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लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा की स्वतंत्रता और समता के परिपेक्ष में मानवता को प्रभावित करने वाली घटनाओं और कहानियों का विश्लेषण

Lucknow Katılım Ocak 2023
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यूजीसी समता कानून की लड़ाई अब केवल एक कानून की लड़ाई नहीं है, बल्कि हर गरीब और वंचित समाज के छात्र‑युवाओं की पढ़ाई और उच्च शिक्षण संस्थानों तक पहुंच की लड़ाई बन गई है। मनुवादी सामंतवादी मानसिकता के लोग जो न्याय और समानता में विश्वास नही रखते हैं, जिन्होंने हमेशा जातीय भेदभाव को अपना हक समझा, वे जो अन्याय को बढ़ावा देते रहे हैं, वे आज भी इसके पक्ष में नहीं हैं। #ugc_equity_regulation #UGCREGULATIONS
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ये डाॅ Ali Larijani के जनाजे का चित्र है. इन दिनों हर समय तेहरान पर इजरायल और अमेरिका की बम वर्षा हो रही है. इसके बावजूद हजारों-हजार लोग अपनी जान जोखिम में डालते हुए लारिजानी साहब और उनके परिवार के कुछ अन्य सदस्यों के जनाजे में शामिल हुए. यह एक ऐसे इंसान का जनाजा है, जिसने अपने मुल्क, अपने समाज और अपनी सभ्यता पर गर्व किया और उसे बेइंतहा प्यार किया! उसके लिए कुर्बान हो गया! इतिहास में वह एक महान् शहीद कहलायेगा! यह व्यक्ति सिर्फ अपने देश का एक बड़ा सियासतदां ही नहीं था, ईरान की सिक्युरिटी कौंसिल का चीफ ही नहीं था, ईरानी संसद का एक पूर्व स्पीकर और सुप्रीम लीडर का सिर्फ सलाहकार ही नहीं था; वह दुनिया का एक बड़ा विद्वान दार्शनिक और लेखक भी था. उसने अठारहवीं सदी के महान जर्मन दार्शनिक-वैज्ञानिक Immanuel Kant पर Ph.D. की थी और दर्शन व राजनीति पर कई महत्वपूर्ण किताबें भी लिखी थीं! दुनिया के विभिन्न देशों की राजनीति में आज ऐसे लोगों का अभाव सा है. इसलिए Ali Larijani जैसे लोग मारे जाने के बावजूद मरते नहीं, वे अपने मुल्क के चप्पे-चप्पे में जज्ब हो जाते हैं और हमेशा जिंदा रहते हैं पानी, हवा और धूप की तरह! कोई उनकी राजनीतिक विचारधारा और धार्मिक विश्वास से सहमत या असहमत हो सकता है पर अपने मुल्क और अवाम के लिए उनकी प्रतिबद्धता और जेनुइननेस पर भला कोई कैसे असहमत हो सकेगा! जिंदाबाद डियर डाॅ लारिजानी! काश, आपसे कभी मुलाकात हुई होती! एक भारतीय पत्रकार के तौर पर आपका कभी इंटरव्यू किया होता, आपके बारे में लिखा होता! अपने बारे में लिखी पहली टिप्पणी को मेरी तरफ से एक श्रद्धांजलि के तौर पर कबूल कीजिये! बेशक, आपका नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो चुका है. यकीं कीजिएगा, आपको मारने वाले भी इतिहास में दर्ज होंगे पर उनका नाम इतिहास के कूड़ेदान में काले अक्षरों में दर्ज होगा, जिन्होंने अपने जीवन का ज्यादा वक्त मनुष्यता के खिलाफ अपराध, खून-खराबे, कारोबारी लूटपाट, तरह-तरह के घिनौने करतबों और षड्यंत्रों को रचने में बिताया! सौजन्य- @UrmileshJ
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मनुस्मृति केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि इतिहास के उस दौर का प्रतीक है जिसमें समाज को जन्म के आधार पर बाँटकर असमानता को वैध ठहराया गया इस ग्रंथ में वर्णित कई प्रावधान आज के लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों जैसे समानता, स्वतंत्रता और न्यायके विपरीत दिखाई देते हैं। भारत का संविधान हर नागरिक को बराबरी का अधिकार देता है, लेकिन मनुस्मृति जैसे ग्रंथों में जाति आधारित भेदभाव को स्थापित और संरक्षित करने की कोशिश दिखती है यही कारण है कि समय-समय पर समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा इसके खिलाफ आवाज़ उठाई जाती रही है। यह विरोध किसी की व्यक्तिगत आस्था पर हमला नहीं, बल्कि उस विचारधारा के खिलाफ है जो सामाजिक अन्याय और ऊँच-नीच को बढ़ावा देती है। इसी संदर्भ में डॉ. भीमराव अम्बेडकर का ऐतिहासिक कदम याद करना जरूरी है, जिन्होंने मनुस्मृति को जलाकर उस समय की कुव्यवस्था और जातिगत अन्याय के खिलाफ प्रतीकात्मक विद्रोह किया था उनका उद्देश्य किसी धर्म का अपमान करना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को चुनौती देना था जो इंसान को इंसान से हीन मानती है आज यदि उनके अनुयायी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समानता और न्याय की मांग कर रहे हैं, तो उसके पीछे के सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ को समझना भी जरूरी है। सामंतवादी मानसिकता, जो व्यक्ति को उसके जन्म के आधार पर ऊँचा-नीचा मानती है, आधुनिक समाज के विकास में एक बड़ी बाधा रही है। यह मानसिकता शिक्षा, अवसर और सम्मान तक समान पहुंच को सीमित करती है। जब युवा और छात्र इस सोच के खिलाफ खड़े होते हैं, तो वे एक अधिक न्यायपूर्ण और बराबरी वाले समाज की मांग कर रहे होते हैं। