Bushra
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आप माने या न माने, लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव में सयानी घोष TMC के लिए एक बड़ा नुकसान साबित हुईं।
मुस्लिम वोटरों को साधने के लिए वह मंचों पर बार बार “मेरे दिल में काबा” गाती नजर आईं, लेकिन इसी बीच उनका एक पुराना पोस्ट वायरल हो गया, जिससे हिंदू समुदाय के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिली।
नतीजा यह रहा कि मुस्लिम वोटर आखिर तक TMC के साथ बना रहा, लेकिन बड़ी संख्या में हिंदू वोटरों का झुकाव TMC के विरोध में दिखाई दिया।

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कल मैंने सयानी घोस को लेकर लिखा था, कुछ लोगों को वो बात अच्छी नहीं लगी। इसमें कोई शक नहीं कि सयानी ने मेहनत की, लेकिन उनकी मेहनत ज़्यादातर एक वर्ग की तरफ झुकी हुई दिखाई दी। जीत के बाद ज़मीनी स्तर पर बंगाल की जनता ने भी उसी अंदाज़ में उनके गाए हुए शब्दों को बदलकर नए तरीके से गाना शुरू कर दिया।
Ilyas@Ilyas_SK_31
आप माने या न माने, लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव में सयानी घोष TMC के लिए एक बड़ा नुकसान साबित हुईं। मुस्लिम वोटरों को साधने के लिए वह मंचों पर बार बार “मेरे दिल में काबा” गाती नजर आईं, लेकिन इसी बीच उनका एक पुराना पोस्ट वायरल हो गया, जिससे हिंदू समुदाय के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिली। नतीजा यह रहा कि मुस्लिम वोटर आखिर तक TMC के साथ बना रहा, लेकिन बड़ी संख्या में हिंदू वोटरों का झुकाव TMC के विरोध में दिखाई दिया।
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पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत से सबसे अधीक खुशी वहां के मुस्लिमों को है।
उनका कहना है कि आए दिन जो मुसलमानों का चरित्रहनन होता था कि बांग्लादेशी हैं,
घुसपैठिए हैं, अवैध हैं, अराजक हैं, आतंकवादी हैं इत्यादि कहते थे अब उनके मुंह में टेप लग जाएगी
क्योंकि पहले तो सीमाएं ही उनके अधीन थी लेकिन अब तो सीमाएं भी, सिस्टम भी और राज्य भी सबकुछ उन्हीं के पास है।
अब कुलमिलाकर बात यही है कि फिलहाल भाजपा भी खुश, मुस्लिम भी खुश, भक्तजन भी खुश।


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दो सगे भाई हैं शहजाद पूनावाला और तहसीन पूनावाला ये दोनों चैनलों की डिबेट में आते हैं।
जिसमें ये आपस में बहस करते दिख जाएंगे। इनमें से एक पक्ष में रहता है और दूसरा विपक्ष में।
ये दोनों भाई घर जाकर साथ में कितना हंसते होंगे कि हम कैसे इतने सालों से पब्लिक को पागल बना रहे हैं और लोग बन रहे हैं।
सोचिए ये कैसे कर पा रहे हैं जबकि इन्हीं के धर्म के आम लोगों के साथ क्या हो रहा है ये सब जानते हैं लेकिन इन सब के बावजूद दोनों लोग भारत के लोगों को बेवकूफ बना कर अपना घर चला रहे है ।


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हर स्कूल में एक “फिक्स-इट लैब” होनी चाहिए, जहाँ बच्चों को अपने कपड़े, साइकिल और इलेक्ट्रॉनिक चीज़ों को ठीक करना सिखाया जाए !
बच्चों को ऐसा बड़ा होना चाहिए कि वो समझें हर चीज़ फेंक देने वाली नहीं होती !
यह बच्चों को उन आधी चीज़ों से ज्यादा असली ज़िंदगी की अहमियत सिखाएगा, जिन्हें स्कूल जबरदस्ती याद करवाते हैं !
चीज़ों को ठीक करना, उनकी देखभाल करना और उन्हें संभालना इंसान में सब्र, जिम्मेदारी और खुदमुख्तारी पैदा करता है !
देखभाल करना और चीज़ों की मरम्मत करना भी इस धरती पर अच्छी ज़िंदगी जीने का हिस्सा है !
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