Bilal Ahmad
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Bilal Ahmad
@BILAL_AIMIM
Asaduddin Owaisi Zindabaad Majlis E ittehadul muslimeen Zindabaad
Meerut, India Katılım Kasım 2022
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@muftiSalmanAzha Mere bhai aapko agar kuch bhi likhna hai to Apne account se likhiye
Mufti sahab ka naam kharab kyo kar ahe hai bhai
Unhone itni badi bahas ko bahut hi narm andaz me shaishta guftgu ke sath khatam kiya
Aap unke naam par galat alfazon ka intekhab kar rahe hai
@muftishamail
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बहराइच के राम गोपाल मिश्रा हत्याकांड में दस आरोपितों को सज़ा हुई है। जिसमें से सरफराज़ को फांसी और बाकी नो लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई है। इस मुकदमे ने अदालत में व्याप्त मनुवादी सोच को भी उजागर कर दिया है। जिन आरोपों को बहराइच पुलिस ने बाक़ायदा अपील करके खारिज किया था अदालत ने उन्हीं आरोपों पर अदालत ने सज़ा सुना दी। सज़ा सुना दी यह कोई विषय नहीं है, सज़ा तो होना तो लाज़मी था क्योंकि एक इंसान की जान गई थी। लेकिन विषय यह है कि अदालत ने मनुस्मृति का हवाला देकर सज़ा सुनाई है। मनुस्मृति का ‘दंड विधान’ कैसा है यह उन वर्गों से पूछा जा सकता है जिन्हें सदियों तक इंसान का दर्जा ही हासिल नहीं था। ऐसी विवादित मनुस्मृति का हवाला क्या उस देश में दिया जा सकता है जो देश संविधान से संचालित होने का दंभ भरता हो?
क्या न्यायधीश महोदय को संविधान निर्माताओं का एक भी कथन नहीं मिला जिसका हवाला देकर गोपाल मिश्रा के गुनहगारों के सज़ा दी जाती? "न्याय होना ही नहीं चाहिए बल्कि दिखना भी चाहिए" यह मशहूर कानूनी सिद्धांत है। क्या इसका हवाला नहीं दिया जा सकता था? लेकिन अदालत ने हवाला दिया मनुस्मृति का! वही मनुस्मृति जिसे इस देश के संविधान निर्माता डॉ. बी. आर अंबेडकर ने जलाया था। उसका हवाला देकर अदालत सज़ा सुना रही है तो सोचिए! देश को कौनसे विधान से चलाने का षडयंत्र हो रहा है?
कानूनविद्यों को बहराइच मामले में अदालत के फैसले की समीक्षा करनी चाहिए। कोई जज अपने फैसले में उस विवादित किताब का हवाला कैसे दे सकता है जो किताब इंसानों के एक वर्ग से उनके इंसान होने का ही अधिकार छीनती हो! क्या यह फैसला मौजूदा राजनीति से प्रभावित नहीं है? मनुस्मृति इतनी ही अच्छी पुस्तक है तो इसे जलाया क्यों गया था? जज साहब को जज की नौकरी संविधान ने दी है या मनुस्मृति ने? इस सवाल का जवाब अगर संविधान है तो फिर जज साहब को फैसला भी संविधान के अनुसार ही करना होगा। डॉक्टर अंबेडकर ने कहा था कि संविधान महज वकीलों का दस्तावेज नहीं है, यह जीवन का एक माध्यम है, और इसकी आत्मा हमेशा युग की आत्मा होती है। संविधान की शपथ लेकर गैर संवैधानिक कृत्य करने वालों को अपना गिरेबान जरूर झांकना चाहिए।


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"विपक्ष बहुत कमजोर है", विधानसभा में बोले AIMIM विधायक Akhtarul Iman
@aimim_national | #BiharVidhansabha | Bihar News
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आज एक बार फिर से #SIR में आ रही मुश्किलात को लेकर AIMIM पार्षद दल व प्रदेश सचिव @shadab_chouhan1 साहब के साथ जिलाधिकारी महोदय से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया।
ÀIMIM का मकसद है एक भी वोटर छूटना नहीं चाहिए।
@asadowaisi
@imshaukatali
@aimim_national


