
सरल वेद का प्रयास (बच्चों के लिए):
अब ऋग्वेद के पहले सूक्त के पहले मंत्र का दूसरा पद लेते हैं
यज्ञस्य देवमृत्विजम्
यज्ञ क्या है? यज्ञ विष्णु हैं । आप यह भी कह सकते हैं यज्ञ बाहरी रूप से हवन है, आग जलाकर उसमे लकड़ियाँ और घी डालें और कुछ मंत्र पढ़ें । किंतु यज्ञ नारायण हैं और आपको उनसे जोड़ने का रास्ता । तो उसकी अग्नि को अपने हृदय में जलती आग या प्रेम मान लें और उस आग में सब कुछ प्रेम से डाल दें । यदि यह बात आपको जंच जाए तो आगे अर्थ सरल हो जाएगा। यज्ञ आपका धर्म है- धर्म से मतलब वह जो आपको धारण करता है या जिसने आपको ऐसा बनाया जैसे आप हैं और आपको ऐसा रखता है। यदि यह बात कठिन हो तो कोई बात नहीं। फिर इस पर लौटेंगे । यज्ञ योग भी है जो आपको जोड़ता है
देव कौन? वे जो प्रकाश से भरे हैं जो पूरे जगत में एक शक्ति cosmic power हैं । जो हमें कुछ देते ही रहते हैं ।
ऋत्विक कौन? वे जिन्हें सच से आनंद मिलता है और जो सही तरह से यज्ञ चलाते हैं
तो अर्थ क्या हुआ? अग्नि जिनसे मुझे प्रेम है जो मेरे आगे मेरे पुरोहित हैं, जो यज्ञ के देव हैं, वे इस यज्ञ को सही तरह से चलाने वाले हैं ।
अग्नि केवल आग नहीं । वे मेरे अंदर भी हैं और वे यज्ञ के अध्यक्ष या मास्टर भी हैं ।वे बड़े रहस्य mystery से भरे हैं।
अभी हम कुछ समय में तीसरा पद भी करेंगे। और फिर इस मंत्र का पाठ भी किसी तरह सरल तरह से सीखेंगे
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