
MUHAMMAD ANAS
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MUHAMMAD ANAS
@Alhamd313
Hard work and will power hold key to success राजनितिक और धार्मिक मतभेद अलग हो सकते हैं, लेकिन हम सब भारतीय हैं। सर्व धर्म सम्मान 🇮🇳
ارض السماء Katılım Haziran 2022
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सहारनपुर में इंडेन गैस एजेंसी जिसका नाम सनबीम गैस एजेंसी है,
उस एजेंसी के मैनेजर उपभोक्ताओं के गैस मांगने पर उनसे बदतमीजी और दबंगई दिखाते हुए नजर आ रहे हैं आप देख सकते हैं,
Source Instagram Link in Comment Section 👇
@indane_gas
@PetroleumMin
@IOCL_NAO
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#Assalamu_Alaikum
अल्लाह तआ़ला का इरशाद है:
क्या ग़ज़ब है कि तुम लोगों को तो नेकी का हुक्म करते हो और अपनी ख़बर भी नहीं लेते,
हालांकि तुम किताब की तिलावत करते हो जिसका तकाज़ा ये था कि तुम इल्म पर अ़मल करते तो फिर किया तुम इतना भी नहीं समझते ?
सूरह_अल-बक़रह_44
अल क़ुरआन
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नमाज़ के साइंस्टिफिक फायदे
1. मुसले पर खड़े होकर नमाज की नियत दिल ओ दिमाग {मन - मस्तिष्क} को केंद्रित करती है और एकाग्रता बढाती है। इससे तनाव कम होता है। दिमाग की अल्फा तरंगें एक्टिव होती है जो रिलेक्सन देती है।
2. नियत के बाद नाभि पर हाथ बांधकर एकाग्रता के साथ सूरह अल फातिहा पढ़ने के लिए थोड़ी देर खड़ा रहना रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने की एक्सरसाइज होती है।
इस दौरान पैरों, कमर और कंधों की मांस पेशियां एक्टिव होती है। खून का बहाव बेहतर होता है। दिमाग में ऑक्सीजन बेहतर तरीके से पहुंच पाता है इससे हमारी यादाश्त भी बेहतर होती है। ये हमारे कंट्रोल और फोकस को बढ़ाता है।
3. फिर “अल्लाह हु अकबर” कहते हुए कमर को एक दम 90⁰ झुकाते हुए घुटनों पर हाथ रखकर तीन बार “सुब्हाना रब्बियल अज़ीम” कहना पड़ता है। इसे रुकूअ कहते है।
इस दौरान आपके पैरों, जांघों, कूल्हों और कमर की मांस पेशियां एक दम खींची रहती है इससे शरीर को थोड़ा सा लचीलापन मिलता है जिससे रक्त संचरण बेहतर होता है। किडनी पर थोड़ा सा हल्का दबाव पड़ने से पथरी जैसी बीमारी का खतरा थोड़ा कम हो जाता है।
4. रुकूअ से वापस सीधा खड़े होने पर मांस पेशियां संतुलन बना लेती है। दिल की धड़कन नॉर्मल हो जाती है। ये ट्रांजिशन हमारी बॉडी को रीसेट करने जैसा होता है।
5. रुकूअ से खड़ा होने के बाद सीधे सजदे में जाना होता है। सजदे में हमारा सिर हमारे दिल से नीचे जमीन पर होता है।
इससे दिमाग में रक्त और आक्सीजन का प्रवाह तेज होता है। इससे यादाश्त और एकाग्रता बढ़ती है साथ ही ब्रेन हेमरेज का खतरा भी कम होता है। इस दौरान भी घुटनों, कमर और उंगलियों की मांस पेशियां खींचती है जो बाद में लचीलेपन का लाभ देती है जिससे शरीर को आराम महसूस होता है।
6. सजदे से उठकर थोड़ी देर बैठ कर “अत्तहिय्यात.... दुरुद शरीफ” पढ़ना पड़ता है। थोड़ी देर इस पोजिशन में बैठने से पाचन तंत्र बेहतर होता है। साथ ही घुटनों और टखनों की मांस पेशियां मजबूत होती है।
7. आखिर में सलाम फेरने से गर्दन दाएं बाएं घूमती है इससे गर्दन की मांस पेशियां मजबूत होती है। ये नमाज़ या रकाअत को खत्म करने की आखिरी एक्टिविटी होती है जिससे दिल को सुकून मिलता है। और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
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ये तो सिर्फ नमाज़ के दौरान की गई एक्टिवी के फायदे है लेकिन नमाज का असल मकसद तो इबादत है। तो इबादत का फायदा भी होता है। एक नमाजी इंसान अपनी सफाई का पूरा ध्यान रखता है इससे न सिर्फ वो स्वस्थ रहता है बल्कि पाक साफ पवित्र भी रहता है।
नमाजी इंसान सुबह जल्दी उठकर फज्र की नमाज पढ़ता है तो जल्द उठना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है जो जीवन भर लाभ देता है।
दिन भर काम करने के दौरान ही बीच बीच में नमाज का टाइम आता है। इसलिए उन्हें नमाज से पूरे दिन शांति मिलती रहती है। साथ ही शरीर की थकान भी दूर होती रहती है।

