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@CPChand10

Member of Legislative Council U.P. | Gorakhpur - Maharajganj seat (सदस्य, विधानपरिषद / विधायक)

Gorakhpur | Lucknow Katılım Mart 2022
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#छत्रसाल_बुंदेला 🇮🇳 4 मई 1649 - 20 दिसंबर 1731 “इत जमुना उत नर्मदा इत चंबल उत टोंस छत्रसाल सों लरन की रही न काहू होंस” धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणोत्सर्ग करने वाले महान योद्धा, बुंदेलखण्ड केसरी महाराज छत्रसाल बुंदेला जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन 🙏🏻 महाराजा छत्रसाल बुंदेला , बुंदेलखंड के महान योद्धा, स्वतंत्रता सेनानी और राजा थे । उन्हें बुंदेलखंड केसरी (Bundela Kesari) या बुंदेलखंड का शिवाजी के नाम से भी जाना जाता है जीवन परिचय • जन्म: 4 मई 1649 को बुंदेलखंड के ककर कछनई (मौर पहाड़ी, ओरछा के पास) में हुआ। पिता: चंपतराय बुंदेला (मुगलों से लड़ते हुए शहीद), माता: लालकुंवरी • वे ओरछा के रुद्र प्रताप सिंह के वंशज थे • बचपन में ही पिता की मृत्यु के बाद वे अनाथ हो गए और मुगल आक्रमणों से प्रभावित हुए *संघर्ष और उपलब्धियाँ • शिवाजी महाराज से प्रेरणा : 1668 के आसपास छत्रपति शिवाजी से भेंट हुई, जिन्होंने उन्हें स्वतंत्र हिंदू राज्य स्थापित करने की प्रेरणा दी • विद्रोह : 22 वर्ष की आयु में (1671) मात्र 5 घुड़सवार और 25 पैदल सैनिकों के साथ मुगल सम्राट औरंगजेब के विरुद्ध बगावत कर दी । गुरिल्ला युद्ध (छापामार) की रणनीति अपनाई • उन्होंने इटावा, गढ़ाकोटा, धामौनी, पन्ना आदि क्षेत्रों में कई लड़ाइयाँ लड़ीं और मुगलों को पराजित किया • स्वतंत्र राज्य: 1675 में पन्ना को राजधानी बनाकर बुंदेलखंड में स्वतंत्र हिंदू राज्य स्थापित किया । उनका शासन 1675 से 1731 तक रहा • युद्ध: जीवन भर 52 प्रमुख युद्ध लड़े । मुगल सेनापति रणदुल्लाह जैसे शत्रुओं को हराया • अन्य योगदान: कला, साहित्य और धर्म के संरक्षक थे। प्राणनाथ जी महाराज उनके गुरु थे *मृत्यु और विरासत • 20 दिसंबर 1731 को 82 वर्ष की आयु में निधन • उनके बाद राज्य उनके पुत्रों (हरदे सह, जगत राय आदि) में बँटा • आज भी बुंदेलखंड में उनकी याद में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (छतरपुर) है । कई लोकगीत, कविताएँ और कहानियाँ उन्हें समर्पित हैं छत्रसाल जी का जीवन साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा का प्रतीक है । वे मुगल साम्राज्य के पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले योद्धाओं में से एक थे महाराजा छत्रसाल जी ने अन्याय और अधीनता के विरुद्ध संघर्ष कर स्वतंत्रता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके पराक्रम और दूरदर्शी नेतृत्व ने बुंदेलखंड को नई पहचान दी । धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए उनके त्याग और बलिदान को युगों-युगों तक स्मरण किया जाएगा । उनकी वीरगाथाएं हम सभी को साहस, स्वाभिमान और कर्तव्यपरायणता की प्रेरणा देती हैं #MaharajaChhatrasal
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आभार माननीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath महाराज जी 💐
Yogi Adityanath Office@myogioffice

मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज से आज लखनऊ में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के माननीय सदस्य श्री सी.पी. चन्द जी ने शिष्टाचार भेंट की। @CPChand10

