
Vivek Singh
3.4K posts

Vivek Singh
@Bab_Vivek
How long will you keep pounding on an open door? #RABIA BASRI









कुछ बड़ा पक रहा है.






'बकवास है.' ‘हवाई बातें हैं.’ 'इसमें बहुत समय लगेगा.' 'ये विकास विरोधी बातें हैं.' दशकों से पर्यावरणविदों, सूखती नदियों और झीलों का मानचित्रण करने वाले जानकारों और जलवायु और खनन पर लिखने वाले पत्रकारों की चेतावनियों पर लोगों की ये प्रतिक्रियाएं रही है. विकास के नाम पर विनाश होता रहा. पहाड़ों, जंगलों और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से natural balance बिगड़ता रहा. ये विनाश सीधे तौर पर तापमान बढ़ाने, बादल फटने और flash-floods, भूस्खलन और जलवायु परिवर्तन का कारण बनता रहा. आज, देखिए हम कहाँ पहुँच गये हैंः दुनिया का सबसे गर्म देश है भारत, दुनिया के सबसे गर्म 100 शहरों में 95 भारत में हैं. 👉🏾 मानव जीवन और वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में है लेकिन क्या हम इस बारे में कुछ करेंगे? क्या नेताजी लोग इस पर कुछ बोलेंगे? क्या ये कभी चुनावी मुद्दा बनेगा? जैसे हालात हैं, खुदाई से खाना क्या है तक के मुद्दे हैं, उससे लगता है अभी मुश्किल है. आपकी क्या राय है? दरमदिन, #Sikkim से ये ट्वीट कर रहा हूँ तापमान है 15°C, AQI 28




















पूरा ज़रूर पढ़ें: "समाज में पहले से ही ऐसे #parasites मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं... #Cockroaches की तरह युवा हैं जिनको न तो रोजगार मिलता है और न ही पेशे में कोई जगह. उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया में, कुछ RTI activist बन जाते हैं, कुछ अन्य activist बन जाते हैं और फिर वो सब पर हमला करना शुरू कर देते हैं." सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत का बयान. मिलार्ड, युवाओं से इतनी नाराज़गी क्यों? युवाओं के मुकाबले ज्यादा उम्रवालों ने देश का ज्यादा बंटाधार किया है. बेतहाशा बढ़ते भ्रष्टाचार, लोकतान्त्रिक मूल्यों के पतन, चुनाव आयोग को पंगु बनाने में युवा कहाँ? बड़े पैमाने टैक्स चोरी, बड़े-बड़े बैंक घोटालों, सरकारी पैसे के गबन, रिश्वत लेने, कंपनी के पैसों की हेराफेरी में युवा कहाँ? न्याय व्यवस्था की गिरती साख और पुलिस के बढ़ते अत्याचार का जिम्मेदार युवा कहाँ? हज़ूर ने #Media को भी cockroach बना दिया. 2026 विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों में से 157वें स्थान पर है. 2025 के मुकाबले छह पायदान नीचे, हालात को रिपोर्ट में 'बहुत गंभीर' बताया गया है. मीडिया का दमन करते और मज़बूर करते लोगों पर मिलार्ड के कानून का चाबुक क्यों नहीं चलता? World Press Freedom Index तैयार करनेवाले संगठन Reporters Without Borders ने कहा है कि "भारत में स्वतंत्र मीडिया का न्यायिक harassment बढ़ रहा है, जिसका मुख्य कारण आपराधिक कानूनों - मानहानि और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों - का बढ़ता उपयोग है, जो सीधे पत्रकारों को निशाना बनाते हैं." हज़ूर मीडिया को संरक्षण दें. कई पीढ़ियों तक हज़ूर की जय जयकार होगी. अभी बस एक बात और, मिलार्ड का ओहदा इतना ऊंचा पर बोल इतने मंदे, उम्मीद है इस पर आप जल्द कुछ सफाई देंगे.

