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Katılım Şubat 2013
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Swami Avdheshanand
Swami Avdheshanand@AvdheshanandG·
आदर्श्यं भावरूपं च सर्वमेतच्चिदात्मकम्। सावधानतया नित्यं स्वात्मनं भावयेद्बुधः।।१४१।। ("अपरोक्षानुभूति") अद्वैत वेदान्त के परम रहस्य का अत्यन्त सूक्ष्म एवं सर्वग्राही निरूपण इस श्लोक में किया गया है। यहाँ भगवद्पाद भाष्यकार भगवान् आदि शंकराचार्य साधक को यह बोध कराते हैं कि जो कुछ दृश्य (आदर्श्य) है और जो अदृश्य, भावात्मक या विचाररूप (भावरूप) है - वह सम्पूर्ण जगत् वस्तुतः चैतन्यस्वरूप ही है। इस सत्य का निरन्तर, सजग एवं सावधान भाव से चिन्तन करना ही ज्ञानी पुरुष का नित्य कर्तव्य है। प्रथम पद “आदर्श्यं भावरूपं च” द्वारा समस्त अनुभूत जगत् को दो वर्गों में विभाजित किया गया है - (१) आदर्श्य - जो इन्द्रियों द्वारा प्रत्यक्ष देखा या अनुभव किया जाता है; जैसे - स्थूल जगत्, शरीर, प्रकृति आदि; (२) भावरूप - जो सूक्ष्म है, जैसे विचार, भावनाएँ, संकल्प-विकल्प, स्मृतियाँ, कल्पनाएँ आदि। इस प्रकार स्थूल और सूक्ष्म दोनों स्तरों पर जो कुछ भी अनुभव के क्षेत्र में आता है, वह इस शिक्षण का विषय है। द्वितीय पद “सर्वमेतच्चिदात्मकम्” इस सम्पूर्ण विविधता के अन्तर्निहित एकत्व को उद्घाटित करता है। यहाँ यह प्रतिपादित किया गया है कि दृश्य और अदृश्य दोनों का वास्तविक स्वरूप चैतन्य ही है। जैसे स्वप्न में देखे गए समस्त दृश्य, पात्र और घटनाएँ स्वप्नद्रष्टा के मन से ही उत्पन्न और उसी में स्थित होते हैं, वैसे ही यह सम्पूर्ण जाग्रत् जगत् भी उस एक अद्वितीय चैतन्य से ही प्रकाशित और अधिष्ठित है।यह चैतन्य न केवल साक्षी है, अपितु वही सबका आधार, अस्तित्व और प्रकाशक भी है - “येन सर्वमिदं प्रकाशते”। किन्तु इस सत्य का बौद्धिक ज्ञान मात्र पर्याप्त नहीं है। श्लोक का तृतीय भाग “सावधानतया नित्यं” यह इंगित करता है कि इस तत्त्वबोध को साधक को अत्यन्त सजगता, सावधानी और निरन्तरता के साथ अपने जीवन में धारण करना चाहिए। ”सावधानता’ यहाँ केवल बाह्य सतर्कता नहीं, बल्कि आन्तरिक जागरूकता (Awareness) का बोध कराती है - जहाँ साधक प्रत्येक क्षण अपने अनुभवों को इस दृष्टि से देखता है कि उनका आधार केवल चैतन्य है, न कि कोई स्वतंत्र सत्ता। अन्तिम पद “स्वात्मनं भावयेद्बुधः” इस साधना की परिपूर्णता को प्रकट करता है। ‘बुधः’ अर्थात् विवेकी, ज्ञानी साधक अपने स्वात्मस्वरूप का निरन्तर चिन्तन करता है। यह ‘भावना’ कोई कल्पना नहीं, बल्कि स्वरूप में प्रतिष्ठा है। साधक बार-बार यह अनुभव करता है - “मैं न शरीर हूँ, न मन हूँ, न विचार हूँ; मैं तो वह शुद्ध, अखण्ड, साक्षी चैतन्य हूँ, जो इन सबका आधार है।” यहाँ अद्वैत वेदान्त का एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त प्रकट होता है अध्यारोप-अपवाद। प्रारम्भ में जगत् को सत्य मानकर उसके आधार का अन्वेषण किया जाता है (अध्यारोप), और अंततः यह समझा जाता है कि जगत् का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है, वह केवल चैतन्य का आभास है (अपवाद)। इस प्रक्रिया के पूर्ण होने पर केवल आत्मस्वरूप का अखण्ड प्रकाश ही शेष रहता है। इस श्लोक में निदिध्यासन की पराकाष्ठा का निर्देश है - जहाँ साधक निरन्तर, अखण्ड भाव से अपने आत्मस्वरूप में