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लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा की स्वतंत्रता और समता के परिपेक्ष में मानवता को प्रभावित करने वाली घटनाओं और कहानियों का विश्लेषण

Lucknow Katılım Ocak 2023
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योगी आदित्य नाथ की गाज़ीपुर पुलिस ने करण्डा थाने में बसावन इंडिया पर मुकदमा पंजीकृत किया हैं, मृतक निशा विश्वकर्मा के हत्यारों के खिलाफ आवाज बुलंद करना सरकार और गाज़ीपुर पुलिस को नगवार गुजरा अन्याय अत्याचार के खिलाफ यह जंग जारी रहेगी.... #Ghazipurpolice #Ghazipur
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"भाजपा 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को सिर्फ एक राज्यीय चुनाव के रूप में नहीं, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर लड़ेगी। इसके लिए यूपी में भाजपा का एक ऐसा रूप देखने को मिलेगा, जो अब तक किसी ने नहीं देखा होगा।" कुमार वीरेन्द्र पत्रकार
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लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्र नेताओं पर मुकदमा दर्ज करना और उन्हें निलंबित करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, अलोकतांत्रिक और निंदनीय है। छात्र लोकतंत्र की जीवंत आवाज़ होते हैं, अपराधी नहीं विश्वविद्यालय विचार, बहस और असहमति की जगह होते हैं, जहाँ छात्रों को अपनी समस्याएँ रखने का संवैधानिक अधिकार है। उनकी आवाज़ को दमन, मुकदमों और निलंबन के जरिए दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है। आज नई शिक्षा नीति के नाम पर जिस तरह शिक्षा का व्यवसायीकरण किया जा रहा है, वह देश के गरीब, किसान, मजदूर, खेत-खलिहान और गाँव-देहात से आने वाले लाखों छात्रों को उच्च शिक्षा से दूर करने की एक सुनियोजित प्रक्रिया बनती जा रही है लगातार फीस वृद्धि, निजीकरण और शिक्षा को “सेवा” की बजाय “मुनाफे का बाजार” बना देने की नीति सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना के खिलाफ है। जब विश्वविद्यालयों की फीस कई गुना बढ़ाई जाती है, तब सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ता है जिनके माता-पिता खेतों में मजदूरी कर, खेती-किसानी करके या छोटे-मोटे काम करके अपने बच्चों को पढ़ाने का सपना देखते हैं। ऐसे फैसले गरीब और वंचित तबकों के बच्चों के लिए विश्वविद्यालयों के दरवाजे बंद करने जैसे हैं छात्रों की मांग है कि :- ▪️ छात्र नेताओं का निलंबन तत्काल वापस लिया जाए। ▪️ दर्ज सभी मुकदमों को अविलंब निरस्त किया जाए। ▪️ फीस वृद्धि के फैसले पर पुनर्विचार कर छात्रों और अभिभावकों से संवाद किया जाए। ▪️ शिक्षा के निजीकरण और व्यवसायीकरण पर रोक लगाई जाए। छात्रों की आवाज़ को दबाने से समस्याएँ खत्म नहीं होंगी लोकतंत्र में संवाद, बहस और विरोध अधिकार हैं, अपराध नहीं छात्रों के अधिकारों, सस्ती और समान शिक्षा तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हम सदैव उनके साथ खड़े हैं। #NewEducationPolicy #LucknowUniversity
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जनगणना 2027 का फार्म आ गया है, जाति का जिक्र नहीं है, यानि जाति जनगणना नहीं होगी? #CasteSensus #Sensus #Caste
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बिहार के सीवान जिले में हर्ष सिंह हत्याकांड में नामित आरोपी सोनू यादव को बिहार पुलिस ने एनकाउंटर मार गिराया है पुलिस ने सोनू यादव पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था. सोनू यादव का नाम भाजपा के पूर्व एमएलसी मनोज सिंह के भांजे हर्ष सिंह गोली काण्ड में आया था। उक्त प्रकरण में सोनू यादव के परिवार का कहना है कि सिवान पुलिस सोनू को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था अब सिवान जिले के बड़हरिया थाना क्षेत्र के लकड़ी गांव (गौशीहाता गांव के पास) में इनकाउंटर में मारा जाना बता रही है। बिहार सिवान पुलिस का कहना है कि जवाबी कार्रवाई में सोनू यादव को सीने में गोली लगी और उसकी मौत हो गई सिवान में पिछले तीन दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा एनकाउंटर है इससे पहले पुलिस ने इसी प्रकरण में छोटू यादव को भी मुठभेड़ में दोनों पैरों के घुटने में गोली मारकर गिरफ्तार किया जाना बताया है। @bihar_police @sp_siwan @Official_Siwan
