Aman Singh
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Aman Singh
@BebakAman
Writer | Social Activities |
india Katılım Mart 2023
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मुकेश सहनी ने 2020 का विधानसभा का चुनाव सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर सीट से लड़ा था। तब वे NDA में शामिल थे। वो राजद के सलाउद्दीन से चुनाव हार गए थे। सलाउद्दीन कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे महबूब अली कैसर के बेटे हैं।
अब तेजस्वी यादव अपनी इस सिटिंग सीट को नहीं छोड़ना चाहते हैं। जबकि मुकेश सहनी एक बार फिर से यहीं से चुनाव लड़ना चाहते हैं। महागठबंधन के जातीय कॉम्बिनेशन के लिहाज से ये एक विनिंग सीट है। यहां मुस्लिम और यादव निर्णयक भूमिका में हैं।
जबकि तेजस्वी की तरफ से मुकेश सहनी को दरभंगा के गौड़ा बौरम विधानसभा सीटी से चुनाव लड़ने के लिए कहा जा रहा है। ये विधानसभा मुकेश सहनी के गृह क्षेत्र में पड़ता है। मुकेश सहनी का घर दरभंगा के विरोल थाना क्षेत्र के सुपौल बाजार में पड़ता है। लेकिन सहनी यहां से चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। अब तक ये साफ नहीं हो पाया है कि सहनी कहां से चुनाव लड़ेंगे।

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एनडीए में चिराग पासवान और महागठबंधन में मुकेश सहनी दोनों की जिद ने गठबंधनों की नींद उड़ा दी है।
चिराग पासवान इस बार बिहार नहीं, दिल्ली से ही डील करने के मूड में हैं, वहीं धर्मेंद्र प्रधान की दिल्ली रवाना होने से सियासी गलियारों में हलचल तेज है।
उधर, मुकेश सहनी सीटों पर नरम लेकिन उपमुख्यमंत्री पद पर अडिग हैं।
तेजस्वी यादव और महागठबंधन के नेता लगातार उन्हें मनाने में जुटे हैं, लेकिन सहनी की जिद ने पूरा समीकरण अटका दिया है।
अब देखना दिलचस्प होगा —
क्या दिल्ली से चिराग की डील पटेगी या पटना में सहनी की शर्तें भारी पड़ेंगी?
#BiharPolitics #NDA #Mahagathbandhan #ChiragPaswan #MukeshSahni #TejashwiYadav

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CJI पर हमला हुआ — लोकतंत्र पर हमला हुआ।
लेकिन हैरानी की बात ये कि
चिराग पासवान और जीतन राम मांझी — दोनों की जुबान बंद रही!
ना कोई ट्वीट,
ना कोई बयान…
अब फैसला समर्थकों को करना है —
क्या ये सच में आपकी आवाज़ हैं,
या फिर संघ की विचारधारा के साये में खो गए नेता..?
#CJI #Democracy #BiharPolitics #ChiragPaswan #JitanRamManjhi


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राजनीति के बाज़ार में फिर एक आधुनिक सौदा दिख रहा है —
चिराग शर्मा आपकी पार्टी हुआ करती थी ‘लोक जन कल्याण’ के लिए, पर अब उसी का नाम चुनावी दुकानदारी की बहस में घिर गया है।
सूत्र बता रहे हैं — भाजपा 20 सीट दे सकती है, पर चिराग 30 पर अड़े हैं। भाजपा का जवाब सीधा है: “अगर आपका मकसद टिकट बेचना है तो 20 से ऊपर जितनी सीटें लोगे, उतनी की कीमत हम दे देंगे।”
साथ ही भाजपा ने चेतावनी भी दी है — अधिक सीटें देने से जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा का प्रेशर बढ़ेगा, जो झेलना मुश्किल होगा।
मतलब: समझौता अब पैसों, गठजोड़ के संतुलन और दबाव की राजनीति के बीच बनना है।
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#Bihar #BiharElections2025

