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जमवारामगढ़, जयपुर के बिवाल परिवार ने जिस ऋषि के लिए नीट का पेपर खरीदा, उसकी 12th की मार्कशीट देखिए। सेकंड डिवीजन बाय ग्रेस पास है। थ्योरी के 56 नंबर के पेपर में फिजिक्स में 9, केमिस्ट्री में 15 और बायोलॉजी में 20 नंबर आए हैं। यदि भांडा नहीं फूटता तो इसके नीट में 600+ नंबर आते और इसे आसानी से सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिल जाता।


पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया भर में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में भारी उछाल आया है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के बंद होने और तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण अप्रैल और मई के अधिकांश समय ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा। इसका असर दुनिया की लगभग हर अर्थव्यवस्था में सीधे पेट्रोल पंपों पर दिखाई दिया। लेकिन भारत इस पूरी तस्वीर में एक अलग और उल्लेखनीय अपवाद बनकर उभरा है। 23 फरवरी 2026 से 15 मई 2026 के बीच अधिकांश देशों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई: • म्यांमार: पेट्रोल +89.7%, डीज़ल +112.7% • मलेशिया: पेट्रोल +56.3%, डीज़ल +71.2% • पाकिस्तान: पेट्रोल +54.9%, डीज़ल +44.9% • संयुक्त अरब अमीरात: पेट्रोल +52.4%, डीज़ल +86.1% • अमेरिका: पेट्रोल +44.5%, डीज़ल +48.1% • श्रीलंका: पेट्रोल +38.2%, डीज़ल +41.8% • ब्रिटेन: पेट्रोल +19.2%, डीज़ल +34.2% • जर्मनी: पेट्रोल +13.7%, डीज़ल +19.8% • जापान: पेट्रोल +9.7%, डीज़ल +11.2% भारत में वृद्धि सबसे कम रही: • पेट्रोल: +3.2% • डीज़ल: +3.4% केवल सऊदी अरब में कोई वृद्धि नहीं हुई, क्योंकि वहाँ प्रत्यक्ष सरकारी सब्सिडी व्यवस्था लागू है। लेकिन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत वह देश रहा जहाँ आम नागरिकों पर सबसे कम बोझ पड़ा। यह अपने आप नहीं हुआ। पश्चिम एशिया संकट गहराने के बाद पूरे 76 दिनों तक भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों, जिनकी खुदरा बाजार में लगभग 90% हिस्सेदारी है, ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ सीधे जनता पर नहीं डाला। उन्होंने स्वयं लागत का बड़ा हिस्सा वहन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रतिदिन लगभग ₹1000 करोड़ तक की अंडर-रिकवरी हो रही थी। 15 मई को घोषित ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि लगभग चार वर्षों में पहली बढ़ोतरी है और यह करीब ₹95 प्रति लीटर के आधार मूल्य पर सिर्फ लगभग 3.5% की वृद्धि बैठती है। बाकी दुनिया से तुलना कीजिए। पाकिस्तान में लोग तीन महीने पहले की तुलना में लगभग 55% अधिक कीमत चुका रहे हैं। मलेशिया में 56% अधिक। अमेरिका में लगभग 45% अधिक। कई देशों में डीज़ल की कीमतें 50% से लेकर 100% तक बढ़ चुकी हैं क्योंकि डीज़ल सीधे माल ढुलाई, व्यापार और लॉजिस्टिक्स से जुड़ा है। भारत ने इसके विपरीत, दो महीने से अधिक समय तक वैश्विक तेल संकट का असर आम नागरिकों तक पहुँचने से रोके रखा और फिर भी केवल सीमित व संतुलित वृद्धि की। यह सिर्फ पेट्रोल पंप की कीमतों का मामला नहीं है। ईंधन की कीमतें परिवहन, खाद्य वस्तुओं, लॉजिस्टिक्स, निर्माण लागत और आम परिवारों के बजट को सीधे प्रभावित करती हैं। ईंधन मूल्य नियंत्रण का अर्थ है महंगाई पर नियंत्रण। इसलिए कहानी सिर्फ ₹3 बढ़ने की नहीं है। असल कहानी यह है कि जब दुनिया के अधिकांश देशों में पेट्रोल-डीज़ल 10%, 20%, 50% और कहीं-कहीं 90% तक महंगे हो गए, तब भारत ने वृद्धि को केवल लगभग 3% तक सीमित रखा। यही इस पूरे आंकड़े का वास्तविक संदर्भ है।













Chief Minister Thalapathy Vijay met former Chief Minister MK Stalin at his residence . No ego. No hate. No bitterness. Only respect. Grace. Maturity. MK Stalin warmly welcomed Vijay and Vijay showed humility and respect towards a senior leader who shaped modern Tamil Nadu politics. A beautiful moment that touched millions of hearts across Tamil Nadu 🔥