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#श्रमिक_दिवस #LabourDay राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देने वाले सभी कर्मयोगियों को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐 मज़दूर दिवस (Labour Day / May Day) 1 मई को विश्वभर में अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस मनाया जाता है । यह दिन उन सभी कामगारों, मज़दूरों और श्रमिकों को समर्पित है जिनकी मेहनत से समाज चलता है *इतिहास (संक्षेप में) • 1886 में अमेरिका के शिकागो शहर में हेयमार्केट स्क्वायर पर 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे मनोरंजन की माँग को लेकर मज़दूरों का बड़ा आंदोलन हुआ • कई मज़दूर शहीद हुए • 1889 में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय सोशलिस्ट कांग्रेस ने 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस घोषित किया • भारत में 1923 से यह दिन मनाया जा रहा है *भारत में महत्व भारत में मज़दूर दिवस पर : • ट्रेड यूनियनें रैलियाँ, सभाएँ और सम्मेलन आयोजित करती हैं • सरकार और संगठन अच्छे काम करने वाले मज़दूरों को सम्मानित करते हैं • यह दिन श्रमिकों के अधिकारों, न्यूनतम मजदूरी, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक न्याय की याद दिलाता है भारत के प्रमुख श्रम कानून (जिन पर आज भी काम हो रहा है): • औद्योगिक विवाद अधिनियम • वेतन भुगतान अधिनियम • कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ESIC) • भविष्य निधि (PF) • हाल में लाए गए चार श्रम कोड (2020) आज का संदेश आज के समय में जब AI, ऑटोमेशन और गिग इकोनॉमी तेज़ी से बढ़ रही है, मज़दूर दिवस हमें याद दिलाता है कि: • हर कामगार का सम्मान ज़रूरी है • उचित वेतन, सुरक्षित काम और गरिमापूर्ण जीवन हर व्यक्ति का अधिकार है एक छोटी सी श्रद्धांजलि: “जो हाथ नहीं थकते, जिनकी मेहनत से रोटी पकती है, घर बनते हैं और देश चलता है — उन सभी अनाम मज़दूरों को सलाम!” यह दिन श्रमिकों की कड़ी मेहनत, उनके संघर्ष और अधिकारों के प्रति सम्मान प्रकट करने का प्रतीक है । यह हमें याद दिलाता है कि मजदूर ही राष्ट्र की सच्ची रीढ़ हैं, जिनके परिश्रम से देश प्रगति की राह पर अग्रसर होता है। इस अवसर पर आइए एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, उचित वेतन और हर श्रमिक को सम्मान दिलाने का संकल्प लें #MayDay #LabourDay2026
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#बुद्ध_पूर्णिमा ॥ बुद्धम् शरणम् गच्छामि ॥ ॥ धम्मम् शरणम् गच्छामि॥ ॥ संघम् शरणम् गच्छामि ॥ "बुद्ध पूर्णिमा" के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 💐 करुणा, अहिंसा और सत्य से जुड़ा भगवान बुद्ध का मार्ग ही सच्चा मार्ग है । आत्मचिंतन और आंतरिक शांति का उनका संदेश मानवता को निरन्तर समृद्ध कर रहा है बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) या बुद्ध जयंती भगवान गौतम बुद्ध का सबसे पवित्र त्योहार है । यह वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है (2026) तिथि : 1 मई 2026, शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाएगी *महत्व : बुद्ध पूर्णिमा पर तीन महान घटनाएँ जुड़ी हुई हैं • जन्म — सिद्धार्थ गौतम (गौतम बुद्ध) का जन्म 623 ईसा पूर्व लुम्बिनी में • ज्ञान प्राप्ति (Enlightenment) — 588 ईसा पूर्व बोधगया में पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया • महापरिनिर्वाण — 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त किया इसी कारण इसे त्रिसारण दिवस भी कहते हैं । यह दिन अहिंसा, करुणा, मैत्री और ज्ञान के संदेश का प्रतीक है • दान — गरीबों, भिक्षुओं और जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े, दवाएँ आदि दान करना बहुत शुभ माना जाता है। • मंदिरों में उत्सव — बोधगया, लुम्बिनी, सारनाथ, कुशीनगर जैसे स्थानों पर भव्य समारोह, जुलूस, भजन-कीर्तन और ध्यान सत्र होते हैं • पीपल पूजा — पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है क्योंकि बुद्ध को इसी के नीचे ज्ञान मिला था बुद्ध के प्रमुख संदेश : • “अपने आप को जीतो, इससे बड़ा कोई विजेता नहीं।” • “करुणा ही धर्म है।” • “जो कुछ भी उत्पन्न होता है, वह नश्वर है।” शांति, करुणा और ज्ञान की कामना के साथ!​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​ #BuddhaPurnima
