मधुबनी में राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की स्थापना के लिए पहल।
नई दिल्ली में माननीय केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल जी से मुलाकात कर बिहार के मधुबनी जिले में राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (National Institute of Design) की स्थापना का आग्रह किया तथा इस संबंध में उन्हें एक विस्तृत पत्र भी सौंपा। इस महत्वपूर्ण विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार करने के आश्वासन के लिए मैं माननीय मंत्री जी का आभारी हूं।
माननीय मंत्री जी को बताया कि मधुबनी विश्व प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग, जो यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त कला विधा है, की उद्गम स्थली है। जिले के गांवों में हजारों कलाकार इस कला परंपरा से जुड़े हैं। पारंपरिक दीवार चित्रकला से आगे बढ़ते हुए आज मिथिला पेंटिंग वस्त्र, फैशन, हस्तशिल्प और डिजिटल माध्यमों तक अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी है तथा विश्वभर की प्रतिष्ठित कला दीर्घाओं में सराहना प्राप्त कर रही है।
मिथिला पेंटिंग की वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रमाण इस बात से भी मिलता है कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने नीदरलैंड की अपनी हालिया यात्रा के दौरान वहां के प्रधानमंत्री को मछली के रूपांकन वाली मधुबनी पेंटिंग उपहार में दी थी। स्पष्ट है कि मिथिला चित्रकला आज भारत की सांस्कृतिक विरासत की गौरवशाली पहचान बन चुकी है।
मिथिला पेंटिंग के साथ-साथ अरिपन चित्रकला, सुजनी कढ़ाई, सिक्की शिल्प और बांस कला जैसी कई अन्य पारंपरिक विधाएं भी इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई प्रदान करती हैं। मिथिला प्राचीन काल से दर्शन, तर्कशास्त्र और पारंपरिक शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे में मधुबनी में राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID) की स्थापना न केवल इस क्षेत्र की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं, कलाकारों और विद्यार्थियों को आधुनिक डिजाइन शिक्षा, नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगी।
मेरा मानना है कि मधुबनी में NID की स्थापना भारत की पारंपरिक कला और समकालीन डिजाइन शिक्षा के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य भी करेगी। इस संबंध में बिहार सरकार की प्रतिबद्धता, प्रस्तावित स्थल तथा संस्थान की स्थापना के औचित्य से जुड़ा प्रस्ताव भी माननीय मंत्री जी को सौंपा। इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की ओर से सकारात्मक पहल के प्रति आशान्वित हूं।
#NationalInstituteOfDesign#MithilaPainting#Madhubani#Mithila@PiyushGoyal@CimGOI@NID_India
यूपी के ग्रामीण इलाक़ों को छोड़िये,नोएडा में रात रात भर बिजली नही रहती है। बिहार में बिजली दो घंटा के लिए कट जाती है तो सोशल मीडिया पर हंगामा मचा देते हैं। यूपी के लोग सह लेते हैं इसलिए रोड पर कोई डंपर इन्हें कुचल जाता है।
अगर आप किसी का एक बार में एक यूनिट ब्लड निकालेंगे तो वह विरोध करेगा। लेकिन 5,5 ML करके निकलेंगे तो वह कुछ नहीं बोलेगा। यही फार्मूला तेल कंपनी अपना रही है। 80,90 पैसे करके तेल का दाम बढ़ा रही है और जानता को तकलीफ़ पता भी नहीं चल रही है।
एनसीआर में एक और बिहारी मारा गया। 8 पेज के सु/साइड नोट में बेगूसराय के रामपुकार यादव ने लिखा कि उसे “बिहारी” कहकर जलील किया जाता था। यहां तक कहा गया कि “हरियाणा में भैंस 1 लाख 30 हजार की मिलती है और बिहारन 80 हजार में बिकती हैं।” FIR लिखने के नामपर दिल्ली पुलिस ने भी किया धोखा।
"मुझे ब्लैकमेल कर मेरे साथ संबन्ध बनाए"
लड़की का इंतजाम करो या पत्नी को बुलाओ...