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एक निज़ाम बशरुल खिंज़ीर का था जो महज़ दीवार पर नारे लिखने के जुर्म में औरतों बच्चों बुज़ुर्गों की भी परवाह नहीं करता था। वो निज़ाम अपने मुखालिफ बुज़ुर्गों नौजवानों को गोलियां मारकर गड्ढे में दफ्न कर रहा था, छोटी बच्चियों को अग़वा करके एप्सटीन जज़ीरे भेज रहा था, छोटे लड़कों को बुरी तरह टॉर्चर करके उनकी कटी फटी लाशें उनकी मांओं को सौंप रहा था ताकि देखने वाले बाकी लोगों पर निज़ाम की दहशत तारी हो और वो दहशतज़दा आम लोग निज़ाम के खिलाफ जाने की सोचें भी नहीं।
दूसरी तरफ अहमद अलशरह अल जौलानी का निज़ाम है जो शामी शैतान अमजद यूसुफ की बहनों को ना सिर्फ मुल्क में रहने की इजाज़त देता है बल्कि इन बहनों को अपने बदतरीन मुजरिम भाई के लिए भरपूर डिफेंस का मौका भी दे रहा है। अमजद युसूफ की मां और बहनें पूरी तरह आज़ाद हैं मीडिया को अपना मौकफ भी दे रही हैं अपने भाई के डिफेंस में खुलकर बोल भी रही हैं।
बनु उमय्या के वारिस ज़ालिमों के लिए जितने सख्त हैं बेगुनाहों के लिए उतने ही नरम भी हैं मगर खुद को आले रसूल कहलाने वाले अलवी नुसैरी राफ्ज़ियों ने तो शामी मुसलमानों को इन्सानी हुक़ूक के लायक भी नहीं समझा। ज़ुल्म की एैसी एैसी दास्तानें निकलकर आ रही हैं कि शैतान ए इब्लीस भी पनाह मांग बैठे।😞
#आदिल

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@HammadVibe हमारे यहां इससे भी बड़े लगे हैं और इस पास रहने वाले लोग भी दिहाड़ी मजदूर हैं, लेकिन 2 कूलर 18/18 हजार वाले लगे हैं कोई चंदा बाहर से नहीं मुहल्ले से ही हो जाता है,
मुसलमान इतना गया गुजरा नहीं है।
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तुम जैसे लोगों को शर्म आनी चाहिए जो खुद इमदाद नही करसकते हो पहली बार देख रहा हूँ कि मस्जिद के कूलर के लिए ऑनलाइन चंदा किया जा रहा है जबकि कूलर पंखा एसी इन जैसी चीज़ें कोई भी इंसान व्यक्तिगत रूप से देदेता है अगर इसी पर कह दूँ कि क़ौम के नाम पर खुद चंदा करके खाते हो विवाद हो जाएगा
Kavish aziz@azizkavish
सभी लोग ज्यादा से ज्यादा मदद करें. मस्जिद के लिए एक एयर कूलर की जरूरत है, नमाज़ हॉल में गर्मी इतनी ज़्यादा हो जाती है कि बुज़ुर्गों और सबके लिए नमाज़ पढ़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। NGO @faithandcare786 मस्जिद के लिए 1 एयर कूलर के लिए 15000 रुपए इकट्ठा कर रहे हैं ताकि नमाज़ पढ़ने वालों को आराम मिल सके। आप दिए गए लिंक या QR पर अपनी मदद भेज सकते हैं. faithandcare.org
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पोर्न वीडियो देखने और मास्टरबेशन करने वालों के लक्षण 👇
1. अकेला रहना पसंद करेगा। ग्रुप से अलग बैठेगा। फोन हाथ में होगा। कोई न देख रहा हो तो वो फोन में अश्लील साम्रगी देखता रहेगा।
2. बातचीत बहुत कम कर देगा। साथियों के साथ बत्तीमीजी से पेश आएगा या बहुत कम बोलचाल होगी।
3. आँखें लाल, थकी हुई, अंदर धंसी हुई, काली दिखाई देगी। ये फोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से होती है। पोर्न वीडियो देखने वाले अक्सर रात में देर तक अकेलेपन में देखते है।
4. चेहरे पर कोई चमक नहीं होगी। चेहरे पर काले दाग भी पड़ सकते है। जिससे त्वचा बूढ़ी दिखने लगती है।
5. शरीर में थकान रहेगी। कमर दर्द करेगी। शरीर में कड़ कड़ की आवाजें ज्यादा आने लगेगी।
6. चलते टाइम कदमचाल कंट्रोल में नहीं होगी। कभी कभी चलते चलते एक दम से टांगे इधर उधर होने लगेगी जिससे ऐसी स्थिति बनेगी जैसे गिरने वाले थे।
7. शादी के बाद शारीरिक और सेक्सुअल प्रॉब्लम आएगी। संतान प्राप्ति में भी दिक्कत आ सकती है।
8. अगर शादीशुदा है तो पत्नी में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेगा। रिश्ते में खटास आएगी। लड़ाई झगड़ा चलता रहेगा।
9. यादाश्त कमजोर होगी। पढ़ाई में मन नहीं लगेगा। दिमाग में बार बार सेक्सुअल सीन क्रिएट होते रहेंगे।
10. जिनको इन दोनों की आदत लगी हुई है तो अभी से छोड़ दो। क्योंकि जिंदगी में कभी बड़ा नहीं कर पाओगे। क्योंकि तुम अपने हाथ से अपने करियर की ऐसी तैसी करने में लगे हो। 😁