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#नरसिंह_जयंती ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥ श्री हरि के चौथे अवतार, भक्त वत्सल भगवान श्री नरसिंह जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 💐 भगवान नरसिंह सभी के जीवन में सुख समृद्धि लाएं, यही कामना है ॐ नृम नृम नृम नर सिंहाय नमः। नरसिंह जयंती भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नृसिंह (आधे नर और आधे सिंह रूप) की जयंती है । यह हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है 2026 में नरसिंह जयंती 30 अप्रैल 2026, गुरुवार (आज) मनाई जा रही है । यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ती है *महत्व भगवान विष्णु ने इस रूप में अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अवतार लिया और राक्षस राजा हिरण्यकश्यप का वध किया । हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा से वरदान था कि वह न दिन में मरेगा, न रात में; न घर के अंदर, न बाहर; न धरती पर, न आकाश में; न किसी हथियार से । नृसिंह ने सूर्यास्त के समय (दिन-रात के बीच), द्वार के खंभे पर (न अंदर न बाहर) बैठकर नाखूनों से (न हथियार) उसका वध किया। यह त्योहार भक्ति की विजय, दुष्टता का नाश और रक्षा का प्रतीक है । भक्तों को शत्रु बाधा, भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है आज भक्त गण नरसिंह कवच, नरसिंह मंत्र (“ॐ नमो भगवते नरसिंहाय”) या प्रह्लाद चरित्र का पाठ करें । हवन, आरती और भजन करें के साथ दान-पुण्य करें नरसिंह मंत्र: ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥ शुभकामनाएं! भगवान नृसिंह आपकी सभी बाधाओं का नाश करें और भक्ति प्रदान करें। जय नृसिंह देव! 🦁🙏 #NarasimhaJayanti
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#HappyBirthday उत्तर प्रदेश की 79 मिर्जापुर लोकसभा से सदस्य व केंद्र सरकार में राज्यमंत्री स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक व अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीया अनुप्रिया पटेल जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🎂🪷 बाबा गोरक्षनाथ जी से प्रार्थना है कि आप दीर्घायु हों और सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें 💐 @AnupriyaSPatel @ApnaDalOfficial
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#वीर_कुवंर_सिंह 🇮🇳 13 नवंबर 1777 - 26 अप्रैल 1858 1857 की क्रांति के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि 💐 आपका शौर्य-पराक्रम और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा 🇮🇳 बाबू वीर कुंवर सिंह ,भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) के महानायक थे । वे बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर के उज्जैनिया राजपूत (परमार वंश) परिवार से थे । 80 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अदम्य साहस और वीरता से लड़ाई लड़ी, इसलिए उन्हें वीर कुंवर सिंह या बाबू कुंवर सिंह कहा जाता है जीवन परिचय • जन्म: 13 नवंबर 1777, जगदीशपुर (भोजपुर, बिहार) में • पिता: राजा साहबजादा सिंह • माता: पंचरत्न कुंवर देवी • वे एक कुशल योद्धा, घुड़सवार और शिकारी थे। 1826 में पिता की मृत्यु के बाद जगदीशपुर रियासत संभाली *1857 संग्राम 1857 की क्रांति में बिहार के प्रमुख नेता के रूप में उन्होंने दानापुर के सिपाहियों के साथ मिलकर आरा पर कब्जा किया । अंग्रेजों की कई कोशिशों के बावजूद भोजपुर क्षेत्र लंबे समय तक स्वतंत्र रहा • उन्होंने लॉन्ग मार्च किया — बिहार से उत्तर प्रदेश (आजमगढ़, बनारस, गाजीपुर आदि) तक अंग्रेजों से लड़ते हुए • गोरिल्ला युद्ध शैली अपनाई और स्थानीय जमींदारों व किसानों का समर्थन जुटाया • उनके भाई बाबू अमर सिंह और सेनापति हरिकृष्ण सिंह ने भी उनका साथ दिया 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर की लड़ाई में घायल होने के बावजूद उन्होंने अंग्रेज सेना (कैप्टन ली ग्रैंड के नेतृत्व में) को हरा दिया । गोली लगने पर उन्होंने अपनी कटी हुई बांह गंगा में अर्पित कर दी । 