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@savedemocracyI मेरा मानना है कि चिराग पासवान को अकेले चुनाव लड़ना चाहिए क्या बोलते हैं आप सभी
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बिहार को लेकर बड़ी खबर🚨
बिहार एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है।
खबरों के अनुसार एनडीए गठबंधन का बड़ा चेहरा चिराग पासवान 25 से कम सीटों पर मानने के लिए तैयार नहीं हैं🔥🔥
चिराग पासवान अगर एनडीए से बाहर हो कर चुनाव लड़ते हैं तो क्या मुकेश सहनी एनडीए में शामिल होंगे ?
सूत्रों के अनुसार उधर जीतनराम मांझी को 7 सीट का ऑफर दिया गया है, ख़बरों के अनुसार नाराज़ वो भी हैं।
बिहार की राजनीति पर नज़र बनाये रखिए।

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@savedemocracyI कोंग्रेस को बिना किसी स्वार्थ को देखते हुए काम करना चाहिए
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बिहार कांग्रेस से जुड़ी बड़ी खबर🚨
बिहार में कांग्रेस सीट बंटवारे से पहले ही लगभग दो दर्जन सीटों पर अपने उम्मीदवार को तय कर लिया है🔥🔥
विश्वसनीय सूत्रों से कांग्रेस की तरफ़ से कुछ उम्मीदवार जो लगभग तय हैं
कुटुंबा से राजेश राम
कदवा से शकील अहमद ख़ान
औरंगाबाद से आनंद शंकर सिंह
मुजफ्फरपुर से विजेंद्र चौधरी
किशनगंज से इज़हारुल हुसैन
मौजूदा समय में कांग्रेस के लगभग 17 विधायक हैं , जिसमे ज्यादातर विधायकों को पार्टी दुबारा टिकट दे सकती है।
जिन विधायकों के ख़िलाफ़ जमीनी स्तर पर विरोध पार्टी उनका टिकट काट सकती है।

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जेडीयू कह रही है — “एक फेज़ में निपटा दो चुनाव।”
बीजेपी कह रही है — “दो फेज़ बेहतर रहेंगे।”
एक ही मीटिंग, एक ही एजेंडा — लेकिन सोच दो विपरीत।
आप बताओ —
एक फेज़ में चुनाव बेहतर या दो फेज़ में?
#BiharElections
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बिहार के मोतिहारी में प्रियंका गांधी की रैली हुई। रैली का आयोजन अखिलेश प्रसाद सिंह और उनके नजदीकी स्थानीय जिलाध्यक्ष की निगरानी में हुआ। रैली में तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी की तरफ से बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह को शामिल होने भेजा। लेकिन सुधाकर सिंह को मंच पर चढ़ने ही नहीं दिया गया। पूछने पर पता चला कि उनका नाम अंतिम समय में किसी वरिष्ठ नेता के दबाव में कटवा दिया गया। हालांकि सभा खत्म होने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इसके लिए खेद जताया..


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@slaraibakram @prasantkumarya6 @RJDforIndia @RabriDeviRJD @yadavtejashwi @sanjuydv @Nawalk7 बहुत बहुत बधाई
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राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय श्री लालू प्रसाद जी ने मुझे राष्ट्रीय प्रवक्ता जैसी महत्वपूर्ण जवाबदेही सौंपी है।
मैं दिल की गहराइयों से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय लालू प्रसाद जी, महासचिव माननीय अब्दुलबारी सिद्दिकी जी और युवा ह्रदय सम्राट माननीय तेजस्वी प्रसाद यादव जी के प्रति आभार ज्ञापित करता हूं।
पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए मैं प्रतिबद्ध रहूंगा।
Rashtriya Janta Dal has bestowed upon me important responsibility of representing the party as a National spokesperson. For this I extend my heartfelt gratitude, to the National President of the RJD, Shri Lalu Prasad Yadav Ji, to Shri Adbul Bari Siddiqui Ji and to our very dynamic youth leader Shri Tejaswi Prasad Yadav ji

