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Anju Meghwal
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Anju Meghwal
@Anju_Megh
सफर में हु लेकिन जाना कही नहीं !!
kya kronge jankar Katılım Aralık 2023
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इस वीडियो में दिखाई गई घटना कोई साधारण घटना नहीं है, बल्कि हमारे समाज की एक गहरी और कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। खासकर राजस्थान के ग्रामीण इलाकों, विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान में आज भी कुछ लोगों की मानसिकता ऐसी है, जो डॉ. अंबेडकर और उनके विचारों के प्रति विरोध और नफ़रत से भरी हुई है।
दरअसल, समस्या यह है कि इन लोगों ने कभी अंबेडकर के विचारों को समझने या पढ़ने की कोशिश ही नहीं की। यही कारण है कि वे उन सभी महान व्यक्तित्वों से असहज हो जाते हैं, जिन्हें दलित समाज अपना मार्गदर्शक मानता है। यह विरोध किसी एक व्यक्ति के प्रति नहीं, बल्कि एक पूरे वर्ग के अस्तित्व और आत्मसम्मान के प्रति है।
कटु सत्य यह है कि जातिगत पूर्वाग्रह आज भी समाज के कई हिस्सों में गहराई से जड़ें जमाए हुए हैं। पश्चिमी राजस्थान के कई गांवों में आज भी ऐसे लोग मिल जाएंगे, जो इसी संकीर्ण सोच और जातीय द्वेष से ग्रसित हैं। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि समाज के समावेशी विकास के रास्ते में एक बड़ी बाधा भी है।
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जोधपुर के बिलाड़ा क्षेत्र में बाबासाहेब अम्बेडकर के बोर्ड को एक जातिवादी व्यक्ति द्वारा डंडों से तोड़कर गिरा दिया गया👇🏼
बाबासाहेब किसी एक जाति के नहीं बल्कि पूरे देश की धरोहर हैं और उनका अपमान देश का अपमान है
@CP_Jodhpur @RajPoliceHelp कृपया आरोपी के ऊपर कार्यवाही करें 🙏🏼
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यह डॉ अंबेडकर का नहीं देश ओर संविधान का अपमान है।
घटना जोधपुर के बिलाड़ा की है।
@Igp_Jodhpur @JodhpurDm @JdprRuralPolice इस जातंकवादी व्यक्ति पर कठोर कानूनी कार्यवाही करे।
@RajPoliceHelp @PoliceRajasthan
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बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के पास जितनी डिग्रियां थीं उतनी तो उन्हें हेट करने वालों के घर में खिड़कियां नहीं होंगी🔥
बाबा साहेब की डिग्रियां देखकर आँखें खुली की खुली रह जाएंगी।
BA
MA
PhD
MSc
Bar at law
DSc
LLD
DLitt
मैं दावे के साथ कहता हूँ कि इनमें से अधिकांश डिग्रियों का तुम्हें फुल फॉर्म भी नहीं आता होगा।
यूँ ही नहीं बाबा साहेब इस दौर के सबसे महान व्यक्तित्व हैं।


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नाम : रतन कुमार मेघवाल
वर्ग : एससी वर्ग
छात्र : MBBS अन्तिम वर्ष,राजकोट एम्स
गृहराज्य : राजस्थान
आत्महत्या : जामनगर, गुजरात
सुसाइड नोट : 17 पन्नों का
जातिगत के आधार पर शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना देने वाले पाँच आरोपित छात्र:
1.आयुष यादव (ओबीसी,गुजरात)
2.निर्विघ्नम यादव (ओबीसी,गुजरात)
3.युवराज चौधरी (ओबीसी,राजस्थान)
4.प्रणव पालीवाल (ब्राह्मण,राजस्थान)
5.अस्मित शर्मा (ब्राह्मण,राजस्थान)
इसीलिए मैं यूजीसी अधिसूचना 2026 में ओबीसी वर्ग को शामिल करने के विरोध में हूँ और अब भी हूँ।
ओबीसी वर्ग बड़े स्तर और एससी-एसटी वर्गों के साथ जाति के आधार भेदभाव, छुआछूत एवं शोषण करता है।
अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति वर्गों के अभ्यर्थियों के साथ उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति के आधार पर जातिवाद,भेदभाव एवं शोषण सवर्ण वर्ग भी करता है,मुस्लिम वर्ग भी करता है और ओबीसी वर्ग भी करता है।
@AnandAkash_BSP @bspindia


