अजयेंद्र राजन शुक्ल / Ajyendra Rajan Shukla 🇮🇳

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अजयेंद्र राजन शुक्ल / Ajyendra Rajan Shukla 🇮🇳

अजयेंद्र राजन शुक्ल / Ajyendra Rajan Shukla 🇮🇳

@AjayendraRS

Journalist (Ex… NBT, News 18, Prabhat Khabar, Bhaskar group, Jagran group, Amarujala, Etv, Hindustan)

Lucknow, India Katılım Eylül 2009
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अजयेंद्र राजन शुक्ल / Ajyendra Rajan Shukla 🇮🇳
जय सियाराम जय हो हनुमान स्वामी लखनऊ में प्रभु सेवा के नाम पर भंडारा करने वाले सभी सुधीजन ध्यान दें.... सेवा पूरी होने के बाद उस जगह की सफाई भी सुनिश्चित कर दीजिए.... क्योंकि आम इंसान का पेट भरने के साथ ही सार्वजनिक जगह की साफ-सफाई भी असली सेवा है। @LMC_Lucknow @MCorpLucknowOff
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आप यह नहीं कह सकते कि मैं किसी पद का उपयोग कर रही हूं।अब मैं एक स्वतंत्र पक्षी हूं। मैंने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में लगाया है। इन 15 वर्षों में मैंने एक पैसा भी पेंशन नहीं लिया और न ही मैं कोई वेतन ले रही हूं।”
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अनुरोध किया कि क्या वे आज ही आ सकते हैं, लेकिन मैंने उनसे कहा कि वे कल आएं, इसलिए वे कल आएंगे। एक-एक करके सभी आएंगे।मेरा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है—मैं INDIA टीम को एक छोटे कार्यकर्ता की तरह मजबूत करूंगी। अब मेरे पास कोई पद नहीं है, इसलिए मैं एक सामान्य नागरिक हूं।...
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“सोनिया जी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, हेमंत सोरेन—सभी ने मुझे फोन किया।INDIA गठबंधन के सभी साथियों ने कहा कि वे पूरी तरह और पूरी मजबूती से मेरे साथ हैं। मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में हमारी एकजुटता और मजबूत होगी।अखिलेश ने मुझसे...
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बंगाल जीत के असली सूत्रधार @vnsrcp
Navneet Mishra@navneetmishra99