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परदे के पीछे कुछ खिचड़ी तो ज़रूर पक रही है!
24 घंटे के भीतर दूसरी बार ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची फिर इस्लामाबाद पहुंचे! अब्बास अरागची नें वहीं से तुर्की के विदेश मंत्री, क़तर के विदेश मंत्री और सऊदी अरब के विदेश मंत्री से भी बात की!
कल वो इस्लामाबाद से ओमान गए, वहां से फिर इस्लामाबाद आए, और इस्लामाबाद से वो मास्को जाएंगे!

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AIMIM प्रमुख @asadowaisi की इस बात पर देश के हमारे हिन्दू भाइयों को सोचने की जरूरत है, अगर मुसलमानों के घरों व मस्जिदों पर बुल्डोजर चलेगा तो आपका इससे क्या फायदा होगा..! ?
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रसूलुल्लाह सलल्ललाहों अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:
“क़मअह (Truffles) मन्न में से है, और उसका पानी आंख के लिए शिफ़ा है !”
शिफ़ा दवाखानों की शीशियों में ही बंद नहीं होती…
शिफ़ा वहां भी होती है जहां अल्लाह चाहे !
कभी एक कतरा शहद में,
कभी काले दाने में,
कभी ज़मज़म के पानी में,
और कभी मिट्टी से निकलने वाली एक अनदेखी खुम्बी में !
एक छोटी सी जंगल की ज़मीन से निकलने वाली खुम्बी…
जिसे लोग आम मशरूम समझ कर नज़रअंदाज़ कर देते हैं !
1400 साल पहले अरब के रेगिस्तान में,
जब modern laboratories नहीं थीं,
जब microscopes नहीं थे,
जब medical journals नहीं थे
उस वक़्त अल्लाह के रसूल सल्लललाहों अलैहि वसल्लम एक ऐसी चीज़ की तरफ़ इशारा कर रहे थे
जिसे लोग मामूली समझते थे, मगर उसमें आंखों की राहत और इलाज का राज़ रखा गया था !
यह सिर्फ एक खुराक नहीं…एक नबवी इशारा है !
यह बताता है कि अल्लाह जिस चीज़ को चाहे,
मिट्टी से उगा कर भी शिफ़ा बना दे !
कभी वही मिट्टी इंसान को बनाती है…और कभी उसी मिट्टी से निकलने वाली खुम्बी आंखों की दवा बन जाती है !
नबी सलल्ललाहों अलैहि वसल्लम की ज़ुबान से निकली हर बात सिर्फ दीन की हिदायत नहीं थी, उसमें इंसानियत के लिए रहमत, फ़ायदा और इलाज भी छुपा था !
हम Sunnah को सिर्फ दाढ़ी, कपड़े और रस्मों तक समझ बैठे,
जबकि Sunnah में रहमत भी है, इल्म भी है,
हिकमत भी है,
और शिफ़ा भी है !
नबवी तिब्ब में आज भी ऐसे राज़ दबे हैं
जिन्हें दुनिया धीरे-धीरे समझ रही है !
जिस नबी सलल्ललाहों अलैहि वसल्लम ने रूह की भी शिफ़ा दी,
उसी नबी सलल्ललाहों अलैहि वसल्लम ने जिस्म की शिफ़ा के रास्ते भी बताए !

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अहमदाबाद में लता चौहान नाम की महिला पर आरोप है कि उसने रास्ता भटकने का बहाना बनाकर एक घर में लूट की वारदात की, जिसके बाद नशीला पदार्थ पिलाने से 81 वर्षीय अब्दुल भाई की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।
वह वृद्ध दंपति के घर पहुंची, बातचीत कर लस्सी में कथित रूप से नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। इसके बाद दोनों बेहोश हो गए और घर से करीब 4,000 रुपये चोरी कर लिए गए।
बताया जा रहा है कि आरोपी पर पहले से 9 मामले दर्ज हैं और वह हाल ही में जेल से रिहा हुई थी।
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