26 अप्रैल 1858 को उन्होंने जगदीशपुर में वीरगति प्राप्त की *विरासत • वे बिहार में 1857 के विद्रोह के प्रतीक हैं • 23 अप्रैल को उनके विजयोत्सव के रूप में मनाया जाता है • जगदीशपुर में उनका स्मारक और कई जगहों पर उनकी प्रतिमाएं हैं • ब्रिटिश इतिहासकारों ने भी उनकी वीरता की तारीफ की — “बूढ़ा राजपूत” ने ब्रिटिश सत्ता को कड़ी टक्कर दी। बाबू वीर कुंवर सिंह स्वतंत्रता, न्याय और साहस के प्रतीक हैं। उनकी कहानी आज भी युवाओं को प्रेरित करती है #VeerKunwarSingh
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#सीता_नवमी श्रीराम सांनिध्यवशां-ज्जगदानन्ददायिनी। उत्पत्ति स्थिति संहारकारिणीं सर्वदेहिनम्।। मिथिला पुत्री, जनक नंदिनी मां जानकी "सीता माता" के जन्मोत्सव की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभेच्छाएं 💐 जानकी नवमी (सीता नवमी या जानकी जयंती) भारतवर्ष का एक पवित्र त्योहार है, जो माता सीता (जिन्हें जानकी भी कहा जाता है) के जन्म (प्राकट्य) को समर्पित है तिथि और समय (2026 में) • आज, 25 अप्रैल 2026 (शनिवार) को जानकी नवमी मनाई जा रही है • वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को यह पर्व आता है • नवमी तिथि: 24 अप्रैल शाम ~7:21 बजे शुरू होकर 25 अप्रैल शाम ~6:27 बजे तक *महत्व और कथा रामायण के अनुसार, मिथिला के राजा जनक (सीरध्वज) पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ भूमि जोत रहे थे । हल की नोक पृथ्वी में फंस गई, और वहाँ से एक दिव्य बालिका प्रकट हुई । हल से जुड़े होने के कारण उनका नाम सीता (सीता = हल की जुताई वाली भूमि) पड़ा । वे राजा जनक की गोद ली हुई पुत्री बनीं, इसलिए जानकी कहलाती हैं । सीता जी लक्ष्मी जी का अवतार मानी जाती हैं । वे पति भक्ति, त्याग, धैर्य और आदर्श नारीत्व की प्रतीक हैं । इस दिन उनके जन्म का उत्सव मनाया जाता है • आरती और भजन: “सीता राम” मंत्र का जाप, राम-सीता की आरती • दान: इस दिन दान करने से विशेष पुण्य मिलता है • विशेष रूप से मिथिला, बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल में धूमधाम से मनाया जाता है शुभकामनाएँ: जय जानकी माता! श्री राम जय राम! 🙏 आज इस पावन अवसर पर माता सीता के आशीर्वाद से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे ।
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#राष्ट्रीय_पंचायती_राज_दिवस समस्त प्रदेशवासियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 💐 राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (National Panchayati Raj Day) 24 अप्रैल को भारत में प्रतिवर्ष मनाया जाता है इतिहास और महत्व • 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के प्रभावी होने की तारीख 24 अप्रैल 1993 को याद करते हुए यह दिवस मनाया जाता है । इस संशोधन ने पंचायती राज संस्थाओं (PRI) को संवैधानिक दर्जा दिया, जिससे ग्रामीण स्तर पर लोकतंत्र और विकेंद्रीकृत शासन को मजबूती मिली • 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस घोषित किया । तब से यह दिन पंचायती राज मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जाता है उद्देश्य यह दिवस ग्रामीण स्वशासन, लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण, पारदर्शिता, जवाबदेही और पंचायतों के माध्यम से समावेशी विकास को बढ़ावा देता है । इसमें पंचायतों को सशक्त बनाने, महिलाओं और कमजोर वर्गों की भागीदारी बढ़ाने और ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जाता है आज (24 अप्रैल 2026) का संदर्भ आज शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जा रहा है । केंद्र और राज्य सरकारें विशेष कार्यक्रम, पुरस्कार वितरण, ग्राम सभाएं और जागरूकता अभियान आयोजित करती हैं । पंचायतों को डिजिटल सशक्तिकरण, वित्तीय प्रबंधन और सतत विकास लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है । पंचायती राज भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतंत्र की नींव है । तीन स्तरों पर कार्य करती है — ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद । यह स्थानीय मुद्दों जैसे जल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और बुनियादी सुविधाओं का समाधान करती है । आइए आज संकल्प लें कि अपनी पंचायतों को और मजबूत, पारदर्शी तथा विकासशील बनाएं! 🇮🇳 ग्राम स्वराज की अवधारणा को साकार करते हुए सशक्त पंचायतें, आत्मनिर्भर गांव और समृद्ध भारत के निर्माण का यह पावन अवसर हम सभी को लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है । आइए, स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ कर ग्राम स्तर से ही विकास की नई गाथा लिखें और सशक्त राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनें
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आज विधान भवन लखनऊ में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय एवं सामाजिक सदभाव समिति बैठक की अध्यक्षता करते हुए ऊर्जा विभाग, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के लंबित प्रकरणों पर धर्मेंद्र सिंह जी , प्रमुख सचिव पर्यटन अमृत अभिजात IAS एवं अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक संग चर्चा की तथा आवश्यक दिशानिर्देश दिए साथी विधान परिषद सदस्य भी उपस्थित रहे @Saketmisra_ @bjpanoop @yogeshnauhwar @amritabhijatias
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#HappyBirthday उत्तर प्रदेश की 263 प्रयागराज (दक्षिण) विधानसभा से सदस्य व प्रदेश सरकार में औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, NRI निवेश प्रोत्साहन कैबिनेट मंत्री माननीय नंद गोपाल गुप्ता नंदी जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🎂🪷 बाबा गोरक्षनाथ जी से प्रार्थना है कि आप दीर्घायु हों और सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें 💐 @NandiGuptaBJP @BJP4UP
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आज विधान भवन लखनऊ में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय एवं सामाजिक सदभाव समिति बैठक की अध्यक्षता करते हुए औद्योगिक विकास विभाग, सहकारिता विभाग , आयुष विभाग एवं प्राविधिक शिक्षा विभाग के लंबित प्रकरणों पर धर्मेंद्र सिंह जी , @jselvakumari IAS (महानिदेशक प्राविधिक शिक्षा) एवं अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक संग चर्चा की तथा आवश्यक दिशानिर्देश दिए साथी विधान परिषद सदस्य भी उपस्थित रहे @bjpanoop @JitendrasMLC
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#WorldEarthDay 🌏 #विश्व_पृथ्वी_दिवस माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या: !! आप सभी को #विश्व_पृथ्वी_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐 विश्व पृथ्वी दिवस (World Earth Day) हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है । आज, 22 अप्रैल 2026 को भी हम इसे पूरे विश्व में पर्यावरण संरक्षण की जागरूकता फैलाने के लिए मनाते हैं 2026 की थीम (Theme): “Our Power, Our Planet” हिंदी में: हमारी शक्ति, हमारा ग्रह (हमारी शक्ति, हमारी पृथ्वी) इस थीम का मतलब है कि पर्यावरण की रक्षा किसी एक सरकार या नीति पर नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक शक्ति और व्यक्तिगत प्रयासों पर निर्भर करती