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Champions ⭐️⭐️⭐️ Phenomenal win for Team India in Ahmedabad. Absolutely no match for the explosive cricket played by us throughout the tournament. Brilliant character shown by the boys to keep fighting in tough situations and become world champions once again. Congratulations to all the players and all the members of the management for achieving this feat. Jai Hind 🇮🇳❤️
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मैं पिछले कुछ समय से एक विशेष व्यक्ति के विचारों और बयानों को देख रहा हूँ। व्यक्तिगत स्तर पर मैं अनावश्यक विवादों से दूर रहना पसंद करता हूँ, लेकिन कुछ सोच और भाषा सच में चिंताजनक होती है। मतभेद स्वाभाविक हैं, पर मर्यादा और जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।
Payout को कोई peyout लिख दे तो बात सीधे आरक्षण पर कैसे आ जाती है ?
आरक्षण कोई व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है और न ही किसी एक वर्ग की संपत्ति, जिसके लिए आप किसी एक व्यक्ति को दोष दें। यह एक व्यापक सामाजिक विषय है, जिसके दायरे में पूरा समाज और अनेक वर्ग आते हैं। ऐसे संवेदनशील विषयों पर गैर-जिम्मेदार टिप्पणियाँ करना उचित नहीं है। मेरा मानना है कि एक जिम्मेदार व्यक्ति को इस प्रकार की बहसों से दूर रहना चाहिए।

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सरेंडर होने से अच्छा है देश के लिए युद्ध में
लड़ते-लड़ते शहीद हो जाना ! 🔥
#Khamenei #Tehran #dubaiattack

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सफ़र शुरू किया था अकेले, आज दस हज़ार अपनों का साथ है। 🌸🙌
मुझ जैसे नाचीज़ को इतना मान और स्नेह देने के लिए आप सभी का हृदय से शुक्रिया। आपकी यही आत्मीयता मुझे सदैव बेहतर करने की प्रेरणा देती है। ❤️✨
इस अटूट विश्वास और बेपनाह अपनेपन के लिए मैं आप सभी का सदैव ऋणी रहूँगा। सादर आभार! 🙏
~भुपेन्द्र | @bs_rupawat

