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@epanchjanya आतंकियों के ख़ास रिस्तेदारो की भावना जरूर आहत हुई होगी क्योंकि गद्दार ही जानता है गद्दारी की कीमत?
घायल की गति घायल जाने और न जाने कोय?
ऐरी में तो प्रेम दिवानी मेरा
दर्द न जाने कोय?
हिन्दू तो संवेदना हीन भावना विहीन हृदय
सून्य है?
नरेंद्र सरेंडर कहने वालो से देश आहत नहीं जज साहब?


हिन्दी



