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार केवल समर्थन करने का नहीं, बल्कि असहमति जताने का भी अधिकार देता है। इसलिए किसी विचारधारा, परंपरा या ग्रंथ की आलोचना करना और उसके खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज करना, सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए बशर्ते वह शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में हो। पटना विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष का मनुस्मृति के प्रति को जलाकर प्रतिकात्मक विरोध करना किसी एक ग्रंथ का विरोध नहीं, बल्कि उस सोच का विरोध है जो बराबरी और न्याय के रास्ते में खड़ी होती है। एक सशक्त भारत वही होगा जहाँ परंपराओं का सम्मान हो, लेकिन उन्हें संविधान के मूल्यों की कसौटी पर परखा भी जाय। #Mnusmrit #ManishYadav #Patana
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स्वतंत्र, निष्पक्ष और बेबाक पत्रकार श्याम मीरा सिंह की गिरफ्तारी की सूचना मिल रही है उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार सत्ता से सवाल करने वाली आवाजो को खामोश कर उसे दबाने की कोशिश कर रही है यह न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि लोकतंत्र की मूल आत्मा के भी खिलाफ है। लोकतान्त्रिक देश में सरकार आलोचना से डरती नहीं, बल्कि उसे सुनती है लेकिन योगी सरकार में सच बोलने वालों को ही निशाना बनाया जा रहा है यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। @Uppolice @dgpup @UPPViralCheck
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विश्वविद्यालय में जातीय भेदभाव के खिलाफ UGC समता कानून के समर्थन में पटना विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों एवं आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्त्ताओं ने निकाला पैदल मार्च। #UGC #Aspa #UGCREGULATIONS #EqualityInEducation #UGC_लागू_करो
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय से निकला समता मार्च छात्र संगठनों ने UGC समता कानून के समर्थन में पैदल मार्च कर जताई एकजुटता। #UGC #CPIML #UGCREGULATIONS #EqualityInEducation #UGC_लागू_करो
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"विश्वविद्यालयों में OBC समाज के साथ उत्पीड़न की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। OBC समाज अक्सर अपने साथ हो रहे उत्पीड़न की शिकायत भी नहीं करता। इसलिए UGC Bill में OBC को शामिल किया गया है, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके और उन्हें न्याय मिल सके।" ~ प्रो. संदीप यादव @drsandeepdu #UGCEquityRegulation2026
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Joseph Kent Director, National counterterrorism centre. United States of America बहुत सोच-विचार के बाद, मैंने आज से राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी केंद्र (NCTC) के निदेशक पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। मैं अच्छे विवेक से ईरान में चल रही इस जंग का समर्थन नहीं कर सकता। ईरान ने हमारे देश के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं पैदा किया था, और यह साफ है कि हमने इज़राइल और उसके अमेरिका में प्रभावशाली लॉबी के दबाव में यह जंग शुरू की। @POTUS और @DNIGabbard के अधीन काम करना और NCTC के पेशेवर कर्मचारियों का नेतृत्व करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है। God bless America. #IranWar#IranIsraelWar #War
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विश्वविद्यालयों में जातीय भेदभाव के खिलाफ लाए गए UGC समता कानून के समर्थन में मनीष यादव ने विरोध स्वरूप मनुस्मृति की प्रतियां जलाते हुए कहा कि देश संविधान से चलेगा, मनुस्मृति से नहीं! पूर्व पटना छात्र संघ अध्यक्ष मनीष यादव ने यूजीसी समता कानून को लागू कराने की मांग को लेकर पटना कॉलेज में ‘महापंचायत’ आयोजित किया , जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों और सामाजिक न्याय के पक्षधर लोगों ने भाग लिया और समानता की आवाज़ बुलंद किया। #UGC_कानून_लागू_करो #UGCREGULATIONS