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"किसी भी हिन्दू धर्म ग्रन्थ व साहित्य में सनातन का उल्लेख नहीं है, सनातन का उल्लेख बौद्ध साहित्य में मिलता है, ब्राम्हणों ने सनातन शब्द भी बौद्ध ग्रन्थ से चुराया है।" राजकुमार भाटी सपा प्रवक्ता @rajkumarbhatisp #Sanatan
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दिशा छात्र संगठन ने देश में लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आम जनता पर बढ़ते आर्थिक बोझ के खिलाफ प्रयागराज में जोरदार प्रदर्शन किया। #StopInflation #RupeeDepreciation
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"जिन धर्म ग्रंथों को हिन्दू धर्म ग्रन्थ कहा जा रहा है, उन धर्म ग्रंथों में हिन्दू शब्द लिखा होता, रामायण, महाभारत, गीता, वेद, पुराण में कहीं भी हिन्दू शब्द नहीं मिलता।" चौधरी विकास पटेल राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा @cvikaspatel @WamanCMeshram
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भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार, न्याय और गरिमा की गारंटी देता है लेकिन अनेक ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें यह आरोप लगा कि केवल नाम, पहचान, जाति, धर्म या सामाजिक पूर्वाग्रह के आधार पर मुस्लिम युवाओं को संदेह की निगाह से देखा गया। मोहम्मद आमिर खाँ का मामला इन्हीं में से एक है 20 फरवरी 1998 की रात एक 18 वर्षीय लड़का अपनी माँ के कहने पर दवा लेने घर से निकलता है कुछ ही घंटों बाद उसकी दुनिया बदल जाती है बताया जाता है कि उसे सादे कपड़ों में आए लोग उठा ले जाते हैं परिवार को जानकारी नहीं दी जाती बाद में वह लड़का “आतंकवादी” घोषित कर दिया जाता है। मीडिया ट्रायल शुरू होता है अदालत में अपराध सिद्ध होने से पहले ही समाज फैसला सुना देता है। यह केवल मोहम्मद आमिर खान की गिरफ्तारी नहीं थी, बल्कि एक पूरे परिवार की सजा की शुरुआत थी 14 वर्षों तक आमिर जेल की सलाखों के पीछे रहा उस पर कई बम धमाकों के आरोप लगाए गए। लेकिन समय के साथ अदालतों में अधिकांश मामले टिक नहीं सके और वे एक-एक कर बरी होते गए जब वह जेल से बाहर आए, तब तक उनकी जवानी, उनका सामाजिक जीवन और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बर्बाद हो चुकी थी चौदह वर्षों के लम्बे सफर में मोहम्मद आमिर खान का परिवार मानसिक सुसुप्त अवस्था में पहुंच चुका था। मोहम्मद आमिर खान जैसे इस तरह के लोगों पर झूठे आरोपों का असर केवल आरोपी के परिवार पर ही नहीं पड़ता बल्कि पीडित परिवार और रिस्तेदारों पर भी पड़ता है उसकी माँ हर पेशी पर अदालत जाती है उसका पिता वकीलों और पुलिस थानों के चक्कर लगाते-लगाते टूट जाते है। बहन-बेटियों के रिश्ते प्रभावित होते हैं। पूरा परिवार समाज की नजर में “संदिग्ध” बना दिया जाता है। हिन्दू मुस्लिम के एंगल से कई मामलों में यह देखा गया कि जातिवादी मीडिया और जांच एजेंसियाँ गिरफ़्तारी के बाद आरोपी को इस तरह प्रस्तुत करती हैं मानो अपराध सिद्ध हो चुका हो बाद में यदि अदालत बरी भी कर दे, तब भी समाज की नजरों में “आतंकवादी” का यह दाग कभी नहीं मिट पाता है यही कारण है कि ऐसे मामलों पर मानवाधिकार संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लगातार चिंता जताई है। उनका कहना रहा है कि आतंकवाद से लड़ाई जरूरी है, लेकिन कानून और जांच एजेंसियों की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। यदि निर्दोष लोग वर्षों जेल में