आत्महत्या से पहले युवक ने 8 पेज का लिखा सु/साइड नोट
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गुरुग्राम के एक छोटे से कमरे में 17 मई की दोपहर जो हुआ, उसने सिर्फ एक परिवार नहीं तोड़ा, बल्कि कई ऐसे सवाल छोड़ दिए जिनका जवाब शायद सिस्टम के पास भी नहीं है। बिहार के बेगूसराय के रहने वाले 31 वर्षीय रामपुकार यादव ने फांसी लगाने से पहले 8 पेज का सुसाइड नोट लिखा। नोट के आखिर में उसने सिर्फ इतना लिखा — “सॉरी ऑल ऑफ यू…”
इन तीन शब्दों के पीछे वो दर्द छिपा था, जिसे वह करीब साढ़े तीन साल तक अंदर ही अंदर सहता रहा।
रामपुकार गुरुग्राम की एक कंपनी में काम करता था। पत्नी और इकलौता बेटा गांव में रहते थे। वह यहां नौकरी करके परिवार का घर चला रहा था और गांव में नया मकान भी बनवा रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि मेहनत करने वाला रामपुकार एक दिन सब कुछ ठीक कर देगा, लेकिन किसी को नहीं पता था कि वह रोज अंदर से टूट रहा है।
रामपुकार ने आत्महत्या से पहले 8 पेजों का सुसाइड नोट लिखा था रामपुकार ने अपने सुपरवाइजर देवेंद्र कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने लिखा कि पहले उसे शराब पिलाकर उसके साथ गलत संबंध बनाए गए, फिर लंबे समय तक ब्लैकमेल किया गया। उसने आरोप लगाया कि उससे पैसे मांगे गए, धमकियां दी गईं और मानसिक रूप से लगातार प्रताड़ित किया गया।
लेकिन सिर्फ ब्लैकमेलिंग ही नहीं रामपुकार को उसकी पहचान और गरीबी को लेकर भी अपमानित किया गया। सुसाइड नोट में उसने लिखा कि उसे “बिहारी” कहकर जलील किया जाता था। यहां तक कहा गया कि “हरियाणा में भैंस 1 लाख 30 हजार की मिलती है और बिहारन 80 हजार में बिकती हैं।”
रामपुकार ने अपने नोट में लिखा कि जब उसने विरोध किया तो उससे कहा गया कि “लड़की की व्यवस्था करो, नहीं तो गांव से अपनी पत्नी को बुला लो।” यही बात उसे अंदर से तोड़ गई। उसने अपने मैनेजर, एडमिन और HR तक से मदद मांगी, लेकिन हर जगह उसे सिर्फ समझौता करने की सलाह मिली।
घटना के बाद भी परिवार को इंसाफ की उम्मीद थी, लेकिन परिजनों का आरोप है कि 30 घंटे तक FIR तक दर्ज नहीं हुई। परिवार बार-बार पुलिस से कार्रवाई की मांग करता रहा, लेकिन उन्हें सिर्फ प्रक्रिया और इंतजार का जवाब मिलता रहा। आखिरकार मजबूरी में परिवार शव लेकर गांव लौट आया।
बुधवार को जब रामपुकार का शव बेगूसराय पहुंचा, तो गांव में मातम पसरा हुआ था। मां बेसुध थी, पत्नी बार-बार सिर्फ यही पूछ रही थी — “अगर उसने इतना कुछ लिखा था, तो किसी ने उसे बचाया क्यों नहीं?
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हिंदुओं का दावा है कि जातिवाद नस्लवाद क्षेत्रवाद है ही नहीं ख़त्म हो चुका है फिर ये क्या है?
नासिक टीसीएस पर छाती पीटने वाले यहां चुप रहेंगे।
कांग्रेस और मुसलमानों के नाम पर रोज चूड़ियां तोड़ने वाले भी चुप रहेंगे।
मैं इसीलिए कहता हूं दोष जाति का नहीं है दोष है तो सिर्फ गरीबी का
पूरा परिवार उजड़ गया, पुलिस पैसे खाकर मस्त हो गई किसी को कोई फर्क नहीं।
क्या कोई बिहारी नेता रामपुकार को न्याय दिला पाएगा? उसे प्रताड़ित करने वाला देवेंद्र कब गिरफ्तार होगा? उसकी कंपनी का HR और मैनेजर कब गिरफ्तार होंगे?
@samrat4bjp मुख्यमंत्री जी, समय रहते ऐसे मामलों में कड़ा रुख अपना लीजिये वरना ऐसी घटनाएं आम बात हो जाएंगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री से बात करिये, आईपीएस लेवल अधिकारी गुरुग्राम और दिल्ली भेजिए, पुलिसवालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। @Biharyouth1
विजिलेंस टीम ने इस CO को 3 लाख घुस लेते हुए पकड़ा है।सासाराम में एक जमीन में परिमार्जन फ़र्ज़ी ढंग से कर रहे थे।इसने दृष्टि से कोचिंग किया था। बिहार में सिर्फ विजिलेंस विभाग ही अपना काम जिम्मेदारी से कर रहा है।
इस CO को 3 लाख रुपए की रिश्वत लेते विजिलेंस की टीम ने गिरफ्तार किया है,सासाराम में एक विवादित जमीन के परिमार्जन के लिए 6 लाख रुपए की मांग हुई,तीन लाख एडवांस लेते समय विजिलेंस ने धर दबोचा...ऐसे लोग सिर्फ मीठी-मीठी बातें करते हैं,अंदर से कूड़ेदान से भी ज्यादा गंदे होते हैं!