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पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में यूजीसी समता कानून के समर्थन में जंतर मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। UGC समता कानून के समर्थन में जंतर मंतर पर इस प्रदर्शन में सामाजिक न्याय और समानता की आवाज़ बुलंद करते हुए बड़ी संख्या में समर्थकों, छात्रों और विभिन्न संगठनों ने भाग लिया। #UGC_कानून_लागू_करो #UGCREGULATIONS
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UGC समता कानून के समर्थन में देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में SC, ST, OBC छात्रों के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समानता में विश्वास रखने वाले छात्र, बुद्धिजीवी व विभिन्न सामाजिक एवं छात्र संगठन लगातार संघर्षरत हैं। 18 मार्च को इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर दोपहर 12 बजे ‘समता महापंचायत’ का आयोजन किया गया है, विभिन्न छात्र संगठनों के आह्वान पर कॉलेजों, हॉस्टलों और डेलीगेसियों से बड़ी संख्या में छात्रों के इस महापंचायत में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में यूजीसी समता कानून के समर्थन में छात्रों व सामाजिक संगठनों द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रम एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले रहा है। #UGC_कानून_करो #UGCREGULATIONS
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शैक्षणिक संस्थानों में जातीय भेदभाव के खिलाफ सशक्त यूजीसी समता विनियम लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को झारखण्ड की राजधानी रांची में ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के आह्वान पर आयोजित किया गया और राजभवन तक मार्च निकाला गया। इस मार्च में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, आदिवासी छात्र संघ और एससीएमआई सहित कई छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लेकर UGC समता कानून के समर्थन में एकजुटता दिखाई। #UGC_लागू_करो #UGCREGULATIONS #UGC
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विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ते जातीय भेदभाव के खिलाफ लाए गए समता कानून के समर्थन में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा के नेतृत्व में 18 मार्च को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी छात्र संघ भवन, पर व्यापक छात्र प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। युवा छात्रों की मांग है कि शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न को रोकने के लिए सशक्त UGC समता कानून को तुरंत लागू किया जाए, ताकि परिसर में समानता, गरिमा और न्याय सुनिश्चित हो सके। #यूजीसी_समता_कानून_लागू_करो #UGC
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वाजातीय राणा अजित सिंह व उनके लोगों ने सुरेश यादव के घर में घुसकर मारपीट और गोलीबारी किया है इस हमले में एक व्यक्ति को गोली लगी और कुल 6 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए है। गाँव के लोगों का कहना है कि योगी आदित्यनाथ के स्वजातीय लोग खुलेआम कानून हाथ में लेकर हिंसा कर रहे हैं और सत्ता, प्रशासन और पुलिस उनका बचाव भी कर रही हैं। @sultanpurpolice @Uppolice @dgpup
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ईरान के राजदूत ने कहा भारत में हमारे सहयोगी “भारत के लोग” हैं, न कि सरकार। गौर करने वाली बात है कि उन्होंने भारत सरकार का नहीं, बल्कि भारतीय जनता का ज़िक्र किया। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दो भारतीय जहाज़ों को सुरक्षित गुजरने दिया गया। इसका श्रेय न नरेन्द्र मोदी को मिला, न सुब्रह्मण्यम जयशंकर को, ईरानी प्रतिनिधि के मुताबिक वजह है भारतीय जनता, जिसने युद्ध और बच्चों पर बमबारी के खिलाफ आवाज़ उठाई और इंसानियत के साथ खड़ी हुई। #IranIsraelWar #Iran #War #India
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लखनऊ के एल्डिको सिटी में आज बौद्ध परंपरा और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाते हुए बुद्ध बिहार और बुद्ध प्रतिमा का अनावरण बड़े धूमधाम के साथ किया गया। दया, करुणा, समता और अहिंसा का संदेश देने वाले महात्मा बुद्ध की प्रतिमा और बुद्ध विहार की स्थापना कर लखनऊ के एल्डिको वासियों ने अपने आने वाली पीढ़ियों को अतार्किक और अंधविश्वासी होने से बचा लिया। बुद्ध बिहार का निर्माण शांति, ज्ञान और सामाजिक समरसता का केंद्र ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक और तार्किक चिंतन का भी केंद्र बनेगा। एल्डिको वासियों को बहुत बहुत बधाई
