Nathu Barala
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2.5 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में हुआ गांव की सरपंची का फैसला!


आज 2024 लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान का प्रचार थम गया. अब 4 जून का इंतज़ार है, जब INDIA की सरकार बनेगी इस चुनाव में प्रचार भी बिलकुल दो तरह के हुए: एक तरफ़ धनबल, चरणचुंबक मीडिया, स्क्रिप्टेड इंटरव्यू, एजेंसियाँ सब होने के बावजूद नरेंद्र मोदी लाख चाह कर भी नैरेटिव नहीं बना पाये. उन्होंने मर्यादा की हर सीमा लांघी, ऊलजलूल भद्दे बयान दिये, अपने पद की गरिमा को तार तार कर दिया और दूसरी तरफ़ वह शख़्स - जो सत्य और साहस के बल पर, मोदी के हर पैंतरे, मुख्यधारा मीडिया के ब्लैकआउट के बावजूद जनता के मुद्दों पर अडिग रहा. रोटी, रोज़गार, महंगाई, ग़रीबी, गिनती जैसे मुद्दों पर पूरा कैंपेन किया. राहुल गांधी ने अकेले इस इलेक्शन का नैरेटिव सेट किया और नरेंद्र मोदी को अपनी पिच पर खेलने को मजबूर किया यह चुनाव - लोकतंत्र और संविधान को सुरक्षित और सशक्त रखने का है. हमने इस चुनाव प्रचार के दौरान तीखे सवाल पूछे, आलोचना की, सरकार को कठघरे में खड़ा किया, अपनी गारंटी के बारे में बातें कीं. पर मुझे गर्व है अपने नेता, अपनी पार्टी और INDIA गठबंधन पर कि एक बेहद मज़बूत लड़ाई लड़ते हुए भी हमने लड़ाई मर्यादित और राजनीतिक शुचिता से ही लड़ी जुड़ेगा भारत, जीतेगा INDIA 🇮🇳