है । हम सभी मिलकर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दें, प्रदूषण कम करें और पृथ्वी को बचाने के लिए कदम उठाएं earthday.org पृथ्वी दिवस का महत्व : पृथ्वी दिवस 1970 में शुरू हुआ था । इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण नियंत्रण, वनों की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है । धरती हमारी मां है । अगर हम इसे बचाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियां भी सुरक्षित रहेंगी विश्व पृथ्वी दिवस पर कुछ लोकप्रिय हिंदी स्लोगन (Slogans): • पृथ्वी बचाओ, भविष्य बचाओ • धरती मां की रक्षा करो, यह हमारा एकमात्र घर है • पर्यावरण बचाओ, जीवन बचाओ • पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ, हरियाली बढ़ाओ • हमारी शक्ति, हमारा ग्रह — मिलकर बचाएं पृथ्वी को • प्रकृति का न करें हरण, आओ बनाएं पर्यावरण • पृथ्वी को संभालो, संसार को संवारो • आने वाली पीढ़ी है प्यारी, तो पृथ्वी को बचाना है हमारी जिम्मेदारी कैसे मनाएं पृथ्वी दिवस ? • पेड़ लगाएं • प्लास्टिक का कम इस्तेमाल करें और रिसाइक्लिंग करें • ऊर्जा बचाएं (बिजली, पानी बचाएं) • सफाई अभियान चलाएं • परिवार और दोस्तों के साथ पर्यावरण पर चर्चा करें • सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाएं आइए, आज हम वादा करें कि हम अपनी पृथ्वी को स्वस्थ और सुंदर बनाए रखेंगे 🌱​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​ पर्यावरण संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है । इस पृथ्वी दिवस पर अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाएं । सिंगल यूज प्लास्टिक का त्याग करें, जल बचाएं और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें । याद रहे, छोटा सा प्रयास, बड़ा बदलाव ला सकता है #WorldEarthDay
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#सिविल_सेवा_दिवस सरकार की योजनाओं एवं नीतियों को मूर्तरूप देने एवं क्रियान्वयन करने के उत्तरदायित्व का निर्वाहन करने वाले देश के समस्त सिविल सेवकों को सिविल सेवा दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ 💐 राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस हर वर्ष 21 अप्रैल को भारत में मनाया जाता है । यह दिन देश की सिविल सेवाओं (IAS, IPS, IFS आदि) में काम करने वाले अधिकारियों के समर्पण, सेवा भावना और योगदान को सम्मानित करने का अवसर है क्यों मनाया जाता है सिविल सेवा दिवस ? यह तारीख 21 अप्रैल 1947 की याद में चुनी गई है । उस दिन स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने दिल्ली के मेटकाफ हाउस में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के पहले बैच के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को संबोधित किया था सरदार पटेल ने सिविल सेवकों को “भारत का स्टील फ्रेम” (Steel Frame of India) कहा था । उन्होंने उन्हें राष्ट्र की सेवा में पूर्ण निष्ठा और निष्पक्षता से काम करने की प्रेरणा दी । यह भाषण स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक व्यवस्था की नींव माना जाता है इतिहास • पहली बार राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस वर्ष 2006 में मनाया गया (विज्ञान भवन, नई दिल्ली में) • तब से हर साल यह दिन सिविल सेवकों को नागरिकों की सेवा के प्रति पुनः समर्पित होने और लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए अपनी प्रतिबद्धता नवीनीकृत करने का अवसर प्रदान करता है *महत्व यह दिवस सिविल सेवकों को प्रेरित करता है कि वे: • नागरिक-केंद्रित शासन (Citizen-Centric Governance) को बढ़ावा दें • नवाचार (Innovation) अपनाएं • सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन करें • Mission Karmayogi जैसी क्षमता निर्माण पहलों के माध्यम से खुद को भविष्य-उन्मुख