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समाजवादी पार्टी के शासनकाल में दिए गए यश भारती सम्मान को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। जिन लोगों को यह सम्मान मिला, उनमें योगेश मिश्रा , हेमंत शर्मा , शिखा पाण्डेय , राजकृष्णा मिश्रा , मनिंद्रा कुमार मिश्रा , महेश्वर तिवारी , देवी प्रसाद पाण्डेय , माता प्रसाद त्रिपाठी और ब्राह्मण चालीसा गाने वाले मनोज मुन्तशीर जैसे सैकड़ों नाम शामिल किए गए। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इस सम्मान की सूची में सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले कई लेखक, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम लगभग गायब रहे वे लोग जो वास्तव में समाजवादी और सामाजिक न्याय की विचारधारा के मजबूत स्तंभ माने जाते रहे हैं। #YashBharti #यशभारती
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समाजवादी सरकार ने 2012-2017 के दौरान कई पत्रकारों, लेखकों और साहित्यकारों को यश भारती से सम्मान सम्मानित किया उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च राज्य स्तरीय सम्मान है इसमें 11 लाख का नकद पुरस्कार व जीवनभर ₹50,000 प्रति माह पेंशन का प्रावधान रहा, लेकिन एक गंभीर प्रश्न यह उठता है कि फ्रैंक हुज़ूर जैसे प्रखर और निर्भीक लेखक को यह सम्मान क्यों नहीं दिया गया? फ्रैंक हुज़ूर केवल एक लेखक नहीं थे, बल्कि राजनीति, विचारधारा और समाज पर निर्भीकता से लिखने वाले साहित्यिक योद्धा थे उन्होंने अपनी लेखनी से सत्ता और कट्टरता दोनों को चुनौती दी। उनके नाटक "Hitler in Love with Madonna" ने 20 साल की उम्र में ही उन्हें भारतीय साहित्य और रंगमंच में एक अलग पहचान दिला दी थी। फ्रैंक हुज़ूर ने पत्रकारिता और साहित्य में साहसिक प्रयोग किए, ब्रिटेन में इमरान ख़ान की जीवनी लिखी और भारत में धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और सांप्रदायिकता जैसे सामाजिक न्याय के विषयों पर अपने पत्रिका Socialist Factor में बेबाकी से लिखा लेकिन क्या उनकी सपा के कुछ सामाजिक न्याय के मुद्दों पर असहजता उनके सम्मान की राह में बाधा बनी? यश भारती पुरस्कार पाने वाले लोगों में योगेश मिश्रा, हेमंत शर्मा, शिखा पांडे, राजकृष्ण मिश्र, मणिन्द्र कुमार मिश्रा, माहेश्वर तिवारी, देवी प्रसाद पाण्डेय, माता प्रसाद त्रिपाठी व ब्राम्हण चालीसा गाने वाले पण्डित मनोज मुंतसिर जैसे सैकड़ो नाम इस सूची में शामिल हुए लेकिन इस सम्मान से फ्रैंक हुज़ूर जैसा नाम गायब रहा, जो समाजवादी, सामाजिक न्याय विचारधारा का मजबूत स्तंभ था! #Frankhuzur #YashBharti #यशभारती

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कुछ सामंती और मनुवादी सोच के लोगों ने आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद चंद्रशेखर आज़ाद को हल्के में लेने की भूल कर दी, उन्हें कांशीराम की जयंती पर बाराबंकी में कार्यक्रम करने से रोकने के लिए “देख लेने” की धमकियाँ दी गयी! लेकिन मनुवादी सामंती सोच के लोगों को शायद यह समझ नहीं थी कि चंद्रशेखर आज़ाद कोई साधारण नेता नहीं, बल्कि बहुजन समाज की आवाज़ और संघर्ष का प्रतीक हैं वे बाराबंकी पहुँचे भी, पूरे सम्मान और दमखम के साथ कार्यक्रम भी किया और अपने साहसिक तेवरों से मनुवादी-सामंती सोच रखने वालों को करारा जवाब दे गए। अब बहुजन आंदोलन को धमकियों से डराया नहीं जा सकता जिस बहुजन विचारधारा को कांशीराम ने खड़ा किया, उसे आगे बढ़ाने वाले लोग हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। @BhimArmyChief @AzadSamajParty
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EWS सवर्ण कोटे से एडमिशन न मिलने पर वही सवर्ण गरीब करोड़ों रूपये देकर प्रबंधन कोटे से एडमिशन ले रहे हैं EWS आरक्षण भारत का महाघोटाला है, यह बहुजनों के हकों पर डकैती है, हमारे यहां आर्थिक गरीब (EWS ) विद्यार्थी 01 करोड़ देकर एडमिशन ले रहे हैं। #EWS #Reservation #EWSReservation
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"हमारे देश के प्रधानमंत्री को विश्वगुरु बनने का अच्छा मौका मिला था. प्रधानमंत्री इजराइल गए थे वहां से बिना परमिशन ईरान चले जाते, जैसे पाकिस्तान गए थे. वहां जाकर बीच में खड़े हो जाते और कहते कि मैं वॉर नहीं होने दूंगा. ये कर देते तो विश्वगुरू बन जाते। " - अखिलेश यादव @yadavakhilesh @samajwadiparty
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