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विनोद जाखड़: संघर्ष से शिखर तक की प्रेरक जीवनी
विनोद जाखड़ जी की जीवन यात्रा एक साधारण दलित परिवार से आने वाले युवाओं के लिए असाधारण प्रेरणा का स्रोत है। जयपुर के विराट नगर के पास स्थित मेड गाँव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। एक बेहद साधारण, सरल और ग्रामीण दलित परिवार में जन्मे इस युवा ने शायद खुद भी अपने शुरुआती दिनों में नहीं सोचा होगा कि वे इतनी ऊँचाइयों तक पहुँचेंगे। लेकिन सच ही कहा गया है “पूत के पाँव पालने में दिख जाते हैं।” अपने जीवन के शुरुआती दौर से ही उन्होंने अपनी प्रतिभा, मेहनत और जुझारूपन का ऐसा परिचय दिया कि स्पष्ट हो गया था कि यह युवा एक दिन बड़ी मंजिल जरूर हासिल करेगा।
छात्र राजनीति से नेतृत्व तक का सफर
विनोद जाखड़ जी ने वर्ष 2014 में राजस्थान कॉलेज की छात्र राजनीति में कदम रखा। उस उम्र में जब अधिकांश युवा अपने भविष्य की दिशा ही तय कर रहे होते हैं, उन्होंने चुनाव लड़कर जीत हासिल की जो अपने आप में साहस और आत्मविश्वास का बड़ा उदाहरण था। इसके बाद वर्ष 2018 में उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय में विजय प्राप्त कर इतिहास रच दिया और अध्यक्ष पद तक पहुँचे।
यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत जीत नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी था कि यदि हौसले मजबूत हों तो गरीबी, सामाजिक बाधाएँ और विपरीत परिस्थितियाँ किसी भी व्यक्ति का रास्ता नहीं रोक सकतीं।
एक दलित और आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि से राजनीति में आगे बढ़ना आज भी आसान नहीं माना जाता। राजनीति के दरवाज़े अक्सर प्रभावशाली और संपन्न वर्ग के लिए ज्यादा खुले दिखते हैं। लेकिन विनोद जाखड़ जी ने इन धारणाओं को तोड़कर दिखा दिया।
वे न आर्थिक रूप से मजबूत थे, न किसी बड़े राजनीतिक घराने से आते थे। फिर भी उन्होंने अपने दम पर वह मुकाम हासिल किया जो हजारों युवाओं का सपना होता है। बाद में वे राजस्थान NSUI के प्रदेश अध्यक्ष बने और यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे पहले दलित युवा नेताओं में शामिल रहे जिन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया।
राजनीतिक जीवन में उन्हें कई तरह की गुटबाज़ी, विरोध और साजिशों का सामना करना पड़ा। राजस्थान की राजनीति में उनके खिलाफ कई प्रयास हुए, कई गुट बनाए गए, लेकिन उन्होंने कभी नकारात्मक रास्ता नहीं चुना।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता रही है सकारात्मक राजनीति। उन्होंने कभी व्यक्तिगत कटुता को प्राथमिकता नहीं दी, विरोधियों के प्रति भी सम्मानजनक भाषा का प्रयोग किया। अपने दुश्मनों को भी दोस्त की तरह देखने की सोच रखी।
उनका मानना रहा है कि समय के साथ लोग बदलते हैं और हमें किसी के बारे में बुरा नहीं बोलना चाहिए। यह राजनीतिक परिपक्वता उन्हें भीड़ से अलग पहचान देती है।
विनोद जाखड़ जी केवल पद के नेता नहीं रहे, बल्कि सड़कों पर संघर्ष करने वाले कार्यकर्ता नेता रहे हैं। उन्होंने राजस्थान में कई नए प्रयोग किए, जैसे: नशा छोड़ो अभियान, छात्र संघ बहाली को लेकर आंदोलन, सरकार के खिलाफ मुखर संघर्ष, साइकिल और पैदल यात्राएँ, कांग्रेस के विभिन्न मुद्दों पर लगातार प्रदर्शन
स्वास्थ्य साथ दे या न दे वे मानसिक रूप से हमेशा तैयार रहे। जयपुर की सड़कों पर उन्हें अक्सर कार्यकर्ताओं के साथ संघर्ष करते देखा गया। वे घर बैठकर राजनीति करने वालों में नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर नेतृत्व करने वालों में रहे हैं।
राजस्थान जैसा विशाल और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य जहाँ जैसलमेर से धौलपुर और श्रीगंगानगर से लेकर डूंगरपुर-बांसवाड़ा तक दूरी ही दूरी है वहाँ उन्होंने लगातार प्रवास और संगठन विस्तार किया।
उनकी खास बात यह रही कि: कोई साधारण कार्यकर्ता भी बुलाए तो वे पहुँचने की कोशिश करते थे, कार्यकर्ताओं को “अपना साथी” मानते हैं, छोटे-बड़े का भेदभाव नहीं करते, सबके साथ बैठना, खाना और संवाद रखना उनकी शैली है
इसी वजह से संगठन में उनकी पकड़ केवल पद के कारण नहीं, बल्कि रिश्तों के कारण मजबूत हुई।
अपनी इसी मेहनत, संगठन क्षमता और सकारात्मक सोच के बल पर आज विनोद जाखड़ जी कांग्रेस के अग्रिम छात्र संगठन एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक पहुँचे हैं। यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं की उम्मीद की जीत है जो गाँव, गरीब या सामाजिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आते हैं।
राहुल गांधी जी द्वारा उन्हें यह जिम्मेदारी देना निस्संदेह एक साहसिक और दूरदर्शी निर्णय माना जा सकता है। एक ऐसे युवा को मौका मिला है जिसने जमीन पर काम करके खुद को साबित किया है।
आज भी देश के लाखों युवाओं के मन में यह सवाल उठता है: हम गरीब हैं, हम गाँव से आते हैं, हमारी आर्थिक स्थिति कमजोर है, राजनीति बड़े लोगों का खेल है, इन सभी सवालों का सबसे मजबूत जवाब है- विनोद जाखड़ जी का जीवन।
@VinodJakharIN

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