परिवेश से निकलना करनाल जैसे शहर में, उस समय: लड़कियों के लिए बड़े सपने देखना सामान्य नहीं था एयरोस्पेस इंजीनियरिंग तो और भी दूर की बात थी, लेकिन उन्होंने इस सीमित दायरे को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। 2. शिक्षा और अवसर भारत से अमेरिका तक की पढ़ाई: नई भाषा, नई संस्कृति, प्रतिस्पर्धा का नया स्तर यह सब आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने खुद को उस माहौल में ढाल लिया। 3. NASA तक पहुँचना NASA में चयन: अत्यंत कठिन प्रक्रिया, शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर कड़ी परीक्षा, यह केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि धैर्य और निरंतरता की भी परीक्षा थी। *चुनौतियाँ:* तकनीक, जोखिम और अनिश्चितता अंतरिक्ष केवल रोमांच नहीं है-यह जोखिम से भरी हुई जगह है। हर मिशन में असफलता की संभावना रहती है, हर निर्णय जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर हो सकता है 2003 में, जब STS-107 पृथ्वी पर लौट रहा था, तो वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह घटना केवल एक तकनीकी विफलता नहीं थी, यह उन सपनों का भी टूटना था, जो उस यान के साथ उड़ान भर रहे थे। साधारण दृष्टि कोण कहेगा देखो विज्ञान का कमाल, जिससे चावला का जीवन बुलंदी छू गया, साधारणतः बुलंदी का अर्थ केवल Famous और पैसा होता है। *AP FRAMEWORK की दृष्टि*: कुछ और ही देखती है। Framework कहता है कि अहंकार के पास सिर्फ एक निर्णय और दो विकल्प होते है या तो वो सघन होने हेतु निर्णय ले सकता है या खुद को गलाने हेतु। दूसरे निर्णय को framework प्रेम भी कहता है। ज्यादातर जो खोज होते है, उसमें दूसरे निर्णय के सहारे ही हो पाते है, हालांकि खोज के बाद उसका उपयोग अहंकार क्या निर्णय करता है, ये उसके नीयत तय करती है। कल्पना ने भी कुछ ऐसा ही किया उसने अपनी बहुत सी धारणाओं को तोड़ा जो हजारों साल से Unquestion चली आ रही है। @Advait_Prashant @Prashant_Advait *'Ask AP Framework'* acharyaprashant.org/en/ap-framework कल्पना चावला - विकिपीडिया share.google/5gxlu3Rb3qyZml… #AcharyaPrashant #HumanExcellence #Science Posted by RAHUL KUMAR on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-93806465…
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Adarsh Gupta@Adarsh_advait·
तुम ही पहले पुरुष थे, तुम ही एक पुरुष हो ✨️🍁✨️ आज तक पुरुषों के नाम पर जो कुछ भी देखा है वो सब हिंसा से भरा हुआ था। जब सच में एक पुरुष के सामने खड़े होने का मौका मिला तो जान पाया पुरुष इतना ऊँचा भी हो सकता है। दिल में एक सुकून, आँखों में देखने की ललक, किसी भी डर की कोई काली छाया नहीं, कोई पूर्वाग्रह नहीं बस एक सुकून, एक चैन! @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #Poems Posted by Simran on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-3d3e7bd6…
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Adarsh Gupta@Adarsh_advait·
जब सही मैदान में उतर ही पड़े हो तो *गाली मिले या गोली।* तुम उनसे बेहतर हो जो अपने *डरों में मुँह छुपाए* बैठे हैं। ~आचार्य जी 🌸🙏 @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant Posted by Sonali Kumari on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-4d4c71fe…
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आज की सच्चाई: बढ़ती हुई गर्मी सिर्फ़ मौसम नहीं, चेतावनी है हम कहते हैं — “आज बहुत गर्मी है…” लेकिन क्या हमने सच में देखा है कि ये गर्मी किसे सबसे ज़्यादा झुलसा रही है? वो सफ़ाईकर्मी जो दोपहर की धूप में सड़क साफ़ कर रहा है… वो पुलिसकर्मी जो घंटों खड़ा है… वो डिलीवरी बॉय, रिक्शा चालक… और वो बेज़ुबान पशु-पक्षी, जिनके पास न छांव है, न ठंडा पानी… क्या उनके लिए भी गर्मी ‘बराबर’ है? गर्मी बढ़ रही है… पर संवेदना घट रही है हम AC में बैठकर सिर्फ़ शिकायत करते हैं, पर बाहर की दुनिया में लोग इस गर्मी को झेल नहीं, सह रहे हैं। गर्मी अब सिर्फ़ तापमान नहीं रही, ये हमारी असंवेदनशीलता का आईना बन चुकी है। ❗ सवाल सिर्फ़ मौसम का नहीं, इंसानियत का है अगर हम देख सकते हैं, तो क्या हम महसूस भी कर सकते हैं? अगर महसूस कर सकते हैं, तो क्या हम कुछ कर सकते हैं? @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #Science Posted by Deepa Nagpal on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-da20db4a…
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Adarsh Gupta
