@umashankarsingh अमेरिका में जो भी मंत्री परिषद में शामिल होता है उसे अपनी सीनेटर यानि काँग्रेस सदस्य का पद छोड़ना पड़ता है,
हमारे यहाँ के विपरीत वहाँ का सिस्टम है
बहुजनों के उद्धारक, शोषित वंचितों को सत्ता का स्वाद चखाने वाले, वोट का सही इस्तेमाल सिखाने वाले बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी के परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें शत-शत नमन।
2. एक तरफ बीजेपी व इनकी सरकार दलितों को बसाने का ढिंढोरा पीटती है जबकि दूसरी तरफ उनको उजाड़ने की घटनाएं उसी तरह से आम हैं जिस प्रकार से पहले कांग्रेस पार्टी के शासन में हुआ करती थी, तो फिर दोनों सरकारों में क्या अन्तर है? खासकर दलितों को इस बारे में भी जरूर सोचना चाहिए।
@Mayawati
1. मध्यप्रदेश के गुना पुलिस व प्रशासन द्वारा अतिक्रमण के नाम पर दलित परिवार को कर्ज लेकर तैयार की गई फसल को जेसीबी मशीन से बबार्द करके उस दम्पत्ति को आत्महत्या का प्रयास करने को मजबूर कर देना अति-क्रूर व अति-शर्मनाक। इस घटना की देशव्यापी निन्दा स्वाभाविक। सरकार सख्त कार्रवाई करे।
2. यूपी के बीएचयू को भी तीसरा रैंक प्राप्त करने पर बधाई। इन नामी उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे और भी ज्यादा लगन व निष्ठा से काम करें, विवादों में न पड़ें व अपनी उपलब्धियों से भारत देश का नाम दुनिया में रौशन करें।
@Mayawati
1. भारत सरकार की रैंकिग में जेएनयू लगातार चैथी बार देश की दूसरी सर्वोत्तम यूनिवर्सिटी घोषित हुई है जबकि दिल्ली के ही जामिया मिल्लिया ने दो रैंक बेहतर करके 10वाँ स्थान प्राप्त किया है। इससे वे लोग जरूर सीख लें जो इन प्रतिष्ठित संस्थानों को बदनाम करने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ते।
देश मे कोरोना महामारी से पीड़ितों व उससे बढ़ती मौतों की चिन्ताओं के बीच आज 69वें दिन लाॅकडाउन-5 कुछ छुट के साथ प्रारम्भ हो गया है जो 30 जून तक चलेगा जबकि अभी भी पूरा देश कोरोना की मार से त्रस्त है तो ऐसे में केन्द्र-राज्य सरकारों को और भी ज्यादा गंभीर होने की जरूरत है।
@Mayawati
4. अच्छा होता सरकार नया एमओयू करने व फोटो छपवाने से पहले यह बताती कि पिछले वर्षों में साइन किए गए इसी प्रकार के अनेकों एमओयू का क्या हुआ? एमओयू केवल जनता को बरगलाने व फोटो के लिए नहीं हो तो बेहतर है क्योंकि लाखों श्रमिकों को जीने के लिए लोकल स्तर पर रोजगार की प्रतीक्षा है। 4/4
3. लाॅकडाउन के कारण बेरोजगारी व बदहाली मे घर लौटे सर्वसमाज के लाखों श्रमिकों को जरूरी प्रभावी मदद पहुँचाने के बजाय यूपी में एमओयू हस्ताक्षर व घोषणाओं आदि द्वारा छलावा अभियान एक बार फिर शुरू हो गया है। अति-दुःखद। जनहित के ठोस उपायों के बिना समस्या और विकराल बन जाएगी। 3/4
@Mayawati
1.चीन छोड़कर भारत आने वाली कम्पनियों की प्रतीक्षा के बजाए केन्द्र व यूपी सरकार को अपने बूते आत्मनिर्भर बनने का प्रयास शुरू करना चाहिए क्योंकि शेनजेन इकोनोमिक जोन जैसी सड़क, पानी, बिजली आदि की फ्री आधारभूत सुविधा व श्रमिकों को कार्यस्थल के पास रहने की व्यवस्था आदि यहाँ कहाँ है।1/4
2.वैसे भी चाहे भाजपा की सरकार हो या फिर कांग्रेस पार्टी की, कोरोना महामारी व लम्बे लाॅकडाउन से सर्वाधिक पीड़ित प्रवासी श्रमिकों व मेडिकलकर्मियों के हितों की जो उपेक्षा व प्रताड़ना लगातार की जा रही है वह भी उचित व देशहित में कतई नहीं है। सरकारें तुरन्त ध्यान दें।
@Mayawati
1.केन्द्र व महाराष्ट्र सरकार के बीच विवाद के कारण लाखों प्रवासी श्रमिक अभी भी बहुत बुरी तरह से पिस रहे हैं जो अति-दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण। जरूरी है कि आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर इन मजलूमों पर ध्यान दें ताकि कोरोना की चपेट में फंसकर इन लोगों की जिन्दगी पूरी तरह बर्बाद होने से बच सके।
पवित्र रमज़ान में 1 माह की इबादत के बाद अब ईद-उल-फित्र, जिसकी खासकर सभी मुस्लिम भाई-बहनों को दिली मुबारकबाद व शुभकामनाएं। जिस तरह आपने लाॅकडाउन के नियमों पर अमल करते हुए रमजान बिताया, उसी प्रकार आप ईद भी मनाएं व अपनी इस खुशी में अपने गरीब पड़ोसी को उसके खुशी के हक को कतई न भूलें।
4. बसपा के लोगों से पुनः अपील है कि जिन प्रवासी मजदूरों को उनके घर लौटने पर उन्हें गाँवों से दूर अलग-थलग रखा गया है तथा उन्हें उचित सरकारी मदद नहीं मिल रही है तो ऐसे लोगों को अपना मानकर उनकी भरसक मानवीय मदद करने का प्रयास करें। मजलूम ही मजलूम की सही मदद कर सकता है। 4/4
@Mayawati
3. साथ ही, बीजेपी की केन्द्र व राज्य सरकारें कांग्रेस के पदचिन्हों पर ना चलकर, इन बेहाल घर वापसी कर रहे मजदूरों को उनके गांवों/शहरों में ही रोजी-रोटी की सही व्यवस्था करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की नीति पर यदि अमल करती हैं तो फिर आगे ऐसी दुर्दशा इन्हें शायद कभी नहीं झेलनी पड़ेगी।
1. आज पूरे देश में कोरोना लाॅकडाउन के कारण करोड़ों प्रवासी श्रमिकों की जो दुर्दशा दिख रही है उसकी असली कसूरवार कांग्रेस है क्योंकि आजादी के बाद इनके लम्बे शासनकाल के दौरान अगर रोजी-रोटी की सही व्यवस्था गाँव/शहरों में की होती तो इन्हें दूसरे राज्यों में क्यों पलायन करना पड़ता? 1/4