#Bihar@VigilanceBihar
NEET परीक्षा में सम्मिलित होने वाले सभी परीक्षार्थियों की सुविधा हेतु बिहार राज्य की सभी सरकारी बसों में आवागमन निःशुल्क रहेगा।
साथ ही, जिला प्रशासन, राज्य के सभी मठ-मंदिरों एवं गैर-सरकारी संगठनों से आग्रह है कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा अन्य प्रमुख स्थानों पर परीक्षार्थियों एवं उनके अभिभावकों हेतु पेयजल, सत्तू आदि की व्यवस्था में सहयोग करें।
सभी अभ्यर्थियों को परीक्षा हेतु हार्दिक शुभकामनाएँ!
मुख्यमंत्री @samrat4bjp द्वारा
बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने, योग्य युवाओं को न्याय दिलाने तथा सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता स्थापित करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।
शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को आयोग के माध्यम से अधिक पारदर्शी बनाना एक ऐतिहासिक कदम है।किन्तु आज भी राज्य में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी प्राप्त करने वाले कुछ तथाकथित शिक्षकों का मामला गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। ये लोग न केवल असली मेधावी अभ्यर्थियों का अधिकार छीन रहे हैं, बल्कि लाखों बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं।
पटना हाईकोर्ट के आदेश पर निगरानी जांच में हजारों प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए हैं, और कइयों ने डाक्यूमेंट ही जमा नहीं कराये, फिर भी कई लोग वर्षों से “Benefit of Doubt” पर नौकरी कर रहे हैं। आखिर कब तक?
मांग है कि —
• 90 दिनों के भीतर मूल प्रमाणपत्र जमा कराने की अंतिम समयसीमा तय हो।
• मूल दस्तावेज नहीं देने वालों को स्वतः बर्खास्त किया जाए।
• फर्जी प्रमाणपत्र वालों पर FIR, वेतन वसूली और कड़ी कार्रवाई हो।
यह सिर्फ नौकरी का नहीं, बिहार के बच्चों के भविष्य और ईमानदार युवाओं के अधिकार का सवाल है।
आप जिस स्तर पर स्कूली शिक्षा को ले जाने की घोषणा कर रहे वो इन फर्जियों के स्कूलों में रहते कैसे हो पाएगा ?
क्या बच्चों का भविष्य हर साल इन फर्जियों द्वारा बर्बाद नहीं हो रहा है।?
महज 10/20 हजार फर्जी लोगों के लिए लाखों अभिभावकों और बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है।
राजनीति न हो उस डर से सरकार कभी कार्रवाई पर नहीं उतरती , कम से कम कोर्ट के निर्देश वाली कार्रवाई पूरी हो ताकि शिक्षा में योग्य शिक्षक रहे फर्जी न बच पाए ।
भाई साहब ने राजस्थान में एक क्रिकेट स्टेडियम में करोड़ो इन्वेस्ट किया है। लेकिन अपने होम स्टेट को सिर्फ बोल बच्चन दे रहे है।
राजस्थान में वेदांता ग्रुप अनिल अग्रवाल अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बना रहा है। जिसमें 300 करोड़े निवेश कर रहे हैं। अगर सही में इन्हें बिहार में क्रिकेट की चिंता होती तो राजस्थान की जगह बिहार में स्टेडियम निर्माण में निवेश करते। अभी भी ये चाहेंगे तो 500 करोड़ की लागत से दो अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनवाने की घोषणा कर सकते थे पोस्ट के साथ में। पर नहीं किए,क्युकी बहुत दिनों से लाइमलाइट से गायब थे तो इन्हें लाइमलाइट चाहिए थी। अब मिल भी गया है अब फिर भूल जाएँगे। ये आदमी शुरू से कपटी है। कुछ दिनों से अदानी ग्रुप बिहार में निवेश कर लाइमलाइट बटोर रहा है जिसके वजह से इसके अंदर जलन की भावना जाग उठी और ऐसा पोस्ट कर दिया।लेकिन करेगा नहीं निवेश।