रहें और बाद में बरी हो जाएँ, तो यह केवल एक कानूनी गलती नहीं बल्कि सामाजिक अन्याय भी है। भारत के मानवाधिकार आयोग द्वारा 05 लाख का अपर्याप्त मुआवज़ा दिए जाने के बावजूद यह प्रश्न बना हुआ है कि क्या किसी व्यक्ति की जिंदगी के 14 साल वापस लौटाए जा सकते हैं क्या बूढ़े होते माता-पिता, टूटा हुआ परिवार, मानसिक यातना और सामाजिक अपमान की भरपाई कुछ लाख रुपये से संभव है? यह मुद्दा केवल मुस्लिम समुदाय का नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और लोकतंत्र की विश्वसनीयता का प्रश्न है क्योंकि यदि किसी भी नागरिक को केवल पहचान के आधार पर संदेह, भय और दमन का सामना करना पड़े, तो यह संविधान की मूल भावना समानता, स्वतंत्रता और न्याय के लिए चुनौती बन जाता है। भारत की ताकत उसकी विविधता और संवैधानिक मूल्यों में है इसलिए आवश्यक है कि किसी भी व्यक्ति को उसके धर्म, नाम या पहचान के आधार पर अपराधी न माना जाए अपराध का फैसला अदालत करे, भीड़, मीडिया या पूर्वाग्रह नहीं न्याय तभी सच्चा माना जाएगा जब निर्दोष व्यक्ति को केवल बरी ही नहीं, बल्कि सम्मान और गरिमा भी वापस मिले। @indSupremeCourt @rashtrapatibhvn
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जातिवाद चेहरों से गया ह? लेकिन दिलों में अब भी। जातिवाद के विरुद्ध सुधीरा का गीत आप भी सुनें! #जातिवाद #गीत #sudhira #CasteSensus
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बिहार सुलतानगंज में रामधनी यादव एनकाउंटर को लेकर परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप एक बार फिर देश में “फेक एनकाउंटर” और पुलिस जवाबदेही की बहस को केंद्र में ले आए हैं परिजनों का आरोप है कि यह कोई वास्तविक मुठभेड़ नहीं, बल्कि हिरासत में की गई सुनियोजित हत्या है वहीं पुलिस इसे जवाबी कार्रवाई और बड़ी सफलता बता रही है। अगर हत्या का बदला हत्या से करना है तो देश में स्थापित न्यायालयों को बुलडोज कर देना चाहिए, न्याय किसे मिलेगा किसे नहीं जब यह शासन सत्ता में बैठे लोगों को तय करना है तो लोकतंत्र के इस झूठे न्याय व्यावस्था के स्वांग को बंद कर देना चाहिए रामधनी यादव का यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है यह उस सवाल को जन्म दे रहा है कि क्या भारत में कानून से ऊपर 'पुलिस-राजनेता और अपराधी का गठजोड़ है? केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकारें, उत्तर प्रदेश हो या बिहार सभी राज्य सरकारें अपने विरोधियों को दबाने व निपटाने के लिए इसी हथकंडे का प्रयोग कर रही हैं, इस तरह के मुठभेड़ शासन सत्ता में पल रहे गुण्डों, माफियाओ पर क्यों नहीं होते, क्या इसी तरह के मुठभेड़ रामदूलार यादव हत्या काण्ड के आरोपी अनंत सिंह व उनके साथियों के साथ बिहार पुलिस कर हिम्मत जुटा सकती है? उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने भी वर्षों पहले इसी बात को लेकर उन्होंने पुलिस सुधारों और राजनीतिक हस्तक्षेप को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में 1996 में जनहित याचिका दायर की थी जिसमें वर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार व राज्यों के लिए ऐतिहासिक दिशानिर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त किया जाए, डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति पारदर्शी हो, पुलिस स्थापना बोर्ड बनाया जाए, कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों को अलग किया जाए, पुलिस शिकायत प्राधिकरण (Police Complaints Authority) गठित हो ताकि फर्जी एनकाउंटर, हिरासत में हत्या और पुलिस अत्याचार की स्वतंत्र जांच हो सके। लेकिन दुखद सच्चाई यह है कि लगभग दो दशक बाद भी किसी भी राज्य ने इन सुधारों को पूरी तरह लागू नहीं किया, परिणाम यह हुआ कि कई जगह पुलिस सत्ता के दबाव, राजनीतिक हितों और स्थानीय प्रभावशाली अपराधियों के नेटवर्क से सत्ता संरक्षित अपराधियों व नेताओं को मजबूत करने के लिए