Ashish Singh

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Ashish Singh

Ashish Singh

@Ashish2821

Former Spokesperson IYC Allahabad।। Natur Lover।। Humanity before religion।। Proud Indian 🇮🇳 ।। घुमक्कड़।। शिव सदा सहाय।। Thank you 😊 🙏

Allahabad, India Katılım Mart 2015
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Ashish Singh
Ashish Singh@Ashish2821·
अपनी मर्ज़ी से कौन आता है... ज़िन्दगी तेरे क़ैदख़ाने तक...!! ♥️♥️
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Ignore!
Ignore!@ihlok·
जब व्यक्ति भीतर से थका हुआ, असंतुष्ट और दबाव में होता है तब उसका मन छोटी घटनाओं को भी बड़ा बना देता है। असल में झुंझलाहट बाहर की परिस्थिति से कम, भीतर के असंतुलन से ज्यादा जन्म लेती है। मन स्थिर नहीं रहता और व्यक्ति छोटी बातों पर चिड़चिड़ा, असंतुलित और प्रतिक्रियाशील हो जाता है।
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Ignore!
Ignore!@ihlok·
मन को जीतने का तरीका उसे दबाना नहीं, समझना है।
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कृतज्ञता
हम अपनी कमाई से इतना मां को न दे पाए , जितना वो हमारा सदका उतारा करती थी... ❣️🌻
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Sanjay Kumar, Dy. Collector
Sanjay Kumar, Dy. Collector@dc_sanjay_jas·
'मनचाहा' पाने के लिए, चाहना भी 'मन' से पड़ता है !
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Swastik 🐴
Swastik 🐴@Ghodewalebhaiya·
"जब से छोड़ी है हमने ये दुनिया की तलब, सुना है तब से ज़माना हमें ढूंढता है बे-सबब।"
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पगली_लड़की💙
कुछ बचाने में उम्र गवाते लोग खर्च हो रहे ये ख़्वाब कमाते हुए लोग..
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Ashwani Dixit
Ashwani Dixit@SerpentForce·
हथियार का सही अधिकारी वह व्यक्ति होता है जिसको जीवनपर्यंत उसका उपयोग न करना पड़े। जो कदम कदम पर इसका प्रदर्शन कर रहा है, या उपयोग किसी को डराने धमकाने में कर रहा है वह इसकी पात्रता रखता नहीं था। कुपात्र को शक्ति मिल जाये तो उसके माध्यम से विनाश ही होता है।
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राधा
राधा@Prem_Ki_Boli·
मनुष्य ने जिस दिन जीवन जीने के नियम बनाए थे उसी दिन उसने अपना आनंद खो दिया था बस वो इसी भ्रम में जी रहा है की वो आनंदित है...!!
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आधुनिक ~ अल्फाज़
भूमि और भाग्य का एक ही स्वभाव है, जैसा बोओगे वैसा पाओगे...!!
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रस'युक्त
रस'युक्त@Rasyukt·
खुद को क्या करना है वो पता नही मगर दूसरों को, क्या करना चाहिए उसकी सलाह सबके पास है...
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Ignore!
Ignore!@ihlok·
नक़्शा उठा के कोई नया शहर ढूँढिए इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई…
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Ignore!
Ignore!@ihlok·
जैसा व्यक्ति सोचता है वैसा ही उसका चित्त बनता है और वैसा ही उसका अगला अनुभव और लोक बनता है। मृत्यु के समय जो अंतिम भाव, विचार या स्मरण होता है… वही जीव की अगली अवस्था या लोक को निर्धारित करता है। अंतिम विचार कोई अचानक घटना नहीं है, वह पूरे जीवन की चेतना का परिणाम होता है।
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Chetas Sukhadia
Chetas Sukhadia@ChetasSukhadia·
संपत्ति के उत्तराधिकारी अनेक हो सकते है लेकिन कर्मों के उत्तराधिकारी केवल हम स्वयं होते है। #ThoughtOfTheDay
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Ashwani Dixit
Ashwani Dixit@SerpentForce·
कोई जीव किसी दूसरे जीव की नकल नहीं है इस धरा पर, सब अनुपम हैं। सबकी जीवन यात्रा अलग है, अपने जन्म का अलग ध्येय है। अतः किसी को भी एक दिशा में हाँका नहीं जा सकता है, हो सके तो उन्हें अपनी ओर से स्वतंत्रता दें; उन्हें अन्ततः अपना रास्ता मिल ही जायेगा। अत्यधिक हस्तक्षेप अक्षम्य है।
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कृतज्ञता
कृतज्ञता@do_lafz10·
उधार देकर बाद मैं गिड़गड़ाने से बेहतर है , पहले ही ना बोलकर अपना स्वाभिमान बचा लो...❣️🌻
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Ashwani Dixit
Ashwani Dixit@SerpentForce·
बाजार में सपने बिकते हैं अतः जो लोग सफल एवं प्रसिद्ध हैं उनकी ही कहानियाँ बिकती भी हैं। असफल लोगों के बारे में कोई नहीं जानना चाहता है क्योंकि उनके पास किसी को देने के लिए सपने भी नहीं। फिर चाहे उन्होंने अपने जीवन में कितना ही संघर्ष किया हो, या गुप्त रूप से सफल ही क्यों न हों।
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Saurabh Singh
Saurabh Singh@saurabhsingh28_·
नहीं, मेरे जीवन की कोई बात गुप्त नहीं है। गुप्त वे बातें रखी जाती हैं, जो अनुचित होती हैं। गुप्त रखना भय का द्योतक है, और भयभीत होना मनुष्य के अपराधी होने का द्योतक है। मैं जो करता हूँ, उसे उचित समझता हूँ, इसलिए उसे कभी गुप्त नहीं रखता।
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शक्तिसारणी
शक्तिसारणी@ShaktiSaarani·
टूटना जरूरी है.... बहुत जरूरी.... इसलिए नहीं कि हर बार तुम कुछ और मजबूत बनकर उभर सको... टूटना इसलिए जरूरी है कि एक दिन तुम टूट कर बिखर सको.... और उस दिन तुम्हारे ईश्वर तुम्हें समेटने के लिए आयेंगे। बस उस एक क्षण के लिए टूटना.... हर बार टूटना.... और एक दिन जर्जर बिखरना जरूरी है।
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कृतज्ञता
कृतज्ञता@do_lafz10·
लम्हे जी लेना चाहिए , बाद में तो सब धरा रह जाएगा... ❣️🌻
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Ignore!
Ignore!@ihlok·
इस जीवन की आपाधापी में किसी व्यक्ति का स्मरण करते समय उसके द्वारा आपके प्रति किए गए श्रेष्ठतम व्यवहार को ही चित्त में रखना चाहिए…अन्यथा आपका मन ही अदृश्य रूप में आपको आरी की तरह काटता रहेगा। जीवन को सहज बनाने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए…
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