बनाएं इस दिन प्रधानमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री लोक प्रशासन उत्कृष्टता पुरस्कार (PM Awards for Excellence in Public Administration) दिए जाते हैं, जिसमें जिला, राज्य और केंद्र स्तर के बेहतरीन कार्यों को सम्मानित किया जाता है *2026 में सिविल सेवा दिवस आज 21 अप्रैल 2026 को यह दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष के उत्सव में नवाचार, बेहतर सार्वजनिक सेवा वितरण, सरकारी योजनाओं का संतृप्ति (Saturation) दृष्टिकोण और विकसित भारत के लक्ष्य पर विशेष जोर है । विभिन्न राज्यों और केंद्र में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को पुरस्कृत किया जाता है सरदार पटेल के शब्दों में सिविल सेवा वाकई भारत की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ है । यह दिवस हमें याद दिलाता है कि निष्पक्ष, ईमानदार और कुशल प्रशासन ही एक मजबूत राष्ट्र का आधार होता है देश के विकास और व्यवस्था के सुचारु संचालन में सिविल सेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है । सिविल सेवा अधिकारी शासन और जनता के बीच सेतु की तरह काम करते हैं । संसद और विधान सभाओं में विधायिका जो कानून बनाती हैं, उन्हें जमीन पर उतारने और पालन करवाने में सिविल सेवक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं @IASassociation @IPS_Association @CentralIfs @indiandiplomats #CivilServicesDay
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#HappyBirthday उत्तर प्रदेश की 206 अकबरपुर रनियां (कानपुर देहात) विधानसभा से सदस्य व प्रदेश सरकार में महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री माननीय प्रतिभा शुक्ला जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🎂🪷 बाबा गोरक्षनाथ जी से प्रार्थना है कि आप दीर्घायु हों और सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें 💐 @_pratibhashukla @BJP4UP
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#अक्षय_तृतीया "ॐ कल्पवृक्षाय नमः। धर्मार्थकाममोक्षप्रदायिनी अक्षया तृतीया शुभे सन्दर्भे सर्वेषां मंगलं भवतु।” धर्मकर्म, सेवा और सद्भावना के संकल्प के प्रतीक “अक्षय तृतीया” के इस पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक मंगलकामनाएँ 💐 अक्षय तृतीया (जिसे अखा तीज भी कहते हैं) हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ और पावन पर्व है । यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है *2026 में अक्षय तृतीया • दिनांक : रविवार, 19 अप्रैल 2026 (उदया तिथि) इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है, अर्थात किसी भी शुभ कार्य (जैसे नया व्यापार शुरू करना, विवाह, गृह प्रवेश आदि) के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं पड़ती । पूरा दिन शुभ माना जाता है 
यह समय धन-समृद्धि और अक्षय लाभ के लिए विशेष रूप से मंगलकारी माना जाता है । इस दिन सोना खरीदना अत्यंत शुभ होता है क्योंकि “अक्षय” का अर्थ है कभी क्षय न होने वाला *अक्षय तृतीया का महत्व • अक्षय शब्द का अर्थ है “जो कभी समाप्त न हो”। इस दिन किए गए दान, जप, तप, यज्ञ, पूजा और शुभ कार्यों का फल अनंत काल तक बना रहता है • पौराणिक कथाओं के अनुसार : • इस दिन परशुराम जी का जन्म हुआ • सतयुग और त्रेता युग की शुरुआत भी इसी तिथि से जुड़ी मानी जाती है • महाभारत में युधिष्ठिर को कुबेर द्वारा अक्षय पात्र दिया गया था • भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी होती है • जैन धर्म में भी यह दिन महत्वपूर्ण है (भगवान आदिनाथ के निर्वाण से संबंधित) सृष्टि के संरक्षक, जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु और सौभाग्य की देवी माँ लक्ष्मी की कृपा से हम सभी का जीवन अपार सुख, अक्षय ऊर्जा और असीम समृद्धि से परिपूर्ण हो ऐसी कामना है #AkshayaTritiya