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Thank you Seemanchal for accepting AIMIM as your voice.
Congratulations to all winning candidates.
Hard work has paid off alhamdulillah @asadowaisi @Akhtaruliman5
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एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है,
तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना,
@asadowaisi
@BadruddinAjmal
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सीमांचल का अपना बेटा - अख्तरुल ईमान, जो अपने लोगों का दर्द दिल से समझता है, जब उसने सीमांचल की तबाही, बाढ़ और कटाव का मुद्दा सदन में उठाया, तो सत्ताधारी दलों को सच बर्दाश्त नहीं हुआ और उसे मार्शल आउट कर दिया गया। लेकिन अख्तरुल ईमान ने न हार मानी, न पीछे हटे। उन्होंने सदन के बाहर धरना देकर दुनिया को दिखा दिया कि सीमांचल की आवाज़ को कोई खामोश नहीं कर सकता।
वो जानते हैं कि सीमांचल सिर्फ नक्शे का एक कोना नहीं, बल्कि वहां बसने वाले लाखों लोगों की उम्मीद है। उनका दर्द, उनकी तकलीफ़, उनके बच्चों का भविष्य - यही अख्तरुल ईमान की सियासत की असली वजह है।
अगर आज सीमांचल के लोग खामोश रहे, तो कल उनका दर्द किसी को सुनाई नहीं देगा। न तेजस्वी यादव, न कोई और नेता आपकी लड़ाई उस सच्चाई और जज़्बे से लड़ सकता है, जैसा अख्तरुल ईमान लड़ रहे हैं।
अब वक्त है एकजुट होकर अपनी आवाज़ को ताक़त देने का। अपना वोट पतंग पर दें, ताकि अख्तरुल ईमान और बुलंद आवाज़ में सदन में बोल सकें, आपके हक़ की लड़ाई जारी रख सकें।
सीमांचल का बेटा बोलेगा, सीमांचल का हक़ मिलेगा - इनशा अल्लाह!
#BiharElection2025
#BiharElections
#AkhtrulIman

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“10 साल से हमारे विधायक ने कुछ नहीं किया इसलिए हम @asadowaisi की पार्टी AIMIM के उम्मीदवार के लिए वोट करेंगे… हम अपने शहर में बदलाव चाहते हैं”
मधुबनी के विधायक से नाराज़ एक युवा मुसलमान वोटर
youtu.be/5qS37jy00ew?si…
#UmashankarSinghPoint

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हाल ही में राजद नेता तेजस्वी यादव जी ने एक इंटरव्यू में MIM को इंडिया गठबंधन में शामिल न करने के सवाल पर श्री असदुद्दीन ओवैसी जी साहब को ‘चरमपंथी’ कहा - यह बयान जनता को बेहद अनुचित लगा।
ओवैसी जी साहब हमेशा संविधान, बराबरी और न्याय की बात करते हैं। वे देश के सम्मानित शिक्षित, देश भक्त जनसेवी और गरीबों की मजबूत आवाज़ वाले सांसद हैं, जो समाज के हर वर्ग के अधिकारों की बात लोकसभा में उठाते हैं।
माननीय सांसद असदुद्दीन ओवैसी जी साहब एक लोकप्रिय, मजबूत और जनहित में काम करने वाले नेता हैं। तेजस्वी यादव जी के उस बयान से मुस्लिम समाज में नाराज़गी देखी जा रही है, क्योंकि ओवैसी जी साहब गरीबों, मजलूमों, मुसलमानों, SC-ST और हर कमजोर वर्ग की आवाज़ हैं।
वे हमेशा न्याय, समानता और संविधान की मर्यादा की बात करते हैं।
ऐसे देशभक्त नेता को चरमपंथी कहा न केवल अनुचित है, बल्कि समाज की भावनाओं को भी ठेस पहुंचा सकता है।
इतिहास गवाह है - जब संवाद की जगह अहंकार ले लेता है, तो परिणाम किसी के हित में नहीं होते। लोकतंत्र की असली ताकत आपसी सम्मान और संवाद में है। जय हिंद 🇮🇳
#BiharElection2025
#BiharAssemblyElection2025
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फाइनल रिपोर्ट यही है इन–शा–अल्लाह हम अमौर विधानसभा अच्छे वोटों से जीतने जा रहे हैं, इन–शा–अल्लाह रहमान @Akhtaruliman5 साहब 5वीं बार विधायक बनने जा रहे हैं।
#BiharPolitics




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