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SIR में आधार कार्ड को मान्यता मिलना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है।
ये है वोटर अधिकार यात्रा की पहली और ऐतिहासिक जीत ✊
अब साफ़ है – जब विपक्ष सड़क पर उतरती है, आवाज़ बुलंद करती है, तो व्यवस्था को झुकना ही पड़ता है।
ये सिर्फ़ शुरुआत है, अभी और कई पड़ाव बाकी हैं।
#VoterAdhikarYatra #JanataKiAwaaz #LoktantraKiJeet

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भाजपा के अपने सांसद जनार्दन मिश्रा ने खुलासा किया है कि रीवा में वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी हुई।
उनके मुताबिक़ – “एक कमरे में 1000 वोट थे, लेकिन वोट गिने गये 1100!”
अब सोचिए, जब भाजपा के सांसद खुद चुनावी धांधली की जांच करके ये कह रहे हैं तो सच्चाई कितनी डरावनी होगी।
सवाल ये है कि जब सत्ता पक्ष के ही सांसद धांधली की बात कर रहे हैं तो चुनाव आयोग क्यों चुप है?
क्या लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने वाली इस धांधली पर कोई कार्रवाई होगी?
या फिर इन आवाज़ों को भी अनसुना कर दिया जाएगा?
रीवा सिर्फ़ एक उदाहरण है, लेकिन ये उदाहरण बता रहा है कि चुनावी प्रक्रिया कितनी संदिग्ध और खोखली हो चुकी है।
देश का हर जागरूक नागरिक अब सिर्फ़ एक ही मांग कर रहा है –
साफ़, पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव!

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इल्ज़ाम तो अनुराग ठाकुर ने भी कई लोकसभाओं में बड़ी संख्या में फर्जी वोट डालने के लगाए थे।
लेकिन क्या आपने देखा कि चुनाव आयोग के मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता ने इस पर कभी कोई आपत्ति जताई? उनसे कोई सवाल-जवाब नहीं हुआ? या फिर नियम सिर्फ विपक्ष और जनता के लिए हैं?
क्या इसका मतलब यही है कि अगर सत्ताधारी दल आरोप लगाए तो उसे “घरेलू मामला” समझकर पब्लिक में डिस्कस नहीं किया जाएगा, और अगर विपक्ष सवाल उठाए तो चुनाव आयोग तुरन्त आगे आकर सफाई देने लगता है?
ये दोहरे रवैये का सबसे बड़ा सबूत है। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता तभी बच पाएगी जब वह सत्ता और विपक्ष के बीच बराबरी का व्यवहार करे।
नहीं तो लोकतंत्र पर सवाल उठना तय है।

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आख़िर चुनाव आयोग चाहता क्या है? 🤔
पहले अकेले राहुल गांधी दवाई दे रहे थे, अब अखिलेश यादव ने भी इंजेक्शन ठोक दिया 💉🔥
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को सीधा चुनौती दी है –
👉 जब समाजवादी पार्टी खुद आपके ऑफिस से पावती (डिजिटल रिसीद) ले चुकी है तो आप कैसे कह सकते हैं कि हमें शपथपत्र नहीं मिले?
👉 अब हम मांग करते हैं कि चुनाव आयोग भी शपथपत्र दे कि जो डिजिटल रिसीद हमें भेजी है, वो सही है।
अगर ऐसा नहीं किया गया तो शक सिर्फ़ चुनाव आयोग पर नहीं, बल्कि पूरे “डिजिटल इंडिया” पर भी उठेगा।
यानी मामला अब सिर्फ़ एक पार्टी का नहीं, लोकतंत्र की साख का हो गया है।
और आख़िरी लाइन में अखिलेश यादव का सीधा वार –
“भाजपा जाए तो सत्यता आए” 💥
साफ है —
राहुल गांधी ने दवाई दी थी, अब अखिलेश यादव ने खेल ही बिगाड़ दिया।


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