Ankush Kumar

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Ankush Kumar

@AnkushkKumar

Founder @Hindinama2 & @kakhagaprod

Delhi Katılım Mayıs 2014
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Ankush Kumar
Ankush Kumar@AnkushkKumar·
मेरी पहली किताब - आदमी बनने के क्रम में आप सब पढ़कर प्रतिक्रिया साझा करेंगे तो ख़ुशी होगी। किताब का लिंक - amzn.to/33Xo6GM
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Ankush Kumar
Ankush Kumar@AnkushkKumar·
दूसरी किताब 'काम में उलझा समय' से एक कविता
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Chatran
Chatran@readchatran·
दो मेमने - अंकुश कुमार ( Chatran, Bal Kavita, Hindinama ) @Hindinama2 @AnkushkKumar
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Ankush Kumar
Ankush Kumar@AnkushkKumar·
Hey @redBus_in, I booked a ticket for Jaipur for today and reached the boarding point mentioned on the ticket. However, the bus operator asked me to come to a different location at the last minute. I couldn’t reach there immediately, and the bus left without me. What to do now?
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काव्य कुटीर
पहला प्रेम प्रेम नहीं शिक्षक होता है जो सिखाता है क्या-क्या नहीं होता है प्रेम। - अंकुश कुमार🌷
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काव्यरस
काव्यरस@Kavya_Ras·
ये भी नहीं कि नदियाँ रोक दी जायें बहने से,बांध के लिये और ना ही ये कि सारे बाग उजाड़ दिये जायें सरकारी योजनाओं के लिये मैं बस इतना चाहता हूँ कि खेत में काम करते हुए जब थक जाऊँ तो नदी से पानी पीकर बैठ जाऊँ और निहारूँ आम से लदे पेड़ों को ~अंकुश कुमार ✍️ #विश्व_नदी_दिवस ↕️
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Ankush Kumar
Ankush Kumar@AnkushkKumar·
दोस्त लोग सलाह दें कि कैसे सोशल मीडिया पर अधिक एक्टिव रहा जाए?
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Ankush Kumar
Ankush Kumar@AnkushkKumar·
Dear TVS Team, @tvsmotorcompany I am writing to express my concern regarding the lack of assistance after registering a service request for my scooty, which is currently not starting. I contacted your customer care team,
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Ankush Kumar
Ankush Kumar@AnkushkKumar·
Please treat this matter as urgent and arrange for immediate assistance. My claim number is: 8170330161
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Ankush Kumar
Ankush Kumar@AnkushkKumar·
It is fortunate that I am currently at home, but I am deeply concerned about what would happen if this issue occurred while I was on the road. In such a scenario, I would be left waiting indefinitely without support, which is extremely inconvenient and unsafe.
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Hindinama
Hindinama@Hindinama2·
आज प्रेमचंद का जन्मदिन है, यह एक आम दिन हो सकता था अगर आज के दिन प्रेमचंद पैदा न हुए होते। प्रेमचंद मतलब हिन्दी साहित्य की रीढ़़। न जाने कितने साहित्यकार आए और गए, लेकिन प्रेमचंद जैसा कोई नहीं हुआ। प्रेमचंद एकमात्र ऐसे लेखक हैं जिन्होंने ग्रामीण भारतीय समाज को यथार्थ रूप में प्रस्तुत किया है। वे आपको उंगली पकड़कर पूरे ग्रामीण भारतीय समाज से अवगत करा देंगे। प्रेमचंद होना विरला है, यूँ ही कोई प्रेमचंद नहीं हो सकता। अपने लेखन की तपस्या से धनपतराय प्रेमचंद हुए और जनमानस के लेखक बन गये। उनके साथ रहते हुए न जाने कितने लोगों ने पढ़ना और लिखना सीखा। आज भी लोग उनको पढ़कर लिखना सीखते हैं। सच कहा जाये तो वे समस्त लेखकों के गुरु के रूप में भी याद किये जाएँगे। ऐसे गुरु जो अप्रत्यक्ष रूप से किसी को दीक्षा दे रहा हो। प्रेमचंद ने यही कमाल अपनी लेखनी से किया है। प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में मानवीय संवेदनाओं की जो तस्वीर खींची वह सच में अविस्मरणीय है। चाहे ईदगाह का हामिद हो या गोदान का होरी सब पात्रों की पीड़ा को प्रेमचंद इस आसानी से कह गए कि वह हमें अपनी सी लगती है। प्रेमचंद ने न केवल ग्रामीण भारतीय परिवेश को अपनी कहानियों में दिखाया है बल्कि उन्होंने बहुत सी जगहों पर इसके इतर भी लिखा और हर तरह के शोषण, जातिगत व्यवस्था आदि पर करारा प्रहार किया। अगर आप लिखते हैं तो आपने कभी न कभी प्रेमचंद को ज़रूर पढ़ा होगा। यह बात बिल्कुल सच है, कम से कम इतनी तो है ही जितनी होने से प्रेमचंद आज भी हमारे मानस पटल पर अंकित हैं। प्रेमचंद ख़ुद ग़रीबी में जिए और आजीवन लिखकर रोजी रोटी की लड़ाई लड़ते रहे। लेकिन इस बात से भी उनके जुनून पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा, उन्होंने हमेशा सच का साथ दिया और यही कारण है कि वे जनता के लेखक बने। प्रेमचंद को आदर्श मानकर न जाने कितने लोगों ने लिखना शुरु किया, ऐसे लोगों को अगर कतार में खड़ा किया जाये तो निश्चित तौर पर कई मील लंबी कतार आपको देखने के लिए मिलेगी। प्रेमचंद का प्रभाव ऐसा है कि वह हर किसी पर अपना स्थायित्व बना लेता है, यही कारण है कि प्रेमचंद आज भी प्रासंगिक हैं। जातिवाद, स्त्री-शोषण आज भी अपना थोड़ा स्वरूप बदलकर मौजूद हैं। ऐसे में प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को न्यूनाधिक आईना दिखाता ही है, मानवीय स्वभाव के मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वन्द्व को भी प्रेमचंद ने उकेरा है इसलिए भी प्रेमचंद की प्रासंगिकता बनी रहेगी। अंकुश कुमार @AnkushkKumar तस्वीर:- आरती मानेकर
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काव्य कुटीर
|| जन्मदिन विशेष •• अंकुश कुमार🌷|| तरसते हैं वही पूरी उम्र एक छत के लिये जिनकी कमर ईंट ढ़ोते ढ़ोते झुक गई @AnkushkKumar जी खूब बधाई...💐
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Apni Hindi
Apni Hindi@apni_hindi·
ग़लत पतों और ग़लत बसों ने मुझे आजीवन यात्री बनाए रखा - अंकुश कुमार @AnkushkKumar जन्मदिवस की शुभकामनाएं
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जन्मदिवस खूब मुबारक प्रिय अंकुश जी। 🎂
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किताब दर्पण
हिंदीनामा के संस्थापक अंकुश कुमार जी के जन्मदिवस की ढेरों शुभकामनाएं। #HindiDarpan
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