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#चंद्रशेखर_सिंह 17 अप्रैल 1927 - 8 जुलाई 2007 जननायक, प्रखर वक्ता, कर्मठ व जुझारू राजनेता, सड़क से संसद तक आमजन की सदैव सशक्त आवाज रहे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह जी की 99वीं जयंती पर उन्हें सादर प्रणाम 💐 चंद्रशेखर जी भारत के आठवें प्रधानमंत्री थे । उनका कार्यकाल 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक रहा, जो कुल सात महीने का था । वे भारत के उन प्रधानमंत्रियों में से एक हैं जिनका कार्यकाल कम अवधि का रहा *प्रारंभिक जीवन •जन्म: 17 अप्रैल 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के इब्राहिमपत्ती गांव में एक किसान परिवार में •शिक्षा: इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में मास्टर्स डिग्री •छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय । वे समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थे और युवा तुर्क के नाम से जाने जाते थे *राजनीतिक सफर •1960 के दशक में कांग्रेस में शामिल हुए, लेकिन इंदिरा गांधी से मतभेद होने पर 1975 के आपातकाल के दौरान जेल गए •1977 में जनता पार्टी के अध्यक्ष बने (1977-1988) •1988 में जनता दल में शामिल हुए, लेकिन वी.पी. सिंह से मतभेद के बाद 1990 में अपनी पार्टी समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) बनाई •वे कभी केंद्र में मंत्री नहीं रहे और न ही मुख्यमंत्री बने । सीधे सांसद से प्रधानमंत्री बने प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल •10 नवंबर 1990 को राष्ट्रपति रामास्वामी वेंकटरामण ने उन्हें शपथ दिलाई •सरकार: अल्पमत सरकार — उनकी पार्टी के केवल 54-64 सांसद थे । कांग्रेस (राजीव गांधी) का बाहरी समर्थन मिला था •वी.पी. सिंह सरकार के गिरने के बाद बनी यह सरकार अस्थिर थी । कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया, इसलिए मार्च 1991 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया, लेकिन कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में मई-जून 1991 तक बने रहे *प्रमुख फैसले •आर्थिक संकट: विदेशी मुद्रा संकट के समय भारत के स्वर्ण भंडार (सोने के रिजर्व) को गिरवी रखकर समस्या का सामना किया । बाद में स्थिति सुधरी •उन्होंने कई मंत्रालयों का प्रभार संभाला, जैसे रक्षा, गृह, सूचना एवं प्रसारण, विदेश आदि •अल्प समय के बावजूद कुछ मजबूत फैसले लिए गए, जैसे व्यापार और कूटनीति में •राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद देश में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश की •1991 के बाद भी सक्रिय राजनीति में रहे और कई बार लोकसभा सांसद चुने गए (अंतिम बार 2004 में) •8 जुलाई 2007 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया । उन्हें जननायक कहा जाता था •उनकी स्मृति में राजघाट के पास जननायक स्थल बनाया गया है चंद्रशेखर जी को बेबाक, क्रांतिकारी और समाजवादी विचारों वाले नेता के रूप में याद किया जाता है। उनका छोटा कार्यकाल राजनीतिक संकट का प्रतीक था, लेकिन उन्होंने उसमें भी हरसंभव प्रयास किए । शोषितों एवं वंचितों के समग्र उत्थान हेतु समर्पित आपका जीवन हम सभी के लिए अनुकरणीय है @MPNeerajShekhar
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C.P. Chand
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#HappyBirthday उत्तर प्रदेश की विधानपरिषद में साथी सदस्य व प्रदेश अध्यक्ष भारतीय जनता युवा मोर्चा माननीय प्रांशु दत्त द्विवेदी जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🎂🪷 बाबा गोरक्षनाथ जी से प्रार्थना है कि आप दीर्घायु हों और सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें 💐 @PranshuDutt @BJP4UP @BJYM
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