पुलिस द्वारा फेक एनकाउंटर किया जा रहा है। जब पुलिस का इस्तेमाल कानून लागू करने के बजाय “तुरंत न्याय” दिखाने के लिए होने लगे, तब लोकतंत्र कमजोर होने लगता है अदालत, जांच और न्यायिक प्रक्रिया की जगह गोली लेने लगे, तो संविधान का “Rule of Law” खतरे में पड़ जाता है। फर्जी एनकाउंटर केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं होती, बल्कि उस न्याय व्यवस्था में जनता के भरोसे का भी कत्ल होता हैं, यदि कोई व्यक्ति अपराधी है, तो उसे सजा अदालत दे, यही लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत है पुलिस का काम आरोपी को पकड़ना है, सजा देना नहीं इसलिए हर एनकाउंटर की स्वतंत्र न्यायिक जांच, CCTV और डिजिटल साक्ष्यों की जांच, पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी, तथा पुलिसकर्मियों की जवाबदेही अनिवार्य होनी चाहिए। आज जरूरत किसी एक घटना पर प्रतिक्रिया की नहीं, बल्कि पुलिस सुधारों को वास्तविक रूप से लागू करने की है वरना 'एनकाउंटर और बुलडोजर मॉडल' धीरे-धीरे संवैधानिक लोकतंत्र की जगह जंगल के नियम पर आधारित व्यवस्था में बदल देगा जो शक्तिशाली होगा वही हत्या, शोषण, दमन और अत्याचार करेगा? @bihar_police @dgpup @HMOIndia
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गौतम बुद्ध आज भी इसलिए प्रासंगिक हैं क्योंकि उन्होंने मानव जीवन की समस्याओं दुःख, भय, असंतोष, लालच और हिंसा का समाधान किसी अंधआस्था या दैवी आदेश में नहीं, बल्कि अनुभव, तर्क और आत्मबोध में खोजा। महात्मा बुद्ध का संदेश था कि मनुष्य स्वयं देखे, परखे और समझे; केवल परंपरा या कथनों के आधार पर किसी बात को स्वीकार न करे यही दृष्टि उन्हें अपने समय से बहुत आगे और आज के दौर में भी अत्यंत प्रासंगिक बनाती है बुद्ध पूर्णिमा पर तथागत गौतम बुद्ध को विनम्र नमन! #तथागत_गौतम_बुद्ध
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महाराष्ट्र में अंधविश्वास, चमत्कार और पाखण्ड के नाम पर होने वाले शोषण को रोकने के लिए अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून 2013 लागू है इस कानून का उद्देश्य किसी धर्म या आस्था का विरोध नहीं, बल्कि अंधविश्वास के नाम पर होने वाली ठगी, शोषण और अमानवीय प्रथाओं पर रोक लगाना है। नागपुर में धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का कार्यक्रम होना है जिसमें “दिव्य दरबार” का लाइव प्रसारण भी होना है। इसी बीच नागपुर में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और श्याम मानव के बीच एक बार फिर बहस तेज हो गई है श्याम मानव के 80 लाख रुपये ईनाम की चुनौती और “दिव्य दरबार” को लेकर पूरे देश की नजरें महाराष्ट्र पर टिकी हैं। अंधश्रद्धा विरोधी संगठनों का कहना है कि यदि किसी के पास अलौकिक शक्ति या चमत्कार है तो उसे वैज्ञानिक तरीके से सार्वजनिक रूप से साबित किया जाना चाहिए वहीं समर्थक इसे आस्था और धार्मिक विश्वास का विषय बता रहे हैं अब सवाल यह है कि समाज विज्ञान और तर्क की दिशा में आगे बढ़ेगा या चमत्कार और अंधविश्वास की बहस और गहराएगी। संविधान वैज्ञानिक सोच विकसित करने की बात करता है, इसलिए किसी भी दावे को तर्क और प्रमाण की कसौटी पर परखना लोकतांत्रिक समाज की जिम्मेदारी है। #ShyamManav #DhirendraShastri
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"सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को ना प्रवेश देने को सुप्रीम कोर्ट ने जायज़ ठहराया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धार्मिक प्रथाओं में हमे हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. प्रथा यह कि माहवारी खून अशुद्ध खून है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ग़लत है क्यू की सुप्रीम कोर्ट ब्राह्मणवादी व्यवस्था का शिकार है।" प्रो० विक्रम अम्बेडकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय #ProVikramAmbedkar