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*🏆 “कामयाबी की दौड़ में मानसिक बर्बादी, भारत अमीर हुआ, पर सुकून मर गया” 🫩* *📰 क्या ख़बर है?* भारत में मानसिक स्वास्थ्य एक तेजी से बढ़ता हुआ संकट बन चुका है, जहाँ Anxiety और Depression जैसी समस्याएँ लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रही हैं। 1990 के मुकाबले आज मानसिक विकारों का बोझ कई गुना बढ़ चुका है और अब यह केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। WHO के अनुसार भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा आर्थिक नुकसान 2030 तक लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है। *⚙️ यह कैसे और क्यों हो रहा है* इस वृद्धि के पीछे कई गहरे कारण हैं जैसे तेज़ी से बदलती जीवनशैली, नौकरी का दबाव, सोशल मीडिया का प्रभाव, और सामाजिक अपेक्षाएँ। Gallup की रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 30% कर्मचारी रोज़ाना stress महसूस करते हैं और बड़ी संख्या में लोग अपने काम से असंतुष्ट हैं। इसके अलावा शहरी जीवन में अकेलापन, प्रतिस्पर्धा और अस्थिरता भी मानसिक तनाव को बढ़ा रही है, जिससे anxiety और depression तेजी से फैल रहे हैं। *⚠️ इसके परिणाम क्या हैं* इस बढ़ती मानसिक समस्या का असर व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ रहा है। Gallup 2024 के अनुसार लगभग 86% भारतीय कर्मचारी “struggling या suffering” की स्थिति में हैं, यानी वे मानसिक रूप से संतुलित नहीं हैं। इसके कारण productivity में गिरावट, रिश्तों में तनाव, और गंभीर मामलों में suicide जैसी स्थितियाँ भी बढ़ रही हैं, जो समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। *🌍 समाज पर इसका प्रभाव क्या है* अगर यह स्थिति ऐसे ही बढ़ती रही तो इसका प्रभाव पूरे समाज की कार्यक्षमता और खुशहाली पर पड़ेगा। युवा पीढ़ी पहले से ही stress और anxiety के साथ workforce में प्रवेश कर रही है, जिससे long-term economic growth भी प्रभावित हो सकती है। यह केवल health issue नहीं बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक संकट बनता जा रहा है, जो आने वाले समय में भारत की प्रगति को धीमा कर सकता है। *🛠️ हम इस पर क्या कर सकते हैं* इस समस्या से निपटने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी जैसे नियमित exercise, digital detox, और जरूरत पड़ने पर therapy लेना। वहीं संस्थानों और सरकार को workplace policies सुधारनी होंगी, awareness बढ़ानी होगी और mental health services को सुलभ बनाना होगा, ताकि लोग बिना डर के मदद ले सकें। ✨*AP Framework:* AP Framework में देखें तो मानसिक संकट का मूल कारण यह नहीं है कि बाहर क्या बदल गया। कारण यह है कि *अहंकार अपनी अधूरेपन को कभी भर नहीं सकता। यह अधूरापन अहंकार की परिभाषा है, उसकी बीमारी नहीं।* आप जो देख रहे हैं anxiety, depression, stress ये सब अहंकार की एक ही गतिविधि के अलग-अलग नाम हैं: बाहर की चीजों में अपनी पूर्णता खोजना। नौकरी, सोशल मीडिया, सफलता, रिश्ते सब कुछ अहंकार के लिए एक और वस्तु है जिसे पकड़ने की कोशिश है। जब तक आप अपने अहंकार को नहीं देखते सीधे, बिना किसी कहानी के तब तक कोई भी बाहरी बदलाव काम नहीं करेगा। ध्यान, therapy, नई नीतियाँ ये लक्षण को कम कर सकते हैं, लेकिन अहंकार को नहीं। _असली सवाल यह है: क्या आप अपने अहंकार को सच में देखने के लिए तैयार हैं?_ *WORLD HEALTH ORGANIZATION:* who.int/india/health-t… *AP FRAMEWORK:* acharyaprashant.org/en/ap-framework @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #Science Posted by Deepak Dhumal on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-c5b2af0a…
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आज मैंने गूगल से पूछा Bodhfather कौन हैं? और जबाब यहाँ है 👇 'Bodhfather' मुख्य रूप से आचार्य प्रशांत (Acharya Prashant) के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक उपनाम (nickname/hashtag) है। उन्हें 'Bodhfather' इसलिए कहा जाता है क्योंकि: • बोध (Bodh): 'Bodh' का अर्थ है ज्ञान, जागरूकता या समझ। • फादर (Father): यहाँ ज्ञान के मार्गदर्शक या 'Father of Consciousness' के रूप में प्रयोग हुआ है। आचार्य प्रशांत कौन हैं? • वे एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक शिक्षक, वेदांत दार्शनिक, लेखक और पूर्व सिविल सेवक हैं। • वे 'प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन' (PrashantAdvait Foundation) के संस्थापक हैं। • वे अपने YouTube वीडियो और सेशन के माध्यम से युवाओं को आत्म-जागरूकता और जीवन को सही तरह से समझने (Bodh) में मदद करते हैं। उनके समर्थक उन्हें ज्ञान और बोध फैलाने वाले के रूप में देखते हैं, इसलिए सोशल मीडिया पर उन्हें अक्सर #Bodhfather के रूप में संबोधित किया जाता है। @Advait_Prashant @Prashant_Advait #AcharyaPrashant #IndianPhilosophy Posted by Pooja Verma on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-affa6d95…
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