स्थित रहता है। यह स्थिति ‘स्मृति’ या ‘चिन्तन’ से आगे बढ़कर ‘स्वाभाविकता’ में परिवर्तित हो जाती है - जहाँ चैतन्य का अनुभव कोई प्रयास नहीं, बल्कि स्वभाव बन जाता है। अन्ततः, यह श्लोक हमें यह शिक्षा देता है कि सम्पूर्ण जगत् - चाहे वह दृश्य हो या अदृश्य केवल चैतन्य का ही विस्तार है। इस सत्य का निरन्तर, सजग और एकनिष्ठ चिन्तन ही साधक को उस परम अवस्था में प्रतिष्ठित करता है, जहाँ वह स्वयं को समस्त भेदों से परे, शुद्ध, नित्य, अद्वैत आत्मस्वरूप के रूप में अनुभव करता है। यही "अपरोक्षानुभूति" की परिपूर्णता है कि जहाँ जानने वाला, जाने जाने वाला और जानने की प्रक्रिया तीनों का विलय होकर केवल एकमेव, स्वप्रकाश चैतन्य ही शेष रह जाता है। #अपरोक्षानुभूति #अद्वैत_वेदान्त #AdvaitVedanta #स्वाध्याय #AvdheshanandG_Quotes
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Akanksha Parmar
Akanksha Parmar@iAkankshaP·
Divine Abhishekam and Shringar aarti darshan of Kashi Vishwanath Mahadev at Varanasi. Har Har Mahadev
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Pakistani♥️
Pakistani♥️@Pak_islamist·
@ShivAstra_ Hahahah that's our history, we ruled the subcontinent for almost a thousand years and we protected this land from Mangols. You hidus always remained our slaves. Then Britishers enslaved you. Now Zionists rule you! So who the f are you pajeets?
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Zigana 🇵🇰
Zigana 🇵🇰@ZiganaKhan·
@Decodingchaos3 lol :) Our roots are Indus Valley, not Hindu Brahmin. That Indus Valley, predates Hinduism by over 2,500 years. So we are older than your entire religious and 'national' framework. Fact is, you're retrofitting your identity onto a far superior, pre-Vedic culture.
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Zigana 🇵🇰
Zigana 🇵🇰@ZiganaKhan·
Made in Pakistan, around 1,800 years ago. This statue from the Kushan Empire shows an insane level of craftsmanship. Every muscle, robe fold & chain was carved by hand with precision. PS: Ancient Pakistanis were ripped thanks to a high-protein, meat-based diet #AncientPakistan
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Shyam
Shyam@trading_wise·
@JigneshTrade Interesting! Even if it gives out one of the best strategy. Most people don't have a trading strategy problem; they have a discipline problem
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AdwaitanWay
AdwaitanWay@AdwaitanWay·
@JigneshTrade hello, I hav opened the GitHub link of urs I am not a developer so I need help to backtest these strategies. Have you backtested these strategies? Or you can give reference of some1 who can help me to backtest this. Reply will be appreciated 🙏
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Amitabh Bachchan
Amitabh Bachchan@SrBachchan·
T 5744(i) - The Ancient Hindu Vishnu Temple in Abbas Bandar, Iran .. Built in 1892 during the Qajar era ..
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