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"आज कुशवाहा लोग कहते हैं सम्राट अशोक मेरे हैं, लेकिन उस समय जाति कुव्यवस्था थी ही नहीं, सम्राट अशोक किसी जाति के सम्राट नहीं थे।" प्रो0 राजेन्द्र प्रसाद सिंह इतिहासकार व भाषा वैज्ञानिक @563Rajendra @jitanrmanjhi
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इतिहासकार चन्द्रगुप्त मौर्य का शासनकाल लगभग 321 ईसा पूर्व से 297 ईसा पूर्व मानाते हैं। सिकंदर महान को 326 ईसा पूर्व में भारत आया उस समय मगध पर नन्द वंश का शासन था न की मौर्य वंश का। सिकंदर की मृत्यु 323 ईसा पूर्व में हो गयी थी। चन्द्रगुप्त मौर्य ने बाद में सिकंदर के सेनापति और उत्तराधिकारी सेल्यूकस प्रथम निकेटर को 305 ई0पूर्व में हराया था। इसके बाद दोनों के बीच संधि हुई और वैवाहिक संबंध होने का भी उल्लेख मिलता है। इतिहासकार व भाषा वैज्ञानिक राजेन्द्र प्रसाद सिंह का कहना है कि सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में वर्ण आधारित जाति कुव्यवस्था नहीं थी, यहाँ तक की पूरे मौर्य काल में जाति कुव्यवस्था नहीं थी न ही मौर्य काल के किसी अभिलेख में इसका कोई उल्लेख मिलता है, चन्द्रगुप्त मौर्य पशुपालक किसान थे न कि किसी जाति से! पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी द्वारा किसी जाति विशेष के अपराधी को बिना किसी आधार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के गैंग का बताना कहां उचित है, अगर कोई सबूत है तो उसे सामने रखना चाहिए? @jitanrmanjhi @yadavtejashwi #Bihar
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"जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(JNU) के एडमिशन में स्टाॅफ के बच्चों के लिए 5% का अतिरिक्त कोटा तय करना पूरी तरह असंवैधानिक और JNU की एडमिशन पॉलिसी के प्रावधानों के विरुध्द है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को इस फैसले को अविलम्ब रद्द करना चाहिए।" उर्मिलेश वरिष्ठ पत्रकार @UrmileshJ @ugc_india @dpradhanbjp
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गाज़ीपुर के रेवतीपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत त्रिलोकपुर गांव से मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिक छात्रा अपने भाई के सगाई कार्यक्रम के सिलसिले में चाचा के घर गई हुई थी। बताया जा रहा है कि देर शाम जब वह वापस घर लौट रही थी, तभी सुनसान गली का फायदा उठाकर गांव के ही दो दबंग युवकों ने उसे जबरदस्ती पकड़ लिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि दोनों युवक छात्रा को बंधक बनाकर खेत में ले गए, जहां उसके साथ दरिंदगी की गई। घटना के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। इस घटना से पीड़िता और उसके परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पॉक्सो एक्ट समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करते हुए आरोपी शुभम सिंह और समरप्रताप उर्फ निक्कू सिंह को गिरफ्तार किया है। स्थानीय लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और पीड़िता को शीघ्र न्याय दिलाने की मांग की है। #Ghazipur
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"अपराधी का जात यादव था इसलिए 12 घण्टे के अंदर एनकाउंटर हो गया, सम्राट जी भागलपुर जैसा अपराध आज से पहले भी हुआ है और कल भी होगा लेकिन हम इन्तजार करेंगे इसी तरह के दूसरे एनकाउंटर का और अगर नहीं हुआ तो हम समझेंगे की ये एनकाउंटर अपराधी देख कर नहीं जात देख कर हो रहा है।" मनीष यादव पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष पटना विश्वविद्यालय #ManishYadav #Bihar #Patana
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मायावती 70 साल की हैं। ममता बनर्जी 71 साल की हैं। एक डर के घर में बैठ गयी। दूसरी बेखौफ सड़क पर है। वेद प्रकाश पत्रकार #ActivistVed
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