बंगाल में जीत के पीछे एक गुमनाम चेहरे की भी बात हो जाए…. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणब दा को 2018 में आरएसएस के नागपुर कार्यक्रम में जाने के लिए राज़ी करने के पीछे संघ के एक गुमनाम मगर धुरंधर प्रचारक हैं। नाम है- रामचंद्र पांडेय। बंगाल से आने वाले कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे प्रणव दा के नागपुर जाने की घटना ने बंगाली भद्रलोक में संघ और भाजपा के प्रति भरोसा भर दिया। बंगाल में बीजेपी की जीत के यूँ तो बहुत से सूत्रधार हैं। फ़्रंट पर कार्य करने वालों को दुनिया जानती है, किंतु पांडेय जी का नाम पहले भी गुमनाम था, आज भी गुमनाम है। मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को मिर्जापुर में आरएसएस का जिला कार्यवाह बनाकर पहली बार संगठन सिस्टम में सक्रिय करने वाले रामचंद्र जी हैं। अब बात बंगाल में उनके योगदान की। 2016 विधानसभा चुनाव के बाद आरएसएस ने अपने इस धुरंधर प्रचारक का केंद्र कोलकाता बनाकर उन्हें पूरे राज्य में संगठन को चुस्त-दुरुस्त रखने की कमान सौंपी। यह रामचंद्र पांडेय थे, जिन्होंने सिलिगुड़ी से लेकर बर्दवान, आसनसोल तक, कोलकाता के गली-कूचों से लेकर मुर्शिदाबाद, मालदा तक आम लोगों में छिपे बीजेपी और संघ कार्यकर्ताओं की कड़ियों को जोड़ना शुरु किया। कांग्रेस, टीएमसी और लेफ्ट के उन लोगों से संपर्क साधा जो बंगाल की दुर्दशा से अपने संगठनों में अंसतुष्ट थे। टीएमसी में सबसे मुखर सुवेंदु अधिकारी से लेकर प्रणब दा के संपर्क-सूत्र मनोज कुमार तक रामचंद्र पांडेय ने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि का इस्तेमाल किया, और यहां तक कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब दा को आरएसएस के नागपुर कार्यक्रम तक पहुंचा कर बंगाली भद्रलोक और कांग्रेस के काडर में आरएसएस और बीजेपी के प्रति हर तरह के भरोसे और आश्वस्ति से भर दिया। उसी समय भविष्य के बंगाल की इबारत वस्तुतः रामचंद्र पांडेय के संपर्कों ने रच दी थी। यह सारा कार्य रामचंद्र पांडेय के संपर्क सूत्रों से आरएसएस के नागपुर केंद्र ने साकार कर दिखाया। रामचंद्र पांडेय कोई साधारण नाम नहीं है। 1967 में जब मोदीजी ने प्रचारक जीवन शुरु किया, उसी समय रामचंद्र पांडेय ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के अपने गांव को अलविदा कह दिया। वह प्रो. राजेंद्र सिंह के संपर्क में आए और फिर आरएसएस के होकर रह गए। 1967 से 2000 तक रामचंद्र पांडेय ने 33 साल अपनी जवानी पूर्वी यूपी से लेकर अवध, बुंदेलखंड आदि इलाकों में आरएसएस को मजबूत करने में खपा दी। बीजेपी के अनेक संगठन महामंत्री रामचंद्र पांडेय के द्वारा प्रशिक्षित हैं। रामचंद्र जी आज भी गुमनाम तरीके से रहते हैं। दो जोड़ी कपड़ों में वह अपना साल गुजार देते हैं। उनकी साधारण चप्पल और निरंतर चलते रहने की उनकी इच्छाशक्ति ने उन्हें आरएसएस के सभी प्रचारकों में सबसे जमीनी स्तर पर खड़ा किया है। कोलकाता का कोई गली-कूचा नहीं, किसी आरएसएस और पुराने बीजेपी कार्यकर्ता का घर नहीं, जहां रामचंद्र पांडेय ने प्रवास न किया और बैठकी नहीं लगाई। उनके साथ इस कार्य में आरएसएस के युवा प्रचारकों की पूरी टोली दिन-रात संपर्क में जुटी रही। आरएसएस की घोषवादकों की टीम के वह पूरे देश के मार्गदर्शक संचारक हैं। और तो और, उत्तर प्रदेश के अवध, गोरखपुर, काशी, बुंदेलखंड के इलाकों में अधिकांश आरएसएस कार्यकर्ताओं के निर्माण में यदि सबसे ज्यादा सक्रिय भूमिका किसी ने निभाई तो 1967 से 2000 के मध्य रामचंद्र पांडेय ने निभाई। सूत्र बताते हैं कि बीजेपी में नेताओं के चयन से लेकर टिकट बंटवारे तक में युवाओं को चुन चुनकर रामचंद्र पांडेय ने आगे किया और केंद्रीय नेतृत्व को सही सूचनाएं दीं। बीते 10 साल में रामचंद्र पांडेय ने पश्चिम बंगाल की जमीन के चप्पे चप्पे को छान मारा। बदलाव की बयार ऐसे ही आरएसएस कार्यकर्ताओं के बूते भी बीजेपी ने बंगाल में खडी की है।

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सोशल मीडिया पर क्रांति ठीक है... लगातार प्रेस कांफ्रेंस और बयानबाजियां भी ठीक हैं लेकिन नेताजी चुनाव जमीन पर लड़कर जीते जाते हैं.... पहले भी, आज भी और आगे भी....
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समय बड़ा बलवान जिन ममता बनर्जी ने वामपंथियों के किले को अकेले दम पर ढहा दिया था, आज 15 साल बाद अपने ही गढ़ नंदीग्राम में 15 हज़ार वोटों से हार गईं। शुभेंदु अधिकारी के हाथ उनकी ये लगातार दूसरी हार है…
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Dr. Irfan Ansari
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कोलकाता में एक होटल में नाश्ते के दौरान भारतीय जनता पार्टी के एक सांसद ने मुझसे पहले ही कहा था कि भाजपा 200 पार करेगी। सवाल यह है कि उन्हें यह आंकड़ा पहले से कैसे मालूम था?
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