
🅰️JaY@आज़ाद
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🅰️JaY@आज़ाद
@Ajay2uni
Theatre Artist@Actor सच🏹 बोलने और सुनने📻 के लिए ग़ज़ब की हिम्मत लगती है।




'मैं चुपचाप जा रहा था . मुझे गालियां दी . मारा और फोन तोड़ दिया ' रोते -रोते ये लड़का जो कह रहा है , सुनिए.














मेरे सरकारी आवास सफदरजंग लेन के बाहर सड़क पर @RahulGandhi जी के धरने के कारण मेरे छोटे बेटे को परीक्षा सेंटर में आधे घंटे विलंब से पहुँचना पड़ा? शायद इसकी ज़िम्मेदारी @INCIndia पार्टी लेगी ?

Times Now के पत्रकार देव कोटक की आज जंतर मंतर पर पिटाई हुई है। कपड़े फाड़ दिए गए। भीड़ ने उनके चैनल पर "गोदी मीडिया" होने का आरोप लगाया। सोचिए, TV एंकर एजेंडा सेट करते हैं और भुगतना फील्ड रिपोर्टरों को पड़ता है। सूत्रों से पता चल रहा है कि साथी की पिटाई के बाद देश की "सबसे बड़ी पत्रकार" नविका कुमार अब खुद जंतर मंतर पर मोर्चा संभालने जा रही हैं।

कल जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान टाइम्स नाउ नवभारत की पत्रकार ज्योति मिश्रा के साथ कथित अपहरण और दुर्व्यवहार की खबर बेहद गंभीर और निंदनीय है। लोकतांत्रिक आंदोलन की आड़ में यदि किसी उपद्रवी तत्व ने किसी महिला पत्रकार के साथ अभद्रता या हिंसा की है, तो ऐसे लोगों के लिए किसी भी प्रकार की सहानुभूति नहीं हो सकती। उग्र भीड़ से अपनी जान बचाने के लिए ज्योति मिश्रा को एक बैंक में लगभग तीन घंटे तक शरण लेनी पड़ी। इस दौरान कथित रूप से पीसीआर टीम को भी उनकी मदद के लिए पहुँचने से रोका गया, उन पर पथराव किया गया और वे लंबे समय तक बैंक के भीतर फँसी रहीं। अंततः डीसीपी रोहित राजबीर स्वयं मौके पर पहुँचे और उनका सुरक्षित रेस्क्यू कराया। पत्रकार की सुरक्षा पर हमला लोकतंत्र पर हमला है। दोषी चाहे किसी भी संगठन, समूह या विचारधारा से जुड़े हों, उनकी निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाएँ तो कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। आंदोलन का अधिकार लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उपद्रव, हिंसा और महिला पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। @jyotimishra999 @RubikaLiyaquat @TNNavbharat













